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यह पेज चोरी हो चुका है। भारत-नेपाल हिन्दुराष्ट्र प्रचार प्रकल्प
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26/08/2026

महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के एनिमेशन फिल्म विवाद पर पुरी गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का बड़ा बयान! शास्त्रों के विरुद्ध देवी-देवताओं के मनगढ़ंत व विकृत (कार्टून) स्वरूप और अप्रामाणिक लीलाओं के प्रसारण पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban) लगाने की मांग। ऋग्वेद व गोपाल सहस्रनाम का हवाला देते हुए इसे बताया जघन्य अपराध। देखिए UBC NEWSपर शंकराचार्य जी का यह कड़ा संदेश।

#हिन्दूराष्ट्र #गो_हत्या_बंद

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26/08/2026

धर्म और राष्ट्र पर विदेश व राजनीतिक षड्यंत्रों की चेतावनी-श्री शङ्कराचार्यजी, श्रीगोवर्धनमठ-पुरीपीठ।

https://youtube.com/shorts/jZFy6_yI_oA?si=5gdGV7PGbqfEqNCi

अब व्यासगद्दी पर भी विदेशी षड्यंत्रकारियों का आधिपत्य हो चुका है। व्यासगद्दी भी चरभरा जाएगी, राजगद्दी भी चरमरा जाएगी। देश गुलाम होगा, ऐसी गुलामी की स्थिति ना आवे, मैं संकेत करना चाहता हूँ। भारत आज क्रिश्चियन तंत्र, मुस्लिम तंत्र, कम्युनिस्ट तंत्र के अधीन है। कभी एक के अधीन था, तीन-तीन के अधीन है। इतना षड्यंत्र है, इतनी व्यूहरचना है, हिंदू समझ भी नहीं सकते कि कहाँ-कहाँ से उन पर आघात हो।
​और कोई संत अगर हो, मुझे बहुत प्रसन्नता होगी, जिनपर भाजपा की मुहर ना लगी हो, कांग्रेस की मुहर न लगी हो, सपा की मुहर न लगी हो, वो राष्ट्र को बचा सकते हैं।
​मैं वेदनापूर्वक कहता हूँ, आडवाणी जी ने मेरी बात नहीं सुनी, वाजपेयी जी ने मेरी बात नहीं सुनी और मुझको नष्ट करने का अभियान करते-करते रसातल में नरसिंह राव पहुँच गए।

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में आरक्षण का पूर्ण पक्षधर हुँ लेकिन एक सेमिनार या संगोष्ठी होना चाहिए । आरक्षण का सर्वोत्कृष्ट स्वरूप क्या हो सकता है ?...
26/08/2026

में आरक्षण का पूर्ण पक्षधर हुँ लेकिन एक सेमिनार या संगोष्ठी होना चाहिए । आरक्षण का सर्वोत्कृष्ट स्वरूप क्या हो सकता है ?और आरक्षण का सबसे विप्लव पूर्ण घातक स्वरूप क्या हो सकता है ? इसपर विचार किया जाय । हर व्यक्ति की जीविका जहाँ जन्म से आरक्षित हो वह आरक्षण की सर्वोत्कृष्ट विधा है । उसी का नाम सनातन वर्ण आश्रम धर्म है जिससे आजकल सबको परहेज है। जिनको कहा जाता है कि आर्थिक दृष्टि से बिपन्न बनाया गया सारे कुटीर उद्योग लघु उद्योग उन्ही के द्वारा क्रियान्वित होते थे। आरक्षण की वह व्यवस्था सबसे उत्तम मानी जाती है । जो जन्म से आरक्षित हो।
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पुरी शंकराचार्य महाभाग

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26/08/2026

व्यासपीठ, मार्गदर्शन और राष्ट्र-हित-श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्यजी, श्रीगोवर्धनमठ-पुरीपीठ।

