कुमाऊ में चार धाम मान्यता हेतु सोसियल मीडिया अभियान

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जीएस  माहरा राजकीय अस्पताल में स्थित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल उचित स्थान मिलेगा – ज़िलाधिकारी                         ...
28/10/2024

जीएस माहरा राजकीय अस्पताल में स्थित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल उचित स्थान मिलेगा – ज़िलाधिकारी रानीखेत की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारीं आलोक कुमार पांडे द्वारा होम्योपैथिक अस्पताल के विषय में भी चर्चा हुईं। इस विषय को मैंने मुख्य मंत्री पोर्टल में भी उठाया था। विकास समिति, रानीखेत के सदस्य कैलाश पांडे ने बतलाया कि जिलाधिकारी ने कहा कि शीघ्र ही होम्योपैथिक अस्पताल के लिए उचित स्थान देने का प्रयास किया जाएगा जिससे की ख़ास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों को तकलीफ़ न हो। इस बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट आनंद वर्धन के अतिरिक्त अनेक अधिकारी उपस्थित थे।

08/10/2024
06/10/2024

सड़क मार्ग अपडेट- बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक यातायात हेतु सुचारु है।

दिनांक- 30 सितंबर 2024

➡️राष्ट्रीय राजमार्ग 07 कमेड़ा गौचर-कर्णप्रयाग-चमोली-जोशीमठ-बद्रीनाथ मोटर मार्ग यातायात हेतु सामान्य सुचारू है।

➡️राष्ट्रीय राजमार्ग चमोली- गोपेश्वर- मंडल चोपता मोटर मार्ग यातायात सामान्य सुचारु है

➡️राष्ट्रीय राजमार्ग कर्णप्रयाग-गैरसैंण-पाण्डुवाखाल मोटर मार्ग यातायात हेतु सामान्य सुचारू हैं।

➡️राष्ट्रीय राजमार्ग जोशीमठ-मलारी-नीति मोटर मार्ग यातायात हेतु सामान्य सुचारू हैं।

➡️राष्ट्रीय राजमार्ग सिमली-थराली-ग्वालदम मोटर मार्ग यातायात हेतु सामान्य सुचारू हैं।

