03/09/2025
58वें #उर्से_शराफ़ती_के_मौके_पर खुसूसी_पेशकश
कल बेरोज जुमेरात 4 सितम्बर 2025 सुबह 11 बजे कुल शरीफ़ होगा।
िबला_शाह_शराफ़त_अली_मियाँ
#रहमतुल्लाह_अलैह
किसी बुजुर्ग का क़ौल है कि सख़ावत वो नही है की आपके पास खज़ाना है , या दौलत का अंबार है तो तुम उसमें से कुछ ख़ुदा की राह में खर्च करो । बल्कि सख़ावत वो है कि तुम सब कुछ ख़ुदा की राह में दे दो और अपने लिए कुछ न छोड़ो............
ऐसी सख़ावत का मुताहमिल कोई अल्लाह का फ़क़ीर ही हो सकता है कोई बादशाह नही हो सकता। और उसकी मिसाल इससे बेहतर किया हो सकती है । कि हज़रत किबला शाह शराफत अली मियाँ र0 अ0 की वालिदा मोहतरमा ने िबला_शाह_शराफत_अली_मियाँ_र0_अ0
के लिए एक नया लिहाफ इस ख़याल से बनाया की आप जब ककराला शरीफ आया करेंगे तो ओढ़ लिया करेंगे । मगर आप जब ककराला आये तो नमाज़े मग़रिब के बाद मस्जिद से निकलते हुए एक ज़रूरतमंद ने आपसे अर्ज़ किया कि हुज़ूर सर्दियों की रातों में बड़ी बेचैनी होती है
कियूंकि मेरे पास कुछ ओढ़ने के लिए नही है
आप उसकी फरियाद सुनकर घर तशरीफ़ लाये और वो लिहाफ उस शख्श को दे दिया ।
इसी तरह एक बार ग़ालिबन उर्स की किसी तकरीब के लिए आप बराबर के क़स्बा अलापुर के बाज़ार में गल्ला वग़ैरा खरीदने के लिए बैलगाड़ी लेकर तशरीफ़ ले गए
और सारा दिन ख़रीदारी करते रहे
शाम को जब ककराला चलने को हुए तो एक शख्श आया । और अर्ज़ करने लगा हुज़ूर मेरी लड़की की अनक़रीब शादी है और मेरे पास कोई इंतिज़ाम नही है
मैं बहुत परीशान हूँ।
आपको उसके रोने पीटने पर रहम आगया आपने बैलगाड़ी भरा वो सारा सामान उसके हवाले कर दिया ।
ये सख़ावत और बंदा नवाज़ी आपके घराने के तुर्रये इम्तियाज़ रही है
तमाम ज़िन्दगी इसमें ज़र्रा बराबर भी कमी नही आने दी बल्कि अपने बुजुर्गों की इस रिवायत में और चार चाँद लगा दिए । दर्दमंदी, हमदर्दी , लुत्फ़ , इनायत , अताओ बख्शीश , की हैरतअंगेज वाक़्यात से आपकी ज़िंदगी भरी पड़ी है परेशानों की की मुश्किल कुशाई ग़मज़दा लोगों की दादरसी आपका शाबोरोज़ का मशग़ला था
अल्लाह की मख़लूक़ को खाना खिलाना आपका सबसे ज़्यादा महबूबतरीन काम था इस सिलसिले में इंसान ही किया चरिन्दों परिंदो को भी खूब खिलाते थे ।
एक तशला खाना रोज़ाना सवेरे आस्ताने शरीफ की छत पर डलवाते फज्र के बाद सैकड़ों चील कौव्वे मुंढेर पर आकर बैठ जाते थे । अल्हम्दुलिल्लाह ये सिलसिला आज भी जारी है
ये था आपका अंदाज़े सख़ावत जिसकी मिसाल आपके ज़माने में कहीं देखने को नही मिलती ।
आपका मज़ारे अक़दस मोहल्लाह शाहबाद बरेली शरीफ में है जो ख़ल्क़ की अक़ीदतों का मरकज़ बना हुआ है
मिंजानिब:–मोहम्मद सलमान खान शेरी