22/09/2026
🌺 जय श्री नारायण 🌺
🪷 परिवर्तिनी एकादशी की सुंदर कथा 🪷
बहुत समय पहले की बात है। सूर्यवंशी राजा बलि भगवान श्रीहरि के परम भक्त थे। वे धर्मपूर्वक राज्य करते और सदैव भगवान का स्मरण करते थे। उनके हृदय में दया, सत्य और भक्ति का वास था।
एक बार भगवान श्रीहरि ने वामन रूप धारण करके राजा बलि की परीक्षा ली। भगवान ने उनसे केवल तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने प्रसन्न होकर अपना वचन दे दिया।
तब भगवान वामन ने विराट रूप धारण किया। दो पगों में उन्होंने पृथ्वी और आकाश को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए जब कोई स्थान शेष नहीं बचा, तब राजा बलि ने विनम्र होकर अपना सिर भगवान के चरणों में रख दिया।
भगवान श्रीहरि राजा बलि की सत्यनिष्ठा और भक्ति से प्रसन्न हुए। उन्होंने राजा बलि को अपना विशेष कृपापात्र बनाया और कहा—
“जो भक्त श्रद्धा से मेरा स्मरण करता है, व्रत करता है और अपने मन को मेरे चरणों में समर्पित करता है, मैं उसके जीवन से अज्ञान और पापरूपी अंधकार को दूर करता हूँ।”
इसी एकादशी को भगवान के वामन रूप और उनके भक्त राजा बलि की भक्ति का स्मरण किया जाता है।
🌿 इस कथा की सीख:
भगवान को धन, शक्ति या वैभव से नहीं, बल्कि सत्य, समर्पण और निर्मल भक्ति से पाया जाता है।
इसलिए परिवर्तिनी एकादशी पर अपने मन में भगवान श्रीहरि का स्मरण करें और प्रेम से कहें—
🙏 “हे श्री नारायण! मेरा मन सदा आपके चरणों में लगा रहे। मेरे द्वारा किसी जीव को दुःख न पहुँचे और मेरे जीवन में सत्य, सेवा और भक्ति बनी रहे।”
🕉️ ॐ नमो नारायणाय।
🌸 जय श्री हरि। जय श्री नारायण। 🌸
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