11/11/2025
श्रीनिम्बार्क परिषद् जयपुर द्वारा आयोजित श्रीनिम्बार्क जयन्ती महोत्सव दिनाँक 30 अक्टूबर से 10 नवंबर 2025 तक श्रीमाधवबिहारी जी मंदिर, जयपुर में सानंद संपन्न हुआ।
30 अक्टूबर को गोपाष्टमी से आरंभ होकर श्रीसर्वेश्वर प्रभु, श्रीहंस भगवान, श्रीसनकादिक प्राकट्य उत्सव पर मन्दिर श्रीसरसबिहारी जी, कलवाड़ा में विराजमान सूक्ष्म चक्रांकित श्रीशालिग्राम भगवान के दिव्य अभिषेक सहित कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी, 3 नवम्बर तक विभिन्न वैष्णवों के सौजन्य से बधाई गान आयोजित हुए।
कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी 4 नवम्बर को महंत श्रीवृन्दावनदास जी महाराज द्वारा संचालित अजयराजपुरा स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम नृसिंह कुटी में श्रीनिम्बार्क सहस्रनाम के पाठ और आचार्य प्राकट्य बधाई गान हुआ और सैंकड़ों भक्तों ने पंगत प्रसादी का आनंद लिया।
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को श्रीआचार्य जयन्ती पर भांकरोटा स्थित आचार्य महामंडलेश्वर श्रीमहन्त स्वामी श्रीपद्मनाभशरणदेवाचार्य जी के स्थान श्रीसर्वेश्वर निम्बार्क सेवाधाम में श्रीनिम्बार्क भगवान का दिव्य महाभिषेक हुआ। बधाई गान, पुष्पमहल में विराजे श्रीप्रिया प्रीतम को छप्पन भोग लगा और सैंकड़ों भक्तों ने पंगत प्रसादी पाई।
मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा से तृतीया, 6 से 8 नवम्बर तक मंदिर श्रीमाधोबिहारी के विशाल और दिव्य प्रांगण में आचार्य महामंडलेश्वर श्रीमहन्त स्वामी श्रीपद्मनाभशरणदेवाचार्य जी ने रासपंचाध्यायी पर अद्भुत प्रवचन किया।
श्रोतागण एकाग्रचित्त होकर सम्पूर्ण समय हर्षित होकर कथा श्रवण करते। सबका कहना था कि ऐसी सरस शैली में ऐसे गूढ़ प्रसङ्ग का आनंद जीवन में प्रथम बार ही प्राप्त हुआ है।
मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी 9 नवंबर को श्रीधाम से पधारे श्रीराधासर्वेश्वर रास मंडल द्वारा श्री भुवनेश्वर वशिष्ठ के निर्देशन में नित्यरास और श्रीनिम्बार्क भगवान के विभिन्न दिव्य चरित्र का दर्शन कराया गया।
नित्य कथा के पश्चात महंत श्रीवृन्दावनदास जी महाराज अपने उद्बोधन में जब नित्यनिकुंज लीला प्रविष्ट श्री श्रीजी महाराज के संस्मरण सुनाते तो उपस्थित भक्तजन भावविभोर हो उठते थे।
मार्गशीर्ष कृष्ण पञ्चमी 10 नवम्बर 2025 को श्रीनिम्बार्क भगवान का छठी महोत्सव मनाया गया।
सर्वप्रथम श्रीनिम्बार्क उत्सव मंडल द्वारा आचार्य प्राकट्य बधाई गान और समाज गायन हुआ। तत्पश्चात वृन्दावन के स्वामी श्री भुवनेश्वर वशिष्ठ जी की श्रीराधासर्वेश्वर रासमण्डली द्वारा दिव्य रासलीला का दर्शन हुआ।
