Arihant Gitanjali - अरिहंत गीतांजलि

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Arihant Gitanjali - अरिहंत गीतांजलि

मत कर काया का अभिमान मत कर माया का अभिमान काया गार से काची की माया काम ना आनी ।🙏🙏🌹🌹🌹काया अरिहंत के काम न आईजहां जहां विष...
15/02/2025

मत कर काया का अभिमान
मत कर माया का अभिमान
काया गार से काची की माया काम ना आनी ।🙏🙏🌹🌹🌹

काया अरिहंत के काम न आई
जहां जहां विषय भोग पड़े थे वहां वहां ये भागती रही,सुखों के साधन जोड़ती रही
पर जहां स्वाध्याय,अरिहंत की भक्ति हो रही थी
वहां जाने में ये आलस्य में आ गई लेकिन
अरिहंत प्रभु के काम नहीं आई
जबकि प्रभु अरिहंत से मिलने के लिए आई थी
पर अरिहंत से न मिल पाई
अपने रूप पर इतराती रही सारी जिंदगी इस किराए के मकान में गुजार दी लेकिन किराया (नाम सिमरन)न दे पाई
ओर खाली तस्वीर (अस्थि पंजर) पड़ी रह गई!
णमो अरिहंताणं🙏🏻🥰🙏🏻
Tina nahar✍️✍️

योग्यता कैसी हो,,,प्रभु मन्दिर जाकर कुछ मांगना चाहा तोसोचने लगी क्या मांगू,,,🤔प्रभु सेप्रभु,,उन्होंने सब कुछ दिया,,अच्छा...
15/02/2025

योग्यता कैसी हो,,,

प्रभु मन्दिर जाकर कुछ मांगना चाहा तो
सोचने लगी क्या मांगू,,,🤔प्रभु से
प्रभु,,उन्होंने सब कुछ दिया,,अच्छा कुल
अच्छी सोच,ओर उनको चाहे वह मन,,
अब क्या मांगू,, तो सोचा प्रभु ऐसी योग्यता दो
जिससे में सबके काम आसकूँ,, अनन्त जीवो को करुणाश्रय दे सकू,,चलते कदम से हर जीव को अभय दे सकू,,पूण्य की चाह ना हो,,दुख आगे आये ऐसे कर्म ना हो मेरे
योग्य होजाउ प्रभु तुम्हारे चरणों मे चढ़ने के लिए
फूलो की भांति,,भले कुछ पल का जीवन हो पर आखरी समर्पण तुझ चरणों मे होजाये,,,✍️✍️
णमो अरिहंताणं🙏🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

प्रभु कहते है सब से,,,,ये जन्म नही दुबारा मिले,,कीमत इसकी पहचानो,,ये घड़ी दुबारा ना आएगी,,,,प्रभु कहते सब सेवीतराग की वाण...
07/10/2024

प्रभु कहते है सब से,,,,
ये जन्म नही दुबारा मिले,,
कीमत इसकी पहचानो,,
ये घड़ी दुबारा ना आएगी,,,,प्रभु कहते सब से

वीतराग की वाणी,,,हमारे आचार्यो द्वारा हमको मिली
पर उस राह का अनुशरण कितना किया🤔🤔
यह हम खुद का निरीक्षण करके ही बता सकते है कि
हम कितने पानी मे है😶

मानव जन्म मिला,,,सांसारिक सुख हेतु क्या,,🙁
अरे,,,अरिहंत सेवा हेतु,,,जिससे जन्म-मरण की बीमारी
हमको आगे ना सताए,,,
क्यो की एक अवसर आया है यह जन्म सुधारने का ओर हम
सांसारिक सुख भोग की खबाहिशो में ही लगे है जो मिथ्या है
क्यो की जो संग रहेगा वो हमारा कर्म रहेगा भले अच्छा या बुरा

प्रभु ने पुण्यों को भी छोड़ा कर्म खपाने हेतु,,,
पर हम मोह ओर अति की कमाना में जी रहे है ना,,,
तो अभी मुक्क्ति कहा,,,😥

