स्वामी आशुतोष पाण्डेय

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स्वामी आशुतोष पाण्डेय Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from स्वामी आशुतोष पाण्डेय, हरमु रोड, किशोरगंज, Ranchi.

🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩🌤️  *दिनांक - 06 अक्टूबर 2026*🌤️ *दिन - मंगलवार*🌤️ *विक्रम संवत 2083*🌤️ *शक संवत -1948*🌤️ *अ...
05/10/2026

🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक - 06 अक्टूबर 2026*
🌤️ *दिन - मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु*
🌤️ *मास - आश्विन*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - एकादशी रात्रि 12:52 तक तत्पश्चात द्वादशी*
🌤️ *नक्षत्र - अश्लेशा रात्रि 11:37 तक तत्पश्चात मघा*
🌤️ *योग - सिद्ध सुबह 09:51 तक तत्पश्चात साध्य*
🌤️*राहुकाल - शाम 03:00 से शाम 04:30 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:08*
🌤️ *सूर्यास्त - 05:52*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण - इंदिरा एकादशी,एकादशी का श्राद्ध*

💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*


🌷 *इंदिरा एकादशी* 🌷
➡️ *आज मंगलवार को इंदिरा एकादशी है।*
🙏🏻 *इंदिरा एकादशी व्रत से बड़े – बड़े पापों का नाश हो जाता है | यह नीच योनियों में पड़े हुए पितरों को भी सद्गति देनेवाली है | इसका माहात्म्य पढ़ने-सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है | - पद्म पुराण*

🌷 *उन्नतिकारक कुंजियाँ* 🌷
👉🏻 *हल्का भोजन करने से शरीर में स्थूलता कम होती है, मन भी सूक्ष्म होता है | सूक्ष्म मन प्रसन्नता का द्योतक है |*
👉🏻 *भृकुटी में तिलक करने से ज्ञानशक्ति का विकास होता है |*

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🍁💐🙏🏻 *नियमित पंचांग तथा अन्य वैदिक जानकारी पाने हेतु हरिओम् वैदिक ज्योतिष केंद्र के आधिकारिक फेसबुक पेज को like और share अवश्य करें* 👉https://www.facebook.com/हरि-ॐ-वैदिक-ज्योतिष-केंद्र-487523985063268/

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🌼 *समाज कल्याण हेतु अन्य ग्रुप तथा अपने मित्रों परिचितो तक पहुचाने का सेवा अवश्य करें* 💐☘🌹🌻🌺🙏🙏🏻🌹🌻☘🌷🌺🌸🌼💐🙏🏻🙏🍀🌷🌻🌺🌺🌸🍁💐🙏🏻💐
*समाज रुपी ईश्वर के सेवा में सदैव अग्रणी ज्योतिषीय संस्थान ( सभी* *तरह के ग्रह शांति निवारण ,रत्न*
*सलाह ,तंत्र बाधा से संबधित सभी समस्या का समाधान,ग्रह से संबंधित सभी समस्या समाधान,ग्रह जनित, तंत्र जनित सभी कष्ट निवारण के विशेष अनुभवी)*

माँ कामाख्या साधक ≠ स्वामी आशुतोष पाण्डेय *(1) .. हरि ॐ वैदिक ज्योतिष केंद्र,हरमु रोड किशोरगंज,रांची,*
*झारखण्ड,संपर्क-6200016671*
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🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩🌤️  *दिनांक - 05 अक्टूबर 2026*🌤️ *दिन - सोमवार*🌤️ *विक्रम संवत 2083*🌤️ *शक संवत -1948*🌤️ *अय...
05/10/2026

🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक - 05 अक्टूबर 2026*
🌤️ *दिन - सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु*
🌤️ *मास - आश्विन*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - दशमी रात्रि 02:53 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र - पुष्य रात्रि 12:54 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
🌤️ *योग - शिव दिन 12:44 तक तत्पश्चात सिद्ध*
🌤️*राहुकाल - सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:08*
🌤️ *सूर्यास्त - 05:52*
👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण - दशमी का श्राद्ध*