https://youtu.be/V0fW6ijSH7s?si=oSxomY9nnRikgOq-

​"अब व्यावहारिक धरातल पर मैं एक तथ्य वेदनापूर्वक प्रकट करना चाहता हूँ, सावधान।
​अंग्रेजों की कूटनीति यह रही कि व्यासपीठ जो सनातन परंपरा से प्राप्त थी, आचार्य का पद जो सनातन परंपरा से प्राप्त था, उसे विकृत किया जाए, उसकी उपेक्षा की जाए। राजनेता ही व्यासपीठ के दायित्व को भी मानो अपना लें।
​यह कूटनीति अंग्रेजों की थी, उस पर ध्यान आपका केंद्रित हो, यह बहुत आवश्यक है। इस कल्प में हमारी गुरु परंपरा श्रीमन्नारायण से लेकर अब तक 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 हजार 120 वर्षों की है। भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य महाभाग को लेकर ही विचार करें तो उनका प्रादुर्भाव ईस्वी सन से 507 वर्ष पूर्व हुआ।
​इस गोवर्धनमठ पूरीपीठ की स्थापना के 2504 वर्ष पूर्ण हो जाते हैं वैशाख शुक्ल दशमी के दिन। इतनी प्राचीन हमारी परंपरा थी। मैं एक संकेत करना उचित समझता हूँ, देवराज इंद्र कोई सामान्य व्यक्ति नहीं होते हैं। दिव्यता की पराकाष्ठा जब किसी व्यक्ति में होती है, तब वह देह त्याग के बाद देवराज इंद्र के पद को प्राप्त करता है।
​लेकिन उन देवराज इंद्र को भी बृहस्पति का मार्गदर्शन अपेक्षित रहता है। साथ ही साथ विरोचन आदि को भी शुक्राचार्य का मार्ग अपेक्षित रहता है। कहीं शुक्राचार्य जी विरोचन आदि की उपेक्षा कर दें, तो दैत्य, दानव, असुर अपने अस्तित्व की रक्षा करने में समर्थ नहीं होते। कहीं देवगुरु बृहस्पति का स्वस्थ मार्गदर्शन देवराज इंद्र को सुलभ न हो, तो देवराज इंद्र भी सुरक्षित नहीं रहते।
​लेकिन स्वतंत्र भारत में कूटनीति चली गई कि राजनेता ही व्यासपीठ का दायित्व भी संभाल लें। मैंने केवल संकेत किया—एक राजनेता को संत के रूप में उत्कृष्ट महात्मा के रूप में ख्यापित किया गया। उसके बाद में अब तक यह बीमारी चल रही है कि व्यासपीठ को अन्यथा सिद्ध करने के लिए, व्यासपीठ के आचार्यों की उपयोगिता को विलुप्त करने के लिए संतों का उपयोग अपने-अपने दल के प्रचार में किया जा रहा है।
​कोई भी स्वस्थ प्रधानमंत्री अब तक नहीं हुए, जिनके हृदय में इस रहस्य को प्रकट करने की भावना हो कि व्यासपीठ को असुरक्षित करके, दिशाहीन करके, व्यासपीठ के सदस्यों को अपना अनुगामी बनाकर राष्ट्र का उत्कर्ष नहीं हो सकता। मैंने संकेत किया।
​यह कूटनीति इस समय भी ज्यों की त्यों विद्यमान है। कोई ऐसा संत न हो, कोई ऐसा आचार्य न हो, कोई ऐसा विचारक न हो, जो धर्म और दर्शन के आधार पर विश्व को स्वस्थ मार्गदर्शन देने वाला न रह जाए। जो ऐसा न हो कि राजनीति का जो अभी दिशाहीन प्रकल्प है, उससे उत्कृष्ट सिद्ध हो जाए, वह दिशा देने में समर्थ हो जाए।
​छल-बल, डंके की चोट से कितने ही ऊँचे राजनेता हों, उनके मन में यह भीषिका पली है। क्योंकि मनु आदि शास्त्र सम्मत सिद्धांत को जो जानता है, उसके सामने विश्व की कोई शक्ति टिक नहीं सकती। थोड़ा इतिहास को परखिए, मैं स्पष्ट शब्दों में कह देना उचित समझता हूँ..."

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26/08/2026

सवा लाख साधकों का दिव्य संकल्प

प्रतिदिन भगवद् भजन का संकल्प-श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्यजी, श्रीगोवर्धनमठ-पुरीपीठ।