मुक्क्ति हेतु युक्ति है भक्ति
निःस्वार्थ प्रभु अरिहंत की भक्ति,,,
उनके वचनों का अनुसरण करना ,,
बस,, फिर मोक्ष दूर नही,,,

मन शुद्ध आस्था,,,, वही से मोक्ष का रास्ता,,,,,✍️✍️
णमो अरिहंताणं,,,,,🙏🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

*सिमरन करना है, तो डटकर चल,*           *थोड़ा दुनियां से हटकर चल,**दिखावे पर तो सभी चल लेते है,*      *कभी इतिहास को पलटक...
05/10/2024

*सिमरन करना है, तो डटकर चल,*
*थोड़ा दुनियां से हटकर चल,*
*दिखावे पर तो सभी चल लेते है,*
*कभी इतिहास को पलटकर चल,*
*बिना सिमरन के मुकाम कैसा ?*
*बिना मेहनत के, दाम कैसा ?*
*जब तक ना हाँसिल हो मंज़िल*
*तो राह में, राही आराम कैसा ?*
*अर्जुन सा, निशाना रख, मन में,*
*ना कोई बहाना रख !*
*लक्ष्य आत्मा का अरिहंत परमात्मा से मिलाने का* *सामने है, बस उसी पे अपना ठिकाना रख !!*
*सोच मत, साकार कर,*
*अपने कर्मो से प्यार कर !*
*मिलेगा तेरी मेहनत का फल,*
*किसी ओर का ना इंतज़ार कर !!*
*जो चले थे अकेले उनके पीछे* *आज सचखंड के मेले है |*
*जो करते रहे आलस्य उनकी जिंदगी में आज भी झमेले है*

णमो अरिहंताणं🙏 🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

मेरे सोहणे आदिनाथ दादा🙏🏻दादा आप के रूप काकैसे बखान करूँ,,,,,💕🤔उपमानों का अभावमेरे शब्दकोश मेंतेरे रूप की तुलनाक्या करूँ ...
05/10/2024

मेरे सोहणे आदिनाथ दादा🙏🏻
दादा आप के रूप का
कैसे बखान करूँ,,,,,💕🤔
उपमानों का अभाव
मेरे शब्दकोश में
तेरे रूप की तुलना
क्या करूँ किसी से
हर शब्द ही अधूरा सा
इस जगत के परिवेश में
नयनों से बरसती जो करुणा दादा,,,.✍🏻
प्यारी आँखों को तेरी
गजल लिखूं या
भक्ति के भरे मेघ लिखूं
जिनके दीदार से दीवानी
दुनिया हो जाती है आदिनाथ..✍🏻
आप की छवि पर क्या लिखूं
या सागर की गहराई नयनों में,,,,
जिसके जादू से तेरे होजाते हम है
बेकरारी देख होजाति है तुझको दादा...✍🏻
मुखड़े को तेरे चन्दा लिखूं
या उगते सूरज की लिखूं छटा
जिसे देखने को है हर शे जमाने की
तरस जाती है मेरे आदिनाथ दादा...✍🏻
चरणों को तेरे पद पंकज लिखूं
या आनन्द का सागर लिखूं
जिसकी रज मस्तक पे लगाने को
तेरे दर पे आती दुनिया मेरे दादा...✍🏻
शत्रुंजय मंडन कहू या मोरादेवी नन्द
तारनहारा नाथ कहू या दीनदयालु
नाभिराया कहू या केशरियानाथ कहू दादा
सादगी का सार कहू या मुक्क्ति दरवाजा
बोल बोल आदेश्वर तुझ् पर अब क्या लिखूं मेरे दादा,,,✍️
णमो अरिहंताणं🙏🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

दौड़ रहे बस,,,वह कमाने जो हमारा है ही, नहीं ,,,इस कमाने के चक्कर ना जाने पाप पाल बैठते है,,पर इन पाप कर्मो के भोगीसिर्फ ह...
04/10/2024

