Hamdi Educational Trust -Islamic Education Board

Hamdi Educational Trust -Islamic Education Board We are working for bring to changing in our society. we hope we will achieve our target with the help of our best wishers and team members.

A Step Towards Changing

18/07/2023
شیخ پورہ کے لال محمد رومان اشرف بہار بورڈ کی 10ویں کلاس میں بہار ٹاپر بنے، 489 نمبر (%97.8) حاصل کر کے اپنے خاندان کا نا...
01/04/2023

شیخ پورہ کے لال محمد رومان اشرف بہار بورڈ کی 10ویں کلاس میں بہار ٹاپر بنے، 489 نمبر (%97.8) حاصل کر کے اپنے خاندان کا نام روشن کیا، رومان کے ساتھ تمام کامیاب طلباء و طالبات کو مبارکباد اور نیک خواہشات۔

बिहार बोर्ड के 10वीं में शेखपुरा का लाल मुहम्मद रूमान अशरफ बना बिहार टॉपर, 489 अंक(97.8%) लाकर अपने परिवार का नाम किया रौशन, रूमान के साथ साथ सभी कामयाब होने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाए

21/03/2023

बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल सभी छात्र छात्राओं को मुबारकबाद एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामनाएँ करता हूँ।

भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के पुण्य तिथि पर उन्हें खिराजे अकीदत पेश करते हैं।“अगर तुम सिर्फ़ अपने लिए ज़िंदा हो तो...
22/02/2023

भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के पुण्य तिथि पर उन्हें खिराजे अकीदत पेश करते हैं।
“अगर तुम सिर्फ़ अपने लिए ज़िंदा हो तो इसका मतलब यही है कि तुम अपनी क़ौम(राष्ट्र) के लिए ज़िंदा लाश हो:आज़ाद”।

Heartily congratulations on the great occasion of republic day. 🇮🇳
26/01/2023

Heartily congratulations on the great occasion of republic day. 🇮🇳

For your attention
11/01/2023

For your attention

यूपी के मिर्जापुर की रहने वाली सानिया मिर्जा ने इतिहास रच दिया है. सानिया ने NDA एग्जाम पास करके देश की पहली मुस्लिम महि...
23/12/2022

यूपी के मिर्जापुर की रहने वाली सानिया मिर्जा ने इतिहास रच दिया है. सानिया ने NDA एग्जाम पास करके देश की पहली मुस्लिम महिला फाइटर पायलट बनने की तरफ कदम बढ़ा दिया है. टीवी मकैनिक शाहिद अली की बेटी सानिया 27 दिसंबर से NDA जॉइन करेगी और फिर वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर प्रशिक्षण लेगी.

बहुत बहुत मुबारक हो ।

अंग्रेजी शासन से देश को आज़ाद कराने के लिए हंसते−हंसते फांसी का फंदा चूम कर अपने प्राण की आहुति देने वाले अशफ़ाक़ुल्लाह ...
22/10/2022

अंग्रेजी शासन से देश को आज़ाद कराने के लिए हंसते−हंसते फांसी का फंदा चूम कर अपने प्राण की आहुति देने वाले अशफ़ाक़ुल्लाह खान जंग−ए−आजादी के महानायक को उनकी ज्यांति पर खिराजे अकीदत पेश है।

انگریزوں سے ملک کو آزاد کرانے کیلئے پھانسی کا پھندا چوم کر جان نچھاور کر دینے والے تحریک آزادی کے عظیم مجاہد شہید وطن اشفاق اللہ خان کو انکی یوم ولادت پر خراج تحسین پیش کرتے ہیں۔

We are happy to announce that Hamdi Educational and Welfare Trust has been awarded 🏆 with "Special jury award of the yea...
21/08/2022

We are happy to announce that Hamdi Educational and Welfare Trust has been awarded 🏆 with "Special jury award of the year" by Association of Muslim Professionals .
We are committed to our vision and mission. And will work as a same for our society and our nation.

