Pushkar rescue committee

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पुष्कर रेस्क्यू कमेटी की स्थापना १० मई २०१५ को समाजसेवा व जनहित से जुड़े मुद्दों के लिए की गई, जिसमे सभी ने मिलकर ये निर्णय लिया की छोटी मोटी परेशानियों के लिए सरकार या अफसरों को कोसने की बजाय आपस में मिलकर जो भी जनहित से जुडी समस्याएं तीर्थराज पुष्कर राज व समाज में नजर आये उन्हें स्वयं के पैसे इकठे करके दूर करने का प्रयत्न करेंगे.
ब्रह्मनगरी पुष्कर राज में फैली समस्याओं को दूर करने के लिए रेस्क्य

ू कमेटी ने सबसे पहले अन्नदाता श्री पुष्कर राज महाराज के फीडर को साफ़ करने का बीड़ा उठाया जो काफी लम्बे समय से
ऐ डी ए द्वारा उपेक्षित किये जा रहे थे व बारिश के दिनों में पवित्र पुष्कर सरोवर में पानी के पहुंचने के एकमात्र मार्ग भी पुष्कर फीडर ही थे, जिसमे जनसहयोग द्वारा फीडर की सफाई करना सुनिश्चित किया गया व जन जन को इससे जोड़ने हेतु इसे श्रमदान महादान अभियान का नाम दिया गया ! २४ मई २०१५ को पुष्कर रेस्क्यू कमेटी का फीडरों की साफ़ सफाई का महाअभियान चलाया गया जिसकी समस्त कस्बेवासिओ ने खूब प्रशंसा की !
इसके पश्चात से लेकर आज तक पुष्कर रेस्क्यू कमेटी निरंतर समाजसेवा में अग्रणी रहकर पुष्करवासिओ समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रो में जनहित के लिए सेवा में समर्पित संस्था है,
हमारी इस संस्था में तीर्थराज पुष्कर के समस्त जागरूक बंधू जुड़े हुए है जो दिनरात पुष्कर राज में व्याप्त समस्याओं के निराकरण के लिए व समाधान के लिए वचनबद्ध है !
पिछले दो सालो में हमारी संस्था द्वारा किये गए सेकड़ो सेवाकार्यो में से कुछ सेवाकार्य आपकी सेवा में प्रस्तुत है !

जय पुष्कर राज की

16/06/2018

*आओ पीपल के वृक्ष लगाएं देश को प्राकृतिक आपदाओं से बचाएँ*

पिछले कुछ दशकों से पीपल, बरगद, नीम, आम, जामुन, शीशम जैसे पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया, सरकारों ने इन पेड़ों से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस, बबूल अलेश्टोनिया आदि को लगाना शुरू कर दिया। आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है।

जब वायुमण्डल में स्वछता ही नही होगी , नमी नही रहेगा तो गर्मी बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा, जमीन बंजर होगी, रेगिस्थान का विस्तार होगा।

हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगाये तो आने वाले कुछ सालो बाद भारत प्रदूषण मुक्त होने की राह पर अग्रसर होगा।

*पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।* इसकी वंदना में एक श्लोक भी है।
*मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,
सखा शंकरमेव च।
पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,
वृक्षराज नमस्तुते।*

पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजार्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %

पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं।

अमृत दें, करते विषपान,
वृक्ष स्वयं शंकर भगवान' :-
"हरियाली भूतल श्रृंगार,
जहाँ वृक्ष हैं, वहीँ बहार"..
*पुष्कर स्थित बालमुकंद आश्रम के महंत श्री श्री रामरत्नाचार्य जी* कहते है कि पीपल "प्रज्ञा बोध" कराने वाला वृक्ष है | इसकी गायत्री मंत्र के साथ पूजा परिक्रमा करने से हमे आत्मज्ञान मिलता है |
*अश्वत्थः स्थापितो येन तत्कुलंस्थापितं ततः।धनायुषां समृध्दिस्तु नरकात् तारयेत् पित्रन्।।*
जो व्यक्ति पीपल का एक भी पेड़ लगा देता है वह अपने कुल को हमेशा के लिए स्थापित कर देता है।धन एवं समृध्दि तो मिलती ही है वह अपने पित्रों को नरक से तार देता है !
पीपल ही एक मात्र ऐसा पेड़ है जो सबसे ज्यादा OXYGEN (प्राण वायु) देता है। इसलिए हमारे धार्मिक ग्रंथों में पीपल के पेड़ को लगाने व पानी देने व न काटने की शिक्षा दे गई है।

बड़ी तादात में हम पीपल के वृक्ष लगा कर हम GLOBAL WARMING को आसानी से कम कर सकते हैं |
हम भारत वासी है जो ठान ले अगर, तो कुछ भी कर जाने के लिए सक्षम है।
तो आइए कम से कम 1 पीपल का वृक्ष लगाएं। देश को प्राकृतिक आपदाओं से बचाएँ ।
*पुष्कर रेस्क्यू कमेटी* 🙏🙏

28/03/2018
जय माता दी ,,🙏🙏
26/03/2018

जय माता दी ,,🙏🙏

JAY PUSHKAR RAJ KI .
13/10/2017

JAY PUSHKAR RAJ KI .

[12:49, 9/5/2017] Dinesh Parashar: साउंड बजाने को लेकर विवाद हो गया , एस डी एम के घर पर नायक कॉलोनी वालो ने किया प्रदर्श...
05/09/2017

[12:49, 9/5/2017] Dinesh Parashar: साउंड बजाने को लेकर विवाद हो गया , एस डी एम के घर पर नायक कॉलोनी वालो ने किया प्रदर्शन, थाना अधिकारी महावीर शर्मा ने मामले को कराया शांत http://www.pushkarnews.com/

पवित्र पुष्कर सरोवर में मछलियों का मरना प्रारंभ जिला प्रशासन स्थानीय नगर पालिका नहीं दे रही है ध्यान। घाटों पर रोक के बावजूद बिक रही है धड़ल्ले से खाद्य सामग्री घाटों पर लगी हुई है कई अवैध थड़िया More »

*यदि 5 सेकंड के लिए धरती से ऑक्सीजन गायब हो जाए तो क्या होगा ?*5 सेकंड के लिए धरती बहुत, बहुत ठंडी हो जाएगी.जितने भी लोग...
10/08/2017

*यदि 5 सेकंड के लिए धरती से ऑक्सीजन गायब हो जाए तो क्या होगा ?*

5 सेकंड के लिए धरती बहुत, बहुत ठंडी हो जाएगी.
जितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे है उन्हें तुरंत सनबर्न होने लगेगा.
दिन में भी अंधेरा छा जाएगा.
हर वह इंजन रूक जाएगा जिनमें आंतरिक दहन होता है. रनवे पर टेक ऑफ कर चुका प्लेन वही क्रैश हो जाएगा.
धातुओ के टुकड़े बिना वैल्डिंग के ही आपस में जुड़ जाएगे. ऑक्सीजन न होने का यह बहुत रोचक साइड इफेक्ट होगा.
पूरी दुनिया में सबके कानों के पर्दे फट जाएगे. क्योंकि 21% ऑक्सीज़न के अचानक लुप्त होने से हवा का दबाव घट जाएगा. सभी का बहरा होना पक्का है.
कंक्रीट से बनी हर बिल्डिंग ढेर हो जाएगी.
हर जीवित कोशिका फूलकर फूट जाएगी. पानी में 88.8% ऑक्सीज़न होती है. ऑक्सीजन ना होने पर हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में आ जाएगी और इसका वाॅल्यूम बढ़ जाएगा. हमारी साँसे बाद में रूकेगी, हम फूलकर पहले ही फट जाएँगे.
समुंद्रो का सारा पानी भाप बनकर उड़ जाएगा. क्योंकि बिना ऑक्सीजन पानी हाइड्रोजन गैस में बदल जाएगा और यह सबसे हल्की गैस होती है तो इसका अंतरिक्ष में उड़ना लाज़िमी है.
ऑक्सीजन के अचानक गुम होने से हमारे पैरों तले की जमीन खिसककर 10-15 किलोमीटर नीचे चली जाएगी.