दौड़ रहे बस,,,वह कमाने जो हमारा है ही, नहीं ,,,इस कमाने के चक्कर ना जाने पाप पाल बैठते है,,पर इन पाप कर्मो के भोगी
सिर्फ हम,,,ओर सांसारिक कमाई के भोगी मोह से जुड़े सम्भन्ध,,,🙂
कितना अजीब है ना,,,,🤔🤔
कल चले जायेंगे,,तब अगले जन्म में ये याद भी नही रहेगा कौनसा परिवार था हमारा जिनके मोह में पाप कर्म बांधे,,
आज वही आपकी कमाई पूंजी से कर्म या धर्म कुछ भी करे आप को कोई बोनस नही मिलेगा,,,🙁🙁
फिर से कर्मो का सिलसिला चालू हो जाएगा,,,
इसलिए रोज कुछ राशि जीवदया,,देव द्रव्य,ओर वेयावच्च
ओर सात क्षेत्र हेतु निकाले क्यो की हमारे द्वारा किया दान ही गिनायेगा,,,हमारे बाद कोई कुछ भी करे हमको कोई फल नही मिलेगा,,,
जीवन स्वयं का है,,ओर बड़ी मुश्किल से मानव भव मिला
ओर समझदारी की खुद हेतु कुछ पुण्य रोज करे
ज्यादा नही तो
रोज एक मुट्ठी अनाज ही पक्षियों को दे
एक रुपया ही देव द्रव्य या जीव दया हेतु निकाले ओर1 माह बाद उसको मन्दिर या जीवदया क्षेत्र में देदे,,
कभी मन्दिर जाकर स्वयं ही काजा साफ करें,, इससे आप के पाप भी क्षय होंगे,,,
एक रोटी पहले अपनी थाली से गाय को देने का नियम ले,,
थाली धोकर पिये,,
ओर जिनमंदिर रोज जाये दर्शन,,पूजन हेतु
रोज भोजन के पूर्व एक शुद्ध विचार करे कि आज सभी जीवों ओर हमारे गुरुभगवंतो को शुद्ध गोचरी मिले,,,
रोज णमो अरिहंताणं का ही जप दुकान जाते या घर का कार्य करते गिनते रहे,,इससे कर्म क्षय होजाते है और पुण्य प्रबल होजाते है,,
मन्दिर में उपयोगी सामग्री का दान देते रहे,,ओर पुण्यकमाई करते रहे,,,
एक बह्मचारी साधुभगवंत के दर्शन का नियम ले उससे 30 मासखमन के तप का फल एक दिन में मिलता है यह आप मोबाइल से भी कर सकते है नियम पक्का हो बस एक दिन भी चूक ना करे,,,
बच्चो की पाठशाला में कभी भी पेंसिल,कॉपी,,मुपत्ति,बेटके का दान दे यह आप के ज्ञानावरणीय कर्म को क्षय करदेगा,,
ओर ऐसी ही post हेतु समय निकाल कर अरिहंत गीतांजलि
में आये और धर्मउपार्जन का हम को भी मोक्का दे,,,
क्या पता,,, कैसे जीवन बदल जाये,,,कौनसा पुण्य उदय होजाये आप का,,, यह पोस्ट सभी को शेयर करे
ओर पुनयूपार्जन करे🙏🙏🙏

आप को हमारे ग्रुप में कैसा लगता है जरूर बताएं
हमको प्रोत्साहन मिलता है कुछ और अच्छा लिखने का,,🙏🙏🙏🙏🥰🥰
णमो अरिहंताणं🙏🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

फैसला आप का,,,,,श्रद्धा या श्राद्ध🤔🤔🤔🔥 *आज पितरों का संदेश* 🌹मुझे कौवा बनकर तुम्हारी छत पर खीर पूरी खाने नहीं आना है।और ...
02/10/2024

