05/11/2024
बिहार की बदहाली का जिम्मेदार कौन?
दोस्तों, बिहार आज बदहाल क्यों है, प्रदेश का युवा पलायन पर मजबूर क्यों है, भ्रष्टाचार और अपराध का ग्राफ क्यों बढ़ रहा है, लगभग प्रत्येक गाँव आज युवा रहित क्यों होते जा रहे हैं? प्रदेश में दिशाहीन एवं अभिशप्त सरकार क्यों है, क्यों बिहार जातिगत ज़हरवाद के विषबेल में पलने पर मजबूर है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो प्रत्येक प्रदेशवासियों को झकझोरते तो ज़रूर हैं लेकिन उचित समाधान की तलाश को अधूरा ही छोड़ देते हैं!
दोस्तों, आजकल पर्व-त्यौहारों
का मौसम चल रहा है। सभी अपने-अपने घरों को लौटना चाहते हैं ताकि दीपावाली- छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्वों पर शामिल हो सके! लेकिन यह कितना दुखद है कि देश के किसी भी शहर से राज्य की ओर जाने वाली ट्रेनों में टॉयलेट सीटों से लेकर दरवाजों तक लटक कर सफर करता एक बिहारी युवा का दर्द कोई बिहारी राजनेता आज तक जान क्यों न सका?
यह कितना दुखद है कि जिस राज्य में लगभग चार दशकों से अपने को अति पिछड़ा व पिछड़ों का अगुवा मानने वालों की ही सरकार रही है लेकिन आज भी जातीय जनगणना, हिंदू-मुस्लिम जैसे उबाऊ और नकारात्मक मुद्दे ही प्रमुखता से उछाले जाते हैं और आम जनता को मदहोशी की दवा दे दी जाती है। प्रदेश कि जनता दिनोदिन भिखमंगी ओर बदहाली की ओर धकेली ही जा रही हैं।
यह बिहार का दुर्भाग्य ही है कि पिछले चालीस वर्षों में शायद ही कोई एक कंपनी बिहार में अपना आश्रय बनाया हो। एक-दो जो कंपनियां जान पर खेलकर आई भी लेकिन सरकारी उदासीनता, अधिकारियों की बदसलूकी और संसाधनों की अनुपलब्धता ने उनसभी का हिम्मत तोड़ दिया। आज बिहार जिस दिशा में जा रहा है वह ख़तरनाक भविष्य की ओर इशारा करता है। प्रदेश का पूरा सिस्टम चुनावी समीकरण का हिस्सा बन गया है। आज स्वास्थ्य और शिक्षा की बदहाली कोई मुद्दा नहीं है बल्कि दोहन करके उसे रसातल में पहुंचा दिया गया है। यह एक साजिश के तहत किया जा रहा है- स्पष्ट दिख रहा है।
आज भी प्रदेश देश में सबसे पिछले पायदान पर खड़ा है। सुशासन बाबू का कुर्सी से चिपके रहने का असली गुनाहगार कोई और नहीं बल्कि राज्य की सभी राजनीतिक दल ही हैं। जो इसके पूर्णतः दोषी हैं। वहीं इन दलों ने राज्य की जनता का विवेक खाकर अपना विस्तार ज़रूर करते जा रहे हैं!
आज समय आ गया है कि बदहाल युवा अपनी किस्मत को टटोले, अपने प्रति होते नफरती व्यवहार को पहचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए ही सही लड़ने का मद्दा दिखाकर इन स्वार्थी दलों एवं नपुंसकी सरकार को उखाड़ फेंके। यहीं अन्तिम और सकारात्मक समाधान है।
निवेदक:- विजय कुमार चंदेश्वर यादव
युवा समाजसेवी और ट्रस्टी- श्री दुर्गा माता मंदिर सेवा ट्रस्ट रामनगर, फुलपरास, मधुबनी (बिहार)