Baba Basant Rishi Ji, Baba Sanghada ji.

Baba Basant Rishi Ji, Baba Sanghada ji. To become strong does not mean to become wealthy, harsh and heartless. To become strong means to grow beyond pleasure and pain! Patti, Amritsar, Punjab, India.

12/09/2025

बाबा बसंत और बाबा सगांडा देव के पेज पर एक छोटी सी कहानी, जो जीवन की एक बहुत बड़ी सच्चाई को दर्शाती है.
एक मूर्तिकार ने दो पत्थरों को तराशना शुरू किया. एक दर्द से चिल्ला उठा और उसने मूर्ति बनने का मौका खो दिया. दूसरा चुपचाप दर्द सहता रहा और आज वह एक पूजनीय प्रतिमा है, जिसे हर कोई पूजता है. वहीं, पहला पत्थर, जिसने दर्द से मुँह मोड़ लिया था, अब रोज़ लोगों के पैरों के नीचे नारियल फोड़ने के काम आता है.
यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में जो लोग संघर्षों और चुनौतियों से डरते हैं, वे कभी सम्मान नहीं पाते. लेकिन जो लोग दर्द सहने की हिम्मत रखते हैं, वे एक दिन सफलता की ऊँचाइयों को छूते हैं और पूजे जाते हैं.
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May this festival strengthen in one and all the commitment to truth, non violence, and harmony.
21/04/2024

May this festival strengthen in one and all the commitment to truth, non violence, and harmony.

जय बाबा सिंघाड़ा देव जी की जयश्री अनिल जैन जी, श्री सागर चंद अनिल जैन नितिन जैन दिल्ली, संघपति परिवार की ओर से 31 मार्च ...
05/04/2024

जय बाबा सिंघाड़ा देव जी की जय

श्री अनिल जैन जी, श्री सागर चंद अनिल जैन नितिन जैन दिल्ली, संघपति परिवार की ओर से 31 मार्च 2024 ध्वजा दिवस कुछ तस्वीरें💐

28/06/2021

*ध्यान*

ध्यान या फिर योग जिसका हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। आज तो पूरा विश्व चाहे वो किसी भी देश या धर्म से संबंध रखता हो योग / ध्यान क्रिया को अपनाने में संकोच नहीं कर रहा है।
इसका सबसे बड़ा कारण है विज्ञान और आध्यात्म।
योग क्रिया जो कि पूरी तरह से वैज्ञानिक है एवम् आध्यात्मिकता के साथ जुड़ी हुई है।
अगर आप मोक्ष रूपी लक्ष्मी को पाना चाहते है तो ध्यान बहुत जरूरी है।
और अगर संसार में रहकर शांतिपूर्ण एवम् स्वस्थ जीवन जीना चाहते है तो ध्यान प्रक्रिया का होना बहुत जरूरी है।
ज्यादातर लोग आसन और प्राणायाम के बारे में जानते है। जबकि ध्यान की क्रिया को कई प्रकार से क्या जा सकता है। ये ध्यान या योग क्रिया प्रत्येक मनुष्य की अलग अलग मनोदशा के अनुरूप होती है।
मुख्यतः ध्यान चार प्रकार के होते है।1.देखना 2.सुनना 3. स्वास लेना
4. एकाग्र सोच - आंखे बंदकर के मौन रहते हुए एकाग्रता को बढ़ाना।

देखने को दृष्टा या साक्षी ध्यान, सुनने को श्रवण ध्यान, स्वांस लेने को प्राणायाम ध्यान एवम् एकाग्र सोच को भृकुटि ध्यान कह सकते है। इन चार प्रकार के ध्यान के हजारों उप प्रकार हो सकते है।
चारों तरह के ध्यान को लेटकर, बैठकर, खड़े होकर और चलते चलते भी कर सकते है।
उक्त तरीकों में ही ढलकर
ध्यान और योग को जैन, बौद्ध और हिन्दू धर्म में हजारों प्रकार के बताएं गए है।

*देखना*- इस विधि को अधिक से अधिक लोग करते आए है। इस विधि को कहते है साक्षी या दृष्टा भाव में रहना अथार्त देखते रहना जैसे देखना ही सब कुछ हो। देखने के दौरान सोचना बिल्कुल नहीं। यह ध्यान विधि आप कभी भी, कहीं भी किसी भी जगह और अगर आप सड़क पर चल रहे हो तो इसका प्रयोग अच्छे से किया जा सकता है। फिर देखें आपके मस्तिष्क में 'विचार और भाव' किस तरह से नियंत्रित होते है और आप उस आनंद यात्रा का मज़ा ले सकते है।

