16/02/2026
प्रभु श्री बाल्हेश्वर धाम की कृपा एवं आशीर्वाद से , श्री जनकल्याण समिति ,ऐहार के तत्वावधान में ग्राम सभा ऐहार एवं आसपास के गाँवों के भक्तों के सहयोग से 69वें वर्ष अपूर्व श्रृंगार पूजा सम्पन्न हुई।
इस पावन परंपरा का शुभारंभ वर्ष 1958 में हुआ था। अर्थात् हममें से अधिकांश तो उस समय जन्मे भी नहीं थे, जब यह आयोजन आरंभ हो चुका था। यह परंपरा किसी एक व्यक्ति या पीढ़ी की देन नहीं, बल्कि अनेक पीढ़ियों की आस्था, तप और सामूहिक समर्पण का परिणाम है।
तीन दिनों तक चलने वाले पावन शिवरात्रि मेले का समापन श्रृंगार पूजा की आरती के साथ होता था। यह मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सहयोग और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक रहा है। उस समय मेले में आने वाले श्रद्धालुओं तथा व्यापार करने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि मानी जाती थी। रात्रि में नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन इसलिए किया जाता था, ताकि लोग अंधकार में असुरक्षित यात्रा न करें, किसी प्रकार की लूट-पाट या अनहोनी का शिकार न हों, और मेले की थकान दूर कर प्रातः सुरक्षित अपने-अपने गाँव लौट सकें। सेवा, विनम्रता और सामूहिक भावना ही उस काल की वास्तविक पहचान थी।
समय के साथ प्राथमिकताएँ भी परिवर्तित होती दिखाई देती हैं। जहाँ पहले सेवा कार्य मौन और निःस्वार्थ भाव से होते थे, वहीं अब कुछ स्थानों पर सेवा से अधिक उसके प्रचार को महत्व मिलता प्रतीत होता है। भगवान की आरती से पूर्व यदि छायांकन और प्रकाशन की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाए, तो मानो आयोजन पूर्ण माना जाता है। कहीं-कहीं तो कुछ लोग स्वयं को मंदिर का संरक्षक या स्वामी के रूप में प्रस्तुत कर मीडिया में विशेष स्थान पाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो यह परंपरा किसी एक समाज की सामूहिक धरोहर न रहकर, कुछ लोगों की निजी छवि और पहचान निर्माण का माध्यम बनती जा रही हो।
मेले में लोगों को लूट से बचाने के लिए रात्रि आयोजन होते थे, और आज कहीं-कहीं भक्ति के मंच पर श्रेय और प्रसिद्धि की होड़ दिखाई देती है। फिर भी, परंपरा की आत्मा आज भी उसी सादगी, समर्पण और सामूहिक श्रद्धा में जीवित है, जो दिखावे से परे है।
हे प्रभु, हमें सदैव आपका निष्काम, निरहंकारी और अनाम भक्त एवं कार्यकर्ता बनाए रखें। कहीं भूलवश भी स्वयं के महिमामंडन की प्रवृत्ति हमारे भीतर उत्पन्न न होने पाए। यही हमारी सच्ची प्रार्थना है।