01/10/2026
⚡️जो लोग परम् पूज्य गुरुदेव और केलीकुंज के बारे में अनाप शनाप बोल रहे हैं उनको शोध करके ही बोलना चाहिए , आपकी जानकारी के लिए बता दू कि गुरुदेव भगवान 06 माह पहले से ही केलिकुंज वृंदावन नही रहते है वह 18 किलोमीटर दूर बेलवन अपने नए आश्रम में रहते है। केवल अपने गुरुदेव से मिलने महीने में 01 बार वृंदावन आते है। रसिक बिहारी केलिकुंज में नही रहते थे वह केलिकुंज से 01 किलोमीटर दूर राधा वाटिका मुहल्ले में रहते थे। वह विरक्त सन्त बनने का निर्णय किया था । विरक्त सन्त का परिवार से कोई सम्बन्ध नही रहता है, परिवार यदि सम्पर्क करता है तो उनको या तो विरक्त सन्त छोड़ना होगा या परिवार से दूर जाना होगा। गुरुदेव भगवान के लाखों दीक्षा प्राप्त सन्त है। जिसमे गृहस्थ व विरक्त दोनो है। विरक्त की दीक्षा से पहले 01 वर्ष उनको समझने का समय दिया जाता है फिर एक वर्ष में उनको बार बार केलिकुंज आना होता है जब उनकी निष्ठा पूर्ण हो जाती है तब दीक्षा ने नियम बताया जाता है यदि विरक्त सन्त बनना है तो स्त्री की परछाई से भी दूर रहना होगा, मांस, मदिरा व जुआ का प्रयोग नहीं करना है। यदि वह 02 वर्ष की परीक्षा में यह सिद्ध कर लेते है कि वह इन नियमो का पालन करेंगे तब उनको विरक्त सन्त बनाया जाता है। गुरुदेव भगवान कहते है कि काम वासना की वेदना बहुत भयानक होती है उसको तुम बर्दाश्त कर सको तभी विरक्त सन्त बनो, वरना गृहस्थ सन्त बनकर रहो। अब दुलारी महराज की क्या समस्या हुई वह तो पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा। इसलिए गुरुदेव भगवान का नाम लेकर अनावश्यक बोलना मुझको उचित नही लगता। जो घटना हुई वह दुलारी महराज की व्यक्तिगत समस्या है । उसको सम्पूर्ण व्यवस्था से जोड़ना गलत है। श्री हरिवंश 🙏