Shri Jirawala Parshwanath Jain Tirth

Shri Jirawala Parshwanath Jain Tirth जीरावला गाँव में जयराज पर्वत की ओट में ।
(781)

इस तीर्थ की महिमा का शब्दों मे वर्णन करना सम्भव नही है । प्रभु प्रतिमा अति मनमोहक व चमत्कारी है । दर्शन मात्र से ही सारे कृष्ट दूर हो जाते है । यहाँ जीरावला पार्श्वनाथ भगवान का मन्दिर विक्रम सं. ३२६ मे कोडी नगर के सेठ श्री अमरासा ने बनाया था । अमरासा श्रावक को स्वप्न में श्री अधिष्ठायक देव ने जीरापल्ली शहर के बाहर भूगर्भ में गुफ़ा के नीचे स्थित पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिमा को उसी पहाडी की तलहटी में

स्थापित करने को कहा । ऐसा ही स्वप्न वहाँ विराजित जैनाचार्य श्री देवसूरिजी को भी आया था । आचार्य श्री व अमरासा सांकेतिक स्थान पर शोध करने लगे । पुण्य योग से वहीं पर पार्श्वनाथ स्वामीजी की प्रतिमा प्राप्त हुई । स्वप्न के अनुसार वही पर मन्दिर का निर्माण कर प्रभु प्रतिमा की प्रतिष्ठा वि.सं. ३३१ में आचार्य श्री देवसूरिजी के सुहस्ते सम्पन्न हुई ।
श्री जीरावला पार्श्वनाथ भगवान की महिमा का जैन शास्त्रों में जगह जगह पर अत्यन्त वर्णन है । अभी भी जहाँ कहीं भी प्रतिष्ठा आदि शुभ काम होते है तो प्रारंभ में “ऊँ श्री जीरावला पार्श्वनाथाय नमः” पवित्र मंत्राक्षर रुप इस तीर्थाधिराज का स्मरण किया जाता है । इस मन्दिर मे श्री पार्श्वनाथ भगवान के १०८ नाम की प्रतिमाएँ विभिन्न देरियों में स्थापित है । प्रायः हर आचार्य भगवन्त, साधु मुनिराजों ने यहाँ यात्रार्थ पदार्पण किया है । इस तीर्थ के नाम पर जीरापल्लीगछ बना है, जिसका नाम चौरासीगच्छों में आता है । अनेकों आचार्य भगवन्तों ने अपने स्तोत्रों आदि मे इस तीर्थ को महिमा मण्डित किया है ।
यहाँ पर जैनेतर भी खूब आते हैं व प्रभु को दादाजी कहकर पुकारते है । प्रतिवर्ष गेहूँ की फ़सल पाते ही सहकुटुम्ब यहाँ आते है व यहीं भोजन पका कर प्रभु चरणों में चढाकर खुद ग्रहण करते है ।

चैन्नई-बैंगलोर हाईवे पर आम्बुर स्टेशन से 8 किलोमीटर दूर 1 छोटा सा गांव है तेनमपट्ट वहाँ लगभग 60 तमिल परिवार रहते हैं । च...
27/09/2021

चैन्नई-बैंगलोर हाईवे पर आम्बुर स्टेशन से 8 किलोमीटर दूर 1 छोटा सा गांव है तेनमपट्ट

