श्री धोरेवाला लंगर सेवा समिति ,,ग्राम पंचायत 6BHM Dhorewala

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ॐ नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव 🙏🏻👑💫

सालासर व पल्लू पैदल यात्रियों की सेवा हेतु एक स्वयंसेवी संस्था 🔱🙏🚩

ग्राम पंचायत 6 BHM धोरेवाला ❣️

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JAY SHREE RAM 🙏🏻 जिस जहर को हम 74 साल से पालते आ रहे थे, जिसे हम वर्षों से पाल रहे थे और जो हमारे ही खिलाफ भौंक रहा था, ...
22/01/2026

JAY SHREE RAM 🙏🏻
जिस जहर को हम 74 साल से पालते आ रहे थे, जिसे हम वर्षों से पाल रहे थे और जो हमारे ही खिलाफ भौंक रहा था, उसे मोदी सरकार ने सिर्फ 30 मिनट में देश से बाहर फेंक दिया।

हम बात कर रहे हैं संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) की, जो 1948 से भारत में बैठा हुआ था। इसका काम था भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद पर नजर रखना, लेकिन असल में ये संगठन भारत के खिलाफ एक विदेशी सेंसर बोर्ड जैसा बन चुका था। और मजे की बात यह है कि इनका रहना-खाना, गाड़ी, घूमना यानि कि सब-कुछ भारत सरकार यानि हमारे टैक्स के पैसे से होता था।

UNMOGIP ने न सिर्फ भारत को कई बार खुले मंचों पर दोषी ठहराया, बल्कि कश्मीर को द्विपक्षीय नहीं, त्रिपक्षीय मसला बताने की भी भरपूर कोशिशें और वकालत की। उन्होंने यहां तक कहा कि भारत हमें काम नहीं करने दे रहा, हमारे खर्च पूरे नहीं कर रहा, भत्ते बढ़ाओ और हमारे लिए और पैसा दो। यानि कि घर में घुसे मेहमान ही अब मेजबान को धमका रहे थे।
इस पर मोदी सरकार ने एक सेकंड भी नहीं गंवाया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पूरे प्रकरण की कमान संभाली और सिर्फ 30 मिनट की कार्यवाही में UNMOGIP का वीजा रद्द कर दिया गया। उन्हें साफ शब्दों में कहा गया है कि “अब यहां तुम्हारी जरूरत नहीं है, 10 दिन में अपना बोरिया-बिस्तर समेटो और निकलो।”

इन 74 वर्षों में भारत ने इनके 40 से ज्यादा अधिकारियों का खर्च उठाया। हमने उन्हें रहना दिया, गाड़ियां दीं, सुरक्षा दी और बदले में क्या मिला? हमारे ही खिलाफ बयान, रिपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान। अब वो दौर खत्म हुआ।

सबसे बड़ा सवाल इन्हें भारत में लाया कौन था? पंडित नेहरू!

वही नेहरू जो कि 1948 में कश्मीर मुद्दा खुद यूएन में घसीट कर ले गए। कश्मीर जो हमारा आंतरिक मामला था, उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। और आज तक उसकी सज़ा हम भुगतते रहे। हर बार जब UN की कोई रिपोर्ट आती थी, उसमें भारत को घेरने की कोशिश होती थी। अब जबकि मोदी सरकार ने UNMOGIP को बाहर का रास्ता दिखाया है, ये वही क्षण है जैसे अंग्रेजों का आखिरी झंडा उतार दिया गया हो।

आज भी देश की 99% जनता को ये नहीं पता था कि अंग्रेजों की छाया UN के नाम पर आज तक हमारे देश में मौजूद थी। मोदी सरकार ने इस बार चुपचाप, पर निर्णायक प्रहार किया है। ये सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, ये सांस्कृतिक, कूटनीतिक और मानसिक स्वतंत्रता का प्रतीक है। जो काम कांग्रेस 74 साल में नहीं कर सकी, वो मोदी सरकार ने 30 मिनट में कर दिखाया।

अब कोई विदेशी संस्था भारत में बैठकर भारत को नहीं सिखाएगी कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अब भारत खुद तय करेगा कि उसकी धरती पर कौन रहेगा और कौन नहीं। ये अंग्रेजी छाया का आखिरी सिरा था और उसे भी हमने आज उखाड़ फेंका।

जय हिंद 🇮🇳
JAY SHREE RAM 🙏🏻
Har har Mahadev 🙌🏻❤️

JAY SHREE RAM 🙏🏻 संतों को पता है  “फर्जी शंकराचार्य”  है, भक्तों को कुचलने के लिए “रथ” पर जाना चाहता था।अविमुक्तेश्वरानं...
21/01/2026

JAY SHREE RAM 🙏🏻
संतों को पता है “फर्जी शंकराचार्य” है, भक्तों को कुचलने के लिए “रथ” पर जाना चाहता था।

अविमुक्तेश्वरानंद खुलेआम योगी जी के लिए तू तड़ाक बोल रहे हैं, योगी को संत मानने से इंकार कर रहे हैं।

योगी जी के खिलाफ इतना एजेंडा सपा, कांग्रेस, बसपा और पूरा INDI गठबंधन नहीं चला सका है, जितना एजेंडा ये “फर्जी शंकराचार्य” चला रहे हैं!