फैसला आप का,,,,,श्रद्धा या श्राद्ध🤔🤔🤔

🔥 *आज पितरों का संदेश*

🌹मुझे कौवा बनकर तुम्हारी छत पर खीर पूरी खाने नहीं आना है।
और ना ही कुत्ता और गाय बनकर बनकर तुम्हारे दरवाजे पर तकने आऊंगा ।।
🌹मैं तो आऊंगा तुम्हारी दो सांसों के बीच तुम्हारे अंतर्तम में साक्षी बनकर.....।।
🌹मैं तो आऊंगा तुम्हारे पूजा स्थान में दीपक की ज्योति बनकर..।
🌹तुम जब किसी मुश्किल में होगे, जीवन का कोई प्रश्न होगा, अपनी नाभि पर हाथ रखकर मुझे याद करना मैं तुरंत उसका उत्तर भेजूंगा।
🌹मैं तो आऊंगा मुश्किलों में हिम्मत बनकर और संकट के समय धैर्य बनकर..., मुझे याद करना ।।
🌹किसी प्रकार की शारीरिक समस्या हो तो मुझे याद करना मैं आऊंगा औषधि बनकर
🌹 किसी प्रकार की मानसिक समस्या हो तो मुझे याद करना मैं आऊंगा प्रगाढ़ निद्रा बनकर..।।
🌹 आर्थिक समस्या होने पर हृदय से मुझे याद करना, महालक्ष्मी को लेकर तुम्हारे द्वार पर आऊंगा...।
🌹 बस मुझे याद कर लेना अपने हृदय पर हाथ रखकर.. मुझे बुला लेना मैं कहां दूर हूं..
🌹 तुम्हारी छत पर मुझे कौवा बनकर नहीं आना है... मुझे सिर्फ श्राद्ध पक्ष में ही नहीं आना है... मेरा स्थान अपने हृदय में जान अपने पूर्ण स्वरूप में मेरे डीएनए को नए अर्थ में जानना...
🌹 घर के बड़ो के प्रति प्रीति शुरुआत से रखो तो श्राद्ध की नोबत नही आएगी,,,श्रद्धा से याद करो उनके पद चिन्हों का अनुशरण करो यही विपत्ति में साथ देगा,,क्यो की आशीर्वाद में बहुत ताकत होती है,,,✍️✍️✍️
णमो अरिहंताणं🙏🥰🙏
जप करते रहे ताकि हमारी आने बाली पीढ़ी को हम पर श्रद्धा हो कि कैसे भव सुधारे,,,वरना श्राद्ध से नाता जुड़ेगा
अब श्रद्धा या श्राद्ध फैसला आप का,,,,,
णमो अरिहंताणं🙏🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

Bapji Maharaj Mantra Anusthan on 29th September - Event Registration Link
26/09/2024

Bapji Maharaj Mantra Anusthan on 29th September - Event Registration Link

“जस नामे सिद्धि”भाग – ३७🙏🙏"जिनके नाम में सिद्धि, काम में सिद्धि जो सिद्धि के भंडार हैं, जिनके दर्शन मात्र से सिद्धि मिले...
26/09/2024

“जस नामे सिद्धि”
भाग – ३७
🙏🙏"जिनके नाम में सिद्धि, काम में सिद्धि जो सिद्धि के भंडार हैं, जिनके दर्शन मात्र से सिद्धि मिले, सिद्धि सुरिश्वर नाम हैं, जिनके वचन में सिद्धि, स्मरण में सिद्धि, जिनकी शरण में जाने मात्र से ही पाप निकंद हो जाते हैं, ऐसे सिद्धिदायक गुरु श्री सिद्धिसुरिश्वर जी को में भावे करूँ वंदना" 🙏🙏

पूज्य श्री विजय सिद्धिसुरिश्वर जी बापजी महाराज का अंतिम चातुर्मास ...

रक्षाबंधन के पावन दिवस विक्रम सं. १९११ श्रावण सुद्दी पूर्णिमा से विक्रम सं. २०१५ की श्रावण सुद्दी पूर्णिमा को पूज्य श्री बापजी ने जीवन के १०४ वर्ष पूर्ण किये और जीवन के १०५ वें वर्ष में प्रवेश किया । १०४ वर्ष के जीवन में लगभग ८२ वर्ष का दीक्षा पर्याय रहा । पूज्य श्री के ८२ वर्ष के दीर्घ संयम पर्याय में संवत २०१५ में आज से तकरीबन ६३ वर्ष पूर्व याने १९५९ का साल में पूज्य श्री का अंतिम चातुर्मास राजनगर में था । Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