*इस लिए अपने जीवनकाल में कुछ वृक्ष 🌳जरूर लगाएं......*
*इस मानसून को बेकार ना जाने दें....*

*अमित भट्ट 9828172672*
*पुष्कर रेस्क्यू कमेटी*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

09/08/2017

*ये एक बुजुर्ग की मौत नही बल्कि मानवता की मौत है, जी हां यही आज के समय का भयावह सत्य है ।*

*मातापिता समाज जो बच्चो को केवल पैसे की अहमियत सिखाता है उसके लिए पैसों केसामने सब रिश्ते बेमानी हो जाते है भले ही मा क्यो न हो जिसने अपने खून से उसे पाला पोसा हो।*
ये भी सत्य है कि पैसा साथ जानेवाला नही है ,फिर भी पैसा ही सब कुछ हो जाता है रिश्तों से ऊपर।
ये सब काल्पनिक कथा जैसा ही लग रहा है *जब 24 घंटे हाथ मे मोबाइल पकड़े रहनेवाला नोजवान महीनों अपनी माँ को फोन पर हल्लो नही बोल पाए, उसे तो साधु होना चाहिए जो जंगल मे नो नेटवर्क एरिया में रहता हो।*
आशा सहनी की मौत की रूह कांपने वाली खबर अधिकतर ने आज नहीं पढ़ी होगी। क्योंकि उस खबर में मसाला नहीं था। खबर पढ़कर इग्नोर करने की एक और वजह भी थी- उसमें हम सब आईने में अपनी तस्वीर देखने की हिम्मत नहीं कर पाते।

*80 साल की आशा सहनी मुंबई के पॉश इलाके में 10 वी मंजिल पर एक अपार्टमेंट में अकेले रहती थी। उसके पति की मौत चार साल पहले हो गयी। अकेले क्यों रहती थी? क्योंकि उसका अकेला बेटा अमेरिका में डॉलर कमाता था।* बिजी था। उसके लिए आशा सहनी डेथ लाइन में खड़ी एक बोझ ही थी। उसके लाइफ फारमेट में आशा सहनी फिट नहीं बैठती थी।

ऐसा कहने के पीछे मजबूत आधार है। *बेटे ने अंतिम बार 23 अप्रैल 2016 को अपनी मां को फोन किया था। व्हाट्सऐप पर बात भी हुई थी। मां ने कहा- अब अकेले घर में नहीं रह पाती हूं। अमेरिका बुला लो। अगर वहीं नहीं ले जा सकते हो तो ओल्ड एज ही होम ही भेज दो अकेले नहीं रह पाती हूं।*

बेटे ने कहा- बहुत जल्द वह आ रहा है। कुल मिलाकर डॉलर कमाते बेटे के लिए अपनी मां से बस इतना सा लगाव था कि उसके मरने के बाद अंधेरी का महंगा अपार्टमेंट उसे मिले। जाहिर है इसके लिए बीच-बीच में मतलब कुछ महीनों पर आशा सहनी की खैरियत ले लिया करता था जो उसकी मजबूरी थी।

