16/06/2018
*आओ पीपल के वृक्ष लगाएं देश को प्राकृतिक आपदाओं से बचाएँ*
पिछले कुछ दशकों से पीपल, बरगद, नीम, आम, जामुन, शीशम जैसे पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया, सरकारों ने इन पेड़ों से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस, बबूल अलेश्टोनिया आदि को लगाना शुरू कर दिया। आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है।
जब वायुमण्डल में स्वछता ही नही होगी , नमी नही रहेगा तो गर्मी बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा, जमीन बंजर होगी, रेगिस्थान का विस्तार होगा।
हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगाये तो आने वाले कुछ सालो बाद भारत प्रदूषण मुक्त होने की राह पर अग्रसर होगा।
*पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।* इसकी वंदना में एक श्लोक भी है।
*मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,
सखा शंकरमेव च।
पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,
वृक्षराज नमस्तुते।*
पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजार्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %
पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं।
अमृत दें, करते विषपान,
वृक्ष स्वयं शंकर भगवान' :-
"हरियाली भूतल श्रृंगार,
जहाँ वृक्ष हैं, वहीँ बहार"..
*पुष्कर स्थित बालमुकंद आश्रम के महंत श्री श्री रामरत्नाचार्य जी* कहते है कि पीपल "प्रज्ञा बोध" कराने वाला वृक्ष है | इसकी गायत्री मंत्र के साथ पूजा परिक्रमा करने से हमे आत्मज्ञान मिलता है |
*अश्वत्थः स्थापितो येन तत्कुलंस्थापितं ततः।धनायुषां समृध्दिस्तु नरकात् तारयेत् पित्रन्।।*
जो व्यक्ति पीपल का एक भी पेड़ लगा देता है वह अपने कुल को हमेशा के लिए स्थापित कर देता है।धन एवं समृध्दि तो मिलती ही है वह अपने पित्रों को नरक से तार देता है !
पीपल ही एक मात्र ऐसा पेड़ है जो सबसे ज्यादा OXYGEN (प्राण वायु) देता है। इसलिए हमारे धार्मिक ग्रंथों में पीपल के पेड़ को लगाने व पानी देने व न काटने की शिक्षा दे गई है।
बड़ी तादात में हम पीपल के वृक्ष लगा कर हम GLOBAL WARMING को आसानी से कम कर सकते हैं |
हम भारत वासी है जो ठान ले अगर, तो कुछ भी कर जाने के लिए सक्षम है।
तो आइए कम से कम 1 पीपल का वृक्ष लगाएं। देश को प्राकृतिक आपदाओं से बचाएँ ।
*पुष्कर रेस्क्यू कमेटी* 🙏🙏