🌷 *श्राद्ध के दिन* 🌷
🙏🏻 *जिस दिन आप के घर में श्राद्ध हो उस दिन गीता का सातवें अध्याय का पाठ करें । पाठ करते समय जल भर के रखें । पाठ पूरा हो तो जल सूर्य भगवन को अर्घ्य दें और कहें की हमारे पितृ के लिए हम अर्पण करते हें। जिनका श्राद्ध है , उनके लिए आज का गीता पाठ अर्पण।*



🌷 *श्राद्ध कर्म* 🌷
🌞 *अगर ब्राह्मण से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपनेदोनों हाथ ऊपर करके बोलें :*
🌞 *"हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दे) को आप संतुष्ट/सुखी रखें । इस निमित मैं आपको अर्घ्य व भोजन कराता हूँ ।" ऐसा करके आप सूर्य भगवान को अर्घ्य दें और भोग लगायें ।*



🌷 *तुलसी* 🌷
🌿 *श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक पत्ता भी महान पुण्य देनेवाला है | पद्मपुराण (ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०१४ से )*


🌷 *श्राद्ध के लिए विशेष मंत्र* 🌷
🙏 *" ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा । "*
🌞 *इस मंत्र का जप करके हाथ उठाकर सूर्य नारायण को पितृ की तृप्ति एवं सदगति के लिए प्रार्थना करें । स्वधा ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं । इस मंत्र के जप से पितृ की तृप्ति अवश्य होती है और श्राद्ध में जो त्रुटी रह गई हो वे भी पूर्ण हो जाती है।*

🌷 *श्राद्ध में करने योग्य* 🌷
🙏 *श्राद्ध पक्ष में १ माला रोज द्वादश मंत्र " ॐ नमो भगवते वासुदेवाय " की करनी चाहिए और उस माला का फल नित्य अपने पितृ को अर्पण करना चाहिए।*

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🌷 *चतुर्दशी तिथि पर न करें श्राद्ध* 🌷   ❤️ 09 अक्टूबर शुक्रवार को चतुर्दशी का श्राद्ध  है ❤️➡ *चतुर्दशी को आग - दुर्घटना...
05/10/2026

🌷 *चतुर्दशी तिथि पर न करें श्राद्ध* 🌷

❤️ 09 अक्टूबर शुक्रवार को चतुर्दशी का श्राद्ध है ❤️
➡ *चतुर्दशी को आग - दुर्घटना - अस्त्र - शस्त्र - अपमृत्यु से मृतक का श्राद्ध*
🙏🏻 *हिंदू धर्म के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में परिजनों की मृत्यु तिथि के अनुसार ही श्राद्ध करने का विधान है । महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया है कि इस तिथि पर केवल उन परिजनों का ही श्राद्ध करना चाहिए, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो।*
💥 *इस तिथि पर अकाल मृत्यु (हत्या, दुर्घटना, आत्महत्या आदि) से मरे पितरों का श्राद्ध करने का ही महत्व है। इस तिथि पर स्वाभाविक रूप से मृत परिजनों का श्राद्ध करने से श्राद्ध करने वाले को अनेक प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उन परिजनों का श्राद्ध सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के दिन करना श्रेष्ठ रहता है।*
🙏🏻 *महाभारत के अनुसार पर्व अनुसार पितरों की मृत्यु स्वाभाविक रुप से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर करने से श्राद्धकर्ता विवादों में घिर जाता हैं। उन्हें शीघ्र ही लड़ाई में जाना पड़ता है। जवानी में उनके घर के सदस्यों की मृत्यु हो सकती है।*
🙏🏻 *चतुर्दशी श्राद्ध के संबंध में ऐसा वर्णन कूर्मपुराण में भी मिलता है कि चतुर्दशी को श्राद्ध करने से अयोग्य संतान होती है।*
🙏🏻 *याज्ञवल्क्यस्मृति के अनुसार, भी चतुर्दशी तिथि को श्राद्ध नहीं करना चाहिए। इस दिन श्राद्ध करने वाला विवादों में फस सकता है।*
🙏🏻 *चतुर्दशी तिथि पर अकाल (हत्या), आत्महत्या (दुर्घटना), रुप से मृत परिजनों का श्राद्ध करने का विधान है।*
🙏🏻 *जिन पितरों की अकाल मृत्यु हुई हो व उनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करने से वे प्रसन्न होते हैं।*