चूंकि उसे इस साल अगस्त में आना था, उसने 23 अप्रैल 2016 के बाद मां को फोन करने की जरूरत नहीं समझी। वह 6 अगस्त को मुंबई आया। कोई टूर टाइम प्रोग्राम था। बेटे ने अपना फर्ज निभाते हुए, आशा सहनी पर उपकार करते हुए उनसे मिलने का वक्त निकालने का प्रोग्राम बनाया। उनसे मिलने अंधेरी के अपार्टमेंट गये। बेल बजायी। कोई रिस्पांस नहीं। लगा, बूढी मां सो गयी होगी। एक घंटे तक जब कोई मूवमेंट नहीं हुई तो लोगों को बुलाया। पता चलने पर पुलिस भी आ गयी। गेट खुला तो सभी हैरान रह गए।

आशा सहनी की जगह उसकी कंकाल पड़ी थी बेड के नीचे। शरीर तो गल ही चुका था, कंकाल भी पुराना हो चला था। जांच में यह बात सामने आ रही है कि *आशा सहनी की मौत कम से कम 8-10 महीने पहले हो गयी होगी। यह अंदाजा लगा कि खुद को घसीटते हुए गेट खोलने की कोशिश की होगी लेकिन बूढ़ा शरीर ऐसा नहीं कर सका।* लाश की दुर्गंध इसलिए नहीं फैली कि दसवें तल्ले पर उनका अपना दो फ्लैट था। बंद फ्लैट से बाहर गंध नहीं आ सकी।

*बेटे ने अंतिम बार अप्रैल 2016 मे बात होने की बात ऐसे की मानो वह अपनी मां से कितना रेगुलर टच में था। जाहिर है आशा सहनी ने अपने अपार्टमेंट में या दूसरे रिश्तेदार से संपर्क इसलिए काट दिया होगा कि जब उसके बेटे के लिए ही वह बोझ थी तो बाकी क्यों उनकी परवाह करेंगे? वह मर गयी।* उसे अंतिम यात्रा भी नसीब नहीं हुई।

*आशा सहनी की कहानी से डरिये। जो अाज आशा सहनी के बेटों की भूमिका में है वह भी डरें, क्योंकि कल वह आशा सहनी बनेंगे। और अगर आप किसी आशा सहनी को जानते हैं तो उन्हें बचा लें।*

पिछले दिनों इकोनॉमिस्ट ने एक कवर स्टेारी की थी। आंकड़ा देकर बताया कि किस तरह यूरोप, अमेरिका जैसे देशों में मृत्यू का इंतजार सबसे बड़े ट्रामा बन रहा है। *मेडिकल-इलाज और दूसरे साधन से इंसान की उम्र बढ़ी लेकिन अकेले लड़ने की क्षमता उतनी ही रही। मृत्यू का इंतजार आशा सहनी जैसे लोगों के लिए सबसे बड़ा कष्ट है। लेकिन मृत्यू और जीवन सबसे बड़ा लेवल करने वाला फैक्टर है। यह एक साइकिल है। आशा सहनी एक नियति है। कीमत है विकास की। कीमत है अपग्रेडेशन की। कीमत है उस एरोगेंस की जब कई लोगों को लगता है कि वक्त उनके लिए ठहर कर रहेगा।*

