24/05/2026
भूलने* वाला भी कहा मुझे मुकम्मल
भुला पाया ....
सौ अच्छाई भूला मेरी ..
पर दो गलतियां नहीं भूल पाया.
जो कहता है कि मुझे पूरी तरह भूल गया है, वो असल में सौ अच्छाइयाँ तो भूल गया... लेकिन दो गलतियाँ अभी भी याद रखे हुए है। ये शायरी कृतघ्नता, selective memory और इंसानी स्वभाव की बहुत कड़वी सच्चाई बयां करती है 💭
आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि अच्छाइयाँ भूल ली गईं और गलतियाँ याद रखी गईं? कमेंट में बताओ 👇💔
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