Jyotish Guru Diwakar Painuli

Jyotish Guru Diwakar Painuli Astrologer Guru ji is a reputed and famous Astrologer who practices Hindu Astrology ,Palmistry, Nume

ज्योतिष गुरुजी श्री दिवाकर पैनुली जी बहुत ही जाने माने विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषों में से एक हैं | गुरूजी सन २००० से ज्योतिषी द्वारा लोगो का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं , व गरीबों के लिए मुफ्त सेवा प्रदान करते आ रहे हैं | गुरूजी का यह कार्य पारिवारिक है , जो पीड़ी दर पीड़ी से चला आ रहा है | गुरूजी सभी समस्याओं जेसे – कुंडली समस्या, प्रेम विवाह समास्य, कुंडली मिलाना , हस्तकला, आदि किसी भी प्रकार की समस्याओं का निवारण करते हैं व अपनी ज्योतिषी द्वारा लोगों को संतुष्ट करते हैं |

20/02/2026
राहु महादशा का चक्रव्यूह: 18 वर्ष, 9 पड़ाव और भ्रम से शिखर तक का तिलिस्म(अगर आपकी राहु ग्रह की महादशा चल रही है तो ये जान...
15/01/2026

राहु महादशा का चक्रव्यूह: 18 वर्ष, 9 पड़ाव और भ्रम से शिखर तक का तिलिस्म

(अगर आपकी राहु ग्रह की महादशा चल रही है तो ये जानकारी आपके लिए है।)

​ज्योतिष शास्त्र के महान ग्रंथों में राहु को 'अति गूढ़' और 'छायापुरुष' कहा गया है। ऋषियों की चेतावनी है—
"राहुस्तुल्यं न दुःखं, राहुस्तुल्यं न सुखं"
अर्थात् राहु जैसा न कोई दुःख दे सकता है, न कोई सुख। यह 18 वर्ष की यात्रा व्यक्ति को या तो अर्श पर पहुँचाती है या फर्श पर।
​जब राहु की दशा आती है, तो तर्क (Logic) हार जाता है और भ्रम (Illusion) जीत जाता है। यही कारण है कि राहु काल में लोग सबसे ज्यादा ज्योतिषियों के चक्कर काटते हैं, क्योंकि उन्हें समझ ही नहीं आता कि उनके साथ हो क्या रहा है।