जब पालघर में साधुओं को मारा गया तो अविमुक्तेश्वरानंद चुप रहे और BJP की सरकार बनी तो कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उद्धव ठाकरे CM नहीं रहे?

- CAA कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के मुस्लिमों को भी भारत की नागरिकता देने की मांग की-

-अतीक अहमद और अशरफ के वध की न्यायिक जांच की मांग की

- बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की ताकि BJP-NDA सरकार को हराया जा सके

- मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर अत्याचार और पलायन पर शांतिप्रिय दंगाइयों को क्लीन चिट दी और इसे कानून व्यवस्था का मामला कहा

- सनातन धर्म को डेंगू ,मलेरिया बताने वाले INDI गठबंधन के नेताओं का समर्थन किया

- महाकुंभ के दौरान कहा कि हमारा CM झूठा है और योगी आदित्यनाथ को इस्तीफ़ा देना चाहिए

देश में 4 शंकर पीठें हैं लेकिन सिर्फ ये तथाकथित शंकराचार्य ही लगातार सुर्खियों में क्यों रहते हैं ?

माघमेला में पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद जी भी गए हैं लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ

सभी अखाड़ों, हजारों संतों ने स्नान किया लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ

करोड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ

और जैसे ही अविमुक्तेश्वरानंद पहुंचे तो बवाल हो गया

अविमुक्तेश्वरानंद के बड़बोलेपन का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि इनके समर्थन में 100 लोग भी प्रयागराज में खड़े नहीं हुए जबकि योगी जी के समर्थन में करोड़ों लोग खड़े हुए हैं

अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे उन्होंने योगी आदित्यनाथ को UP की सत्ता से बाहर करने की सुपारी ले ली हो

कल रात उन्होंने अखिलेश यादव से फ़ोन पर बात भी की और इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाला गया

अब तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी 2027 में हिंदू वीर शिरोमणि अखिलेश यादव के साथ मिलकर हिंदू द्रोही योगी आदित्यनाथ को सत्ता से बाहर करने के लिए अभियान चलाएंगे

अविमुक्तेश्वरानंद का ईगो देखिए

बिना प्रशासन को भरोसे में लिए ये स्वयंभू धनकराचार्य रथ पर सवार होकर और अपने साथ भीड़ लेकर संगम नोज की तरफ निकल पड़े

पुल नंबर दो बंद था लेकिन इन्होंने व इनके शिष्यों ने जबरन पुल नंबर दो खोल दिया और उसी पुल से रथ पर सवार होकर संगम नोज की तरफ चले गए

अब जाता सोचिए, बंद पुल को इनके समर्थकों ने क्यों खोला ? अगर वहां भगदड़ हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता ? भगदड़ में श्रद्धालु मारे जाते तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता ?

प्रशासन ने जिस पुल को बंद किया हुआ है, जबरन उस पुल को खोलना क्या सीधे-सीधे अराजकता फैलाना नहीं है ?

प्रशासन ने फिर भी इनका सहयोग किया और माहौल बिगाड़ने से बचा लिया तो बाबा जी ने अब नया ड्रामा शुरू कर दिया

अविमुक्तेश्वरानंद जी अवैध रास्ते से रथ पर सवार होकर संगम नोज के पास 50 मीटर दूर तक पहुंच गए

यहां प्रशासन ने इन्हें रोका और कहा कि महाराज जी, संगम नोज सिर्फ 1 मिनट की दूरी पर है, कृपया रथ से उतारकर पैदल ही संगम नोज तक चलें क्योंकि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ है

रथ से चलेंगे तो समस्या हो सकती है

बस इतना सुनते ही अविमुक्तेश्वरानंद का ईगो हर्ट हो गया कि मैं पैदल नहीं जाऊंगा, मैं रथ पर ही जाऊंगा

करोड़ों श्रद्धालु कष्ट उठाकर माघ मेले में स्नान करने आए हैं लेकिन ये महाराज जी 50 मीटर पैदल नहीं चल सकते, फिर भले उन श्रद्धालुओं को असुविधा हो, भगदड़ हो और वो मर जाएं

एक व्यक्ति के नैरेटिव और ईगो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ की जान के साथ नहीं खेला जा सकता

अविमुक्तेश्वरानंद जी एक ऐसा नेरेटिव खड़ा करने का प्रयत्न कर रहे हैं जो ब्राह्मण समाज को 2027 में BJP के खिलाफ खड़ा कर दे और योगी आदित्यनाथ की सत्ता से विदाई हो जाए

