विश्व विख्यात दाता अंबाजी का आदिस्थल : आरासना धाम !
प्रथम शक्तिपीठ का प्रतिक
Address
गाव- आरासना, जिल्ला - सिरोही (रा
Raj
307022
15 Km From Pindwara Railway Station ,Near by 4 km From Veerwada Village ,National Highway 14
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#आरासना_अम्बाजी_मंदिर_का_दिव्य_इतिहास
#पिंडवाड़ा तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दुरी ग्राम आरासना में स्थित #आरासुरी माँ अम्बे का मंदिर जो की जन जन की आस्था का केंद्र व् दिव्य इतिहास से परिपूर्ण है!यहाँ माँ अम्बे के नाभि की पूजा की जाती है! #आईए_जानते_है_मंदिर_का_इतिहास:}
द्वापर युग में जब भगवान शिव माँ पार्वती को सती होने पर ले जा रहे थे तब माँ पार्वती के अंग धरती पर गिर रहे थे तब माँ पार्वती के नाभि वाला अंग आरासना की पहाड़ियों पर गिरा था! जिससे शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है मंदिर के पुजारी के अनुसार माँ अम्बे की नाभि गिरने के बाद आरासना के आस पास के लोग माँ अम्बे के पूजा अर्चना के लिए पहाड़ पर आते थे जिसमे माली समाज की बूढी औरत दारमी बेन सोलंकी थी जो माँ अम्बे की परम भक्त थी जो प्रति दिन पहाड़ पर चढ़ कर माँ अम्बे के पूजा अर्चना करती थी एक दिन भी ऐसा नही था की बूढी औरत माँ माँ अम्बे की पूजा के लिए नही आई हो ! जब व् बूढी औरत पहाड़ पर चढ़ने में असर्मथ हो गई और अधिक बूढी हो गई तब उसने माँ अम्बे से प्राथना की की ''हे माँ मेरा शरीर अब साथ नही देता अब आप ही कुछ करे में अब पहाड़ चढ़ने में असर्मथ हु'' और उसी रात उसे माँ अम्बे सपने में आई और कहा ''तेरी भक्ति से में प्रसन्न हु इसीलिए तेरी खातिर में निचे आ रही हु ! मेरा निवासः शेष नाग के निचे होगा'' जब वह बूढी औरत जगी और वह मंदिर के वहा गई तब उसने देखा की पहाड़ पर माँ अम्बे कुम कुम के पद चिन्ह मौजूद थे जो की पहाड़ से निचे की तरफ जा रहे थे !( जिसको लेकर कुम कुम ना पगला पड्या गीत प्रचलित हुआ है) और माँ अम्बे शेष नाग की आकर के पहाड़ी के निचे विराजमान है! इसी बूढी औरत के वंश आज भी इसी मंदिर में पूजा करतें है! #दाता_गुजरात के नरेश माँ अम्बे के परम भक्त थे वे भी माँ अम्बे के दर्शन के लिए प्रतिदिन यहाँ आते थे !उन्होंने माँ अम्बे से प्राथना की की आप मेरे साथ मेरे राज्य में चले वहा में आपकी दिन रात सेवा करूँगा तब माँ अम्बे ने प्रकट होकर कहा की तू चल में तेरे पीछे पीछे आउंगी जहा तुम पीछे मुड़ के देखोगे में वही विराजमान हो जाउंगी ! दाता नरेश ने माँ अम्बे की बात को मान कर ठीक वेसा ही किया व् जब नरेश गुजरात के अम्बाजी(वर्तमान नाम) पंहुचा तो उसने माँ को देखने के लिए पीछे मुड़ के देखा तब माँ वही विराजमान हो गई जो आज विश्व विख्यात व् शक्ति पीठ मंदिर है जिसे अम्बाजी नाम से जाना जाता है!
#वर्तमान में आरासना का देव स्थान बोर्ड के अन्तर्गत आता है यहाँ प्रतिवर्ष सिरोही दरबार द्वारा ध्वजा चढाई जाती है!