🌷 *सर्व पितृ अमावस्या* 🌷
➡ *10 अक्टूबर 2026 शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या है।*
🙏🏻 *जिन्होंने हमें पाला-पोसा, बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया, हममें भक्ति, ज्ञान एवं धर्म के संस्कारों का सिंचन किया उनका श्रद्धापूर्वक स्मरण करके उन्हें तर्पण-श्राद्ध से प्रसन्न करने के दिन ही हैं श्राद्धपक्ष।*
🙏🏻 *जिस प्रकार चारागाह में सैंकड़ों गौओं में छिपी हुई अपनी माँ को बछड़ा ढूँढ लेता है उसी प्रकार श्राद्धकर्म में दिए गये पदार्थ को मंत्र वहाँ पर पहुँचा देता है जहाँ लक्षित जीव अवस्थित रहता है।*
🙏🏻 *पितरों के नाम, गोत्र और मंत्र श्राद्ध में दिये गये अन्न को उसके पास ले जाते हैं, चाहे वे सैंकड़ों योनियों में क्यों न गये हों। श्राद्ध के अन्नादि से उनकी तृप्ति होती है। परमेष्ठी ब्रह्मा ने इसी प्रकार के श्राद्ध की मर्यादा स्थिर की है।"*
🙏🏻 *सर्व पितृ अमावस्या को पितर भूमि पर आते हैं । उस दिन अवश्य श्राद्ध करना चहिये।*
🙏🏻 *उस दिन श्राद्ध नही करते हैं तो पितर नाराज होकर चले जाते हैं ।*
🙏🏻 *आप यदि उस दिन श्राद्ध करने में सक्षम् नही हैं तो उस दिन तांबे के लोटे में जल भरकर के भगवदगीता के सातवें अध्याय का पाठ करें और मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेव"एवं " ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधा देव्यै स्वाहा" की 1-1 माला करके सूर्यनारायण भगवान को जल का अर्घ्य दें ।*
🙏🏻 *और सूर्य भगवान को बगल ऊँची करके बोले की मैं अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ।*
🙏🏻 *वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करें। मैंने अपनी दोनों बाहें आकाश में उठा रखी हैं।और जिनका श्राद्ध किया जाये उन माता, पिता, पति, पत्नी, संबंधी आदि का स्मरण करके उन्हें याद दिलायें किः "आप देह नहीं हो। आपकी देह तो समाप्त हो चुकी है, किंतु आप विद्यमान हो।*
🙏🏻 *आप अगर आत्मा हो.. शाश्वत हो... चैतन्य हो। अपने शाश्वत स्वरूप को निहार कर हे पितृ आत्माओं ! आप भी परमात्ममय हो जाओ। हे पितरात्माओं ! हे पुण्यात्माओं !अपने परमात्म-स्वभाव का स्मऱण करके जन्म मृत्यु के चक्र से सदा-सदा के लिए मुक्त हो जाओ। हे पितृ आत्माओ !*
🙏🏻 *आपको हमारा प्रणाम है। हम भी नश्वर देह के मोह से सावधान होकर अपने शाश्वत् परमात्म-स्वभाव में जल्दी जागें.... परमात्मा एवं परमात्म-प्राप्त महापुरुषों के आशीर्वाद आप पर हम पर बरसते रहें.... ॐ....ॐ.....ॐ...." पितृपक्ष के विषय में शास्त्रों में बताया गया है कि इन दिनों मनुष्य को अपना आचरण शुद्ध और सात्विक रखना चाहिए। इसलिए भोजन में मांस-मछली, मदिरा और तामसिक पदार्थों से परहेज रखना चाहिए।*
🙏🏻 *क्योंकि आप जो भोजन करते हैं उनमें से एक अंश पितरों को भी प्राप्त होता है। इन दिनों मन और भावनाओं पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें और काम-वासना से बचें।*
👉🏻 *ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जिनके पितर नाराज हो जाते हैं उनकी ग्रह दशा अच्छी भी हो तब भी उनके जीवन में हर पल परेशानी बनी रहती है।*
👉🏻 *श्राद्ध पक्ष में सयंम-नियम पालन करें, नहीं तो पितर देंगे शाप...*
👉🏻 *श्राद्ध पक्ष में गाय को गुड़ के साथ रोटी खिलाएं और कुत्ते, बिल्ली और कौओं को भी आहार दें। इससे पितरों का आशीर्वाद आप पर बना रहेगा।*

