25/07/2026
॥ श्रीहरिः शरणम् ॥
देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी एवं पावन चातुर्मासारम्भ की मंगलमयी शुभकामनाएँ।
आज से भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शेषशय्या पर योगनिद्रा में विराजमान होते हैं। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, साधना, सेवा, सत्संग, जप, दान और धर्ममय जीवन का दिव्य आह्वान है।
श्रीमद्भागवत का अमर संदेश है—
"स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।
अहैतुक्यप्रतिहता ययाऽत्मा सुप्रसीदति॥" (१.२.६)
जब संसार बाहरी उपलब्धियों में उलझा हो, तब चातुर्मास हमें भीतर की यात्रा का मार्ग दिखाता है। यही समय है—मन को निर्मल करने का, जीवन को अनुशासित करने का और प्रभु के चरणों में स्वयं को समर्पित करने का।
आइए, श्रद्धापूर्वक "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" महामंत्र का जप करें और प्रार्थना करें कि भगवान श्रीहरि की कृपा से प्रत्येक घर में धर्म, ज्ञान, आरोग्य, सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना का दिव्य प्रकाश सदैव बना रहे।
॥ श्रीहरिः सर्वलोकमङ्गलं करोतु ॥ 🙏
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