​राहु की अंतर्दशाएं: समय और प्रभाव का विश्लेषण
​राहु की महादशा में हर ग्रह अपनी अंतर्दशा के दौरान विशिष्ट प्रभाव डालता है:
​राहु में राहु (2 वर्ष, 8 माह, 12 दिन): भारी कन्फ्यूजन और मतिभ्रम। अचानक स्थान परिवर्तन और अपनों पर शक करना।
​राहु में गुरु (2 वर्ष, 4 माह, 24 दिन): ज्ञान बनाम भ्रम। यदि गुरु मजबूत है, तो करियर में बड़ी जम्प (Growth) मिलती है, अन्यथा चंडाल दोष से बदनामी होती है।
​राहु में शनि (2 वर्ष, 10 माह, 6 दिन): इसे 'शापित समय' या 'नंदी दोष' कहते हैं। काम बहुत धीरे चलते हैं और घर में नकारात्मक ऊर्जा महसूस होने लगती है।
​राहु में बुध (2 वर्ष, 6 माह, 18 दिन): बुद्धि और माया का संगम। बिजनेस और शेयर मार्केट में अद्भुत तरक्की, लेकिन गलत कैलकुलेशन से कंगाली भी संभव है।
​राहु में केतु (1 वर्ष, 18 दिन): अलगाव और वैराग्य। मानसिक क्लेश, आत्मघाती विचार और परिवार से विछोह (Separation)।
​राहु में शुक्र (3 वर्ष): यह 'लंपट योग' का समय है। विलासिता की अंधी दौड़। शुक्र के अस्त होने पर व्यक्ति अनैतिक संबंधों और फिजूलखर्ची से पूरी तरह कंगाल हो सकता है।
​राहु में सूर्य (10 माह, 24 दिन): 'ग्रहण' काल। पिता से विवाद, राजभय और मान-सम्मान पर अचानक आंच आना।
​राहु में चंद्र (1 वर्ष, 6 माह): फोबिया, डिप्रेशन और अनिद्रा। व्यक्ति को 'प्रेत बाधित' स्थानों या दूषित भूमि का आभास होने लगता है।
​राहु में मंगल (1 वर्ष, 18 दिन): 'अंगारक योग'। दशा का अंत विस्फोटक होता है—एक्सीडेंट, सर्जरी या भारी कानूनी विवाद की संभावना।
​गहन शोध: कंगाली, अपराध और विछोह की स्थितियां
​अपराध और राहु: यदि राहु मंगल के साथ होकर 6वें, 8वें या 12वें भाव में हो, तो व्यक्ति अपराध की ओर प्रवृत्त होता है। उसे लगता है कि वह कानून से ऊपर है।
​माता-पिता से विछोह: यदि राहु सूर्य या चंद्रमा के साथ युति करे और चतुर्थ या दशम भाव पीड़ित हो, तो व्यक्ति को अपने माता-पिता से दूर जाना पड़ता है या उनके साथ भारी वैचारिक मतभेद पैदा हो जाते हैं।
​कंगाली का योग: 'मानसागरी' के अनुसार, यदि राहु व्यय भाव (12वें) में हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो, तो व्यक्ति संचित धन को व्यसनों और अदालती मामलों में गंवाकर पूरी तरह कंगाल हो जाता है।
​अष्टम का राहु: रहस्य और ज्योतिष का आकर्षण
​"अष्टमस्थे यदा राहौ, गुप्तविद्या विशारदः"
​जब राहु कुंडली के 8वें भाव में होता है, तो स्थितियां अत्यंत संवेदनशील हो जाती हैं। यह भाव मृत्यु और गुप्त रहस्यों का है:
​ज्योतिष का आकर्षण: अष्टम का राहु व्यक्ति को ज्योतिष, तंत्र-मंत्र और गूढ़ विद्याएं सीखने पर मजबूर कर देता है। व्यक्ति खुद अपनी समस्याओं का हल खोजने के लिए ग्रंथ पलटने लगता है।
​दूषित भूमि: यदि राहु शनि के साथ चतुर्थ भाव को प्रभावित करे, तो व्यक्ति ऐसी दूषित भूमि पर घर बना लेता है जहाँ पहले कभी श्मशान रहा हो। ऐसे घरों में अक्सर 'अतृप्त आत्माओं' का डेरा महसूस होता है।
​राहु के साइड इफेक्ट्स: लोग क्यों हैं परेशान?
​राहु जब बिगड़ता है, तो व्यक्ति को मानसिक और सामाजिक रूप से तोड़ देता है:
​अज्ञात भय: इंसान को हमेशा मौत या किसी अनहोनी का डर सताता रहता है।
​भ्रम (Illusion): जो आप देख रहे हैं, वह सच नहीं है। गलत फैसले लेना राहु का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट है।
​अकेलापन: भीड़ में होकर भी इंसान खुद को कटा हुआ महसूस करता है।

​रेमेडी की अनिवार्य आवश्यकता कब?
​राहु की दशा में रेमेडी की सलाह तब अनिवार्य हो जाती है जब:
​बिना कारण घर के पालतू जानवर मरने लगें।
​घर का नैऋत्य कोण (South-West) बार-बार टूटता हो या वहां सीलन आती हो।
​ऊंचाई से गिरने या सांपों के डरावने सपने लगातार आने लगें।
​बिजनेस में शुक्र के अस्त होने से लिक्विड कैश पूरी तरह खत्म हो जाए और आप कर्ज के जाल में फंस जाएं।
​निष्कर्ष:
राहु वह अंधकार है जिसके पीछे बहुत बड़ा प्रकाश छिपा है। यह दशा व्यक्ति को तपाकर कुंदन बनाने आती है, लेकिन अगर सावधानी न बरती जाए, तो यह भटकाव जीवन बर्बाद कर देता है। सटीक गणना और सही व्यवहार ही इस चक्रव्यूह से निकलने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

