Shri Hari Har Mandir, Rampur (up) India

Shri Hari Har Mandir, Rampur (up) India ANNUAL DAY : 16 DECEMBER

जय माँ गंगे, श्री हरिहर मन्दिर पुराना गंज रामपुर उत्तर प्रदेश में स्थापित गंगा मैया की मनभावन मूर्ति
25/05/2026

जय माँ गंगे, श्री हरिहर मन्दिर पुराना गंज रामपुर उत्तर प्रदेश में स्थापित गंगा मैया की मनभावन मूर्ति

नमामि गंगे तव पाद पंकजम्,सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम्भुक्तिं च मुक्तिं च ददासि नित्यं,भावानुसारेण सदा नराणाम् 🙏ज्येष्ठ मा...
25/05/2026

नमामि गंगे तव पाद पंकजम्,
सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम्
भुक्तिं च मुक्तिं च ददासि नित्यं,
भावानुसारेण सदा नराणाम् 🙏

ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। राजा भागीरथ की तपस्या के फलस्वरूप गंगा ने उनके पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया।

इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन स्नान करने से दस पापों से मुक्ति मिलती है।

गंगा दशहरा के दिन स्नान करने से इन 10 पापों से मुक्ति मिलती है जिसमें तीन शारीरिक, चार वाणी से होने वाले पाप और तीम मानसिक रूप से होने वाले पापों से मुक्ति मिलती है।

तीन शारीरिक पाप जिन्हें कायिक पाप कहा जाता है, इनमे हिंसा, चोरी करना और गलत आचरण शामिल है। वहीं वाचिक यानी वाणी से होने वाले पाप में झूठ बोलना, कठोर वचन बोलना, दूसरे की चुगली करना और दूसरों की निंदा करना शामिल है।

इसके साथ ही आखिर मानसिक पाप होते हैं जिसमें लालच, ईर्ष्या और अशुद्ध विचार रखना शामिल है।

गंगा मां की कृपा से सुख-समृद्धि, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जय गंगा मैया 🙏🌺

25/05/2026

माता गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस गंगा दशहरा की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं हर हर गंगे

ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥      समस्त धर्म प्रेमियों को न्याय, कर्मफल ...
16/05/2026

ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
समस्त धर्म प्रेमियों को न्याय, कर्मफल एवं संतुलन के देवता सूर्यपुत्र श्री शनिदेव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
भगवान शनिदेव की कृपा से आप सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि का संचार हो, यही कामना है।

वट सावित्री व्रत🌳  पति की दीर्घायु हेतु वट वृक्ष की पूजा"वट सावित्री व्रत का पूजन शनिवार 16 मई को विधि-विधान से होगा। इस...
15/05/2026

वट सावित्री व्रत🌳 पति की दीर्घायु हेतु वट वृक्ष की पूजा"

वट सावित्री व्रत का पूजन शनिवार 16 मई को विधि-विधान से होगा। इस दिन सुहागिनें 16 श्रृंगार करके बरगद के पेड़ की पूजा कर फेरें लगाती हैं ताकि उनके पति दीर्घायु हों । प्यार, श्रद्धा और समर्पण का यह भाव इस देश में सच्चे और पवित्र प्रेम की कहानी कहता है।

वट वृक्ष बरगद को जल चढ़ाना केवल एक प्रथा नहीं बल्कि सुख शांति तरक्की का माध्यम है...
आपको बता दें कि ऐसी मान्यता है कि इसी दिन देवी सावित्री ने यमराज के फंदे से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। सनातन परंपरा में वट सावित्री पूजा स्त्रियों का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे करने से हमेशा अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीष प्राप्त होता है।
कथाओं में उल्लेख है कि जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे तब सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी। यमराज ने सावित्री को ऐसा करने से रोकने के लिए तीन वरदान दिये। एक वरदान में सावित्री ने मांगा कि वह सौ पुत्रों की माता बने। यमराज ने ऐसा ही होगा कह दिया। इसके बाद सावित्री ने यमराज से कहा कि मैं पतिव्रता स्त्री हूं और बिना पति के संतान कैसे संभव है।

सावित्री की बात सुनकर यमराज को अपनी भूल समझ में आ गयी कि,वह गलती से सत्यवान के प्राण वापस करने का वरदान दे चुके हैं।

जब सावित्री पति के प्राण को यमराज के फंदे से छुड़ाने के लिए यमराज के पीछे जा रही थी उस समय वट वृक्ष ने सत्यवान के शव की देख-रेख की थी। पति के प्राण लेकर वापस लौटने पर सावित्री ने वट वृक्ष का आभार व्यक्त करने के लिए उसकी परिक्रमा की इसलिए वट सावित्री व्रत में वृक्ष की परिक्रमा का भी नियम है।