https://youtube.com/shorts/5g5wtgq0NDk?si=51DMlhsP0A5adUWq

एक भावना व्यक्त करता हूँ। पूरे विश्व में कम से कम सवा लाख व्यक्ति हमारे संस्थान से संपर्क स्थापित करें और वे जीवन में 15-15 मिनटों तक सही, 5 बार भजन का व्रत लें। 40 दिनों तक अनुष्ठान का व्रत लेने पर, उनके जीवन में जो दिव्य ऊर्जा की अभिव्यक्ति होगी, वह विश्व के लिए एक उज्ज्वल इतिहास का रूप धारण कर सकेगी।
​और मैं समझता हूँ कि पूरा विश्व स्वस्थ क्रांति के बल और वेग से उद्भासित होगा। विश्व का हृदय जो भारतवर्ष है, उसकी दिशाहीनता विश्व की दिशाहीनता में हेतु है। भारत में भव्यता का उदय हो, भारत भव्य रूप से अपने अस्तित्व और आदर्श की रक्षा कर सके, इसके लिए आवश्यक है कि करोड़ों व्यक्ति भव्य भारत की भावना से—भारत भव्य हो, सब के हित में इसका उपयोग और विनियोग हो—भजन का व्रत लें।
​और हमारे यहाँ संपर्क साध कर उसकी सूचना दें, मुझे बहुत प्रसन्नता होगी। मैं समझता हूँ प्रथम चरण में कम से कम सवा लाख व्यक्ति सवा घंटे प्रतिदिन भजन का व्रत लेंगे। 15-15 मिनटों तक 5 बार भजन का वेग और बल रहेगा, तो हमारा जीवन अपने हित में और अन्यों के हित में प्रयुक्त और विनयुक्त हो सकेगा। नारायण!

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25/08/2026

शब्द की शक्ति और आध्यात्मिक विकास-श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्यजी, श्रीगोवर्धनमठ-पुरीपीठ।

https://youtube.com/shorts/KEdNAVkF_5U?si=bYOCwMPPcOrBZTlz

​जय जय राम!
​मुझे प्रसन्नता इस बात को लेकर है कि हम लोग जो बोलते हैं... पहले व्यक्ति मनोबल कमजोर करने का प्रयास करते थे। यह जो मशीन का युग उतना नहीं था या हमारे पास यह सब सामग्री नहीं के बराबर थी, कि आप जो बोलते हैं सिर्फ सिर से ऊपर चला जाता है, प्रायः लोग यही कहते थे।
​लेकिन हमने धैर्य नहीं तोड़ा, हम बोलते रहे। उसका प्रभाव यह पड़ा कि यंत्र के माध्यम से या सीधे जो हम लोगों की बात सुनते हैं, उनका बौद्धिक स्तर बढ़ गया। वह जो प्रश्न करते हैं, दूसरा नहीं कर सकता।
​तो इसका अर्थ है अगर हम धैर्य तोड़ देते, तो विश्व में हजारों व्यक्तियों का बौद्धic स्तर आध्यात्मिक जगत में नहीं बढ़ता।
​अभी कुछ महीने पहले हम होशियारपुर गए। 11 साल की एक बच्ची ने जो प्रश्न कर दिया, सब चौंक गए। वह हमारे प्रवचन को सुनती है यंत्रों के माध्यम से। हमने क्या संकेत किया? नाचना-गाना भगवान को लेकर, सब काम का मैं समर्थन करता हूँ, पूरा सनातन धर्मी। लेकिन हम भी अगर अपना स्तर वैसे बनाकर रखते, तो विश्व में हजारों व्यक्तियों का बौद्धिक स्तर नहीं बढ़ता।
​बौद्धिक स्तर बढ़ा है, विचार का स्तर बढ़ा है, तो उनके जीवन में भी आचरण का स्तर, दिव्यता का स्तर बढ़ ही रहा है।

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25/08/2026

आरएसएस, भाजपा और वैचारिक विरोधाभास पर विचार

-श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्यजी, श्रीगोवर्धनमठ-पुरीपीठ।

https://youtube.com/shorts/i5_LJTlpOug?si=7nepPgX9_S2PsbAE

​मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (विश्व हिंदू परिषद/आरएसएस का अंग): स्वामी जी बताते हैं कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच आरएसएस की ही एक शाखा है और इसके इंद्रेश जी को लोग भली-भांति जानते हैं।
​विरोधाभास और असफलता: वे कहते हैं कि जिन लोगों से परहेज की बात की जाती है, उन्हें ही संगठन में शामिल किया जा रहा है, जिससे अपनों के बीच ही विफलता का सामना करना पड़ता है।
​भाजपा में पद और वैवाहिक संबंध: स्वामी जी का कहना है कि वाजपेयी जी के समय से ही भाजपा में ऐसे लोगों को ऊंचे पदों पर बैठाया जाता रहा है जिन्होंने ब्राह्मण परिवारों में शादियां की हैं।
​आरएसएस के नेताओं पर टिप्पणी: वे आरएसएस के कई नेताओं के पारिवारिक संबंधों और विरोधाभासों की ओर संकेत करते हुए बताते हैं कि स्थिति काफी विचित्र है।