मकर संक्रांति 2026 : पूजा विधि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्व.... ||  मकर संक्रांति सनातन संस्कृति का एक ...
07/01/2026

मकर संक्रांति 2026 : पूजा विधि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्व.... ||

मकर संक्रांति सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पावन और शुभ पर्व है, जो प्रकृति, सूर्य उपासना और मानव जीवन के बीच संतुलन को प्रदर्शित करता है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न प्रदेशों में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल तथा असम में माघ बिहू के नाम से जाना जाता है। नाम चाहे अलग हों, लेकिन इस पर्व का मूल भाव एक ही है, और वह है; सूर्य देव की उपासना और दान-पुण्य करना।

मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मनाया जाता है। यह वह क्षण होता है, जब सूर्य उत्तरायण होते हैं और खरमास के बाद शुभ काल आरंभ होता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय आत्मशुद्धि और पुण्य अर्जन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।



मकर संक्रांति 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन का पुण्य काल दोपहर 03:07 बजे से आरंभ होगा। वहीं महा पुण्य काल दोपहर 03:07 बजे से शाम 04:50 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में किया गया स्नान-दान और पूजा कई गुना पुण्य फल प्रदान करती है। माना जाता है कि इस शुभ काल में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।



मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व अत्यंत गहन है। यह पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं। उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति का काल माना गया है। इस समय किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल शीघ्र प्राप्त होता है।

शास्त्रों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती अथवा किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का क्षय होता है। साथ ही ब्राह्मणों, साधुओं और दीन-दुःखी, निर्धन, जरूरतमंद लोगों को दान देने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है।



मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व
मकर संक्रांति का उल्लेख अनेक पौराणिक कथाओं में मिलता है। महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण काल की प्रतीक्षा करते हुए अपने प्राण त्यागे थे। मान्यता है कि उत्तरायण में देह त्याग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस काल को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

कृषि प्रधान भारत में मकर संक्रांति का विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। यह पर्व नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। किसान इस दिन प्रकृति और सूर्य देव का आभार व्यक्त करते हैं। सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, सत्य और तप का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस दिन उनकी विशेष आराधना की जाती है।



मकर संक्रांति की पूजा विधि
मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें-



गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।



ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभंतर: शुचि:।।



स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए तांबे का लोटा लें और उसमें स्वच्छ जल भरें। जल में पुष्प, तिल, गुड़ और रोली मिलाएं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय श्रद्धा पूर्वक “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात सूर्य देव को तिल के लड्डू, खिचड़ी और व्यंजन अर्पित करें। सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। अंत में भगवान सूर्य को प्रणाम कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करें।



मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति का पर्व दान-पुण्य के बिना अधूरा माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है, जिसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। इस दिन दीन-दुःखी, असहाय और जरूरतमंदों की सेवा करने से भगवान सूर्य अत्यंत प्रसन्न होते हैं।



अन्न और भोजन का दान : इस दिन अन्नदान का विशेष महत्व है। खिचड़ी का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही तिल और गुड़ का दान करने से धन, यश और मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना मां अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने का उत्तम माध्यम माना गया है।



वस्त्र दान : मकर संक्रांति के अवसर पर वस्त्र दान का भी विशेष महत्व है। गरीबों, वृद्धों और जरूरतमंदों को नए वस्त्र, सर्दी में कंबल या स्वेटर का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।

 #विवाह_हेतु_कुण्डली_मिलान_एवं_सही_मुहूर्त_की_गणना :वर कन्या के विवाह का मिलान सही नहीं होने पर कई बार बहुत कष्टकर स्थित...
06/10/2025