21/09/2024

माननीय मुख्य मंत्री महोदय , योगी आदित्यनाथ ने प्रयाग राज ज़िले की घोषणा की है। लद्दाख मे भी केंद्र सरकार ने पांच जिलो की घोषणा कर दी परंतु उत्तराखंड मे गृहण लग गया है । 2022 में आपने 7 ज़िलों के निर्माण की प्रतिबद्धता की घोषणा की थी। इससे पहले ठीक 11 साल पहले 2011 में वर्तमान केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने 15 अगस्त को 2011 को 4 ज़िलों की घोषणा की थी ! अफ़सोच है दोनों ही घोषणा, केवल घोषणा बन कर ही रह गई। निवेदन एवं प्रार्थना है की अब आपकी अपनी घोषणा के अनुसार ज़िलों के निर्माण हेतु आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें l इस सम्बन्ध में निम्न बिंदु भी विचारणीय है।
2)उत्तराँचल सृजन के समय कुल तहसील 78 थीं ! आज तहसील 128 हो चुकी हैं अर्थात 50 तहसीलों की बढ़ोत्तरी हुई है ! परंतु जिले उत्तराँखण्ड सृजन के समय 13 थे जिसमें कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई, आज भी जिले मात्र 13 ही हैं !
3)तर्क है कि सरकार के पास जिलों के निर्माण हेतु धन उपलब्ध नहीं है ! विशेष राज्य का दर्जा पाने वाले राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा दी गई राशि में 90% अनुदान और 10% रकम बिना ब्याज के कर्ज के तौर पर मिलती है फिर भी महोदय इस विषय में जिले घोषित करते समय सरकार द्वारा विचार किया जा चुका है ! कहा जाता जिलों के निर्माण मैं 1000 करोड़ रुपये खर्च होंगे ! मोटे तौर पर यह तथ्य सही हो सकता है, परन्तु महोदय यह रकम तो लगभग 10-20 साल मैं खर्च होगी, क्योंकि जिला निर्माण एक सतत एवं लम्बी प्रक्रिया है ! सन 1815 मैं स्थापित अल्मोड़ा जैसे पुराने जिले को अब जाकर 206 साल बाद उसका विकास भवन उपलब्ध हुआ है ! जिला निर्माण होने पर कई कार्यालय सरकारी भवनों में ही कार्यरत हो जायेंगे परन्तु कुछ कार्यालय किराए के भवनों में स्थापित होंगे ! नए निर्माण के लिए सरकारी भूमि का ट्रान्सफर या भूमि को क्रय करना होगा ! नव निर्माण हेतु भूमि क्रय व नक्शा आदि बनाने, आर्किटेक्ट रिपोर्ट में कई साल लगेंगे ! उस समय ही बड़ी रकम की जरूरत होगी !
4)रानीखेत जिला तो मात्र 2-3 करोड़ से भी कम में स्थापित किया जा सकेगा, क्योंकि रानीखेत में पहले से ही ज़िले के विभिन्न कार्यालय व अवस्थापना आदि मौजूद है ! केवल जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति से काम चल जाएगा !
आपके संज्ञान में यह भी लाना चाहता हूँ कि जब 2011 मैं जिले घोषित किये गए थे, तो आनन फ़ानन में 10-11 बैंक रानीखेत में स्थापित किये गए, जो कि सरकार की आय को आज भी बढ़ोत्तरी कर रहे हैं ! जिले निर्माण से कई प्राइवेट संस्थाएं भी जिला मुख्यालय आती है, जिससे सरकार की आय बढ़ती है !