राष्ट्रवादी मुस्लिम मंच (मुस्लिम राष्ट्रीय मंच) तो आरएसएस की शाखा है। इंद्रेश जी से आप परिचित हैं। जिनसे आप परहेज करते हैं, वे तो आरएसएस में भर्ती किए जा रहे हैं। तो आपको तो अपने घर से ही पहले मुंह की खानी पड़ेगी। समझ गए या नहीं?
​आप जो... अच्छा! आप समर्थक हैं भाजपा के, बुरा मत मानो। लेकिन बिहार का अमुक-अमुक-अमुक... नाम नहीं लूंगा। भाजपा में वही मुसलमान सज्जन बहुत ऊंचे पद पर लाए जाते हैं, जिन्होंने ब्राह्मण की बेटी से शादी की है। वाजपेयी जी के समय से लेकर अब तक यह प्रथा है।
​तो सबसे पहली बात है कि आप मुसलमानों से संघर्ष करने जा रहे हैं, या आरएसएस और राष्ट्रवादी मुस्लिम मंच से संघर्ष करने जा रहे हैं? आरएसएस के कई नेता आपको मिल जाएंगे—जिनकी बेटी कहां गई, और जिनके घर में कौन बहूरानी होकर आई। तो बात तो बहुत विचित्र है, इसीलिए मैं जो उपाय बताता हूं...

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25/08/2026

राजनीति और धर्म: गौरक्षा पर राजनेताओं को कड़ा संदेश

https://youtube.com/shorts/FUIA3bqpIQk?si=c72jTN9hZfFoktSy

आज के प्रवचन को विराम देता हूँ। आज पाकिस्तान है ना कोई देश?
​आपत्ति पड़ने पर... जो मर गए-मर गए, गाज़र-मूली की तरह काट दिए गए। सारी संपत्ति छोड़कर भागनी पड़ी कि नहीं?
​आपकी आँखें खुल जाएँगी स्वतंत्र भारत में। केसर के बागान को छोड़कर के हिंदुओं को भागना पड़ा या नहीं? लो जी केसर के बागान! केवल धन बटोरने तक रहेंगे, समाज की सेवा में धन का उपयोग नहीं करेंगे, वह धन छोड़ के भागना पड़ेगा। केसर के बागान छोड़कर के स्वतंत्र भारत में भागना पड़ा।
​स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्रियों ने 14 बार देश का विभाजन किया। मेरे पास सारी सूची है। स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्रियों ने 14 बार देश का विभाजन किया ढाई बीघा तक। इसका अर्थ... इसका अर्थ क्या है? दो बिंदु हम रखते हैं, प्रवचन को विराम देते हैं।
​गोवंश की हत्या में गुप्त या प्रकट जिस राजनीतिज्ञ का हाथ है, उसको बहिष्कृत कीजिए। मानवता का विद्रोही बनाइए।
​गौरक्षकों को 'गुंडे' कहने वाले जो राजनेता हैं, उनको कहिए 'धिक्कार!' तुम्हारे नाम पर, तुम्हारी माता, तुम्हारे पिता सब पर धिक्कार!
​सुप्रीम कोर्ट से कहलवाया गया—'गौरक्षक गुंडे!' हम उस देश में रह रहे हैं जहाँ सुप्रीम कोर्ट, उच्चतम न्यायालय जिसको कहते हैं, उससे दो बार कहलवाया गया—'गौरक्षक गुंडे!' एक प्रधानमंत्री ने कहा—'गौरक्षक गुंडे!' वो हत्यारे हो गए, गुंडे नहीं? और गौरक्षक हो गए 'गुंडे'?
​उस देश में हम रहते हैं जहाँ के प्रधानमंत्री और जहाँ का न्यायालय कहता है—'गोहत्यारे... गौरक्षक गुंडे!' इसका अर्थ क्या है? वो जानते हैं कि हिंदुओं से कोई खतरा नहीं है। वोट देते समय हमको देंगे ही!
​नहीं! उनको मालूम होना चाहिए कि अगर आपने मान-बिंदुओं का अतिक्रमण किया, मर्यादा का अतिक्रमण किया, हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाने का... इनकी आस्था के केंद्र गोवंश को नष्ट करने का प्रयास किया, जनता फेंक देगी! जनता स्वीकार नहीं करेगी!
​इनको बाध्य कीजिए, अपना जीवन इतना बुलन्द कीजिए—आध्यात्मिक और आदर्श की रक्षा में जिनकी सहभागिता हो, वही मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रपति आज बनें।"