अगर आप लोगों को लगता है कि योगी जी वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में आपके और हमारे लिए आवश्यक हैं तो कृपया अविमुक्तेश्वरानंद के एजेंडे का शिकार मत होइए

ये अवैध शंकराचार्य अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए सनातन को डेंगू/मलेरिया बताने वाले INDI गठबंधन के पक्ष में बैटिंग कर रहे हैं, इससे अधिक कुछ नहीं है
JAY SHREE RAM 🙏🏻
Har Har Mahadev 🙌🏻❤️

JAY SHREE RAM 🙏🏻 गुजरात हाई कोर्ट ने बेट द्वारका के 2 द्वीपों पर कब्जा जमाने के सुन्नी वक्फ बोर्ड के सपने को चकनाचूर कर ...
16/01/2026

JAY SHREE RAM 🙏🏻
गुजरात हाई कोर्ट ने बेट द्वारका के 2 द्वीपों पर कब्जा जमाने के सुन्नी वक्फ बोर्ड के सपने को चकनाचूर कर दिया है इस समय गुजरात का यह विषय बहुत चर्चा में है सोशल मीडिया के माध्यम से हम लोगों को मालूम पड़ गया वरना पता ही नहीं चलता...!!

कैसे पलायन होता है और कैसे कब्जा होता है लैंड जिहाद क्या होता है वह समझने के लिए आप बस बेट द्वारिका टापू का अध्ययन कर लें तो सब प्रक्रिया समझ आ जायेगी कुछ साल पहले तक यहाँ कि लगभग पूरी आबादी हिन्दू थी यह ओखा नगरपालिका के अन्तर्गत आने वाला क्षेत्र है जहाँ जाने का एकमात्र रास्ता पानी से होकर जाता है इसलिए बेट द्वारिका से बाहर जाने के लिए लोग नाव का प्रयोग करते हैं यहाँ द्वारिकाधीश का प्राचीन मंदिर स्थित है कहते हैं कि 5 हजार साल पहले यहाँ रुक्मिणी ने मूर्ति स्थापना करी थी...!!

समुद्र से घिरा यह टापू बड़ा शांत रहता थालोगो का मुख्य पेशा मछली पकड़ना था धीरे धीरे यहाँ बाहर से मछली पकड़ने वाले मुस्लिम आने लगे दयालु हिन्दू आबादी ने इन्हें वहाँ रहकर मछली पकड़ने की अनुमति दे दी धीरे धीरे मछली पकडने के पूरे कारोबार पर मुस्लिमों का कब्जा हो गया बाहर से फंडिंग के चलते इन्होंने बाजार में सस्ती मछली बेची जिससे सब हिन्दू मछुआरे बेरोजगार हो गये अब हिन्दू आबादी ने रोजगार के लिए टापू से बाहर जाना शुरू किया लेकिन यहां एक और चमत्कारी प्रयोग हुआ बेट द्वारिका से ओखा तक जाने के लिए नाव में 8 रुपये किराया लगता था अब क्योंकि सब नावों पर मुस्लिमों का कब्जा हो गया था तो उन्होंने किराये का नया नियम बनाया जो हिन्दू नाव से ओखा जायेगा वह किराये के 100 रुपये देगा और मुस्लिम वही 8 रुपये देगा अब कोई दिहाड़ी हिन्दू केवल आवाजाही के 200 रुपये देगा तो वह बचायेगा क्या....??

इसलिए रोजगार के लिए हिन्दुओ ने वहाँ से पलायन शुरू कर दिया अब वहाँ केवल 15 प्रतिशत हिन्दू आबादी रहती है रोजगार के 2 मुख्य साधन मछली पकड़ने का काम और ट्रांसपोर्ट दोनो हिन्दुओ से छीन लिया गया जैसे बाकी सब जगह राज मिस्त्री, कारपेंटर, इलेक्ट्रॉनिक मिस्त्री, ड्राइवर, नाई व अन्य हाथ के काम 90% तक हिन्दुओ ने उनके हवाले कर दिये हैं...!!

अब बेट द्वारिका में तो 5 हजार साल पुराना मंदिर है जिसके दर्शन के लिए हिन्दू जाते थे तो इसमें वहां के जिहादियों ने नया तरीका निकाला क्योंकि आवाजाही के साधनों पर उनका कब्जा हो चुका था तो उन्होंने आने वाले श्रद्धालुओं से केवल 20-30 मिनट की जल यात्रा के 4 हजार से 5 हजार रुपये मांगने शुरू कर दिये इतना महंगा किराया आम व्यक्ति कैसे चुका पायेगा इसलिए लोगो ने वहां जाना बंद कर दिया अब जब वहाँ पूर्ण रूप से जिहादियों की पकड़ हो गई तो उन्होंने जगह जगह मकान बनाने शुरू किये, देखते ही देखते प्राचीन मंदिर चारों तरफ से मजारों से घेर दिया गया वहाँ की बची खुची हिन्दू आबादी सरकार को अपनी बात कहते कहते हार चुकी थी, फिर कुछ हिन्दू समाजसेवियों ने इसका संज्ञान लिया और सरकार को चेताया सरकार ने ओखा से बेट द्वारिका तक सिग्नेचर ब्रिज बनाने का काम शुरू करवाया बाकी विषयो की जांच शुरू हुई तो जांच एजेंसी चौंक गई....!!