पूज्य श्री ने अपने जीवन काल में करीब करीब १००० से ज्यादा साधू भगवंतों को दीक्षा प्रदान की थी । जब पूज्य श्री का अंतिम चातुर्मास राजनगर के दोशीवाडा की पोल स्थित विध्याशाला में था, उस समय करीब १२०० से ज्यादा साधू भगवंत राजनगर में विद्यमान थे ।

पूज्य श्री ने अपने चातुर्मास में १२०० से ज्यादा साधू भगवंतो को उस समय नवकार तप की आराधना से जोड़ा था । ३०० से ज्यादा लोगों को रोज नवकार की सतत साधना से जोड़ा । और १.२५ करोड़ के अरिहंत पद के जाप का अनुष्ठान करवाया था । ये अनुष्ठान अपने अंतिम चातुर्मास में पूज्य श्री ने करवाया था ।

पूज्य बापजी ने अपने जीवन के १०५ वर्ष में जितने भी चातुर्मास किये हर चातुर्मास में पर्युषण के समय पूज्य श्री छठ अठ्म की तपस्या अवश्य करते थे । और ये छट्ठ अट्ठम पूज्य श्री हमेशा पर्युषण के ८ दिवस के भीतर ही करते थे ।

अंतिम चातुर्मास जब राजनगर में था उस समय पूज्य श्री ने ये तप पर्युषण के पहले ही कर लिए थे जबकि पूज्य श्री वर्षीतप की तपस्या यथावत चल रही थी । पर्युषण का पर्व आया और पूज्य श्री इस बार पहले ही छट्ठ अठ्म की तपस्या कर चुके थे । पर्युषण के समय पूज्य श्री ने १-२-३ उपवास किये और प्रभु के जन्मवाचन के दिन स्वयं के मुख से जन्म वाचन विवेचना पूर्वक किया ।

इसी के साथ पूज्य श्री ने सम्पूर्ण बारसा सूत्र का भी श्रवण वाचन किया करीब २ से २.५ घंटे । बारसा सूत्र में ५ प्रभु के सम्पूर्ण जीवन चरित्र का वर्णन हे । इसका एक एक अक्षर मन्त्र स्वरूप होता हे । जिसे स्वयं पूज्य श्री भद्रबाहु स्वामी जी ने रचा था । इस बारसा सूत्र को साधु साध्वी भगवंत द्वारा ही पढ़ा जाता हे ।

संवत्सरी के दिवस सांयकाल में करीब १५०० आराधकों और साधु भगवंतो के साथ करीब ३ से ३.३० घंटों का प्रतिकमण बड़े ही स्वस्थता पूर्वक पूज्य श्री ने किया । १०५ वे वर्ष में शारीरिक अवस्था शायद किसी का साथ न दे और दे तो भी शायद प्रतिक्रमण में प्रायश्चित का भाव न हो न हो। लेकिन पूज्य श्री ने साधु भगवंतो के साथ और श्री संघ के साथ संवत्सरी का वार्षिक प्रतिक्रमण पूर्ण किया और प्रायश्चित किया ।

और विद्याशाला में इस चातुर्मास में वर्षीतप की आराधना तपस्या करते हुए पूज्य श्री ने भादवा वदी १४ याने चौमासी चौदस गुरुवार के दिन, चौविहार उपवास का पच्चखान किया, पूर्व रात्रि में करीब ११.३० बजे सभी साधु भगवंतो के साथ स्वस्थता पूर्वक बातचीत करते हुए सभी को वासक्षेप किया । और पूज्य श्री ने करीब १.२५ घंटे की योग निद्रा ली । और विक्रम सं. २०१५ की भादवा वदी १४ को दोपहर करीब १ बजे पूज्य श्री ने इस संसार को अपनी देह को बिना किसी पीड़ा के, सम्पूर्ण जागृत अवस्था में त्याग दिया ।

जैसे एक युग का अंत हुआ । एक प्रकार से सम्पूर्ण युग जिसमे युग पुरुष पूज्य श्री विजय सिद्धि सुरिश्वर जी पूज्य बाप जी महाराज सा ने अपने जीवन में १०५ वें वर्ष में इस नश्वर देह को त्याग दिया । जिसने सुना स्तब्ध था क्या जैन क्या अजैन जो भी पूज्य बापजी को जानता था हर एक के लिए एक अपूर्णीय क्षति थी । ऐसी क्षति जिसे शायद कोई पूरा न कर पाए ।