5)रानीखेत तहसील के अंतर्गत 6 बड़े ब्लाक हुवा करते थे ! आज अब केवल एक ब्लाक है ! रानीखेत के अंतर्गत समस्त ब्लाक में तहसील स्थापित हो चुकी हैं ! इस समय एक तहसील के अंतर्गत एक या 2 ब्लाक हैं ! यही कहानी अन्य तहसीलों की है ! एक तहसील के अंतर्गत केवल एक ब्लाक हो यह बात छोटे राज्यों की धारणा के बिपरीत है ! इससे उत्तराखंड का ढांचा ही अस्त-व्यस्त हो चुका है ! इसी कारण रानीखेत की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है ! रानीखेत की जन संख्या भी कम हुई है, पलायन लगातार जारी है ! केवल रानीखेत को जिला बनाए जाने पर ही इस शहर को बचाया जा सकता है !
6)उत्तराखंड 9 नवम्बर 2000 को अलग राज्य बना वही छत्तीसगढ़ 1 नवम्बर 2000 को बना। प्रारंभ में छत्तीसगढ़ में 16 जिले थे फ़िर 11 मई 2007 को दो नए जिले बने उसके बाद 15 अगस्त 2011 को 9 नए जिलों की घोषणा हुई और 1 जनवरी 2012 को 9 नए बने ! इसी के साथ 15 अगस्त को हम उत्तराखंड में जिले के लिए चिल्लाते रहे l छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 4 और नए जिलो के साथ वहाँ जिलो की संख्या 36 हो चुकी है परंतु हमारा उत्तराखंड में 13 ही जिलो में अटका पड़ा है l
इन चारों जिलों को पुनर्जीवित करने हेतु अभियान रानीखेत जिला नाम से सोसियल मीडिया अभियान 25 सितम्बर, 2014 को प्रारंभ किया गया ! अभियान जिला रानीखेत, उत्तराखंड में सोसियल मीडिया का पहला सबसे लम्बे समय से (3,462) दिन से ) चल रहा अभिनव अभियान है ! इस अभियान को अब 9 साल से भी अधिक समय हो चुका है !
इसके अंतर्गत आमरण अनसन हेतु तत्पर जिला आन्दोलनकारियों के 163 वीडियो सन्देश मिले हैं !
17 महिलाओं ने जिन्होंने आमरण अनसन की सहमति वीडियो सन्देश के माध्यम से दी है ! अभी तक हमें 3.8 K लाइक्स मिल चुके हैं इस अभियान से जुड़े कुल फोलोवर्स की संख्या 3.8 K हो चुकी है ! यह संख्या प्रतिदिन बढ़ती रहती है !
2019 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 2011 में घोषित चार जिलों – रानीखेत, डीडीहाट, कोटद्वार, यमुनोत्री के जिले प्रेमी लोगों ने देहरादून मैं एक संयुक्त सभा की ! इस सभा मैं “भाजपा द्वारा घोषित चार जिलो की संयुक्त संघर्ष समिति” की स्थापना की गई, जिसमें अब्बल चंद कुमयाँ को अध्यक्ष चुना गया तथा डीएन बड़ोला को मुख्य संरक्षक नियुक्त किया गया ! 14 नवम्बर, 2019 को जन चेतना अभियान के अंतर्गत यह यात्रा रानीखेत पहुँची ! चारों जिलों में जन जागरण यात्रा के सदस्य मुख्य मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिले, जिन्होंने 2019 के अंत तक जिलों की घोषणा की बात कही ! पर पूर्व घोषणाओं की तरह यह घोषणा भी निरर्थक निकली ! उचित समय है जब इनके लिए अधिसूचना जारी कर इनको अस्तित्व में लाया जाय ! सरकार द्वारा पहले ही इस सम्बन्ध मैं शासनादेश जारी किया जा चुका है !
डीएन बड़ोला, मुख्य संरक्षक, भाजपा घोषित चार जिलों की संयुक्त संघर्ष समिति मोबाइल – 9412909980

