30/03/2018
रोमियो 5:8 "परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।"
प्रेम कोई भावना नहीं - यह एक क्रिया और चुनाव है। हम (जवान दिल वाले) कभी कभी बाहरी सुन्दरता देख कर प्रेम करने लगते हैं, किन्तु अन्त में जैसे जैसे हम एक दूसरे के नजदीक आते हैं, बाहरी सुंदरता को ज्यादा महत्व न देते हुए भीतरी गुणों ( जैसे - बातें, विचार, प्रेम, .... ) की सराहना करने लगते हैं । पर हाँ, हम सब जानते हैं कि हमारा केंद्र इस सचाई से भटकर ऊपरी सुंदरता पर स्थिर हो जाता है जो रिश्तों में आगे चलकर करड़वाहट लता है ।
परमेश्वर ने प्रेम इस तरह दिखाया " कि जब हम पापी ही थे तब प्रभु हमारे लिए मरे । जब हम पाप के गहरे खाई में पड़े थे, उसने हमसे प्रेम रखने का चुनाव किया । क्या आप सच्चाई सुनना चाहते हैं ?
जब आप झूठ बोलते हैं, बुराई करने की योजना बना रहे होते हैं, चोरी कर रहे होते हैं, झूठी गवाही दे रहे होते हैं, अपने माता -पिता, मित्र, या किसी से भी बुरा ब्यवहार कर रहे होते हैं, जब आप हत्या या दुषकर्म किए होते हैं, अशलील वीडियो या इसी तरह की गन्दी बातें ( जो यहाँ उल्लेख नहीं कर सकते ) देख रहें होते हों . . . . . . . . . . .
तो सच्चाई यह है कि - तब भी प्रभु आपसे प्रेम करते हैं ।
यह उनका चुनाव है कि वह हमसे प्रेम रखे । आप सोच रहे होंगे, कि येशु मसीह जब इन सब बातों के बावजूद हमसे प्रेम रखते हैं, तो क्या हम पाप करते रहें ?
ेरे मित्रों वह हमारे बदले जीवन में रूचि रखते हैं , वह हमें दंड देना नहीं चाहते, हमारे बदले क्रूस पर वह इसलिए मरे कि जो पाप हमने किए या करेंगे (फ्यूचर) उनका लेखा हमें देना ना पड़े । परमेश्वर चाहता है कि हम एक " दोष रहित " जीवन जियें । अपने पापों को मान लें, किसी मनुष्य के सामने नहीं बल्कि परमेश्वर के सामने, और सहायता के लिए प्रार्थना करें, कि जैसी जिंदगी उसने हमारे लिए चाही, एक "स्वतन्त्र" जीवन, हम जी सकें ।मैं आशा करती हूँ कि "पाप" के बंधन से आप आजाद होंगे। प्रभु के अनुग्रह को प्राप्त करें ।
आशीषित बने रहे !!!