06/04/2026
20वीं शताब्दी के महान संत महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की रचनाओं की संक्षिप्त जानकारी एक-एक करके आपके सामने रखने का प्रयास कर रहा हूं। आशा है कि आपको यह सीरीज पसंद आएगा। इस सीरीज का शुभारंभ "सत्संग-योग" से कर रहा हूं जो गुरु महाराज की अमर कृति है।
मानव - कल्याणार्थ महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने आत्मिक बल के आधार पर कुछ पुस्तकों की रचना की। इसके साथ-साथ कुछ धार्मिक पुस्तकों का टीका लिखकर सर्वसाधारण लोगों के लिए भी सुलभ कर दिया। उनकी एक रचनात्मक पुस्तक चार भागों में है। प्रथम भाग में वेद,उपनिषद,अध्यात्म रामायण, श्रीमद् भागवत गीता,श्रीमद्भागवत,महाभारत,दुर्गासप्तसती,शिव-संहिता, ज्ञान संकललिनी तंत्र, उत्तरगीता, स्कंद पुराण,मनुस्मृति आदि का संग्रह है।द्वितीय भाग में 50 संतों की वाणियों का संग्रह है।तृतीय भाग में कुछ विद्वानों एवं महात्माओं के उत्तम से उत्तम वचनों का संग्रह और चतुर्थ भाग में अपनी समाधि साधनाओं द्वारा की गई अनुभूतियों की चर्चा है जिसका ठीक से अध्ययन मनन करने से आध्यात्मिक ज्ञान की पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है।इस पुस्तक का नाम है "सत्संग-योग" जो सबके लिए पठनीय है। आपने लोक-कल्याण के लिए चारों वेदों का अध्ययन-मनन कर तथा साधना जनित अनुभूतियों के आधार पर संतों की वाणियों के मेल से एक पुस्तक की रचना की जिससे लोगों के मन का यह संदेह मिट जाए कि वेद मत और संतमत अलग नहीं, बल्कि दोनों का एक ही मत है।महर्षि मेंहीं ने यह पुस्तक लिखकर इस खाई को सदा के लिए पाठ दिया। इस पुस्तक का नाम है - "वेद दर्शन योग"।
बोलिए श्री सदगुरु महाराज की जय...
Maharshi Menhi Gyan Sagar
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