02/03/2016
एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात
अपने सिंधी समाज के लाेगाें प्रति
धर्म, अध्यात्म, इष्टदेव, ये तीनों चीजें अलग अलग हाेते हुए भी हम लोगों ने सभ काे इकठ्ठा कर के अपने आप को एक शर्मनाक स्थिति में डाल दिया है
जैसे कि हमारे इष्टदेव झूलेलाल सांई है, कुलदेवी हिंगलाज माता जी हैं, हम सब का सबसे बड़ा फर्ज है कि हम इन दाेनाे की सेवा, पूजा करें, इसी में हमारा कल्याण है,
इस के विपरीत हम में से कई सिंधी भाई-बहन काे झूलेलाल सांई आैर हिंगलाज माता जी के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है, जबकि गुरु नानक देव जी और गुरु घर और गुरमति के बारे में इतना ज्यादा जानकारी रखते हैं कि सिंधी हाेते हुए भी हम अपने आप को गुरसिख "खालसा "कहलाने लगे हैं, एेसे करते करते उन सिंधीओ में कट्टरता के बीज बाेए जा चुके हैं, ऐसे लाेग न झूलेलाल काे मानते हैं, न हिंगलाज माता काे, न राम काे, न किरषन काे और ना ही किसी उच्च काेटि के सिंधी संत महात्माओं काे,
जैसे मुस्लिम समुदाय में शिया सुनी की कट्टरता परसिद्ध है, वैसे ही हम सिंधी लाेगाें में धीरे-धीरे यह अशोभनीय बात ज्यादा से ज्यादा देखने में आ रही है
हमारे सिंधी संताे के कितने परयतनाे के बाद भी यह कटुता कम नहीं हाे रही है, सिंधी संताे की खुलेआम निंदा करने में उन लोगों काे काेई ग्लानि नहीं हाेती,
मैं न गुरु नानक देव जी का, न गुरमति का, न गुरु घर का, किसी का भी विरोध नहीं करता, पर हमारे सिंधी समाज में जाे यह कटुता, कठोरता और कट्टरता जाे दिन ब दिन बढ़ती जा रही है उससे बहुत चिंतित हूं
जब कि हकीकत यह है कि इस मनुष्य जन्म काे पाकर हमारे लिए इतना ही जरूरी है कि हम अपने धर्म काे मानें,
अध्यात्म के मुख्य अंग -गुण, जैसे कि जप, दान, सनान भकती, गुरु सेवा, सत्संग, संकीर्तन, ध्यान और प्रभु की
शरणागती,
ये गुण अपने में संचार करें और मुकती पद के अधिकारी बनें
जब कि हमारे सिंधी समाज में एकता की जरूरत है और इन सभी बातों से इसके विपरीत वर्ग विग्रह बढ़ रहा है
इसकाे जल्द से जल्द मिटाना ही हाेगा, वरना इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा
अंत में एक बात कहना जरूरी समझता हूँ कि मेरी इस Facebook post से कईओ की भावनाओं काे ठेस पहुंच सकती है, उन से मै पहले ही संवेदना प्रकट करता हूँ,
ये मेरी विचार धारा पूरे समाज की आवाज़ है
जाे भी मुझसे सहमत हैं वह comments लिखें, जाे सहमत नहीं भी है वह भी comments कर के हमारी राह राेशन करें