वहाँ लगभग 60 तमिल परिवार रहते हैं । चारों तरफ केवल नारियल के पेड़ हैं , ऐसे सुन्दर और शांत प्राकृतिक स्थान पर स्थानीय लोगों की जानकारी के आधार पर कृष्ण वर्ण की 1 पार्श्वनाथ भगवान की जिन प्रतिमा कम से कम पिछले 65 वर्षों से एक पीपल के पेड़ के नीचे रखी थी।
साथ में एक नाग की प्रतिमा भी वहां रखी थी। परंतु यह प्रतिमा यहाँ कब से है और कैसे आई इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है ।
गाँव वाले लोगों को यह पता नहीं था कि यह प्रतिमा किसकी है पर स्वाभाविक श्रद्धा से वो उसपर पानी डालते थे और फूल चढ़ाते थे और उनकी यह मान्यता थी कि इस प्रतिमा के कारण उनके गांव में समृद्धि है ।
आज से लगभग 10 वर्ष पूर्व निकटवर्ती तिरपात्तूर जैन संघ को इस बात की सुचना मिलने पर वो वहां पहुंचे और प्रतिमा देने का निवेदन किया परंतु स्थानीय निवासियों का लगाव प्रतिमा से होने के कारण वो प्रतिमा देने को तैयार नहीं थे ।
उनका आग्रह था कि मंदिर वहीं पर ही बनाया जाये परंतु सभी परिवार मांसाहारी थे इसलिए वहाँ मंदिर बनाने पर अशुद्धि और आशातना की सम्भावना थी , इसलिए वापस लौटना पड़ा ।

कालान्तर में इसी साल पौष वदी दशम को प्रभु के जन्म कल्याणक के दिन ही तिरपात्तूर में एक श्राविका को स्वप्न में उस पेड़ के नीचे रखी जिन प्रतिमा और नाग की प्रतिमा के दर्शन हुए और संजोग से उसी दिन उस गांव से एक व्यक्ति उस प्रतिमा का फ़ोटो लेकर यहाँ आया तब संघ के अग्रणी श्रावक फिर से वहाँ गए और इस बार उनके प्रयास से वहाँ के 13 परिवारों ने आजीवन मांसाहार त्याग का नियम लिया और मंदिर में दर्शन सेवा पूजा रखरखाव के लिए तैयार हुए ।
तत्पश्चात तिरपात्तूर और आम्बुर के 4 भामाशाह जैन परिवारों ने अतिशीघ्र वहां भूखंड खरीदकर 40 दिन में जिन मंदिर का निर्माण करवाया और 11-12 मार्च 2015 को
पूज्य उपाध्याय प्रवर मणिप्रभसागर जी म. सा. के शिष्य पूज्य मनितप्रभ सागर जी म.सा. आदि ठाणा 3 , साध्वी श्री मयुरप्रिया श्री जी आदि ठाणा 3 और यतिवर्य श्री वसंत गुरु जी की निश्रा में भव्य अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव वहां सैकड़ों जैन और तमिल लोगों की उपस्थिति में संपन्न हुआ ।
विशेष बात ये रही कि तमिल मूल की 4 लड़कियों ने 30000 नवकार मंत्र का 1 महीने तक जाप किया और वरघोड़े के दिन 2 लड़कियों ने चैत्यवन्दन भी किया ।गाँव के लोगों को दर्शन - पूजा की शुद्धता और विधि के बारे में सिखाया गया है। अभी प्रति सप्ताह वहां तिरपात्तुर संघ द्वारा स्नात्र पूजा भी कराई जायेगी तथा धार्मिक कक्षा ली जायेगी। मंदिर में पूजा करने वालों को रोज़ प्रभावना भी दी जायेगी ।
पार्श्वनाथ दादा की यह अत्यंत मनमोहक प्रतिमा लगभग 50 इंच की है परंतु इसका वजन लगभग 1500 किलो से भी अधिक है इसलिए लगभग 10-15 लोगो की 3 घंटे की कड़ी मेहनत के पश्चात् प्रतिमा जी को मंदिर के बाहर उसके पूर्व स्थान से हटाकर गम्भारे के अंदर ले जाने में सफलता प्राप्त हुई ।
टेस्टिंग से यह भी पता चला है कि प्रतिमा जी लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है परंतु मजबूत और भारी पत्थर से निर्मित होने के कारण आज भी पूर्ण सुरक्षित है और अत्यंत मनमोहक प्रतीत होती है ।

ऐसे तीर्थ और प्रतिमा जी के दर्शन हेतु अवश्य पधारें ।
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बेंगलुरु में इन रत्न चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की स्थापना के तुरन्त बाद जैसे ही प्रभु को प्रणाम किया, प्रभू के चरणों के ...
30/08/2021

बेंगलुरु में इन रत्न चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की स्थापना के तुरन्त बाद जैसे ही प्रभु को प्रणाम किया, प्रभू के चरणों के नीचे मुझे वहां पर (ध्यान में) कछुआ दिखाई दिया.