शुक सम्प्रदाय आचार्य श्रीअलबेली माधुरीशरण जी महाराज, महंत श्रीकल्याणदास जी महाराज जगतपुरा, महंत श्री सर्वेश्वरशरण जी महाराज नायला, महंत श्रीबनवारीशरण जी महाराज जूसरी, महंत श्रीवृन्दावनदास जी महाराज वृन्दावन, आचार्य महामंडलेश्वर श्रीमहन्त श्रीपद्मनाभशरणदेवाचार्य जी महाराज, सरस कुन्ज के बड़े भैया, श्रीलाडली जी का मंदिर जयपुर के महंत श्री संजय गोस्वामी जी एवं श्रीवराह मंदिर जयपुर के महंत श्री पवन कुमार जी शर्मा ने श्रीरासबिहारी सरकार की आरती उतारी।
उपस्थित संतों/विद्वानों ने श्रीनिम्बार्क भगवान, निम्बार्क सम्प्रदाय और उनके सिद्धांतों पर विभिन्न प्रकार से प्रकाश डाला।
समुपस्थित सभी संतों-विद्वानों ने श्रीनिम्बार्क परिषद् द्वारा प्रकाशित श्रीवराह चालीसा तथा आगामी विक्रम् संवत् 2083 के "श्रीसर्वेश्वर-जयादित्य-पञ्चाङ्ग" का विमोचन किया।
सैंकड़ों भक्तजन भाव विभोर होकर अश्रुपात करते हुए इस दिव्य आयोजन का आनंद लाभ ले रहे थे।
इस उत्सव में ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे नित्यनिकुंज लीला प्रविष्ट श्री "श्रीजी" महाराज ही साक्षात विराजमान होकर संपूर्ण आयोजन का संचालन कर रहे थे उन्हीं के सानिध्य में सारा आयोजन हो रहा था।
प्रत्येक वक्ता "जय जय" के संस्मरण सुनाकर भावविह्वल हो रहे थे, और आचार्यश्री में अपनी निष्ठा रखने वाले समस्त वैष्णववृन्द बारंबार जयघोष कर रहे थे।
सम्पूर्ण उत्सव में 7 दिवस तक हजारों भक्तों ने उत्सव के आनंद सहित पंगत प्रसादी पाई।
इस समस्त दिव्य-भव्य आयोजन में श्रीसर्वेश्वर प्रभु की अहैतुकी कृपा और उनकी कृपा के साक्षात मूर्तिमंत स्वरूप श्री "श्रीजी" महाराज का आशीर्वाद ही एकमात्र कारक रहा।
महंत श्रीबनवारीशरण जी महाराज जूसरी, महंत श्रीवृन्दावनदास जी महाराज वृन्दावन, आचार्य महामंडलेश्वर श्रीमहन्त स्वामी श्रीपद्मनाभशरणदेवाचार्य जी महाराज, ये सभी जो स्वयं आचार्यश्री के परम कृपापात्र रहे हैं, इन विभूतियों ने स्वयं सम्पूर्ण आयोजन को अपना निर्देशन संरक्षण प्रदान किया इसीके फलस्वरूप यह महोत्सव ऐसा भव्य स्वरूप प्राप्त कर सका।
श्रीनिम्बार्क परिषद् के अध्यक्ष श्री देवेशचंद्र स्वामी जी के नेतृत्व में समस्त पदाधिकारी/कार्यकर्ता और सदस्यगण, जयपुर के सभी वैष्णववृन्द ने इस आयोजन में जिस प्रकार अपना सहयोग प्रदान किया वह अद्भुत रहा।
प्रत्येक वैष्णव इस प्रकार इस कार्य में जुड़ा जैसे स्वयं आचार्यश्री ने उन्हें प्रत्यक्ष आदेश प्रदान किया हो और उस आदेश की पूर्ति के माध्यम से सभी "अपनी निष्ठा" आचार्यश्री में सिद्ध कर रहे थे।
श्रीसर्वेश्वर प्रभु हम सभी का कल्याण करें तथा हमारी अगाध निष्ठा हमारी आचार्यपरम्परा और स्वसम्प्रदाय सिद्धान्त में सदा बनी रहे।