सुहागन स्त्रियां वट सावित्री व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके सिंदूर, रोली, फूल, अक्षत, चना, आम फल और मिठाई से वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री, सत्यवान और यमराज की कथा श्रवण कर पूजा करें। ब्राह्मण देव को दक्षिणा आदि सामग्री दान करें।
वट वृक्ष की जड़ को दूध और जल से सींचें। इसके बाद कच्चे सूत को हल्दी में रंगकर वट वृक्ष में लपेटते हुए कम से कम तीन बार, 5 बार, 8 बार, 11 बार, 21 बार, 51, 108 जितनी परिक्रमा कर सके करें। पूजा के बाद वटवृक्ष से सावित्री और यमराज से पति की लंबी आयु एवं संतान हेतु प्रार्थना करें।

बरगद की पूजा जरूर करें.....
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ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन वटवृक्ष की पूजा का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन
वटवृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और
सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

बरगद के पेड़ को वट का वृक्ष कहा जाता है।

पुराणों में यह स्पष्ट लिखा गया है कि वटवृक्ष की जड़ों में ब्रह्माजी, तने में विष्णुजी और डालियों एवं पत्तों में शिव का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा कहने और सुनने से मनोकामना पूरी होती है।

हिन्दू धर्मानुसार 5 वटवृक्षों का महत्व अधिक है
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अक्षयवट, पंचवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट

इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। संसार में उक्त 5 वटों को पवित्र वट की श्रेणी में रखा गया है।

प्रयाग में अक्षयवट,
नासिक में पंचवट,
वृंदावन में वंशीवट,
गया में गयावट
और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है।
जहाँ प्रत्येक चौदस अमावस्या के पहले वाली तिथि को पित्रो को दूध अर्पित किया जाता है।

मानस से-
तहं पुनि संभु समुझिपन आसन।
बैठे वटतर, करि कमलासन।।

भावार्थ- अर्थात कई सगुण साधकों, ऋषियों यहां तक
कि देवताओं ने भी वटवृक्ष में भगवान विष्णु की उपस्थिति के दर्शन किए हैं।

वट और पीपल के वृक्ष पहले बहुत लगाये जाते थे, ये धर्म से जुड़ा हुआ वृक्ष है, लेकिन आज वर्तमान के लिए यह वृक्ष अति आवश्यक है। क्या आप जानते हैं कि वर्तमान में पड़ रहे सूखे, अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण की वजह क्या है ?

🌳बरगद और पीपल के वृक्षों की कमी होना।
विकास के नाम पर इस प्रकार के बड़े पेड़ों को काटना, इनके नए पेड़ नहीं लगाना, इन पेड़ों के संरक्षण, संवर्धन में कमी।।

आप को लगेगा अजीब बकवास है किन्तु यही अटल सत्य है.. .।
पीपल, बरगद और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द कर दिया गया है।
पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड को 100% सोख लेता है, बरगद़ 80% और नीम 75 %
हमने इन पेड़ों से दूरी बना लिया तथा इसके बदले यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन कर देता है।
अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही ।
हर 500 मीटर की दूरी पर एक बरगद का, पीपल का पेड़ लगाये तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा।
वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए, बरगद और पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह से शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं। वैसे भी बरगद और पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।
इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए-
मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,सखा शंकरमेवच।
पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,वृक्षराज नमस्तुते।

भावार्थ तो समझ ही गए होंगे।
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डिसक्लेमर - इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य केवल आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना सूचना पहुंचाना है। परिणाम व्यक्ति की श्रद्धा और विश्वास पर निर्भर करते हैं। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।स्थानीय परंपराओं के अनुसार कार्य करें।
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श्रोत/सांभर: विभिन्न स्थान, संग्रह: अखिल कुमार गुप्ता
सेवार्थ: श्री हरिहर मन्दिर पुराना गंज रामपुर, उत्तर प्रदेश, भारत
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अब करने योग्य कार्य
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इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगायें तथा यूकेलिप्टस पर बैन लगाया जाये इसके साथ नीम और आम के पौधे भी लगाएं । हर शहरों में ऐसा नियम बनाया जाये की हर घर के आसपास पेड़ जरूर लगाना है, जैसे वाटर हार्वेस्टिंग को जरूरी नियम बनाया गया है वैसे ही हर घर में वृक्ष का नियम भी होना चाहिए।

जिसके घर में ये बड़े पेड़ लगाने की जग़ह न हो वह तुलसी जी का पौधा जरूर लगाये*
आइये हम सब मिलकर अपने "हिंदुस्तान" को प्राकृतिक आपदाओं से बचायें, सूखे से बचायें, अत्यधिक गर्मी से बचायें।।

14/05/2026
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07/05/2026

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