19/06/2026
🌿 सुख-दुःख में समभाव — सच्ची भक्ति की पहचान 🌿
एक बार भगवान श्रीकृष्ण के पास दो भक्त आए। पहला भक्त अत्यंत धनवान था, जबकि दूसरा बहुत गरीब। दोनों ही भगवान के प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे।
कुछ समय बाद धनवान भक्त का व्यापार अचानक घाटे में चला गया और उसकी प्रतिष्ठा भी कम होने लगी। दूसरी ओर, गरीब भक्त को अप्रत्याशित रूप से धन और सम्मान मिलने लगा। लोग आश्चर्य करने लगे कि भगवान ने ऐसा क्यों किया।
दोनों भक्त श्रीकृष्ण के पास पहुंचे। धनवान भक्त ने कहा, "प्रभु! मैंने सदैव आपकी भक्ति की, फिर भी मुझे दुःख और अपमान क्यों मिला?" गरीब भक्त ने भी पूछा, "प्रभु! मुझे अचानक इतना सुख और सम्मान क्यों मिला?"
भगवान मुस्कुराए और बोले, "मैं अपने भक्त की परीक्षा नहीं, बल्कि उसके हृदय की दृढ़ता प्रकट करता हूँ। सच्चा भक्त वह नहीं जो केवल सुख मिलने पर मेरा स्मरण करे, बल्कि वह है जो सुख-दुःख, लाभ-हानि और मान-अपमान में समान बना रहे।"
फिर श्रीकृष्ण ने देखा कि धनवान भक्त अपने दुःख में भी भगवान का नाम जप रहा था और गरीब भक्त अपने सम्मान में भी विनम्र बना हुआ था। तब भगवान ने कहा, "तुम दोनों ने समभाव बनाए रखा, इसलिए तुम मेरी दृष्टि में समान रूप से प्रिय हो।"
यही गीता का संदेश है— "जो व्यक्ति सुख-दुःख, लाभ-हानि और मान-अपमान में विचलित नहीं होता, वही सच्चा भक्त और सच्चा योगी है।"
✨ संदेश: जीवन में परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं। कभी सुख मिलता है तो कभी दुःख, कभी सम्मान तो कभी अपमान। जो हर परिस्थिति में ईश्वर पर विश्वास बनाए रखता है और अपने मन को स्थिर रखता है, वही सच्ची भक्ति का अधिकारी बनता है।
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🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏
राधे राधे 🌺