*पुष्कर रेस्क्यू कमेटी*

09/08/2017

🙏🏻🙏🏻 *राम के फरिश्ते*🙏🏻🙏🏻
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एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था,उस पर मोटे मार्कर से लिखा हुआ था.....
*"घर में कोई नहीं है, मेरी बूढ़ी माँ बीमार है, मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना, दवा और टायलट कराने के लिए घर जाना पड़ता है, अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ी से फल तौल ले और पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें, साथ ही रेट भी लिखे हुये हैं"*
और अगर आपके पास पैसे नहीं हो तो मेरी तरफ से ले लेना, इजाजत है..
मैंने इधर उधर देखा,पास पड़े तराजू में दो किलो सेब तोले, दर्जन भर केले लिए, बैग में डाले, प्राइज लिस्ट से कीमत देखी, पैसे निकाल कर गत्ते को उठाया वहाँ सौ पच्चास और दस दस के नोट पड़े थे, मैंने भी पैसे उसमें रख कर उसे ढक दिया । बैग उठाया और अपने फ्लैट पर आ गया, रात को खाना खाने के बाद मैं और भाई उधर निकले तो देखा एक कमज़ोर सा आदमी दाढ़ी आधी काली आधी सफेद, मैले से कुर्ते पाजामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर बस जाने ही वाला था, वो हमें देख कर मुस्कुराया और बोला "साहब, फल तो खत्म हो गए ।
नाम पूछा तो बोला सीताराम ..
फिर हम सामने वाले ढाबे पर बैठ गए...
चाय आयी, कहने लगा "पिछले तीन साल से मेरी माता बिस्तर पर हैं, कुछ पागल सी भी हो गईं है और अब तो फ़ालिज भी हो गया है, मेरी कोई संतान नहीं है, बीवी मर गयी है, सिर्फ मैं हूँ और मेरी माँ । माँ की देखभाल करने वाला कोई नहीं है इसलिए मुझे हर वक़्त माँ का ख्याल रखना पड़ता है"
एक दिन मैंने माँ का पाँव दबाते हुए बड़ी नरमी से कहा, *माँ ! तेरी सेवा करने को तो बड़ा जी चाहता है । पर जेब खाली है और तू मुझे कमरे से बाहर निकलने नहीं देती, कहती है तू जाता है तो जी घबराने लगता है, तू ही बता मैं क्या करूँ ?"*
अब क्या गले से खाना उतरेगा ? न मेरे पास कोई जमा पूंजी है ।
ये सुन कर माँ ने हाँफते काँपते उठने की कोशिश की, मैंने तकिये की टेक लगवाई, उन्होंने झुर्रियों वाला चेहरा उठाया अपने कमज़ोर हाथों को ऊपर उठाया मन ही मन राम जी की स्तुति की फिर बोली...
*"तू रेहड़ी वहीं छोड़ आया कर हमारी किस्मत का हमें इसी कमरे में बैठ कर मिलेगा"*
"मैंने कहा माँ क्या बात करती हो, वहाँ छोड़ आऊँगा तो कोई चोर उचक्का सब कुछ ले जायेगा, आजकल कौन लिहाज़ करता है और बिना मालिक के कौन खरीदने आएगा ?"
कहने लगी "तू राम का नाम लेने के बाद बाद रेहड़ी को फलों से भरकर छोड़ कर आ जा बस, ज्यादा बक बक नहीं कर, शाम को खाली रेहड़ी ले आया कर, अगर तेरा रुपया गया तो मुझे बोलियो"
*ढाई साल हो गए है भाई ! सुबह रेहड़ी लगा आता हूँ शाम को ले जाता हूँ, लोग पैसे रख जाते हैं फल ले जाते हैं, एक धेला भी ऊपर नीचे नहीं होता,* बल्कि कुछ तो ज्यादा भी रख जाते हैं, कभी कोई माँ के लिए फूल रख जाता है, कभी कोई और चीज़ । परसों एक बच्ची पुलाव बना कर रख गयी साथ में एक पर्ची भी थी "अम्मा के लिए"
एक डॉक्टर अपना कार्ड छोड़ गए पीछे लिखा था माँ की तबियत नाज़ुक हो तो मुझे काॅल कर लेना मैं आ जाऊँगा, कोई खजूर रख जाता है, रोजाना कुछ न कुछ मेरे हक के साथ मौजूद होता है।
*न माँ हिलने देती है न मेरे राम कुछ कमी रहने देता है, माँ कहती है तेरा फल मेरा राम अपने फरिश्तों से बिकवा देता है ।*

आखिर में इतना ही कहूँगा कि अपने *मां बाप की खिदमत करो और देखो दुनिया की कामयाबियाँ कैसे हमारे कदम चूमती है ।*

*पुष्कर रेस्क्यू कमेटी*

*ब्रह्मनगरी पुष्कर राज का फीडर में सड़क ठेकेदार द्वारा डाली गई मिट्टी*  *गौरवपथ के नाम पर काटकर डाले गए हरे भरे बड़े पेड़**...
24/06/2017

