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10/02/2024

पैसे की तंगी से पढ़ाई बहुत लोगों ने छोड़ दी लेकिन बीड़ी, सिगरेट, दारू, गांजा किसी ने नहीं छोड़ा।

29/01/2024

तथाकथित राष्ट्रपिता के वध के पश्चात् हुए दंगों में मारे गये निरपराध
चित्पावन ब्राह्मण समाज के भारतीयों को सादर
🥹😭अश्रुपुरित आदरांजलि🥺😭

22/01/2024

हम धन्य हैं जो मंदिर निर्माण और प्रभु की प्रतिष्ठा पूजन देख रहे हैं
अन्यथा हमारे पूर्वजों ने केवल मंदिर गिरते ही देखे हैं
जिसकी वजह से ये सब सिद्ध हुआ उसे भूलिएगा मत

आज के श्रृंगार मातारानी के
20/09/2019

आज के श्रृंगार मातारानी के

14/12/2018

सुप्रभात

08/09/2017

शुभ प्रभात मित्रों,

अब समय आ गया है आप को ज्योतिष के माध्यम से कष्टों से छुटकारा मिल सके उसका उपाय क्या है कैसा है सब समझाने का।

अतिरुद्र अनुष्ठान की कुछ झलकियां
03/08/2017

अतिरुद्र अनुष्ठान की कुछ झलकियां

06/03/2017

शिव लिंग विशेष
🌻🌻🌼🌻🌻

मुस्लिमो और अंग्रेज़ो ने शिवलिंग को गुप्तांग की संज्ञा कैसे दी ?
और अब हम बेवकूफ हिन्दू खुद शिवलिंग को शिव् भगवान का गुप्तांग समझने लगे हे और दूसरे हिन्दुओ को भी ये गलत जानकारी देने लगे हे।
प्रकृति से शिवलिंग का क्या संबंध है
जाने शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है और कैसे इसका गलत अर्थ (मुस्लिमों) ने निकालकर हिन्दुओं को भ्रमित किया।

कुछ लोग शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते हैं..
छोटे छोटे बच्चों को बताते हैं कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा करते हैं।
मूर्खों को संस्कृत का ज्ञान नहीं होता है..और अपने छोटे'छोटे बच्चों को हिन्दुओं के प्रति नफ़रत पैदा करके उनको आतंकी बना देते हैं।संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है।
इसे देववाणी भी कहा जाता है।

*लिंग÷*
लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह, प्रतीक होता है…
जबकी जनर्नेद्रीय को संस्कृत मे *शिश्न* कहा जाता है।

*शिवलिंग÷*
>शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक….

>पुरुषलिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक इसी प्रकार स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक और नपुंसकलिंग का अर्थ हुआ नपुंसक का प्रतीक। अब यदि जो लोग पुरुष लिंग को मनुष्य के जनेन्द्रिय समझ कर आलोचना करते है..तो वे बताये *”स्त्री लिंग ”’के अर्थ के अनुसार स्त्री का लिंग* होना चाहिए।

"शिवलिंग”’क्या है ?
शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है।शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है।
शिव लिंग का अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है और ना ही शुरुआत।

शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता.दरअसल यह गलतफहमी भाषा के रूपांतरण और मुस्लिम ( मलेच्छों यवनों) के द्वारा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने पर।तथा बाद में षडयंत्रकारी अंग्रेजों के द्वारा इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एक ही शब्द के विभिन्न भाषाओँ में अलग-अलग अर्थ निकलते हैं।
उदाहरण के लिए
यदि हम हिंदी के एक शब्द “सूत्र” को ही ले लें तो
सूत्र का मतलब डोरी/धागा गणितीय सूत्र कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता है। जैसे कि नासदीय सूत्र ब्रह्म सूत्र इत्यादि ।
उसी प्रकार “अर्थ” शब्द का भावार्थ : सम्पति भी हो सकता है और मतलब (मीनिंग) भी ।
ठीक बिल्कुल उसी प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से अभिप्राय चिह्न, निशानी, गुण, व्यवहार या प्रतीक है।धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है।तथा कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है। जैसे : प्रकाश स्तंभ/लिंग, अग्नि स्तंभ/लिंग, उर्जा स्तंभ/लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ/लिंग (cosmic pillar/lingam)

ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे हैं: ऊर्जा और प्रदार्थ। हमारा शरीर प्रदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है।
इसी प्रकार शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते हैं।
ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा ऊर्जा शिवलिंग में निहित है। वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है.