गुजरात में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका स्थित बेट द्वारिका के दो टापू पर अपना दावा ठोका है वक्फ बोर्ड ने अपने आवेदन में दावा किया है कि बेट द्वारका टापू पर दो द्वीपों का स्वामित्व वक्फ बोर्ड का है गुजरात उच्च न्यायालय ने इस पर आश्चर्य जताते हुए पूछा कि कृष्ण नगरी पर आप कैसे दावा कर सकते हैं और इसके बाद गुजरात उच्च न्यायालय ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया बेट द्वारका में करीब आठ टापू है, जिनमें से दो पर भगवान कृष्ण के मंदिर बने हुए हैं...!!

प्राचीन कहानियां बताती हैं कि भगवान कृष्ण की आराधना करते हुए मीरा यहीं पर उनकी मूर्ति में समा गई थी बेट द्वारका के इन दो टापू पर करीब 7000 परिवार रहते हैं, इनमें से करीब 6000 परिवार मुस्लिम हैं यह द्वारका के तट पर एक छोटा सा द्वीप है और ओखा से कुछ ही दूरी पर स्थित है वक्फ बोर्ड इसी के आधार पर इन दो टापू पर अपना दावा जताता है यहां अभी इस साजिश का शुरुआती चरण ही है कि इसका खुलासा हो गया सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इस चरण में कुछ लोग, ऐसी जमीनों पर कब्जा करके अवैध निर्माण बना रहे थे जो रणनीतिक रूप से भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता था अब जाकर सब अवैध कब्जे व मजारें तोड़ी जा रही हैं...!!

माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी की कृपा से अब सी लिंक का उद्घाटन हो गया है, मुसलमानों के नौका यानि छोटे पानी के जहाज से यात्रा करवाने का धंधा भी चौपट होने जा रहा है...!!

बेट द्वारिका में आने वाला कोई भी मुसलमान वहाँ का स्थानीय नहीं है सब बाहर के हैं फिर भी उन्होंने धीरे धीरे कुछ ही वर्षों में वहां के हिन्दुओ से सब कुछ छीन लिया और भारत के गुजरात जैसे एक राज्य का टापू सीरिया बन गया....!!

सावधान व सजग रहना अत्यंत आवश्यक है ज्यादा से ज्यादा शेयर करें...!!

"राष्ट्रहित सर्वोपरि"🙏🏻🙌🏻❤️
JAY SHREE RAM 🙏🏻
Har har Mahadev 🙌🏻❤️

JAY SHREE RAM 🙏🏻 आज जो सांप्रदायिकता फैली हुई है उसका जिम्मेदार और कोई नही बल्कि खुद सेक्युलर हिंदू है। हिंदू 450 वर्ष ब...
16/01/2026

JAY SHREE RAM 🙏🏻
आज जो सांप्रदायिकता फैली हुई है उसका जिम्मेदार और कोई नही बल्कि खुद सेक्युलर हिंदू है। हिंदू 450 वर्ष बाबरी ढांचे में पूजा पाठ करता रहा, सबकुछ ठीक चल रहा था।

लेकिन इन सेक्युलर शूरमाओ को तो राम को कल्पना सिद्ध करना था, रामायण में कमियां ढूंढनी थी और बाबरी ढांचे को मस्जिद सिद्ध करना था। जब कोशिश की तो जो बाबरी 450 वर्षो में नही गिरी वो 1992 में ढहा दी गई।

बाबरी की दीवारें ज्ञानवापी की तरह चीख चीख कर गवाही दे रही थी की वो ढांचा एक मंदिर है। लेकिन सुन्नी वफ्फ बोर्ड को जमीन में इंटरेस्ट था और सेक्युलर हिंदू को ज्ञान बांचने में। लेकिन असल में दोनो ही मूर्ख है और इन दो मूर्खो के चक्कर में बाबरी ढांचा ध्वस्त हुआ और नया राम मंदिर बना।

विजय दोनो तरफ हिंदुओ की ही थी, यदि हिंदू को हिंदू ही रहने देते तो वो आज जितना आक्रामक नही होता लेकिन हिंदू को सेक्युलर बनाने के लिए जो कृत्रिम उपाय किए गए उसने हिंदू को कट्टर हिन्दू में बदल दिया।

