23/04/2023
◆●◆● मधुर स्मृतियाँ ●◆●◆
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आज दर्शन करते हैं उस उद्गम स्थान के जो शायद इस समूह में से कई धर्मावलम्बियों को प्राप्त नहीं हुए हों।
इन १० वर्षों (२०१२ से प्रारम्भ) से अधिक समय में खराड़ी में धर्म प्रभावना इस उच्च स्तर पर पहुंचेगी इसकी शायद कल्पना नहीं थी।
चित्र १ : वर्ष २०१२ में श्री जी का खराड़ी की धरा पर आगमन। मुनि श्री १०८ नियम सागर जी द्वारा प्रतिष्ठित आदि प्रभु की प्रतिमा चांदनी चौक स्थित मंदिर जी से खराड़ी में चैत्यालय में विराजित की गई। एक सामान्य सी वेदी पर सुशोभित श्री १००८ आदिनाथ भगवान् का तेज आज भी वही है जैसा की १० वर्ष पूर्व था।
चित्र २ (ऊपर से दाएं की ओर) : अगस्त २०१२ में वीरोदय के निर्माण का तत्कालीन चित्र (A बिल्डिंग )
चित्र ३ (नीचे बाएं में प्रथम) : चित्र उस स्थान का है जहाँ अभी मंदिर जी विराजमान है।
चित्र ४ (नीचे बीच में) : श्रावक / श्राविका मंदिर जी में धर्मध्यान में लीन।
चित्र ५ (सबसे नीचे बाएं) : चैत्यालय स्थापना / प्रथम दसलक्षण पर्व की आमंत्रण पत्रिका
कोई अतिश्योक्ति नहीं कि इस स्थान ने अनेकों के जीवन को एक नया मोड़ दिया।