22/04/2023
'सैंकड़ों वर्ष पुराने गंगेश्वरस्थान शिवालय का अस्तित्व संकट में.......।'
दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के रतनपुर पंचायत स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक गंगेश्वरस्थान शिवालय से संबंधित खबरों को जानकर लाखों शिवभक्तों के पैर तले की जमीन खिसक जाएगी। जिस शिवालय को इलाके के लाखों लोग सदियों से इसे सार्वजनिक शिवालय मानते चले आ रहे हैं, उन्हें यह जानकर उनकी भावनाएं काफी आहत होंगी कि वहां के पंडा-पुजारियों ने इसे अपनी निजी संपत्ति बताया है। पंडा-पुजारियों ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड, पटना को लिखित बताया है कि यह बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद क्षेत्र से पड़े है, क्योंकि बाबा गंगेश्वरनाथ उनका निजी मंदिर है। मंदिर उनके पूर्वजों ने बनवाया, 'शिवगंगा' तालाब भी उनके पूर्वजों ने खुदवाया और पूर्वजों ने हीं पेड़-पौधे लगवाए थे। जमीन का सभी दस्तावेज उनके पक्ष का है। यह सार्वजनिक शिवालय नहीं है। पंडा-पुजारियों का कहना है कि विभिन्न धार्मिक अवसरों पर इलाके के लोग उनके निजी मंदिर में जलाभिषेक एवं पूजा करने आते हैं। तालाब, मंदिर, धर्मशाला, बाग-बागीचा सबकुछ उनकी निजी संपत्ति है। इधर, कछुआ पंचायत के प्रसादी टोला गांव निवासी अजीत कुमार मिश्र का दावा है कि बाबा गंगेश्वरनाथ शिवालय, अति प्राचीन है, जो लाखों शिवभक्तों के आस्था का केंद्र है। लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व उनके पूर्वज परम प्रतापी दानवीर स्व. पशुपतिनाथ मिश्र ने गंगेश्वरनाथ मंदिर, धर्मशाला, तालाब, बाग-बगीचे एवं भोग-राग के लिए जमीन दान किया था। इलाके के लोग जानते हैं कि वर्तमान में मंदिर का जो ढांचा खड़ा है, उसे लखनपुर गांव निवासी परम प्रतापी स्व. डोमन ठाकुर के नेतृत्व में इलाके के लोगों ने बनवाया था। वर्तमान पार्वती मंदिर रतनपुर पंचायत के पूर्व मुखिया स्व. मोहन सिंह के नेतृत्व में इलाके के ग्रामीणों ने बनवाया था। मंदिर परिसर में पड़े कर्नाट शैली के भूरे रंग के कई पत्थर, अनेकों प्राचीन मूर्तियां इस बात की गवाही देती है कि इस मंदिर का अतीत से कितना प्राचीन संबध है। गौरतलब है कि इस शिवालय की ऐतिहासिकता एवं लाखों लोगों के आस्था के केंद्र को देखते हुए बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड, पटना ने शिवालय को पिछले वर्ष निबंधित करते हुए अधिकृत कर लिया है। पंडा-पुजारियों के दावे के बाद इलाके के लाखों लोगों में खलबली मच गई है।
विजय पत्रकार -