27/05/2026
🕉️ नवनाथ: रहस्य, सिद्धियाँ और उनकी अलौकिक उत्पत्ति की अमर कथाएँ! ✨
नाथ संप्रदाय में 'नवनाथों' का सर्वोच्च स्थान है। क्या आप जानते हैं इन ९ महान सिद्ध योगियों की उत्पत्ति कैसे हुई थी? आइए जानते हैं:
१. 🔱 मच्छिन्द्रनाथ (मत्स्यनाथ):
इन्हें नाथ प्रथा का संस्थापक और हठयोग का जनक माना जाता है। बौद्ध धर्म के ६४ महासिद्धों में भी ये पूजनीय हैं। महाबली हनुमान जी के साथ इनका युद्ध अत्यंत प्रसिद्ध है, जिसमें इनकी मन्त्रशक्ति देखकर स्वयं हनुमान जी ने प्रसन्न होकर इन्हें अपना आशीर्वाद दिया था।
२. 🔱 गोरक्षनाथ (गोरखनाथ):
नाथ संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध गुरु! त्रेतायुग में श्रीराम के राज्याभिषेक और द्वापर में श्रीकृष्ण के विवाह में भी ये उपस्थित थे। इनकी उत्पत्ति का रहस्य अद्भुत है—एक स्त्री ने इनकी दी हुई भस्म को डर से गोबर के ढेर पर रख दिया था। १२ वर्ष बाद जब मत्स्यनाथ ने अलख जगाई, तो उसी गोबर के ढेर से गोरखनाथ प्रकट हुए!
३. 🔱 गहिनीनाथ:
जब गोरखनाथ जी एकांत में मृतसंजीवनी विद्या का अभ्यास कर रहे थे, तब बच्चों के आग्रह पर उन्होंने गीली मिट्टी के एक पुतले पर मन्त्र पढ़ा, जिससे वह जीवित हो उठा। बाद में इसी सिद्ध बालक को मधुमय नामक ब्राह्मण को दत्तक पुत्र के रूप में सौंपा गया।
४. 🔱 जालंधरनाथ:
पंजाब का जालंधर शहर इन्हीं के नाम पर है! हस्तिनापुर के राजा सोम के यज्ञ कुंड की अग्नि से इनकी उत्पत्ति हुई थी। अपने शिष्य कृष्णपाद के साथ मिलकर इन्होंने कापालिक संप्रदाय की स्थापना की।
५. 🔱 कानिफनाथ (कृष्णपाद):
इन्हें प्रबुद्ध नारायण के नौ अवतारों ("नवनारायण") में से एक माना जाता है। ब्रह्मा जी के तेज से एक हथिनी के कान में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम कनीफनाथ पड़ा। शरीर का रंग काला होने के कारण इन्हें कृष्णपाद भी कहा गया।
६. 🔱 भर्तृहरिनाथ (भरथरी नाथ):
ये उज्जैन के राजा और सम्राट विक्रमादित्य के बड़े भाई थे। पत्नी पिंगला से जुड़े एक अमर फल के रहस्य और वैराग्य के कारण, इन्होंने अपना विशाल राजपाट त्याग दिया और गुरु गोरखनाथ से संन्यास की दीक्षा ली।
७. 🔱 रेवणनाथ:
रेवा नदी के किनारे बालू की प्रतिमा पर ब्रह्मा जी का तेज पड़ने से ये जीवित हो उठे! भगवान दत्तात्रेय ने दर्शन देकर इनकी हर इच्छा पूरी होने का वरदान दिया और बाद में इनके मन में छिपे अज्ञान और अभिमान को दूर कर इन्हें पूर्ण सिद्ध बनाया।
८. 🔱 नागनाथ (वटनाथ):
ब्रह्मा जी के तेज को एक नागिन द्वारा निगलने के बाद एक अंडे से इनका जन्म हुआ। दत्तात्रेय जी की कृपा से इन्हें सभी ६४ विद्याओं का ज्ञान प्राप्त हुआ। एक बार अज्ञानतावश इनका युद्ध अपने ही गुरु भाई मच्छिन्द्रनाथ से हो गया था, जिसके बाद सत्य जानकर इन्होंने क्षमा मांगी।
९. 🔱 चर्पटीनाथ:
शिवजी के तेज का कुछ भाग नदी किनारे उगी घास में फंस गया, जिससे ९ महीने बाद इनका जन्म हुआ। घास या ईख में फंसे होने के कारण इनका नाम चर्पटीनाथ पड़ा। देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में पश्चाताप कर इन्होंने नवें और अंतिम सिद्ध का स्थान ग्रहण किया।
🙏 नवनाथ स्मरण मन्त्र 🙏
आदि-नाथ ओ स्वरुप, उदय-नाथ उमा-महि-रुप।
जल-रुपी ब्रह्मा सत-नाथ, रवि-रुप विष्णु सन्तोष-नाथ।
हस्ती-रुप गनेश भतीजै, ताकु कन्थड-नाथ कही जै।
माया-रुपी मछिन्दर-नाथ, चन्द-रुप चौरङ्गी-नाथ।
शेष-रुप अचम्भे-नाथ, वायु-रुपी गुरु गोरख-नाथ।
घट-घट-व्यापक घट का राव, अमी महा-रस स्त्रवती खाव।
ॐ नमो नव-नाथ-गण, चौरासी गोमेश।
आदि-नाथ आदि-पुरुष, शिव गोरख आदेश।
ॐ श्री नव-नाथाय नमः।।
राधे राधे! 🌸🙏
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