27/02/2026
बनारस की रंगभरी एकादशी !!
क्योंकि बनारस सात वार और नव त्यौहार वाला शहर है,और जब बात काशी विश्वनाथ से जुडी हो तो फिर वो खुशी ,उंमग, उल्लास कई गुना बढ़ जाता है !
रंगभरी एकादशी- रंगभरी एकादशी बनारस के मुख्य उत्सवो में से एक है,और इसकी शानों शौकत,नजाकत,ठाठ देखना हो तो आपको एक बार इस दिन काशी विश्वनाथ का रुख जरूर करना चाहिए !
"काशी पुराधिपति ( काशी विश्वनाथ)के गौने का बरात"
जी हां ! बनारस वाले इसे यही जानते है ,और जहाँ शिव की बात हो वहा श्रद्धा और विश्वास की कोई कमी नहीं !
बसंतपंचमी शिव के तिलकोत्सव ,शिवरात्रि शिवविवाह तो रंगभरी एकादशी भोलेनाथ के गौने के लिए जाना जाता है !
और ये उत्सव बनारस में पुरे जोश से से मनाया जाता है,
रंगभरी एकादशी पर भोले बाबा दूल्हा बनते है ,
तन पर भस्म-भभूत की जगह गोटा जड़े खादी सिल्क के वस्त्र ,लाल सुर्ख पगड़ी और धोती के साथ सुनहरी चाँदीदार अगरपंखा व सुनहरी लाल किनारो पर सिल्वर कढ़ाई वाली दुपट्टा भी खूब फबेगा !
गले में सर्प,हाथ में डमरू और त्रिशूल,भाल चन्द्र और सिर गंगा लहरे ,तो हाथ में भांग का एक झोला ........
तो उधर दुल्हनिया रानी गौरा भी भोलेनाथ के लिए 16 श्रृंगार किये है !
जरी की लाल और सिल्वर किनारो वाली खाटी बनारसी साड़ी , गौरा की आँखो में पारने के लिए काजल श्री काशी विश्वनाथ के खप्पर से मंगाई गई ,पार्वतीमंदिर के कटोरदान से मंगाई गई लाली से बहुरिया के रक्तिम अधरों का रंग और गहरा जाएगा, और सुहायेगा !
बेला के गजरे से गौरा के केशों का शृंगार उन्हें और चार चाँद लगा देगा !
पैरों में लाल महावर,हाथों में लाल मेहँदी रची शिव के प्रेम में मेहँदी का रंग और चटक और खिला हुआ ......
अब सारे गौने के बाराती (बनारसवासी)तैयार ...... इनका भी ठाठ बाबा से कुछ कम नहीं होता ( अरे त लइका भी तो इनके ही है ना ) .......
गले में रुद्राक्ष की माला,सिर पर सफ़ेद पगडी ,सफेद धोती कुर्ता और हांथो में डमरू ये है गौने के बाराती !!
अब भोलेबाबा माता गौरा को उनके पीहर(मायके) से लेकर अपने धर(काशी विश्वनाथ मंदिर) की ओर निकलते है ,.... गौरा और शिव की आगवानी रेडकार्पेट पर होती है
रजत पालकी पर शिव-गौरा और गणेश ,पालकी उठाये शिवपुत्र ,मार्ग में डमरू , शंख ,घण्ट- घड़ियाल लिए सैकड़ो भक्त उन्हें एक साथ बजाते है ......मार्ग में गलियो के ऊपर मकानों से शिव गौरा के आने की खुशी में अबीर-गुलाल और पुष्प वर्षा होती है .......
पूरी गलियाँ,पूरा काशी विश्वनाथ मंदिर सैकड़ों क्विंटल लाल ,पीले ,हरे रंगो की सुगन्धित अमीर गुलाल से पट जाता है ! हर एक चेहरा ,हर एक वस्त्र ,हर एक रंग लाल ही लाल नजर आता है ...... और सैकड़ो डमरू की डम डम ,कई क्विन्टल अबीर गुलाल के बीच माता गौरा एवं भगवान शिव श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुँचते है !
यानि माता गौरा आपने ससुराल में ........
और बस इसी गौने के साथ ही भगवान शिव अपने पुत्रो को होली खेलने की आधिकारिक अनुमति देते है .....और डूब जाता है सारा शहर
रंगो में,भांग में,मस्ती में ,रिश्ते में,!!
और मस्ती का शहर और मस्त हो जाता है !!
जय जय श्री काशी विश्वनाथ।।
नमः पार्वती पतये
हर हर महादेव।।
🙌🙌🙌