पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश

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पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश The most sacred Hindu Holy Cities of Haridwar and Rishikesh हर हर महादेव
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Lakshman Jhula is an iron suspension bridge across the river Ganges, located 5 km north-east from the town Rishikesh in ...
23/06/2023

Lakshman Jhula is an iron suspension bridge across the river Ganges, located 5 km north-east from the town Rishikesh in the Indian state of Uttarakhand.

Laxman Jhula Lakshman Jhula लक्ष्मण झूला connects the two villages; Tapovan in Tehri Garhwal district to Jonk in Pauri Garhwal district crossing the river from west to east. However it is near to the Rishikesh city thus creating ambiguity in its location, the bridge is one of the iconic landmarks of Rishikesh. A similar bridge 2 kilometres (1.2 mi) downstream from Lakshman Jhula is Ram Jhula which is made by mehak chuahan.

It is said that Lakshmana crossed Ganges on jute ropes between the place where this bridge is built. Lakshman Jhula was completed in 1929.
Two plaques exist at the foot of the West side (located in Tapovan) of the bridge.
The first plaque reads:
Lakshman Jhula Bridge
First Jeepable Suspension Bridge of U.P.
Span - 450 feet
Carriage Way - 6 feet
This bridge was constructed by U.P.P.W.D. during 1927-1929. It replaces the old bridge of 284 feet span which was washed away by great floods of October, 1924. This was opened to traffic on 11 April 1930.
The second plaque reads:
Lakshman Jhuala Suspension Bridge
Span - 450 feet
Height of roadway above mean summer water level - 59 feet
Opened to traffic by H.E. Sir Malcolm Haley C.C.I.E. K.C.S.I. Governor of the United Provinces on 11 April 1930. This bridge was constructed by the Public Works Department during the years 1927-1929. It replaces the old bridge of 284 feet span, which was the gift of Rai Bahadur Surajmal Jhunjhunwala father of Rai Bahadur Shewpershad Tulshan, and was situated about 200 feet down stream. This was washed away by the great flood of October, 1924 which undermined the left abutment. The extra cost of rebuilding this new bridge as nearly as possible on the site of the old bridge has been contributed by Rai Bahadur Shewpershad Tulshan to perpetuate the honored memory of his father and no toll or tax will ever be imposed or realized for crossing this bridge.

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#लक्ष्मणझूला #ऋषिकेश

Ram Jhula राम झूला is an iron suspension bridge across the river Ganges, located 3 kilometres (1.9 mi) north-east from t...
08/08/2022

Ram Jhula राम झूला is an iron suspension bridge across the river Ganges, located 3 kilometres (1.9 mi) north-east from the town Rishikesh in the Indian state of Uttarakhand.
Ram Jhula राम झूला bridge connects the Sivananda Nagar area of Muni Ki Reti in Tehri Garhwal district to Swargashram in Pauri Garhwal district crossing the river from west to east. Built in the year 1986, the bridge is one of the iconic landmarks of Rishikesh.
There are many Hindu ashrams and religious centers established at both sides of the Ganges. It is also a connecting bridge between Sivananda Ashram located in Muni Ki Reti to Gita Bhawan, Parmarth Niketan and other temples located in Swargashram. Though similar in design, this bridge is bigger than Lakshman Jhula which is 2 kilometres (1.2 mi) upwards the river stream. This bridge is constructed with the span of 750 feet
(230 m).
#रामझूला #ऋषिकेश

हर की पौड़ी या हरि की पौड़ी भारत के उत्तराखण्ड राज्य की एक धार्मिक नगरी हरिद्वार का एक पवित्र और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक...
10/12/2021

हर की पौड़ी या हरि की पौड़ी भारत के उत्तराखण्ड राज्य की एक धार्मिक नगरी हरिद्वार का एक पवित्र और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश

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पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश

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ऋषिकेश (संस्कृत : हृषीकेश) उत्तराखण्ड के देहरादून जिले का एक नगर, हिन्दू तीर्थस्थल, नगरपालिका तथा तहसील है। यह गढ़वाल हि...
05/07/2021

ऋषिकेश (संस्कृत : हृषीकेश) उत्तराखण्ड के देहरादून जिले का एक नगर, हिन्दू तीर्थस्थल, नगरपालिका तथा तहसील है। यह गढ़वाल हिमालय का प्रवेश्द्वार एवं योग की वैश्विक राजधानी है। ऋषिकेश, हरिद्वार से २५ किमी उत्तर में तथा देहरादून से ४३ किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
हिमालय का प्रवेश द्वार, ऋषिकेश जहाँ पहुँचकर गंगा पर्वतमालाओं को पीछे छोड़ समतल धरातल की तरफ आगे बढ़ जाती है। ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है। उत्तराखण्ड में समुद्र तल से 1360 फीट की ऊंचाई पर स्थित ऋषिकेश भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में एक है। हिमालय की निचली पहाड़ियों और प्राकृतिक सुन्दरता से घिरे इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी इसे अतुल्य बनाती है।

ऋषिकेश को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार माना जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान पर ध्यान लगाने से मोक्ष प्राप्त होता है। हर साल यहाँ के आश्रमों के बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शान्ति के लिए आते हैं। विदेशी पर्यटक भी यहाँ आध्यात्मिक सुख की चाह में नियमित रूप से आते रहते हैं।

पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश

#हरिद्वार #ऋषिकेश #पवित्रनगरी #उत्तराखण्ड #गढ़वाल #हिमालय #गंगा #गंगानदी

13/05/2021

ऋषिकेश (संस्कृत : हृषीकेश) उत्तराखण्ड के देहरादून जिले का एक नगर, हिन्दू तीर्थस्थल, नगरपालिका तथा तहसील है। यह गढ़वाल हिमालय का प्रवेश्द्वार एवं योग की वैश्विक राजधानी है। ऋषिकेश, हरिद्वार से २५ किमी उत्तर में तथा देहरादून से ४३ किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

हिमालय का प्रवेश द्वार, ऋषिकेश जहाँ पहुँचकर गंगा पर्वतमालाओं को पीछे छोड़ समतल धरातल की तरफ आगे बढ़ जाती है। ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है। उत्तराखण्ड में समुद्र तल से 1360 फीट की ऊंचाई पर स्थित ऋषिकेश भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में एक है। हिमालय की निचली पहाड़ियों और प्राकृतिक सुन्दरता से घिरे इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी इसे अतुल्य बनाती है।

ऋषिकेश को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार माना जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान पर ध्यान लगाने से मोक्ष प्राप्त होता है। हर साल यहाँ के आश्रमों के बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शान्ति के लिए आते हैं। विदेशी पर्यटक भी यहाँ आध्यात्मिक सुख की चाह में नियमित रूप से आते रहते हैं।

पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश

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15/04/2021

Haridwar kumbh mela sahi snaan

हर की पौड़ी या हरि की पौड़ी भारत के उत्तराखण्ड राज्य की एक धार्मिक नगरी हरिद्वार का एक पवित्र और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक...
12/12/2020

हर की पौड़ी या हरि की पौड़ी भारत के उत्तराखण्ड राज्य की एक धार्मिक नगरी हरिद्वार का एक पवित्र और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश

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पवित्र नगरी हरिद्वार ऋषिकेश

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जय बद्री विशाल - बद्रीनाथ धाम - अलकनंदा नदीबदरी नारायण मंदिर जिसे बद्रीनाथ भी कहते हैं अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड र...
02/11/2020

जय बद्री विशाल - बद्रीनाथ धाम - अलकनंदा नदी

बदरी नारायण मंदिर जिसे बद्रीनाथ भी कहते हैं अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है। नर नारायण की गोद में बसा बद्रीनाथ नीलकण्ड पर्वत का पार्श्व भाग है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा चारों धाम में से एक के रूप में स्थापित किया गया था। यह मंदिर तीन भागों में विभाजित है, गर्भगृह, दर्शनमण्डप और सभामण्डप।

मंदिर परिसर में 15 मूर्तियां है, इनमें सब से प्रमुख है भगवान विष्णु की एक मीटर ऊंची काले पत्थर की प्रतिमा है। यहां भगवान विष्णु ध्यान मग्न मुद्रा में सुशोभित है। जिसके दाहिने ओर कुबेर लक्ष्मी और नारायण की मूर्तियां है।
इसे धरती का वैकुंठ भी कहा जाता है।शंकराचार्य की व्यवस्था के अनुसार बद्रीनाथ मंदिर का मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से होता है।
मंदिर अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवम्बर तक मंदिर दर्शनों के लिए खुला रहता है।

बद्रीनाथ धाम में श्री बदरीनारायण भगवान के पांच स्वरूपों की पूजा अर्चना होती है। विष्णु के इन पांच रूपों को ‘पंच बद्री’ के नाम से जाना जाता है।
बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा अन्य चार बद्रियों के मंदिर भी यहां स्थापित है। श्री विशाल बद्री पंच बद्रियों में से मुख्य है। इसकी देव स्तुति का पुराणों में विशेष वर्णन किया जाता है। ब्रह्मा, धर्मराज व त्रिमूर्ति के दोनों पुत्र नर के साथ ही नारायण ने बद्री नामक वन में तपस्या की, जिससे इन्द्र का घमण्ड चकनाचूर हो गया। बाद में यही नर नारायण द्वापर युग में कृष्ण और अर्जुन के रूप में अवतरित हुए। जिन्हें हम विशाल बद्री के नाम से जानते हैं। इसके अलावा श्री योगध्यान बद्री, श्री भविष्य बद्री, श्री वृद्घ बद्री, श्री आदि बद्री इन सभी रूपों में भगवान बद्रीनाथ यहां निवास करते हैँ।

#अलकनंदानदी #बद्रीनाथ #बद्रीनाथमंदिर #तप्तकुंड #जयबद्रीविशाल

केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारन...
30/10/2020

केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्‍य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया।

जून २०१३ के दौरान भारत के उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश राज्यों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण केदारनाथ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा। मंदिर की दीवारें गिर गई और बाढ़ में बह गयी। इस ऐतिहासिक मन्दिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित रहे लेकिन मन्दिर का प्रवेश द्वार और उसके आस-पास का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया।

#केदारनाथ #केदारनाथधाम #केदारनाथमंदिर

Address

Haridwar Road
Rishikesh
249201

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