Thanks to Association of Muslim Professionals for appreciate us.
https://drive.google.com/drive/folders/18CgeL_OUSJpApvuT8QmvTIz5o1_LV1Il

अल्लामा फज़ले हक खैराबादी ( 1797 - 1861 )  वे प्रथम स्वतंत्रता-संग्राम 1857 की क्रांति के क्रांतिकारी एवं तर्कशास्त्री, ...
14/08/2022

अल्लामा फज़ले हक खैराबादी ( 1797 - 1861 ) वे प्रथम स्वतंत्रता-संग्राम 1857 की क्रांति के क्रांतिकारी एवं तर्कशास्त्री, उर्दू, अरबी व फारसी के प्रसिद्ध शायर थे।

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हक का जन्म 1797 ई• में उत्तर प्रदेश के ज़िला सीतापुर के खैराबाद में हुआ था। उन्होंने शिक्षा दीक्षा धार्मिक रीति रिवाज़ो से प्राप्त की।

शिक्षा समापन के बाद वह खैराबाद में अध्यापन कार्य करने लगे और फिर 1816 ई• में उन्नीस साल की उम्र में दिल्ली ब्रिटिश सरकार में नौकरी करने लगे।

लेकिन एक ऐसा समय आया जब उन्होंने अंग्रेजों की नौकरी नहीं करने का मन बना लिया और 1831 में सरकारी नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ना के बाद वह दिल्ली के मुगल दरबार में कामकाज देखने लगें और शायरों की महफिल से वाबस्ता होने लगे।

1857 के दौर में जब ईस्ट इंडिया कंपनी के ज़ुल्मों की हद हो गई और हिन्दुस्तान के राजा महाराजा तथा नवाबों की रियासतों को हड़पना चाहा तो सभी राजा महाराजाओं तथा नवाबों और मौलवियों द्वारा अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने का प्रयास किया गया और ज़बरदस्त विद्रोह की योजना बनाई गई। जिसका नेतृत्व क्रांति के महानायक मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर द्वारा किया गया और अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी ने उनके साथ मिलकर अहम भूमिका निभाई।

अल्लामा फज़ले हक द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ जेहाद का फतवा देकर मुस्लिम समुदाय से अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में शामिल होने की अपील की। जिसका लाभ मुगल सम्राट और अन्य विद्रोही नेताओं को मिला।

मौलाना द्वारा फतवा जारी करने के बाद से ही अंग्रेजी प्रशासन द्वारा उनकी तलाश शुरू कर दी गई। क्रांति असफल हो जाने के बाद मौलाना बचते बचाते दिल्ली से खैराबाद तशरीफ ले आये। खैराबाद में अंग्रेजों को भनक लग गई। 30 जनवरी 1859 को उन्हें खैराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया।

खैराबाद से उन्हें लखनऊ सेशन कोर्ट लाया गया और वहां उन पर मुकदमा चलाया गया। इस मुकदमें की पैरवी के लिए उन्होंने कोई वकील नियुक्त नहीं किया बल्कि मुकदमे की पैरवी उन्होंने खुद की। मौलाना पर अंग्रेजों के खिलाफ जेहाद का फतवा देने और लोगों को विद्रोह के लिए उकसाने, भड़काने के संगीन आरोप लगाये गये।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने जुर्म को कुबूल किया पर झूठ नहीं बोला और कहा -- हॉ वह फतवा सही है, वह मेरा लिखा हुआ था और आज भी मैं इस फतवे पर कायम हूं।

आरोपो को कुबूल करने के बाद उन्हें काले पानी की सज़ा सुनाई गई और सारी ज़ायदाद ज़ब्त करने का आदेश दिया गया। अंडमान-निकोबार ( सेलूलर जेल ) में ही 20 अगस्त 1861 में उनका देहांत हो गया। थे

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