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*पंचांग में तिथि ,नक्षत्र आदि का काल गणना (समय) काशी (बनारस) के पंचांग से लिया गया है क्योकि हमारे उत्तर और मध्य भारत में लग्न,तिथि ,नक्षत्र, व्रत,त्योहार आदि के लिए काशी (वाराणसी ) का ही मानक समय सारणी मान्य है* 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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स्वामी आशुतोष पाण्डेय *(1) .. हरि ॐ वैदिक ज्योतिष केंद्र,हरमु रोड किशोरगंज,रांची,*
*झारखण्ड,संपर्क-6200016671*
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🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩🌤️  *दिनांक - 04 अक्टूबर 2026*🌤️ *दिन - रविवार*🌤️ *विक्रम संवत 2083*🌤️ *शक संवत -1948*🌤️ *अय...
04/10/2026

🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक - 04 अक्टूबर 2026*
🌤️ *दिन - रविवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु*
🌤️ *मास - आश्विन*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - अष्टमी सुबह 07:27 तक तत्पश्चात नवमी*
🌤️ *नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 02:23 तक तत्पश्चात पुष्य*
🌤️ *योग - परिघ दोपहर 03:44 तक तत्पश्चात शिव*
🌤️*राहुकाल - शाम 04:30 से शाम 06:00 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:06*
🌤️ *सूर्यास्त - 05:54*
👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण - नवमी का श्राद्ध,सौभाग्यवती का श्राद्ध,*
*विशेष- नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*आज नवमी श्राद्ध का मुहूर्त दोपहर 11:40 से 12:20 का है*

💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*


🌷 *आश्विन माह* 🌷
🙏🏻 *अश्विन हिन्दू धर्म का सप्तम महिना है। अश्विन नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम अश्विन पड़ा (अश्विनीनक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र मासे सः)। आश्विन मास का संबंध अश्विनौ से है जो सूर्य के दो पुत्र हैं और देवताओं के चिकित्सक हैं। इस मास का एक नाम क्वार भी है।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “तथैवाश्वयुजं मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। प्रज्ञावान्वाहनाढ्यश्च बहुपुत्रश्च जायते।।” जो अश्विन मास को एक समय भोजन करके बिताता है, वह पवित्र, नाना प्रकार के वाहनों से सम्पन्न तथा अनेक पुत्रों से युक्त होता है ।*
🌷 *आश्विने भौमावास्याम जायते खलु पार्वती। विविध विपदाम धनक्षयं पापाचारम वर्धते।।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व के अनुसार जो अश्विन मास में ब्राह्माणों को घृत दान करता है, उस पर दैव वैद्य अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर उसे रूप प्रदान करते हैं ।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार अश्विन में धान्य दान करने से अन्न तथा धन की वृद्धि होती है।*
🙏🏻 *अग्निपुराण के अनुसार अश्विन के महिने में गोरस- गाय का घी, दूध और दही तथा अन्न देनेवाला सब रोगों से छुटकारा पा जाता है |*
🌷 *आश्विने कृष्णपक्षे तु षष्ठ्यां भौमेऽथ रोहिणी । व्यतीपातस्तदा षष्ठी कपिलानन्तपुण्यदा ।।*
🙏🏻 *अश्विन महिने के कृष्णपक्ष की षष्ठी के दिन मंगलवार, रोहिणी नक्षत्र और व्यतिपात हो तो वह अनंत पुण्य देने वाला कपिला षष्टी योग कहा जाता है। यह योग बहुत दुर्लभ है।*

🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार सती ने अश्विन मास में नंदा (प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी) तिथियों में भक्तिपूर्वक गुड़, भात और नमक चढाकर भगवान शिवका पूजन किया और उन्हें नमस्कार करके उसी नियम के साथ उस मास को व्यतीत किया |*
🙏🏻 *अश्विन कृष्णपक्ष को पितृपक्ष महालय के नाम से जाना जाता है जिसमें पितृ ऋण से मुक्त होने तथा पितरों को तृप्त करने के उद्देश्य से श्राद्ध किया जाता है।*