आज ज्ञानवापी और शाही ईदगाह को लेकर भी वही हालात है, मुसलमानो का मथुरा और काशी से कोई लेना देना नही है हिंदू प्रेम से अपना मंदिर मांग रहे है। लेकिन देखते रहिए सुन्नी वफ्फ बोर्ड टांग अड़ा देगा और खुद को अंग्रेजो की जूती मानने वाले सेक्युलर हिंदू उल्टा सीधा ज्ञान दे देंगे।

मंदिर तो पुनः हिंदुओ को मिल जाएगा लेकिन हिन्दू समाज का चेहरा और क्रोधमयी दिखेगा। पिछले एक साल में सिर्फ दिल्ली में 25 से ज्यादा मस्जिदे तोड़ दी गई, एक तो 800 साल पुरानी मस्जिद भी गिरा दी गई।

एक समय था हिन्दू मस्जिद को भी भारतीय इतिहास समझ बैठा था लेकिन जब उसने देखा की इस उदारता के नाम पर उसके देवताओं को काल्पनिक करार दिया जा रहा है तो उसने प्रतिउत्तर देना शुरू कर दिया।

आज कोई हिंदू ताजिए के नीचे से नही निकलता, मस्जिद के सामने हाथ जोड़कर जो वो खुद को ओवरस्मार्ट समझता था वो कार्य अब बंद हो चुका है। हिंदू मस्जिदों को ढहता देख खुश है, और उसका कारण वही एकतरफा सेक्युलरिज्म है जिसने हिन्दू की पीठ में हमेशा खंजर मारा है।

यदि सेक्युलरिज्म के पलड़े बराबर होते तो शायद इतना विवाद ही ना होता लेकिन उसे तो बिल्कुल मुस्लिम परस्त कर दिया गया और हिन्दू को अपने ही देश में हाशिए पर बैठाने की कोशिश हुई।

काशी मथुरा में भी वही होगा जो अयोध्या में हुआ, मुस्लिम समाज के पास एक मौका है अपनी की हुई गलती सुधारने का। दूसरी ओर सेक्युलर हिंदू के पास भी मौका है की इस बार अपने फर्जी ज्ञान की दिशा हिंदू से बदलकर मुसलमान की ओर कर दे।

लेकिन ऐसा कुछ होगा नही, ये अब भी टारगेट हिंदुओ को ही करेंगे और जो कट्टर हिंदू आज दो मंदिरों की मांग कर रहे है वे ही कट्टर हिंदू अब अपने सभी हजारों मंदिरों के लिए लड़ेंगे और इस बार उन्हें कोई नही रोक सकता।

हिंदुओ को डराने की कोशिश हो रही है की कांग्रेस का राज आया तो फिर मंदिर तोड़ देंगे। लेकिन ध्यान रहे अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि ये कोई चक्र नही चल रहा है बस राष्ट्र अपनी प्राचीनता की ओर नई यात्रा पर है।

जो पीछे छूट गए सो छूट गए फिर चाहे वो मुगल हो या कांग्रेस।
हिन्दू बढ़ता रहेगा और अपने गौरव को पुनः प्राप्त करेगा यही इस देश का प्रारब्ध है।
साभार 🙏

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आपका भाई
हर हर महादेव 🙏
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Jai hind 🙏🇮🇳🇮🇳

जानिए उन चेहरों को जो हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन लेना चाहते हैं  :- इस तस्वीर में सभी चेहरों को पहचान लीजिए । उत्तर प...
11/12/2025

जानिए उन चेहरों को जो हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन लेना चाहते हैं :-

इस तस्वीर में सभी चेहरों को पहचान लीजिए । उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव , प्रियंका वाड्रा, शिवसेना UBT के अरविंद सामंत , असदुद्दीन ओवैसी शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले सहित हिंदी गठबंधन के 112 सांसदों ने मद्रास हाई कोर्ट के मदुरई बेंच के जज जस्टिस गर स्वामीनाथन को पद से बर्खास्त करने के लिए महाभियोग लाने का नोटिस दिया है । जानते हैं क्यों ? क्योंकि जस्टिस जी आर स्वामीनाथन ने हिंदुओं के पूजा के सदियों से मिले अधिकार को बरकरार रखने का आदेश दिया है ।

प्रियंका वाड्रा , राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी, सुप्रिया सुले, अखिलेश यादव, इकरा हसन, मोदी की बोटी बोटी करने की इच्छा रखने वाले इमरान मसूद चाहते हैं कि हिंदुओं से अब पूजा का अधिकार भी छीन लिया जाना चाहिए ।

इसमें सबसे आश्चर्यजनक नाम उद्धव ठाकरे का है । क्योंकि उद्धव ठाकरे ने अपने सांसद को भेज कर यह बात दिया है कि शिव सेना भी चाहती है कि हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन लिया जाए और वह भी इस पर दस्तखत किए हैं

