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देहरादून: उत्तरकाशी में पेड़ों की कटान को लेकर उठ रहे विरोध के बीच अब बागेश्वर से भी बड़ी खबर सामने आई है। कांडा–बागेश्व...
11/12/2025

देहरादून: उत्तरकाशी में पेड़ों की कटान को लेकर उठ रहे विरोध के बीच अब बागेश्वर से भी बड़ी खबर सामने आई है। कांडा–बागेश्वर नेशनल हाईवे को बेहतर बनाने की परियोजना के लिए 5700 से अधिक पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग ने प्रभावित पेड़ों के चिन्हीकरण की पुष्टि की है।

पृष्ठभूमि / संदर्भ

राज्य में नेशनल हाईवे को चौड़ा और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऐसे में उत्तरकाशी में 6000 से ज्यादा पेड़ों की कटान चर्चा का विषय बनी ही थी कि बागेश्वर–अल्मोड़ा हाईवे निर्माण से जुड़ी एक और बड़ी पर्यावरणीय चुनौती सामने आ गई है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता जताई है कि बड़े पैमाने पर कटान पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की समस्या को और बढ़ा सकता है।

अधिकारिक जानकारी

कांडा–बागेश्वर नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट को पांच चरणों में पूरा किया जाना है। इसका अधिकांश हिस्सा बागेश्वर जिले में आता है, जहां पेड़ों की कटान सबसे अधिक होगी। बागेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्न ने बताया कि कुल 5745 पेड़ परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि नियमानुसार क्षतिपूर्ति के लिए चार गुना पौधरोपण किया जाएगा।

वन विभाग के अनुसार इस कटान में लगभग 30 से ज्यादा प्रजातियों के वृक्ष शामिल हैं, जिनमें देवदार, अखरोट, काफल, जामुन, अमरूद, नाशपाती, शहतूत, आम और बांज जैसे फलदार और स्थानीय प्रजातियों वाले वृक्ष भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट से संबंधित लगभग सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं और अब अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

स्थानीय प्रतिक्रिया

पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय ग्रामीणों ने चिंता जताई है कि बड़ी संख्या में पेड़ों की कटान से पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मिट्टी कटाव का जोखिम बढ़ सकता है। उनका कहना है कि मानसून के दौरान पहले ही कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं होती हैं, और यदि हरा आवरण कम हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों ने कहा कि सड़क सुधार जरूरी है, लेकिन पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञ टिप्पणी

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सड़क प्रोजेक्ट पहाड़ी राज्यों में दोहरी चुनौती लेकर आते हैं—एक ओर विकास के लिए आवश्यक, दूसरी ओर पर्यावरणीय संवेदनशीलता के लिए खतरा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कटान के स्थान पर संरेखण बदलाव, रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज सिस्टम और व्यापक पौधरोपण जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संख्या और तथ्य

कुल 5745 पेड़ों को परियोजना से प्रभावित माना गया है। प्रोजेक्ट अल्मोड़ा और बागेश्वर दोनों जिलों में फैला है, लेकिन कटान का बड़ा हिस्सा बागेश्वर क्षेत्र में प्रस्तावित है। लगभग 30 प्रजातियों के पेड़ चिन्हित किए गए हैं, जिनमें कई फलदार वृक्ष भी शामिल हैं।

आगे क्या होगा

वन विभाग के अनुसार पेड़ों के कटान की अनुमति मिलते ही प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि पर्यावरण प्रेमियों ने संकेत दिया है कि वे परियोजना की विस्तृत पर्यावरण रिपोर्ट और वैकल्पिक उपायों की मांग करेंगे। उत्तरकाशी में जारी विरोध की तरह यहां भी आवाजें उठ सकती हैं, क्योंकि चिन्हीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है।

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