#विवाह_हेतु_कुण्डली_मिलान_एवं_सही_मुहूर्त_की_गणना :
वर कन्या के विवाह का मिलान सही नहीं होने पर कई बार बहुत कष्टकर स्थितियां उत्पन्न होते देखी गयी है, एक मामले में वर ने शादी के कुछ दिन बाद ही आत्महत्या कर लिया, दूसरे मामले में कन्या शादी के सात माह बाद जहर खाकर जान दे दी, इस प्रकार की बहुत सारी घटनाएं सामने आती रहती हैं, अतः शादी निश्चित करते समय कम्प्युटर साफ्ट वेयर से गुण मिलान तक सीमित न रहें, क्योंकि आज कम्प्यूटर का जमाना है जिसे देखो अपने अपने कम्प्यूटर में कोई न कोई सोफ़्टवेयर ज्योतिष वाला डालकर बैठा है, जैसे ही किसी भी वर कन्या की विवाह वाली बात की जाती है सीधे वर और कन्या की जन्म तारीख समय आदि बायोडाटा के साथ कुण्डली बना ली जाती है और उससे सीधे गुण मिलान कर विवाह के लिये उपयुक्तता देखा जाता है, गुण चक्र नाड़ी दोष और भकूट दोष आसानी से कम्पयूटर का साफ़्टवेयर निकाल कर दे देता है, मंगल चाहे वक्री हो अस्त हो कम डिग्री का हो फिर भी उसमें मंगली दोष बताते देर नही लगती है, #चन्द्रमा चाहे बाल हो वृद्ध हो अस्त हो नीच का हो, उसे नजरअंदाज कर कुण्डली मिलान कर दिया जाता है, कन्या का गुरु बल चाहे बहुत ही कमजोर हो, वर का सूर्य बल चाहे बिलकुल ही नही मिलता हो, लेकिन कम्प्यूटर के अनुसार गुण चक्र बताने मे कतई देर नही लगती है, और फ़टाफ़ट फ़ैसला भी हो जाता है, चाहे दोनो का चन्द्र बल बहुत ही अच्छा हो नहीं देखा जाता ! इस प्रकार से कितने मामलों में अर्थ के अनर्थ हो जाते हैं जिसका दुष्प्ररिणाम बाद में सामने आता है ! जिन लोगों को वास्तव मे सही ज्योतिषीय गणना करने की जानकारी नही है वह आसानी से वर-कन्या के गुण दोष बताने लगते है और जब उनसे कोई बात पूँछी जाती है तब वह अपने ज्ञान को सर्वोच्च बताते हुए, अपने अनाप सनाप वाचाली नीति को बताने लगते हैं !
#विवाह हेतु कुण्डली मिलान करते समय अष्टकूट के गुण का मिलान तो करना ही चाहिए साथ ही वर कन्या के #चन्द्रबल, सूर्यबल, गुरुबल, वैधव्य योग, तलाक योग, निःसंतान योग, #नपुंसक योग, सैय्या सुख पीड़ित योग, सप्तम भाव, सप्तमेश, लग्न व लग्नेश की मजबूत कमजोर स्थिति पर भी अवश्य ध्यान देना चाहिए ! मांगलिक दोष का #सावधानी पूर्वक विचार कर लेना चाहिए ! गण दोष, भकूट दोष, नाड़ी दोष, ग्रहमैत्री अवश्य देखना चाहिए ! यह सब बातें अनुकूल होने पर #विवाह हेतु स्वीकृति देनी चाहिए ! इसके बाद बात आती है विवाह के शुभ मुहूर्त व तिथि की उसपर हम आगे विचार करेंगे !
#विवाह_के_शुभ_नक्षत्र :— मूल, अनुराधा, मृगशिरा, रेवती, हस्त, उत्तराफ़ाल्गुनी, उत्तराषाढा, उत्तराभाद्रपद, स्वाती, मघा व रोहिणी इन नक्षत्रो मे और ज्येष्ठ, माघ, फ़ाल्गुन, बैशाख, मार्गशीर्ष एवं आषाढ इन महीनो मे विवाह करना शुभ होता है ! विवाह का सामान्य दिन पंचांग मे लिखा रहता है अत: पांचांग से दिन निकालकर उसको लेकर उस दिन वर कन्या के लिये यह विचार करना चाहिए कि उस दिन कन्या के लिये गुरुबल वर के लिये सूर्य बल दोनो के लिये चन्द्रबल उपयुक्त है या नहीं यह अवश्य देख लेना चाहिये।
#गुरुबल_विचार :-
गुरु, कन्या की राशि से नवम एकादश द्वितीय और सप्तम राशि मे शुभ होता है ! दशम, तृतीय, छठा और प्रथम राशि मे दान देने से शुभ हो सकता है परन्तु चौथीे आठवीं व बारहवीं राशि मे अशुभ होता है !
