07/08/2025
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किन्नौर कैलाश — हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जनपद में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ — न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि किन्नौरी संस्कृति, परंपरा और लोकमान्यताओं का भी जीवंत प्रतीक है। आदिकाल से ही किन्नौरवासियों द्वारा इसकी परिक्रमा, जिसे रालड़ंग कोरा कहा जाता है, आस्था, आत्मशुद्धि और पितरों की शांति हेतु की जाती रही है। यह परिक्रमा मानव जीवन के राग-द्वेष और मोह से मुक्ति का मार्ग मानी जाती है।
परंपरागत रूप से, रिब्बा, पोवारी, तंगलिंग, सांगला, बारंग और छितकुल जैसे गाँवों के निवासी इस दिव्य स्थल की दूर से ही पूजा करते आए हैं। लोककथाएँ स्पष्ट चेतावनी देती हैं कि किन्नौर कैलाश के अत्यधिक निकट जाना अशुभ और खतरनाक है। यह दूरी ही सम्मान का प्रतीक मानी जाती थी।
लेकिन अब...
हाल के वर्षों में, शिवलिंग यात्रा (जो रालड़ंग कोरा का एक भाग मात्र है) को पर्यटन और व्यवसाय के नाम पर बढ़ावा मिला है, जबकि परंपरागत कोरा की अनदेखी हो रही है। यह स्थिति स्थानीय देवताओं के आदेशों, विशेषतः कासुराजस (रिब्बा के कुलदेवता), के खिलाफ है जिन्होंने इस यात्रा पर प्रतिबंध स्पष्ट रूप से घोषित किया था।
1990 के दशक से पहले इस शिवलिंग तक जाना अत्यंत दुर्लभ था। आज, लोग वहां जाकर फोटो और वीडियो बना रहे हैं, अपवित्रता फैला रहे हैं, और पवित्र स्थल की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं। यह न केवल धार्मिक अनादर है, बल्कि किन्नौरी आस्था के साथ विश्वासघात भी है।
हालिया हादसे और प्रशासनिक लापरवाही
अभी हाल ही में एक यात्री की दुखद मृत्यु हुई, और प्रशासन व यात्रा कमेटी (पोपारी) ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि यात्रा "बिना रजिस्ट्रेशन" की गई थी। लेकिन जब पैसे लिए जा रहे थे, तब सब कुछ वैध बताया गया था। अब जब जवाबदेही की बारी आई, तो रजिस्ट्रेशन ‘गायब’ हो गया। यह दोहरापन बेहद शर्मनाक है।
प्रशासन को पहले से ज्ञात था कि 20 जुलाई के बाद मौसम बिगड़ने वाला है, फिर भी यात्रा जारी रखी गई। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि लोगों की जान को जानबूझकर खतरे में डालने जैसा कृत्य है। आज स्थिति यह है कि —
> "शिव नाम जपना, पब्लिक का पैसा अपना"
यही नीति बन गई है।
अब सवाल उठता है...
जब यह स्पष्ट है कि यह यात्रा प्राकृतिक आपदाओं को आमंत्रण देती है, तो फिर इसकी अनुमति क्यों? क्या पर्यटन और कमाई इतनी महत्वपूर्ण हो गई है कि हम धार्मिक गरिमा, संस्कृति और जीवन की कीमत पर इसे बढ़ावा दें?
यह यात्रा अब एक आसान कमाई का माध्यम बन चुकी है, जिसमें कुछ प्रशासनिक और स्थानीय तत्व मिलकर आस्था से व्यापार कर रहे हैं।
समाधान क्या है?
शिवलिंग यात्रा पर तत्काल रोक लगे।
परंपरागत रालड़ंग कोरा को ही मान्यता और प्रोत्साहन दिया जाए।
स्थानीय देव आदेशों और जनभावनाओं का सम्मान हो।
यात्रा से पूर्व पुख्ता मौसम पूर्वानुमान और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित हों।
अब समय है…
.. चुप्पी तोड़ने का।.. सामूहिक चेतना जगाने का।.. प्रशासन को जवाबदेह बनाने का।
इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया के माध्यम से हमें एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी। यदि हम अब भी नहीं जागे, तो भविष्य में और भी निर्दोष जानें जोखिम में पड़ेंगी।
निष्कर्ष
रालड़ंग कोरा हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। इसकी पवित्रता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना हम सभी किन्नौरवासियों की संयुक्त ज़िम्मेदारी है।
आइए, हम मिलकर इस आस्था और प्रकृति के देवालय को व्यवसायिक दोहन से बचाएं, और एक ऐसी परंपरा को पुनः स्थापित करें जिसमें श्रद्धा हो, सुरक्षा हो, और सम्मान हो।
#हम #हम #हम