जगत जननी माता श्री नैना देवी जी, पांडव सरोवर कुंतभ्यो, रिवालसर मंडी हि प्र

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जगत जननी माता श्री नैना देवी जी, पांडव सरोवर कुंतभ्यो, रिवालसर मंडी हि प्र रिवालसर हिमाचल प्रदेश के मंडी क़स्बे ?
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रिवालसर मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
रिवालसर— शहर —रिवालसर झील
रिवालसर is located in हिमाचल प्रदेश

निर्देशांक : 31.633889°N 76.833333°Eनिर्देशांक: 31.633889°N 76.833333°E
Country Flag of India.svg भारत
राज्य हिमाचल प्रदेश
जिला मंडी
शासन
• सभा नगर पालिका
ऊँचाई 1,360
जनसंख्या (2001)
• कुल 1,369
भाषाएँ
• आधिकारिक हिन्दी
समय मण्डल भारतीय मानक समय (यूटीसी +5:30)

रिवालसर झील

रिवालसर
रिवालसर हिमाचल प्रदेश के मंडी क़स्बे से 24 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से जुड़ा एक प्राचीन तीर्थ है जहाँ एक बड़ा सरोवर और सरोवर के निकट ही गुरु पद्मसम्भव द्वारा स्थापित 'मानी-पानी' नामक बौद्ध मठ और एक गुरुद्वारा भी स्थित है | इसे महर्षि लोमश की तपोभूमि माना जाता है।

अनुक्रम [छुपाएँ]
1 धार्मिक महत्व
1.1 हिंदू धर्म
1.2 बौद्ध धर्म
1.3 सिख धर्म
2 आवागमन
3 गैलरी
4 सन्दर्भ
धार्मिक महत्व[संपादित करें]
यह स्थान हिंदू, बौद्ध एवं सिख धर्म के अनुयायियों के लिए श्रद्धा का केंद्र है।[1]

हिंदू धर्म[संपादित करें]
यहाँ शंकर, लक्ष्मीनारायण और महर्षि लोमश के तीन मंदिर प्रसिद्ध हैं | रिवालसर सरोवर में सात उभरे हुए भूभाग हैं, उन पर उगे वृक्षों पर देव-मूर्तियाँ हैं|[2]

बौद्ध धर्म[संपादित करें]
ऐसा माना जाता है कि मंडी के राजा अर्शधर को जब यह पता चला कि उनकी पुत्री ने गुरु पद्मसंभव से शिक्षा ली है तो उसने गुरु पद्मसंभव को आग में जला देने का आदेश दिया, क्योंकि उस समय बौद्ध धर्म अधिक प्रचलित नहीं था और इसे शंका की दृष्टि से देखा जाता था। बहुत बड़ी चिता बनाई गई जो सात दिन तक जलती रही। इससे वहाँ एक झील बन गई जिसमें से एक कमल के फूल में से गुरु पद्मसंभव एक षोडशवर्षीय किशोर के रूप में प्रकट हुए।[3] [4]

सिख धर्म[संपादित करें]
यहाँ पर एक भव्य गुरुद्वारा भी है जो गुरु गोविंद सिंह जी की याद में बना है। कहा जाता है कि मुगलों से युद्ध में पहाड़ी राजाओं से मदद मांगने के उद्देश्य से वे यहाँ पधारे थे और तीस दिन तक यहाँ रहे। मंडी के राजा जोगिंदर सेन ने सन् १९३० में इस गुरुद्वारे का निर्माण कराया। बैसाखी के अवसर पर श्रद्धालु यहाँ स्नान के लिए आते हैं।[4]

आवागमन[संपादित करें]
सड़क मार्ग
रिवालसर के निकट सबसे प्रमुख शहर मंडी है, जहाँ से सड़क मार्ग से लगभग एक घंटे में यहाँ पहुँचा जा सकता है। मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग २१ (अम्बाला-मनाली मार्ग) पर स्थित होने से भारत भर से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन कीरतपुर साहिब है। वहाँ से सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग २१ के रास्ते मंडी और फिर रिवालसर जाया जा सकता है।
स्कंद पुराण के मुताबिक रिवालसर का इतिहास~