#सूर्यबल_विचार :- सूर्य वर की राशि से तीसरा, छठा, दसवां, ग्यारहवाँ शुभ होता है, दूसरा, पांचवाँ, सातवाँ और नौवाँ दान देने से शुभ हो सकता है ! परन्तु चौथा आठवां और बारहवां सूर्य हर हालत में अशुभ होता है !
#चन्द्रबल_विचार :-
चन्द्रमा वर और कन्या की राशि से तीसरा, छठा, सातवां, दसवाँ, ग्यारहवां शुभ होता है ! पहला, दूसरा, पांचवां, नौवां दान से शुभ हो सकता है, और चौथा, आठवां व बारहवां अशुभ होता है !
#विवाह_में_त्यागने_वाली_लगनें :
दिन मे तुला, वृश्चिक और रात्रि में मकर लग्न बधिर रहती है, दिन मे सिंह, मेष, वृष और रात्रि में कन्या, मिथुन, कर्क लग्न अन्धी रहती हैं, दिन मे कुंभ और रात्रि मे मीन दोनो लगने पंगु हैं, सिंह, मेष, वृष, मकर, कुम्भ, मीन यह लगन सुबह और शाम के समय कुबड़ी होती हैं !
#त्यागने_वाली_लगनों_का_फ़ल :
यदि विवाह बधिर लगन मे होता है तब वर कन्या चाहे कुबेर के खजाने से लदे हुये जाये लेकिन दरिद्र हो जायेंगे, दिन की अन्धी लगनो मे विवाह किया जाता है तब कन्या को वर से अलगाव व दूरी मिलनी ही है, रात्रि की अन्धी लगन में विवाह होता है तब संतति होने में बाधा उत्पन्न होती है, यदि किसी तरह उपाय से संतान होती भी है तब जिन्दा नही रहती, लगन पंगु होती है तब धन नाश और परिवार की मर्यादा का नाश होने लगता है !
ुद्धि :
लगन से बारहवे शनि दसवे मंगल तीसरे शुक्र लग्न मे चन्द्रमा और क्रूर ग्रह अच्छे नही होते है ! लगनेश और सौम्य ग्रह आठवें भाव मे अच्छे नही होते हैं ! सातवे भाव मे कोई भी ग्रह शुभ नही होता है !
#ग्रहों_का_बल :
पहले चौथे पांचवे नवें और दसवे स्थान मे गुरु सब दोषों को नष्ट करने वाला होता है ! सूर्य ग्यारहवे स्थान पर होने पर तथा चन्द्रमा वर्गोत्तम लग्न मे स्थिति होने पर नवमांश दोष को नष्ट कर देता है ! बुध, लगन से चौथे, पांचवे, नौवें और दसवें स्थान मे हो तब अक्सर खराब से खराब दोष को भी शुभ कर देता है ! लग्न का स्वामी और नवमांश का स्वामी एक ही भाव राशि में स्थित हों तब भी अक्सर दोष शांति माना जाता है !
Jyotish guru Diwakar painuli

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06/09/2025

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येन बंद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबला:| तेन त्वामनु बाधनामि रक्षे मा चल मा चल ||
07/08/2025

येन बंद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबला:| तेन त्वामनु बाधनामि रक्षे मा चल मा चल ||

आज 500 वर्ष पुराने श्री सत्यनारायण मंदिर मैं पंचमुखी हनुमान जी और सनी देव जी की मूर्ति स्थापना और सनी मंदिर का जीर्णोद्ध...
10/12/2024

आज 500 वर्ष पुराने श्री सत्यनारायण मंदिर मैं पंचमुखी हनुमान जी और सनी देव जी की मूर्ति स्थापना और सनी मंदिर का जीर्णोद्धार का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।जय हनुमान जी जय सनी देव जी जय श्री राम 🙏🙏🙏।भगवान सबकी मनोकामना पूर्ण करे 👏👏💐💐 #💐

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ
31/10/2024

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

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Rishikesh
249204

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