तो थोड़ा आश्चर्य हुआ कि पार्श्वनाथ भगवान के साथ में कछुए का क्या संबंध है? वैसे तो धर्नेन्द्र का वाहन कछुआ ही है पर घर वालों से पूछा कि घर में कोई कछुआ है क्या? क्योंकि लोग वास्तु के हिसाब से मैटल या कांच का कछुआ रखते हैं घर में, तो उन्होंने तुरंत ही कहा कि हां कछुआ है एक नहीं, दो है.

मैंने उनको लाने के लिए कहा तो लाकर सीधे दोनों मेरे हाथों पर रखे. थोड़ा पानी ऊपर लगा हुआ था. भारी होने के कारण पहले तो मैंने उन्हें मेटल का ही समझा. कुछ ही सेकंड में दोनों ने धीरे धीरे अपना मुंह बाहर निकाला.

अरे! ये तो जीवित कछुए हैं !

तुरंत ही मन में विचार आया कि मंत्रोचार सुनने के बाद इनके मन में भी प्रभु के दर्शन करने की इच्छा हुई है इसलिए उन्हें भी प्रभु के दर्शन करवाए. उनका जीवन सफ़ल हुआ! मंत्रोच्चार के तुरन्त बाद प्रभु के दर्शन उन कछुओं को हुवे!!

पूर्व जन्म में किसी कर्मवश इस जन्म में कछुए बने हैं, परंतु धर्म से किसी प्रकार का संबंध रहने के कारण, मंत्रोच्चार के कारण उन्होंने अपने मन की इच्छा व्यक्त की. उस समय सिर्फ घर के ही लोग उपस्थित थे इसलिए इस बात का ज्यादा पता पड़ ना सका परंतु आज इस बात को सबके सामने रख रहा हूं.

जीरावला पार्श्वनाथ तीर्थ की विहंगम नयनाभिराम झलक....  मानो स्वर्ग धरती पर उतर आया हो !
31/07/2021

जीरावला पार्श्वनाथ तीर्थ की विहंगम नयनाभिराम झलक.... मानो स्वर्ग धरती पर उतर आया हो !

31/07/2021
Shared By : Pradeep Sanghvi
28/07/2021

Shared By : Pradeep Sanghvi

ॐ ह्रीं श्रीं अर्हम श्री जीरावला पार्श्वनाथाय नमो नमः 🙏😊
28/07/2021

ॐ ह्रीं श्रीं अर्हम श्री जीरावला पार्श्वनाथाय नमो नमः 🙏😊

17/07/2021

जय हो 🙏

कर्नाटक में मिली दुनिया की एकमात्र आदिवीर भगवान की प्रतिमा जिसका आधा अंग आदिनाथ भगवान का और आधा अंग महावीर भगवान का हैयह...
17/06/2021