अब जानिए मामले को । तमिलनाडु में मदुरै के पास थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित अरुलमिघु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में दीपथून (स्तंभ) पर पारंपरिक दीप जलाने के आदेश से जुड़ा है।

यहां दीपम महोत्सव होता था यानि स्तंभ पर पारंपरिक दीप जलता था

फिर पहाड़ी के सामने एक दरगाह बन गई फिर दरगाह बड़ी होती गई । जैसा कि सबको पता है तमिलनाडु में हमेशा से मुस्लिम परस्त सरकारे रही हैं । उसके बाद दरगाह वालों ने स्तंभ पर दीप जलाने पर आपत्ति जताई कहा कि इससे हमारी भावना को ठेस पहुंचती है

अब भारत में हिंदू मुस्लिम भाई-भाई का नारा यही INDI के लोग देते हैं और इन लोगों ने कभी दरगाह वालों से नहीं कहा कि "भाई तुम्हारी दरगाह के सामने हालांकि जो कुछ दूरी पर है वहां अगर एक स्तंभ पर दीप जलेगा तो उससे तुम्हारी भावनाओं को क्या ठेस पहुंचेगी । वह बेचारे हिंदू हैं । उनको एक दीप जला देने दो । उनको भी पूजा का अधिकार दे दो ।" लेकिन ऐसा ये INDI गठबन्धन वाले नहीं बोले ।

जो तमाम दल हिंदुओं को गंगा जमुनी तहजीब की घुट्टी पिलाते हैं अब वही कह रहे हैं कि हिंदू अपना दीप ना जलाएं ताकि मुसलमान की भावनाओं को ठेस न पहुंचे

जस्टिस स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह दीप जलाए। यह दीपस्तंभ दरगाह के नजदीक स्थित है, अदालत ने स्पष्ट किया था कि इससे दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा।

अब तमिलनाडु की सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई है

वहां उसके वकील कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी है

और सेटिंग बाज वकील का फायदा भी हुआ आदेश पर रोक लगा दी है सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई तक

लेकिन INDI गठबंधन इससे ही खुश नहीं है INDI गठबंधन यह चाहता है कि भारत की न्यायपालिका को हमेशा से हिंदू विरोधी होना चाहिए और जो कोई जज हिंदुओं का साथ देता है तो उसे सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरे जजों में खौफ बैठ सके

इसीलिए मद्रास हाई कोर्ट के उस जज स्वामीनाथन को हटाने के लिए INDI गठबंधन के नेता एक साथ हो चुके हैं और मजे की बात यह की असदुद्दीन ओवैसी सहित कई मुस्लिम दल जो INDI गठबंधन में नहीं है वह भी एक साथ आ गई है

जो कांग्रेस हमेशा से कहती है ओवैसी बीजेपी का B टीम है वही कांग्रेस हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीनने के लिए ओवैसी और बदरुद्दीन अजमल की भी मदद ले रही है

अंत में मैं अपनी लाइन फिर से लिखूंगा की आखिर वह कौन से हिंदू है जो समाजवादी पार्टी, कांग्रेस या INDI गठबंधन को वोट देते हैं जबकि यह लोग हिंदुओं से पूजा का मूलभूत अधिकार भी छीन लेना चाहते हैं

सादर/साभार

सुधांशु

(जितेंद्र सिंह जी भाईसाहब)

#हिंदू #पूजा #दीपक #जज #महाभियोग

 #06 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में 02 लाख की भीड़ जुटाकर हिंदुओं को संदेश दिया गया था, उसके ठीक एक दिन बाद, कोलकाता में 5 ला...
08/12/2025

#06 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में 02 लाख की भीड़ जुटाकर हिंदुओं को संदेश दिया गया था, उसके ठीक एक दिन बाद, कोलकाता में 5 लाख की भीड़ ने उसका जवाब दिया है ..
#कोलकाता का ब्रिगेड मैदान... कभी CPM इस मैदान का इस्तेमाल अपनी ताक़त दिखाने के लिए करती थी ..!

वक्त बदला, ममता बनर्जी ने नंदीग्राम आंदोलन के बाद कोलकाता का ब्रिगेड मैदान भर दिया! उसी वक़्त बंगाल को एहसास हो गया था कि हवा बदल रही है, माहौल बदल रहा है!

आज कोलकाता का ब्रिगेड मैदान एक बार फिर से खचाखच भरा है! ये किसी राजनीतिक दल की रैली नहीं है, बल्कि सनातन की हुंकार है। 5 लाख लोग एक साथ, सामुहिक रूप से गीता का पाठ कर रहे हैं। क्या ये बंगाल में "भगवा क्रांति" की आहट है ..?