जय जय नंदा जय जय भद्दा.........🙏🙏🙏🙏

नोट:- 29 Sep 2024 को पूज्य बापजी दादा की 65 वी पुण्य तिथि है।

🙏 जिन आज्ञा विरुद्ध कुछ भी लिखा या गलत हो तो मिच्छामी दुक्क्डम 🙏

हर प्रभात शुरुआत है,,,,हर रात अंत यही जीवन है,,,कल कभी आता नही,,जो करे सो आज कर ।।जीवन जिसको जीना आगया उसको हर पल खुश रह...
23/09/2024

हर प्रभात शुरुआत है,,,,
हर रात अंत यही जीवन है,,,
कल कभी आता नही,,
जो करे सो आज कर ।।

जीवन जिसको जीना आगया उसको हर पल खुश रहना
अभाव और प्रभाव में आगया,,, ऐसे मनुष्य विरले ही होते है
क्यो की ऐसे मनुष्य उच्च कोटि के संत ही होते है
फिर वे अरिहंत कहे या राम और श्याम

भक्ति हमेशा समर्पण मांगती है,,अपने इष्ट से प्रित मांगती है
भक्ति ऐसी शुद्ध हो जिसमें भक्त को भगवान का प्रतिबिंब सदा मन के भीतर दिखे,,ओर लब पर नाम रूपी धुन प्रभु की रहे
हर स्वरूप में प्रभु दर्शन हो चाहे दुख हो या सुख भक्ति की मस्ती में मन इतना खोये की कब सुख आया कब दुख पता ही नही चले,,,,🦚🦚
मन के भीतर सावन की फुआर रूपी प्रभु भक्ति बरसती रहे
श्री आचार्य माँगतुंगाचार्य जी की भक्ति ऐसी ही थी
48 तालों का कोई भार नही प्रभाव जरूर था सिर्फ आदिनाथ दादा की भक्ति का,,अंधकार रूपी काल कोठरी में दीपक जला
आदेश्वरम नाम का,,फिर अंधकार कैसे रहेगा अभिमान भरे
संसार का,,,आज भी भक्ति मन्त्र बनकर समूचे विश्व का अंधकार दूर कर रही है,,ऐसा प्रभाव शुद्ध भक्ति का ही होता है,
णमो अरिहंताणं🙏🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

आज-कल याद कुछ रहता नहींएक तुझ् से प्रभु नयन,, मिलने के बाद,,,,,मेरे भावों में बस एक मूरत तेरी,,ओर याद नही कुछ तुझसे  मिल...
21/09/2024

आज-कल याद कुछ रहता नहीं
एक तुझ् से प्रभु नयन,, मिलने के बाद,,,,,
मेरे भावों में बस एक मूरत तेरी,,
ओर याद नही कुछ तुझसे मिलने के बाद,,,,

प्रभु अरिहंत से नयन जब मिलते है,,,तब संसार का मोह भरा अंधकार खो जाता है ऐसे जैसे धुंध में हमको हमारा ही साया नही दिखता है,,,✍️✍️
जब,,,प्रित में प्रेम मिलजाए तब भक्ति निखर जाती है
ऐसे ही भक्तामर नही बनते भक्त को अमर करदे ऐसे जिनराज है हमारे,,,✍️✍️✍️
भक्ति का रंग जब चढ़ता है तब शिवलिंग से भी प्रभु प्रकट होकर भक्तों की लाज रख लेते है ऐसे है जिनराज हमारे
भक्तों के पक्के विश्वास को मुझे उगाकर भी प्रमाणित कर देते है ऐसे है मेरे जिनराज,,,,,
किस्से बहुत है भक्ति की शक्ति के पर विश्वास कितना हमारा जिनराज पर,,,,,✍️✍️
णमो अरिहंताणं🙏🥰🙏
Tina nahar✍️✍️✍️
Arihant Gitanjali (अरिहंत गीतांजलि)

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