🌷 *पितृ पक्ष* 🌷
🙏🏻 *अभी पितृ पक्ष चल रहा है | अपने घर के लोग जो गुजर गये हैं | उनकी आत्मा को शांति देने के लिए इतना जरूर करें कि अब सर्व पितृ अमावस्या आयेगी, (10 अक्टूबर 2026 शनिवार को ) उस दिन गीता का 7 अध्याय पाठ करें, सूर्य भगवान के सामने जल और अन्न ले जाकर प्रार्थना करें कि: "हे सूर्यदेव, यमराज आपके पुत्र हैं, हमारे घर के जो भी गुजर गये उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें, आज के गीता के पाठ का पुण्य उनके लिए दीजिये" पितृ गण राजी होंगे, घर में अच्छी संतान जन्म लेगी यह सर्व पितृ अमावस्या के दिन जरूर करें।*

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03/10/2026

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🌤️ *तिथि - सप्तमी सुबह 09:53 तक तत्पश्चात अष्टमी*
🌤️ *नक्षत्र - आर्द्रा रात्रि 04:00 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
🌤️ *योग - वरीयान शाम 06:50 तक तत्पश्चात परिघ*
🌤️*राहुकाल - सुबह 09:00 से सुबह 10:30तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:06*
🌤️ *सूर्यास्त - 05:54*
👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण - अष्टमी का श्राद्ध,महालक्ष्मी व्रत समाप्त*
*विशेष- सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

आज अष्टमी का श्राद्ध है..
*तर्पण, ब्राह्मण भोजन, दान आदि का मुहूर्त दोपहर 11:40 से 12:20 तक है*

🌷 *श्राद्धकर्म* 🌷
🙏🏻 *अगर श्राद्धकर्म करने के लिए आपके पास बिल्कुल भी धन नहीं है तो आपको उधार मांगकर धन लेना चाहिए और श्राद्ध करना चाहिए। अगर आपको कोई उधार नहीं दे रहा तो पितरों के उद्देश्य से पृथ्वी पर भक्ति विनम्र भाव से सात आठ तिलों से जलाञ्जलि ही दे दें। अगर यह भी संभव नहीं तो कहीं से चारा लाकर गौ को खिला दें। और अगर इतना भी संभव नहीं तो अपनी बगल दिखाते हुए सूर्य तथा दिक्पालों से कहें :*
🌷 *"न मेऽस्ति वित्तं न धनं चान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितॄन्‌नतोऽस्मि ।*
*तृप्यन्तु भत्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वर्त्मनि मारुतस्य ।।"*
➡ *'मेरे पास श्राद्धकर्म के योग्य न धन-संपति है और न कोई अन्य सामग्री। अत: मै अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ। वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करे। मैंने अपनी दोनों भुजाएं आकाश में उठा रखी हैं ।*
💥 *ऐसा विवरण विष्णुपुराण तृतीयांश, अध्यायः 14 तथा वराहपुराण अध्याय 13 में मिलता है।*

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*समाज रुपी ईश्वर के सेवा में सदैव अग्रणी ज्योतिषीय संस्थान ( सभी* *तरह के ग्रह शांति निवारण ,रत्न*
*सलाह ,तंत्र बाधा से संबधित सभी समस्या का समाधान,ग्रह से संबंधित सभी समस्या समाधान,ग्रह जनित, तंत्र जनित सभी कष्ट निवारण के विशेष अनुभवी)*

माँ कामाख्या साधक ≠ स्वामी आशुतोष पाण्डेय *(1) .. हरि ॐ वैदिक ज्योतिष केंद्र,हरमु रोड किशोरगंज,रांची,*
*झारखण्ड,संपर्क-6200016671*
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🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩🌤️  *दिनांक - 02 अक्टूबर 2026*🌤️ *दिन - शुक्रवार*🌤️ *विक्रम संवत 2083*🌤️ *शक संवत -1948*🌤️ *...
02/10/2026

🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक - 02 अक्टूबर 2026*
🌤️ *दिन - शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083*
🌤️ *शक संवत -1948*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु*
🌤️ *मास - आश्विन*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - षष्ठी दोपहर 12:17 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌤️ *नक्षत्र - रोहिणी सुबह 07:21 तक तत्पश्चात मृगशिरा*
🌤️ *योग - व्यतीपात रात 09:56 तक तत्पश्चात वरीयान*
🌤️*राहुकाल - सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:05*
🌤️ *सूर्यास्त - 05:55*
👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण - षष्ठी और सप्तमी का श्राद्ध*
*दोपहर 11 से 12:17 तक षष्ठी का श्राद्ध*
*दोपहर 12:18 से 01:00 तक सप्तमी का श्राद्ध मुहूर्त है*
*विशेष- षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