*ब्रह्मनगरी पुष्कर राज का फीडर में सड़क ठेकेदार द्वारा डाली गई मिट्टी*

*गौरवपथ के नाम पर काटकर डाले गए हरे भरे बड़े पेड़*

*लापरवाही के चलते पहाड़ी से पुष्कर फीडर में आने वाले पानी के रास्ते को भी किया बंद, रास्ते को किया मिट्टी व बड़े पत्थरो को डालकर बंद*

तीर्थनगरी पुष्कर राज के पवित्र सरोवर में पानी की आवक का एकमात्र साधन पुष्कर फीडर हैं जिसके द्वारा बारिश का पानी एक नदी के रूप में करोड़ो हिन्दुओ की आस्था के केंद्र तीर्थराज पुष्कर के पवित्र सरोवर में पहुचता है।

परन्तु PED द्वारा हाल में निर्माणाधीन पुष्कर अजमेर मुख्य मार्ग में गौरवपथ का निर्माण किया जा रहा है जिसके चलते ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरतते हुए सड़क को चौड़ा करने के नाम पर सड़क के दोनों ओर से सेकड़ो पेड़ो को काटा गया जिनमे से कुछ बड़े पेड़ो ओर सड़क के दाई ओर से मिट्टी को उठाकर लीलासेवरी फीडर में डाल दी गई जिससे फीडर के किनारों पर बनाई गई लिंक रोड तो बन्द हो ही गई है साथ ही साथ फीडर में भी भारी मात्रा में मिट्टी जा चुकी है।
आख़िर ठेकेदार द्वारा बरती लापरवाही पर सभी अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौन क्यों है। ठेकेदार द्वारा बरती जा रही लापरवाही के फीडर की सफाई में लाखों रुपयों की बर्बादी होगी। हर साल सरकार व एडीए द्वारा इन फीडरों की सफाई के लिए लाखों रुपयों का बजट पास किया जाता रहा है ।
सरकार व जनप्रतिनिधि ऐसे ठेकेदार पर कठोर कार्यवाही करें ताकि भविष्य में इसकी पुनरावर्ती न हो व जनता के खून पसीने की कमाई सफाई के नाम पर बर्बाद न हो।

*पुष्कर रेस्क्यू कमेटी* 🙏🏻

*हरियाणा के महेंद्रगढ़ के जिला प्रमुख एंव शिक्षामंत्री के भाई ने पूजा सरोवर विभिन्न संगठनों के लोगो ने किया भव्य स्वागत*त...
17/06/2017

*हरियाणा के महेंद्रगढ़ के जिला प्रमुख एंव शिक्षामंत्री के भाई ने पूजा सरोवर विभिन्न संगठनों के लोगो ने किया भव्य स्वागत*
तीर्थ नगरी पुष्कर में आज हरियाणा के शिक्षामंत्री रामविलास कौशिक के छोटे भाई महेंद्रगढ़ के जिला प्रमुख सुरेंद्र कोशिक ने सपरिवार पवित्र सरोवर की पूजा अर्चना कर जगत पिता ब्रह्मा मन्दिर के दर्शन किये इस दौरान अखिल भारतीय पाराशर ब्राह्मण महासभा पुष्कर इकाई के अध्यक्ष अरुण बाबू रेस्क़यु कमेटी के अमित भट्ट नरेंद्र पाठक चन्द्रशेखर पाराशर पतंजलि योगपीठ के मोतीलाल शर्मा भाजपा नेता राजेन्द्र महावर बदलता पुष्कर के संपादक एंव जर्नलिष्ट एसोसियशन के अध्यक्ष अनिल सर ने माला पहनाकर एंव स्मृति चिन्ह देकर उनका सम्मान किया।
*अनिल सर संपादक बदलता पुष्कर*

19/05/2017

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