*सुनना*- सुनकर श्रवण बनने वाले बहुत है । ध्यान लगाकर सुनना बहुत कठिन प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में पास एवम् दूर की ध्वनि को सुनना और फिर कान और आंख बंद कर के भीतर से उत्पन्न होने वाली आवाज को सुनना और एकाग्रचित होकर धीरे धीरे यह सुनना गहरा होकर भीतर के शून्य में चला जाता है तब अंदर से ओंकार की ध्वनि सुनाई देने लग जाती है।

*श्वास लेना*- बंद आंखों से भीतर और बाहर गहरी सांस ले और बलपूर्वक दबाव डाले बिना जहां तक हो सके गहरी सांस ले। आती जाती सांस के प्रति होशपूर्ण एवम् सजग रहें और महसूस करें। बस यही प्राणायाम की सरल विधि है।


*एकाग्र सोच*- सिद्धासन में बैठकर सबसे पहले दोनों आंखों के बीच भृकुटि पर ध्यान रखते हुए गहरी श्वास लेकर धीरे धीरे बाहर छोड़े अथार्त रेचक करें। फिर कुछ समय के लिए आंखें बंदकर स्वांस को गहरा गहरा ले और छोड़े । इस प्रक्रिया को 10 मिनट तक करें जिससे दूषित वायु बाहर निकल जाएगी और इस भृकुटि ध्यान को करने से मस्तिष्क शांत और तन मन प्रफुल्लित हो जाएगा।रोज ऐसा करने से ध्यान की एकाग्रता बढ़ेगी।

ये चारों क्रियाएं करने से मन और तन सुंदर और स्वस्थ होगा और आगे चलकर हमारा मोक्षमार्ग प्रशस्त करेगा और इसी भावना के साथ एक दिन हम उस मोक्षलक्ष्मी को प्राप्त कर सिद्ध शिला में विराजमान हो सकते है।

June 21 Baba Ji Darshan 🙏🙏
24/06/2021

June 21 Baba Ji Darshan 🙏🙏

18/01/2018

बाबा सगांडा देव जी की जय!!

बाबा सगांडा देव जी की समाधि स्थल पट्टी में वार्षिक ध्वजारोहण समारोह 25 मार्च 2018 दिन रविवार को होगा।

इस पावन दिन की छवि निहारने ओर उस भव्य उत्सव मे शामिल होने के लिए एक वोल्वो बस 24 मार्च शनिवार सुबह 6 बजे वल्लभ विहार रोहणी से जायेगी।

बाबा जी के श्री चरणो में भव्य और भाव से भग्ती करने के लिए कृपया अपनी अनुमति जल्द से जल्द प्रधान करें ताकि समय रहते उचित व्यवस्था की जा सके किराया
प्रति वयस्क 1000/- मात्र
12 साल तक प्रति सीट 500/- मात्र

बस 24 मार्च शनिवार सुबह 6 बजे जायेगी ओर
25 मार्च रविवार शाम 5 बजे वापिस लौटेगी
धन्यवाद

20/07/2017

आमतौर पर चातुर्मास काल में काफी जन छोटी-बड़ी तपस्या करते रहते है। सब तपस्वियोंकी खुप खुप अनुमोदना जो इस तप कार्य से जुड़े रहते है।

पर आप जो भी तप करते हो उससे आपके परिवार सदस्योंको तकलीफ ना हो उसका ख़ास ख्याल रखे। आप अपने घर एकास्ना/बियासना/उपवास करे और आप को खाना बनाना संभव ना हो तो बच्चे बाहर होटल में खाना खाये तो आप पाप के भागिदार होते हो।

एक घर की बहु मायके जाती है। सास बियासना करती है उस वक़्त ससुरजी खाकरा से काम चलाते है और सास अपने बेटे को और पोते/पोती को बाहर खाने को भेजती है तो उस सास के तप को कोई फल प्राप्त नही होगा।

*भले आप कोई तप ना कर सको पर परिवार सदस्योंको हर संभव घर पर खाना खिलाये*

आपके सामयिक, प्रतिक्रमण से भी घर के काम में बाधा ना आये इसका ख़ास ख्याल रखे.....

*🍂_____________________🍂*

*"धर्म" की सबसे सरल व्याख्या*

*किसी भी आत्मा को हमारी*
*वजह से दुःख ना पहुँचे,*
*यही धर्म है...*
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*जिनाज्ञा विरूध कुछ लिखा गया हो तो मिच्छामी दुककड़म

30/03/2015
25/02/2014

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