जननायक माननीय हरीश रावत जी ! राहुल गांधी ने अमेरिका में देवता शब्द को परिभाषित किया है। वह हिंदू धर्म पर अपने विचार प्रक...
11/09/2024

जननायक माननीय हरीश रावत जी !
राहुल गांधी ने अमेरिका में देवता शब्द को परिभाषित किया है। वह हिंदू धर्म पर अपने विचार प्रकट करते रहते हैं। वह अभय मुद्रा के विषय में भी बतलाते हैं। प्रश्न है हमारे नेता हिंदू धर्म के विषय में बात करते हुए क्यों कतराते हैं, जबकि कांग्रेस में एक से बढ़कर एक हिंदू धर्म के प्रकांड विद्वान मौजूद हैं। हिंदू धर्म चार धामों की बहुत बड़ी मान्यता है। महोदय! अवसर है जब आप अपने जीवन का एक अद्वितीय लैंडमार्क स्थापित कर सकते हैं ! समय है जब कुमायूँ में भी चार धाम स्थापित होने चाहिए। यही एक मात्र रास्ता है जिससे कुमायूँ में धार्मिक पर्यटन को गढ़वाल की तर्ज़ पर बढ़ाया जा सकता है। इस संबंध में 22 सितंबर , 2022 से मेरे संयोजकत्व में “कुमाऊ में चार धाम मान्यता हेतु सोसियल मीडिया अभियान' चलाया जा रहा है। इस संबंध में हमें सफलता भी मिली है। प्रथम चरण में जागेश्वर धाम मंदिर, हाट कालिका मंदिर व पाताल भुवनेश्वर मंदिर को सरकार द्वारा मंदिर माला मिशन में शामिल कर लिया गया है। जागेश्वर धाम मंदिर को आप स्वयं भी पाँचवाँ धाम कह चुके है। कुमायूँ की जनता एवं शीर्ष राजनेताओं के मन में भी धाम स्थापित करने का संकल्प है इसमें संदेह नहीं है।
अतः आपसे निवेदन है कि इस संकल्प को पूरा करने हेतु अपना संदेश संयोजक “कुमाऊ में चार धाम मान्यता हेतु सोसियल मीडिया अभियान', बड़ोला कॉटेज, रानीखेत को देने की कृपा करें। यदि संभव हो तो अभियान के ‘संरक्षक’ का पद स्वीकार करने की महती कृपा करें। इस अभियान का पूर्ण विवरण निम्न प्रकार है :
केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने आदि कैलाश को पाँचवाँ धाम घोषित करने की बात की है । इससे पहले पूर्व गवर्नर डॉ केके पॉल ने कल्याणिका आश्रम डोल-कनरा को धाम घोषित किया था। इसी प्रकार वर्तमान मुख्य मंत्री पुष्कर धामी ने जागेश्वर धाम को पाँचवाँ धाम घोषित किया है। विभिन्न धार्मिक पुस्तकों के अध्ययन से हमें ज्ञात हुआ कि 8वीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने गढ़वाल में बद्रीनाथ मंदिर व केदार नाथ मंदिर एवं कुमायूं में जागेश्वर मंदिर, हाट कालिका मंदिर एवं पाताल भुवनेश्वर मंदिर की खोज की थी थी ! उन्होंने भारत के चार धामों – बद्रीनाथ धाम , द्वारका पुरी, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम धाम की स्थापना की ! 20वीं सदी में गढ़वाल में तीन और धाम - केदार नाथ धाम, गंगोत्री धाम एवं यमुनोत्री धाम की विधिवत स्थापना की गई l इस प्रकार बद्रीनाथ धाम समेत गढ़वाल में चार धाम बनाए गए ! इनको छोटा धाम की उपाधि दी गई थी। कालांतर में इनको धाम की मान्यता दे गई। सच तो यह है कि गढ़वाल के चार धामों की तर्ज़ पर कुमायूँ के भी चार धाम होने चाहिए। हम कुमायूँ के चार धाम हेतु सोसियाल मीडिया पर आन्दोलरत हैं । इस संबंध में हमें सफलता भी मिली है। सरकार ने जागेश्वर धाम, पाताल भुवनेश्वर एवं हाट कालिका मंदिर को मानस खंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत मान्यता भी स्वीकृत की है । कुमायूँ के चार धाम बारह मासी धाम होंगे । कुमायूँ में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु यह एक बड़ा कदम होगा । डीएन बड़ोला, संयोजक, कुमायूँ में चार धाम मान्यता हेतु सोसियल मीडिया अभियान, बड़ोला कॉटेज, रानीखेत । मोबाइल 9412909980 दिनांक : 11 सितंबर , 2024

हैलो रानीखेत! अमर उजाला की 24 पेज की रंगीन एवं खूबसूरत पुस्तिका प्राप्त कर मेरे अनेक प्रश्नों के उत्तर मुझे मिल गये ! इस...
09/09/2024

हैलो रानीखेत! अमर उजाला की 24 पेज की रंगीन एवं खूबसूरत पुस्तिका प्राप्त कर मेरे अनेक प्रश्नों के उत्तर मुझे मिल गये !
इसके साथ ही कुछ नये प्रश्न भी उभर कर सामने आ गये ! महोदय! पेज 4 में ‘जनपद अलमोड़ा के प्रमुख अधिकारियों के नाम’ तथा सरकारी कार्यालयों एवं कुछ अन्य स्थानों के दूरभाष नंबर दिये गये हैं। कितना अच्छा होता इन अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी दिये गये होते? सच तो यह है, लैंड लाइन हो या न हो मोबाइल नंबर आवश्यकीय हैं।
पत्रकारों की इस पुस्तिका में पत्रकारों के मोबाइल नंबर नहीं दिये गये हैं। अतः अगले अंक में इन सुझाओं को शामिल कर सकें तो अति उत्तम होगा। धन्यवाद ।

रानीखेत टाइम्स - संपादकीय!
03/09/2024

रानीखेत टाइम्स - संपादकीय!

मुख्य मंत्री श्री हरीश रावत से डीएन बड़ोला की मुलाक़ात का दृश्य!
03/09/2024

मुख्य मंत्री श्री हरीश रावत से डीएन बड़ोला की मुलाक़ात का दृश्य!

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