The universe is a sign of Shiva Lingam

शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है तथा पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतिक भी है। अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों सामान हैं।

अब बात करते है योनि शब्द पर-
मनुष्ययोनि ”पशुयोनी”पेड़-पौधों की योनी’जीव-जंतु योनि
योनि का संस्कृत में प्रादुर्भाव ,प्रकटीकरण अर्थ होता है....जीव अपने कर्म के अनुसार विभिन्न योनियों में जन्म लेता है। किन्तु कुछ धर्मों में पुर्जन्म की मान्यता नहीं है नासमझ बेचारे। इसीलिए योनि शब्द के संस्कृत अर्थ को नहीं जानते हैं। जबकी हिंदू धर्म मे 84 लाख योनी बताई जाती है।यानी 84 लाख प्रकार के जन्म हैं। अब तो वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि धरती में 84 लाख प्रकार के जीव *(पेड़, कीट,जानवर,मनुष्य आदि) है।

*मनुष्य योनी*
पुरुष और स्त्री दोनों को मिलाकर मनुष्य योनि होता है।अकेले स्त्री या अकेले पुरुष के लिए मनुष्य योनि शब्द का प्रयोग संस्कृत में नहीं होता है। तो कुल मिलकर अर्थ यह है:-

लिंग का तात्पर्य प्रतीक से है शिवलिंग का मतलब है पवित्रता का प्रतीक | दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इस की शुरुआत हुई, बहुत से हठ योगी दीपशिखा पर ध्यान लगाते हैं | हवा में दीपक की ज्योति टिमटिमा जाती है और स्थिर ध्यान लगाने की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करती है। इसलिए दीपक की प्रतिमा स्वरूप शिवलिंग का निर्माण किया गया। ताकि निर्विघ्न एकाग्र होकर ध्यान लग सके | लेकिन कुछ विकृत *मुग़ल काल* व गंदी मानसिकता बाले *गोरे अंग्रेजों* के गंदे दिमागों ने इस में गुप्तांगो की कल्पना* कर ली और *झूठी कुत्सित कहानियां* बना ली और इसके पीछे के रहस्य की जानकारी न होने के कारण अनभिज्ञ भोले हिन्दुओं को भ्रमित किया गया |
आज भी बहुतायत हिन्दू इस दिव्य ज्ञान से अनभिज्ञ है।
हिन्दू सनातन धर्म व उसके त्यौहार विज्ञान पर आधारित है।जोकि हमारे पूर्वजों ,संतों ,ऋषियों-मुनियों तपस्वीयों की देन है।आज विज्ञान भी हमारी हिन्दू संस्कृति की अदभुत हिन्दू संस्कृति व इसके रहस्यों को सराहनीय दृष्टि से देखता है व उसके ऊपर रिसर्च कर रहा है।

*नोट÷* सभी शिव-भक्तों हिन्दू सनातन प्रेमीयों से प्रार्थना है। यह जानकारी सभी को पोस्ट भरपूर मात्रा में इस पोस्ट को शेयर करें।ताकि सभी को यह जानकारी मिल सके।जोकि मुस्लिम और गोरे अंग्रेजों ने षड्यंत्र के तहत फेला दी थी।

🌻🌼सनातन धर्म विजयते🌼🌻

10/02/2017

1.
_*तुलसी इस संसार में, भांति भांति के लोग।*_
_*सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, इस संसार में तरह-तरह के लोग रहते हैं. आप सबसे हँस कर मिलो और बोलो जैसे नाव नदी से संयोग कर के पार लगती है वैसे आप भी इस भव सागर को पार कर लो._

2.
_*आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह।*_
_*तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, जिस स्थान या जिस घर में आपके जाने से लोग खुश नहीं होते हों और उन लोगों की आँखों में आपके लिए न तो प्रेम और न ही स्नेह हो. वहाँ हमें कभी नहीं जाना चाहिए, चाहे वहाँ धन की हीं वर्षा क्यों न होती हो._

3.
_*तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक।*_
_*साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, विपत्ति में अर्थात मुश्किल वक्त में ये चीजें मनुष्य का साथ देती है. ज्ञान, विनम्रता पूर्वक व्यवहार, विवेक, साहस, अच्छे कर्म, सत्य और राम ( भगवान ) का नाम._

