21/09/2024
माननीय मुख्य मंत्री महोदय , योगी आदित्यनाथ ने प्रयाग राज ज़िले की घोषणा की है। लद्दाख मे भी केंद्र सरकार ने पांच जिलो की घोषणा कर दी परंतु उत्तराखंड मे गृहण लग गया है । 2022 में आपने 7 ज़िलों के निर्माण की प्रतिबद्धता की घोषणा की थी। इससे पहले ठीक 11 साल पहले 2011 में वर्तमान केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने 15 अगस्त को 2011 को 4 ज़िलों की घोषणा की थी ! अफ़सोच है दोनों ही घोषणा, केवल घोषणा बन कर ही रह गई। निवेदन एवं प्रार्थना है की अब आपकी अपनी घोषणा के अनुसार ज़िलों के निर्माण हेतु आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें l इस सम्बन्ध में निम्न बिंदु भी विचारणीय है।
2)उत्तराँचल सृजन के समय कुल तहसील 78 थीं ! आज तहसील 128 हो चुकी हैं अर्थात 50 तहसीलों की बढ़ोत्तरी हुई है ! परंतु जिले उत्तराँखण्ड सृजन के समय 13 थे जिसमें कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई, आज भी जिले मात्र 13 ही हैं !
3)तर्क है कि सरकार के पास जिलों के निर्माण हेतु धन उपलब्ध नहीं है ! विशेष राज्य का दर्जा पाने वाले राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा दी गई राशि में 90% अनुदान और 10% रकम बिना ब्याज के कर्ज के तौर पर मिलती है फिर भी महोदय इस विषय में जिले घोषित करते समय सरकार द्वारा विचार किया जा चुका है ! कहा जाता जिलों के निर्माण मैं 1000 करोड़ रुपये खर्च होंगे ! मोटे तौर पर यह तथ्य सही हो सकता है, परन्तु महोदय यह रकम तो लगभग 10-20 साल मैं खर्च होगी, क्योंकि जिला निर्माण एक सतत एवं लम्बी प्रक्रिया है ! सन 1815 मैं स्थापित अल्मोड़ा जैसे पुराने जिले को अब जाकर 206 साल बाद उसका विकास भवन उपलब्ध हुआ है ! जिला निर्माण होने पर कई कार्यालय सरकारी भवनों में ही कार्यरत हो जायेंगे परन्तु कुछ कार्यालय किराए के भवनों में स्थापित होंगे ! नए निर्माण के लिए सरकारी भूमि का ट्रान्सफर या भूमि को क्रय करना होगा ! नव निर्माण हेतु भूमि क्रय व नक्शा आदि बनाने, आर्किटेक्ट रिपोर्ट में कई साल लगेंगे ! उस समय ही बड़ी रकम की जरूरत होगी !
4)रानीखेत जिला तो मात्र 2-3 करोड़ से भी कम में स्थापित किया जा सकेगा, क्योंकि रानीखेत में पहले से ही ज़िले के विभिन्न कार्यालय व अवस्थापना आदि मौजूद है ! केवल जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति से काम चल जाएगा !
आपके संज्ञान में यह भी लाना चाहता हूँ कि जब 2011 मैं जिले घोषित किये गए थे, तो आनन फ़ानन में 10-11 बैंक रानीखेत में स्थापित किये गए, जो कि सरकार की आय को आज भी बढ़ोत्तरी कर रहे हैं ! जिले निर्माण से कई प्राइवेट संस्थाएं भी जिला मुख्यालय आती है, जिससे सरकार की आय बढ़ती है !
5)रानीखेत तहसील के अंतर्गत 6 बड़े ब्लाक हुवा करते थे ! आज अब केवल एक ब्लाक है ! रानीखेत के अंतर्गत समस्त ब्लाक में तहसील स्थापित हो चुकी हैं ! इस समय एक तहसील के अंतर्गत एक या 2 ब्लाक हैं ! यही कहानी अन्य तहसीलों की है ! एक तहसील के अंतर्गत केवल एक ब्लाक हो यह बात छोटे राज्यों की धारणा के बिपरीत है ! इससे उत्तराखंड का ढांचा ही अस्त-व्यस्त हो चुका है ! इसी कारण रानीखेत की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है ! रानीखेत की जन संख्या भी कम हुई है, पलायन लगातार जारी है ! केवल रानीखेत को जिला बनाए जाने पर ही इस शहर को बचाया जा सकता है !
6)उत्तराखंड 9 नवम्बर 2000 को अलग राज्य बना वही छत्तीसगढ़ 1 नवम्बर 2000 को बना। प्रारंभ में छत्तीसगढ़ में 16 जिले थे फ़िर 11 मई 2007 को दो नए जिले बने उसके बाद 15 अगस्त 2011 को 9 नए जिलों की घोषणा हुई और 1 जनवरी 2012 को 9 नए बने ! इसी के साथ 15 अगस्त को हम उत्तराखंड में जिले के लिए चिल्लाते रहे l छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 4 और नए जिलो के साथ वहाँ जिलो की संख्या 36 हो चुकी है परंतु हमारा उत्तराखंड में 13 ही जिलो में अटका पड़ा है l
इन चारों जिलों को पुनर्जीवित करने हेतु अभियान रानीखेत जिला नाम से सोसियल मीडिया अभियान 25 सितम्बर, 2014 को प्रारंभ किया गया ! अभियान जिला रानीखेत, उत्तराखंड में सोसियल मीडिया का पहला सबसे लम्बे समय से (3,462) दिन से ) चल रहा अभिनव अभियान है ! इस अभियान को अब 9 साल से भी अधिक समय हो चुका है !
इसके अंतर्गत आमरण अनसन हेतु तत्पर जिला आन्दोलनकारियों के 163 वीडियो सन्देश मिले हैं !
17 महिलाओं ने जिन्होंने आमरण अनसन की सहमति वीडियो सन्देश के माध्यम से दी है ! अभी तक हमें 3.8 K लाइक्स मिल चुके हैं इस अभियान से जुड़े कुल फोलोवर्स की संख्या 3.8 K हो चुकी है ! यह संख्या प्रतिदिन बढ़ती रहती है !
2019 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 2011 में घोषित चार जिलों – रानीखेत, डीडीहाट, कोटद्वार, यमुनोत्री के जिले प्रेमी लोगों ने देहरादून मैं एक संयुक्त सभा की ! इस सभा मैं “भाजपा द्वारा घोषित चार जिलो की संयुक्त संघर्ष समिति” की स्थापना की गई, जिसमें अब्बल चंद कुमयाँ को अध्यक्ष चुना गया तथा डीएन बड़ोला को मुख्य संरक्षक नियुक्त किया गया ! 14 नवम्बर, 2019 को जन चेतना अभियान के अंतर्गत यह यात्रा रानीखेत पहुँची ! चारों जिलों में जन जागरण यात्रा के सदस्य मुख्य मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिले, जिन्होंने 2019 के अंत तक जिलों की घोषणा की बात कही ! पर पूर्व घोषणाओं की तरह यह घोषणा भी निरर्थक निकली ! उचित समय है जब इनके लिए अधिसूचना जारी कर इनको अस्तित्व में लाया जाय ! सरकार द्वारा पहले ही इस सम्बन्ध मैं शासनादेश जारी किया जा चुका है !
डीएन बड़ोला, मुख्य संरक्षक, भाजपा घोषित चार जिलों की संयुक्त संघर्ष समिति मोबाइल – 9412909980