स्कंद पुराण के हिमवान खंद के प्रथम, द्वितिय और तृतीय अध्यायों में हृदयलेश का वर्णन आता है। हृदयलेश अर्थात झीलों का राजा ( हद-तालाब, आलय- स्थान, ईश- राजा)। रिवालसर का प्राचीन नाम हृदयलेश है। पूर्व काल में लोमश ऋषि हिमालय पर तप कर रहे थे, इसी दौरान ऋषि लोमश ने ब्रह्म पर्वत पर चढ कर एक तालाब देखा जो अत्यंत सुंदर, जिसके चारों ओर सुंदर वृक्षों की छाया, विभिन्न प्रकार के पक्षियों से सुशोभित। जिसका जल अत्यंत निर्मल और शुद्ध है। जिसमें अप्सराएं क्रिडा कर रही हैं। इस सुंदर तालाब को देखकर ऋषि बहुत प्रसन्न हुए। पर्वतों में छिपे इस तालाब में स्नान कर लोमश ऋषि इसके किनारे तपस्या करने बैठ गए। कुछ देर बाद उन्हे नींद आ गई, स्वपन में उन्होने एक भस्म और रूद्राक्ष माला धारण किए हुए यति को देखा, यति ने लोमश ऋषि को इस स्थान पर तप करने को कहा। तब लोमश ऋषि ने इस तालाब की पश्चिम दिशा में कठोर तपस्या करनी शुरू की। तीन माह तक कठोर तप करने पर इंद्र भयभीत हो गए तथा उन्होेने लोमश ऋषि की तपस्या को भंग करना चाहा परंतु ऋषि विघ्न बाधओं के बावजूद तपस्या करते रहे। शिव भगवान, ऋषि की अखंड तपस्या से प्रसन्न होकर पार्वती सहित इस तालाब में भूखंड पर नहल का रूप धारण कर नौकायन करने लगे। लोमश ऋषि अपनी तपस्या समाप्त कर सरोवर की ओर देखकर हैरान हो जाते हैं कि यह कौन सी माया है। तब प्रसन्न होकर शिव पार्वती उन्हे दर्शन देते हैं लोमश ऋषि पाद्यार्थ से शिव पूजन कर गदगद वाणी से शिव स्तुती करने लगे। यह स्तुति नौ श्रलोकों वाली है जिसे शिव भगवान ने नवरत्न कहा है। तब भगवान शिव ने ऋषि को मन वांछित वर प्रदान किया तथा महाकल्प पर्यन्त जीवित रहने का वर दिया तथा मनोवेग से वायु मेें भ्रमण करने का आशीर्वाद दिया। लोमश ऋषि ने भगवान शिव से इस तालाब का महत्व पूछा तब शिव ने इसे मां पार्वती से पूछने को कहा। इस संवाद के दौरान विष्णु, ब्रह्मा, इन्द्रादि देवता, किन्नर नागादि, तीर्थराज प्रयाग, पुष्कर सहित सभी पवित्र तीर्थ तथा नदियां यहां पर उपस्थित हुए। ब्रह्मा, विष्णु, गणपति, सूर्य एवं शिव पार्वती सहित पांच देवताओं ने भूखंड में निवास कर झील में तैरने लगे तथा यहां पर टिल्लो बेडों में निवास करने का निश्चय किया जिस कारण रिवालसर को पंचपुरी अर्थात जहां पांच देवता वास करते हैं के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव के आदेश से देवता हिम रूप होकर देवांगनाएं मंजुला, मालती और बेल रूप होकर पितरगण वृक्ष रूप में, निशाचर गंधर्व, किन्नर आदि गुम रूप होकर निवास करने लगो।
साभार �

वायु मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा भुन्तर (कुल्लू-मनाली) है। वहाँ से सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग २१ के रास्ते मंडी और फिर रिवालसर जाया जा सकता है।

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175023

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