4.
_*काम क्रोध मद लोभ की, जौ लौं मन में खान।*_
_*तौ लौं पण्डित मूरखौं, तुलसी एक समान॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, जब तक व्यक्ति के मन में काम की भावना, गुस्सा, अहंकार, और लालच भरे हुए होते हैं. तब तक एक ज्ञानी व्यक्ति और मूर्ख व्यक्ति में कोई अंतर नहीं होता है, दोनों एक ही जैसे होते हैं._

5.
_*दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।*_
_*तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट में प्राण॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, धर्म का मूल भाव ही दया हैं और अहम का भाव ही पाप का मूल (जड़) होता है. इसलिए जब तक शरीर में प्राण है कभी दया को नहीं त्यागना चाहिए._

6.
_*तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर।*_
_*बसीकरन इक मंत्र है, परिहरू बचन कठोर॥*_
अर्थ : _तुलसीदासजी कहते हैं, मीठे वचन सब ओर सुख फैलाते हैं. किसी को भी वश में करने का ये एक मन्त्र है इसलिए मानव को चाहिए कि कठोर वचन छोड़कर मीठा बोलने का प्रयास करे._

7.
_*तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए।*_
_*अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, भगवान् राम पर विशवास करके चैन की बांसुरी बजाओ. इस संसार में कुछ भी अनहोनी नहीं होगी और जो होना उसे कोई रोक नहीं सकता. इसलिये आप सभी आशंकाओं के तनाव से मुक्त होकर अपना काम करते रहो._

8.
_*तुलसी पावस के समय, धरी कोकिलन मौन।*_
_*अब तो दादुर बोलिहं, हमें पूछिह कौन॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, वर्षा ऋतु में मेंढकों के टर्राने की आवाज इतनी ज्यादा हो जाती है कि, कोयल की मीठी वाणी उनके शोर में दब जाती है. इसलिए कोयल मौन धारण कर लेती है. अर्थात जब धूर्त और मूर्खों का बोलबाला हो जाए तब समझदार व्यक्ति की बात पर कोई ध्यान नहीं देता है, ऐसे समय में उसके चुप रहने में ही भलाई है._

9.
_*सहज सुहृद गुरस्वामि सिखजो न करइ सिर मानि।*_
_*सो पछिताइ अघाइ उर अवसि होइहित हानि॥*_
अर्थ : _स्वाभाविक ही हित चाहने वाले गुरु और स्वामी की सीख को जो सिर चढ़ाकर नहीं मानता, वह दिल से बहुत पछताता है और उसके हित की हानि अवश्य होती है._

10.
_*मुखियामुखु सो चाहिऐ, खान पान कहुँ एक।*_
_*पालइपोषइ सकल अंग, तुलसी सहित बिबेक॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, मुखिया मुख के समान होना चाहिए जो खाने-पीने को तो अकेला है, लेकिन विवेकपूर्वक सब अंगों का पालन-पोषण करता है._

11.
_*तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान।*_
_*भीलां लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण॥*_
अर्थ : _तुलसीदास जी कहते हैं, समय ही व्यक्ति को सर्वश्रेष्ठ और कमजोर बनता है. अर्जुन का वक्त बदला तो उसी के सामने भीलों ने गोपियों को लूट लिया जिसके गांडीव की टंकार से बड़े बड़े योद्धा घबरा जाते थे._

03/11/2016

प्रिय मित्रों
बहुत समय हो गया आप से बात् किये
आज आप को जो वचन दिया की अब सब के हिसाब से मासिक जानकारी दी जायेगी उस पर फिलहाल काम चल रहा है
अभी कुछ समय लगेगा लेकिन निश्चित मानिये सटीक ता निकट होगी

29/09/2016

जय हिंद

29/09/2016

भारत के वीर 3 पुत्र
भारतीय सेना
भारतके इतिहास में पहली बार बे झिझक फैसले लेने वाले हमारे प्रधान मंत्री
और भारत के रक्षा मंत्री जी
सभी को ऐतिहासिक कूटनीतिक और भारतीय सेना के अभूतपूर्व जीत के लिए

हार्दिक बधाई

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Shri Laxmi Mata Mandir, Near Muktangan English School, Shivdarshan
Pune
411009

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