🌷 *पितरों का उद्धार* 🌷
🙏🏻 *भगवान शिव अपने पुत्र से कहते हैं: कार्तिकेय ! संसार में विशेषतः कलियुग में वे ही मनुष्य धन्य हैं, जो सदा पितरों के उद्धार के लिये श्रीहरि का सेवन करते हैं । बेटा ! बहुत से पिण्ड देने और गया में श्राद्ध आदि करने की क्या आवश्यकता है। वे मनुष्य तो हरिभजन के ही प्रभाव से पितरों का नरक से उद्धार कर देते हैं। यदि पितरों के उद्देश्य से दूध आदि के द्वारा भगवान विष्णु को स्नान कराया जाय तो वे पितर स्वर्ग में पहुँचकर कोटि कल्पों तक देवताओं के साथ निवास करते हैं। - पद्मपुराण*
🚩

🌷 *श्राद्ध में क्या करें क्या ना करें* 🌷
🌷 *श्राद्ध एकान्त में ,गुप्तरुप से करना चाहिये, पिण्डदान पर दुष्ट मनुष्यों की दृष्टि पडने पर वह पितरों को नहीं पहुचँता, दूसरे की भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिये, जंगल, पर्वत, पुण्यतीर्थ और देवमंदिर ये दूसरे की भूमि में नही आते, इन पर किसी का स्वामित्व नहीं होता, श्राद्ध में पितरों की तृप्ति ब्राह्मणों के द्वारा ही होती है, श्राद्ध के अवसर पर ब्राह्मण को निमन्त्रित करना आवश्यक है, जो बिना ब्राह्मण के श्राद्ध करता है, उसके घर पितर भोजन नहीं करते तथा श्राप देकर लौट जाते हैं, ब्राह्मणहीन श्राद्ध करने से मनुष्य महापापी होता है | (पद्मपुराण, कूर्मपुराण, स्कन्दपुराण )*
🌷 *श्राद्ध के द्वारा प्रसन्न हुये पितृगण मनुष्यों को पुत्र, धन, आयु, आरोग्य, लौकिक सुख, मोक्ष आदि प्रदान करते हैं , श्राद्ध के योग्य समय हो या न हो, तीर्थ में पहुचते ही मनुष्य को सर्वदा स्नान, तर्पण और श्राद्ध करना चाहिये,*
*शुक्ल पक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष और पूर्वाह्न की अपेक्षा अपराह्ण श्राद्ध के लिये श्रेष्ठ माना जाता है | (पद्मपुराण, मनुस्मृति)*
🌷 *सायंकाल में श्राद्ध नहीं करना चाहिये, सायंकाल का समय राक्षसी बेला नाम से प्रसिद्ध है, चतुर्दशी को श्राद्ध करने से कुप्रजा (निन्दित सन्तान) पैदा होती है, परन्तु जिसके पितर युद्ध में शस्त्र से मारे गये हो, वे चतुर्दशी को श्राद्ध करने से प्रसन्न होते हैं, जो चतुर्दशी को श्राद्ध करने वाला स्वयं भी युद्ध का भागी होता है | (स्कन्दपुराण, कूर्मपुराण, महाभारत)*
🌷 *रात्रि में श्राद्ध नहीं करना चाहिये, उसे राक्षसी कहा गया है, दोनो संध्याओं में भी श्राद्ध नहीं करना चाहिये, दिन के आठवें भाग (महूर्त) में जब सूर्य का ताप घटने लगता है उस समय का नाम 'कुतप' है, उसमें पितरों के लिये दिया हुआ दान अक्षय होता है, कुतप, खड्गपात्र, कम्बल, चाँदी , कुश, तिल, गौ और दौहित्र ये आठो कुतप नाम से प्रसिद्ध है, श्राद्ध में तीन वस्तुएँ अत्यन्त पवित्र हैं, दौहित्र, कुतपकाल, तथा तिल, श्राद्ध में तीन वस्तुएँ अत्यन्त प्रशंसनीय हैं, बाहर और भीतर की शुद्धि, क्रोध न करना तथा जल्दबाजी न करना (मनुस्मृति, मत्स्यपुराण, पद्मपुराण, विष्णुपुराण)*
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माँ कामाख्या साधक ≠ स्वामी आशुतोष पाण्डेय *(1) .. हरि ॐ वैदिक ज्योतिष केंद्र,हरमु रोड किशोरगंज,रांची,*
*झारखण्ड,संपर्क-6200016671*
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🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩🌤️  *दिनांक - 01 अक्टूबर 2026*🌤️ *दिन - गुरूवार*🌤️ *विक्रम संवत 2083*🌤️ *अयन - दक्षिणायन* 🌤️...
01/10/2026