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25/08/2026

वैदिक आरक्षण और भारत का प्रामाणिक इतिहास

हरिश्चंद्र को काशी जैसे नगरी में अगर सब धन ब्राह्मण, क्षत्रियों के पास ही था, वैश्य के पास तो जिनको पुरानी भाषा में डोम, आजकल की भाषा में अंत्यज विशेष कहते हैं, खरीदा या नहीं? उनके यहाँ हरिश्चंद्र ने नौकरी की या नहीं? अगर आर्थिक दृष्टि से समझ गए वह परिवार गया-गुज़रा होता तो हरिश्चंद्र वहाँ नौकरी कैसे करते? माने कितना लाखों वर्ष प्राचीन हमारा इतिहास है। अब यह कहें गप है, ऐसे नहीं। उन्हीं के वंशधर आज भी काशी में हरिश्चंद्र घाट, मीरघाट दो श्मशान हैं। दोनों श्मशान पर टैक्स लेने का, कर लेने का अधिकार हरिश्चंद्र जिनके यहाँ नौकरी करने के लिए विवश हुए थे, उनके वंशधर को प्राप्त है। आज भी वह मुँह माँगी दक्षिणा लेते हैं, समझ गए।
​तो सबसे पुराना हमारा इतिहास वह है, नया इतिहास—जब देश का विभाजन हुआ, यदि सचमुच में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्यों ने उन सब को रौंदा होता, समझ गए, रौंदा होता तो कम से कम पाकिस्तान में रहकर मुसलमान बनकर के आरामपूर्वक रहने का उनको अवसर प्राप्त था। वह छोड़ के भारत में दलित जिनको कहते हैं या हरिजन जिनको कहते हैं या अंत्यज जिनको कहते हैं या चौथे-पाँचवें कॉलम के व्यक्ति जिनको कहते हैं, वही होकर यहाँ रहने के लिए आए या नहीं? अगर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्यों ने सचमुच में अन्याय किया होता तो पाकिस्तान में रहकर के वह मुसलमान बनकर के राज्य करते। फिर वह पाकिस्तान छोड़ करके भारत में दलित कहें, हरिजन कहें, अंत्यज कहें, शूद्र कहें, वह होकर रहने के लिए आए या नहीं? विदुर जी का सम्मान था या नहीं? धर्मव्याध का सम्मान था या नहीं हमारे यहाँ?

#हिन्दूराष्ट्र #गो_हत्या_बंद #मनुस्मुर्ती

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25/08/2026

सनातन परंपरा, शासन तंत्र और राष्ट्र का कल्याण

https://youtube.com/shorts/MSH6xd6Dtyk?si=RkWROu-0uahFAsW7

​थोड़ा विचार कीजिए, 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 हजार 118 वर्षों से जो हमको ज्ञान-विज्ञान की परंपरा प्राप्त है, उसका विलोप हो जाने पर इससे अधिक क्षति विश्व की कुछ हो सकती है क्या? इधर किसी राजनीतिक दल का ध्यान है क्या?
​यहाँ तक षड्यंत्र चल रहा है कि जो किसी राजनीतिक दल का एजेंट नहीं बनेगा, यंत्र नहीं बनेगा, उसको कुचल दिया जाएगा। वे पोप महोदय को कुचलते नहीं, क्षपित करते हैं। और हम? परंपरा प्राप्त आचार्य को कुचलने का प्रयास करते हैं।
​आज आचार्य चाहिए तो भाजपाई, कांग्रेसी, सपाई, बसपा-ई! आप अपने कार्यकर्ताओं को संत और शंकराचार्य बनाकर घुमाओगे, आपका कल्याण कैसे होगा, राष्ट्र का कल्याण कैसे होगा?
​इसलिए, राजनेताओं के व्यामोह को समझकर बुलंद स्वर से विचार करना चाहिए कि भारत के हित में राजनीतिज्ञ कदम उठावें। और न उठावेंगे तो व्यासपीठ की वह क्षमता होती है, व्यासपीठ का अधिकार होता है, व्यासपीठ में वह बल और वेग होता है... अगर शासन तंत्र अपने शोधन का मार्ग नहीं निकालता, तो आचार्यों का दायित्व होता है—परंपरा प्राप्त उनमें बल और वेग होता है कि क्या? शासन तंत्र का शोधन करें।
​व्यासपीठ को विकृत भी शासन तंत्र के द्वारा किया गया है और शासन तंत्र तो विकृत होकर रसाततल तक पहुँचने की स्थिति में है। इसलिए व्यासपीठ का शोधन हो, शासन तंत्र का शोधन हो, दोनों में सैद्धांतिक सामंजस्य के द्वारा भारत, भारत के रूप में पुनः उद्भासित हो, सकल विश्व में भारत एक आदर्श राष्ट्र के रूप में उद्भासित हो, इस भावना के साथ...

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