कर्नाटक में मिली दुनिया की एकमात्र आदिवीर भगवान की प्रतिमा जिसका आधा अंग आदिनाथ भगवान का और आधा अंग महावीर भगवान का है
यह प्रतिमा आदिवीर भगवान की है । प्रतिमा का आधा
अंग आदिनाथ भगवान का है और आधा अंग महावीर भगवान का है ! प्रतिमा का जो लांचंण है उसमे आधा बैल है और आधा सिंह है । प्रतिमा को तीसरी आख भी है जो थोडीसी आदिनाथ के अंग की तरफ है । यहप्रतिमा कम से कम 1800 वर्ष पुरानी है क्योकी वहा एक प्राचीन शिलालेख मिला है जो बताता है की आचार्य भद्रभाहू और चंद्रगुप्त मौर्य और 700 मुनी उत्तर से दक्षिण की तर्फ जाते समय उनका चातुर्मास हुआ था ।
कर्नाटक में मिली अदभुद एवं आलौकित जैन प्रतिमा,
हलिंगली (कर्नाटक) में खुदाई के दौरान प्राचीन जैन प्रतिमा प्राप्त भगवान आदिनाथजी व भगवान महावीर जी की संयुक्त आधा बैलमुख व आधा शेरमुख चिन्ह युक्त लगभग दूसरी या तीसरी सदी की भारत में पहली बार इस तरह की "आदिवीर" भगवान की प्राचीन प्रतिमा मिली है ।
इससे पूर्व में भी यहाँ से प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हो चुकी है। संभवत: यहां प्राचीन समय मे विशाल जिनालय होगा । इसी स्थान से एक शिलालेख भी प्राप्त हुआ था जिसमे आचार्य भद्रबाहु के साथ चंद्रगुप्त मौर्य उत्तर से दक्षिण भारत की और विहार करते समय चातुर्मास किये जाने का उल्लेख है । सूचना प्रदाता- संजय जैन आचार्य कुलरत्नभूषण महाराजजी के अनुसार इसके पहले भी यहा पर 16 पुरानी प्रतिमा मिल चुकी है और वो सारी प्रतिमा आचार्य श्री कुलरत्न भूषण महाराजजी के दृष्टांत से मिली है । यह संपूर्ण भारत वर्ष मे या दुनिया मे ऐसी एकमेव अतिशयकारी प्रतिमा है जिसको आदिवीर भगवान के नाम से जाना जाता है ! जय हो आदिवीर भगवान की । जय हो कुलरत्न भूषण मुनिराज की ।

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16/06/2021

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🙏आन्ध्रप़देश के छोटे से गांव पेद्दतुम्बलम में १२वीं शताब्दी के प्राचीन श्री पार्श्वनाथ भगवान्,श्री शांतिनाथ भगवान्,श्री महावीर स्वामी एवं देवी पद्मावती की अत्यंत दुर्लभ खड़ी प्रतिमा लगभग 55 वर्ष पहले श्री पर्श्वमणि तीर्थ में खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी 🙏

🙏प्रतिमाजी प्राप्त होते ही गाँव में मीठे पानी की नहर का चमत्कारिक आगमन हुआ। इस चमत्कार से गाँव वालों ने इन मूर्तियों को यहीं पर मंदिर बनवाकर उसमे विराजमान करने की ज़िद की।यह तीर्थ आदोनी से १८ की.मी. की दूरी पर मुंबई- चेन्नई रेलवे लाइन पर स्थित है 🙏

🙏पार्श्वनाथ भगवान की जटाएं कन्धों तक फैली है प्रतिमाजी के ह्रदय भाग में चमकती मणि है जिसके कारण तीर्थ का नाम पार्श्वमणि तीर्थ है 🙏

19/05/2021

⛰️अपने शिखरजी की प्राकृतिक सुंदरता के आगे सभी फीका लगता है

फागुनी तेरस के शुभ मुहूर्त पर शाम्य और प्रद्युम्न के द्वारा नेमिनाथ भगवान से दिक्षित होकर श्री सिद्धांत शत्रुन्जय तीर्थ ...
26/03/2021

फागुनी तेरस के शुभ मुहूर्त पर शाम्य और प्रद्युम्न के द्वारा नेमिनाथ भगवान से दिक्षित होकर श्री सिद्धांत शत्रुन्जय तीर्थ पर मोक्ष पधारे उसका चित्र दर्शन। आज की गिरिराज की छ गांव की यात्रा इसी पावन दिन से शुरूहुई 🙏🙏🙏

Address

Shri Jirawala Parshwanath Jain Derasar, Major Distric Road 26, Saran Ka Khera
Reodar
307514

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