#सुनो हुमाऊँ कबीर बाबर के औलाद वक्त रहते सुधर जाओ ⚔️
#बाबर जैसे छक्के की बाबरी मस्जिद नहीं बनेगी

#यह देश वीर योद्धाओ के नाम से जाना जाएगा
महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज,राणा सांगा , भगत सिंह जैसे वीर सपूत के नाम से जाना जाएगा 🚩⚔️
जय हिंद जय भारत 🇮🇳





आगा खां पैलेस... यही वो जेल है जहाँ कथित 'मोहन दास करमचंद गांधी को दो वर्ष तक घोर यातनाएं दी गई थीं।सजा इतनी कठोर थी कि ...
25/10/2025

आगा खां पैलेस... यही वो जेल है जहाँ कथित 'मोहन दास करमचंद गांधी को दो वर्ष तक घोर यातनाएं दी गई थीं।

सजा इतनी कठोर थी कि गांधी को स्नान करने के लिए 10×10 फिट के संगमरमर लगे बाथरूम में नहाना पड़ता था।

सजा इतनी कठोर थी कि बापू को 8×8 फिट के नर्म, मुलायम मखमली बिस्तर पे सोने के लिए मजबूर किया जाता था।

सजा इतनी कठोर थी कि 20 एकड़ में फैले आगा खां पैलेस की हरी-हरी मुलायम घास में घूमने के लिए मजबूर किया जाता था।

सजा इतनी कठोर थी कि 12×12 फिट के स्टडी रूम में आलीशान टेबल और कुर्सी पे बेहतरीन इंग्लैंड के कागज में लेखन के लिए मजबूर किया गया।

और हाँ, सजा इतनी कठोर थी कि बापू की पत्नी भी साथ में रहती थी।

सजा इतनी कठोर थी कि आने-जाने के लिए गांडी को मर्सडीज कार में बैठने को मजबूर किया जाता था।

सजा इतनी कठोर थी कि अंग्रेज अफसरों के साथ ब्लैक कॉफी पीनी पड़ती थी।

और उधर वीर सावरकर को इतनी आसान सजा मिली थी... हाथ-पाँव लोहे की जंजीरों से जकड़े थे और दो जन्म की कालापानी की सजा और उसमें भी रोज कोल्हू से तेल निकालना पड़ता था।

गांधी देश के महात्मा और बापू बन गए और वीर सावरकर जी अंग्रेजों से माफी माँगने वाला माफी वीर !!

जब दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हुआ तो अमेरिका के पास 22000 टन सोना जमा हो चुका था। स्वाभाविक था कि यूरोपीय देशो ने सोना बेचक...
25/10/2025

जब दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हुआ तो अमेरिका के पास 22000 टन सोना जमा हो चुका था। स्वाभाविक था कि यूरोपीय देशो ने सोना बेचकर उससे हथियार खरीदे थे।

युद्ध के बाद वाशिंगटन मे सभी देशो की मीटिंग हुई और यही समस्या रखी गयी कि किस मुद्रा मे व्यापार करें...?

क्योंकि ब्रिटिश पाउंड की स्थिति खराब थी।
तब अमेरिका ने कहा कि डॉलर मे लेन देन करो।

भारत चीन को डॉलर देगा, चीन चाहे तो इस डॉलर को आगे प्रयोग करें या फिर अमेरिका को देकर सोना ले जाए क्योंकि अमेरिका के पास सोने की कमी नहीं थी।

28 ग्राम सोने के बदले 35 डॉलर का मूल्य तय हुआ।

इस तरह सभी देश खुश हो गए और डॉलर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बन गया। अमेरिका पर भी दबाव था कि ज्यादा डॉलर ना छापे अन्यथा उतना गोल्ड कहाँ से लाएगा?

1960 मे सोने के भाव मे बढ़ोत्तरी हुई,
28 ग्राम सोना 40 डॉलर तक पहुँच गया।

ऐसे मे लोग 35 डॉलर मे अमेरिका से गोल्ड खरीदते फिर 40 डॉलर मे लंदन के गोल्ड एक्सचेंज पर बेच देते।

उस समय ब्रिटेन को लोन चाहिए था इसलिए अमेरिका ने ब्रिटेन के मुँह मे पैसे भरकर यह मार्केट ही बंद करवा दिया।

यही कारण है कि आज भी दोनों के रिश्ते अटूट है क्योंकि मज़बूरी के साथी है।

15 अगस्त 1971 को अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन घोषणा कर देते है कि अब से डॉलर के बदले गोल्ड वाली स्कीम ही बंद।

ये विश्व को धोखा था....
मगर निक्सन को इसकी परवाह नहीं थी।

दुनिया का हर देश डॉलर लिये बैठा था
वो इसे फाड़ भी नहीं सकता था,

उस समय डॉलर को बचाना अमेरिका से ज्यादा दुनिया का सिरदर्द बन गया क्योंकि यदि डॉलर खत्म हो गया तो आपके पास तो विदेशी मुद्रा भंडार ही नहीं बचा।