🚩 *~ आज का वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक - 01 अक्टूबर 2026*
🌤️ *दिन - गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2083*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु*
🌤️ *मास - आश्विन*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - पंचमी दोपहर 02:35 तक तत्पश्चात षष्ठी*
🌤️ *नक्षत्र - कृतिका प्रातः 08:52 तक तत्पश्चात रोहिणी*
🌤️ *योग - सिद्धि रात्रि 12:58 तक तत्पश्चात व्यतीपात*
🌤️*राहुकाल - दोपहर 01:30 से शाम 03:00 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:05*
🌤️ *सूर्यास्त - 05:55*
👉 *दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे*
🚩*व्रत पर्व विवरण - षष्ठी का श्राद्ध,व्यतीपात योग (रात्रि 12:58 से 02 अक्टूबर रात 09:56 तक)*
*विशेष- पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
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🌷 *पितृ पक्ष* 🌷
🙏🏻 *धर्म ग्रंथों के अनुसार, विधि-विधान पूर्वक श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वर्तमान समय में देखा जाए तो विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करने में धन की आवश्यकता होती है। पैसा न होने पर विधिपूर्वक श्राद्ध नहीं किया जा सकता। ऐसे में पितृ दोष होने से कई प्रकार की समस्याएं जीवन में बनी रहती हैं। पुराणों के अनुसार, ऐसी स्थिति में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर कुछ साधारण उपाय करने से भी पितर तृप्त हो जाते हैं।*

➡ *न कर पाएं श्राद्ध तो करें इनमें से कोई 1 उपाय, नहीं होगा पितृ दोष*
🙏🏻 *जिस स्थान पर आप पीने का पानी रखते हैं, वहां रोज शाम को शुद्ध घी का दीपक लगाएं। इससे पितरों की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी। इस बात का ध्यान रखें कि वहां जूठे बर्तन कभी न रखें।*
🙏🏻 *सर्व पितृ अमावस्या के दिन चावल के आटे के 5 पिंड बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में बहा दें।*
🙏🏻 *गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर उस पर गूगल के साथ घी, जौ, तिल व चावल मिलाकर घर में धूप करें।*
🙏🏻 *विष्णु भगवान के किसी मंदिर में सफेद तिल के साथ कुछ दक्षिणा (रुपए) भी दान करें।*
🙏🏻 *कच्चे दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में बहा दें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।*
🙏🏻 *श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराएं या सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, सब्जी और दक्षिणा दान करें।*
🙏🏻 *श्राद्ध नहीं कर सकते तो किसी नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृ दोष में कमी आती है।*
🙏🏻 *श्राद्ध पक्ष में किसी विद्वान ब्राह्मण को एक मुट्ठी काले तिल दान करने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।*
🙏🏻 *श्राद्ध पक्ष में पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें। इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।*
🙏🏻 *सूर्यदेव को अर्ध्य देकर प्रार्थना करें कि आप मेरे पितरों को श्राद्धयुक्त प्रणाम पहुँचाए और उन्हें तृप्त करें।*

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*समाज रुपी ईश्वर के सेवा में सदैव अग्रणी ज्योतिषीय संस्थान ( सभी* *तरह के ग्रह शांति निवारण ,रत्न*
*सलाह ,तंत्र बाधा से संबधित सभी समस्या का समाधान,ग्रह से संबंधित सभी समस्या समाधान,ग्रह जनित, तंत्र जनित सभी कष्ट निवारण के विशेष अनुभवी)*

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