उसी बीच अरब देशो मे तेल निकला,
इन अरब देशो मे राजपरिवार का शासन था जिन्हे हमेशा क्रांति होने का डर था। अमेरिका ने इन्हे सुरक्षा दी और सुनिश्चित किया कि ये डॉलर मे ही तेल बेचे।

जाहिर है ज़ब तेल डॉलर मे मिलेगा तो अन्य देशो के लिये डॉलर का रिजर्व रखना मज़बूरी होंगी।

ज़ब बैंकिंग सिस्टम उन्नत होने लगा तो अमेरिका ने स्विफ्ट सिस्टम मे खुद को आगे किया।

ये ऐसा होता है कि मानो आपको SBI से न्यूजीलैंड की किसी बैंक मे पैसे भेजना है तो जरूरी नहीं कि दोनों बैंक एक दूसरे को जानते हो। ऐसे मे पहले पैसा अमेरिकन बैंक जाएगा और वहाँ से न्यूजीलैंड।

जाहिर है डॉलर का रोल यहाँ भी आएगा।

हालांकि इसी स्विफ्ट को चुनौती देने भारत का UPI आया है, अब आप समझ गए होंगे कि राहुल गाँधी और पी चिदंबरम इसके विरोध मे क्यों थे?

वे बेवकूफ नहीं है....
बस अमेरिकी डॉलर का नमक अदा कर रहे है।

बेवकूफ तो हम है जिन्हे उनकी आवाज मे लोकतंत्र दिख रहा है। खैर डॉलर के डोमिनेशन की कहानी यही है,

अमेरिका अरबो डॉलर खर्च करता है,
ताकि अन्य देशो मे राजनीतिक हस्तक्षेप कर सके।

अमेरिका के लिये बेहद जरूरी है कि किसी भी देश की सरकार डॉलर का विरोध ना करें।

UPI आ गया तो स्विफ्ट को खा जाएगा इसलिए पहले NGO को फंडिंग होती है फिर राहुल गाँधी और चिदंबरम जैसे लोग UPI के खिलाफ बोलते है।

सद्दाम हुसैन करीब 25 वर्ष से तानाशाह था
लेकिन लोकतंत्र की आड़ मे उसे तब ही मारा गया ज़ब उसने डॉलर को चुनौती दी।

ये हस्तक्षेप करने के लिये अमेरिका को अरबो डॉलर खर्च करने पड़ते है एक इकोसिस्टम बनाना पड़ता है।

अब आपको अमेरिका की ये नीति चाहे जैसी भी लगी हो लेकिन उसके अर्थशास्त्रियों की प्रशंसा करनी होंगी। इसमें हमारे लिये भी कुछ सबक है।

आज ट्रम्प है, कल बाइडन थे, परसो ओबामा थे तो नरसो बुश थे। सभी ने अमेरिका के हित मे ही निर्णय लिये है ना कि भारत के हित मे, इसलिए हमें किसी का प्रशंसक होने की जरूरत नहीं है।

हमें सिर्फ अपना हित देखना है।

भारत सरकार ने अपने प्रयास तेज कर दिये है,
अरब देशो से संबंध सुधारकर UPI को वहाँ भी ले जा रहे है इसलिए नूपुर शर्मा जैसे केस मे थोड़ा झुकना पड़ता है।

यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के लिये हमें 1947 वाला विश्वसनीय अमेरिका बनना है इसलिए सीधे किसी भी देश पर मिलिट्री एक्शन लेकर युद्ध के हालात नहीं बना सकते।

हर चीज बोलने लिखने की नहीं होती,
नागरिको को अपने विवेक का भी प्रयोग करना होगा।

आपको समझना होगा कि भारत मोदी युग मे अचानक इतना कैसे बदलने लगा।

हो सकता है हम सुपर पॉवर ना बन सके
मगर प्रयास भी ना करें ये कैसे संभव है।

इन सबमे समय लगेगा तब तक राहुल गाँधी हजारों बार जाति परस्त और उद्योग विरोधी बातो मे उलझायेगा।

कई राज्यों को मणिपुर बनाने का प्रयास होगा, लेकिन आपको समझना होगा कि ये अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र है।

इस स्टेज पर आकर....
हम देश का सौदा नहीं कर सकते।

21/10/2025

श्री धोरेवाला लंगर सेवा समिति ,, ग्राम पंचायत 6 BHM धोरेवाला की तरफ से आप सभी को दिवाली की बहुत बहुत शुभकामनाएं 🙏🏻😊
जय श्री राम
धोरेवाला मन्दिंर 6B.H.M

29/09/2025

भारत का पाकिस्तान से कभी कोई मुकाबला नहीं है ❤️🙌🏻
भारत विजेता था और हमेशा रहेगा 🙌🏻😊
#एशियाकप #भारत #टीमभारत

28/09/2025

वाह रिंकू 🙌🏻❤️
भारत न जीत गी भौत भौत बधाई 💕

दुनिया का सबसे बड़ा सोलरप्लांट 🧐
23/09/2025

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