02/07/2020
महावीर मन्दिर में सेन्सर पद्धति से चरणामृत वितरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई है। कम्पनी की ओर से जो पद्धति अपनायी गयी थी, उसमें एक बार में अंजलि में 10 मि.ली. चरणामृत आता था जो अंजलि में कुछ अधिक होने के कारण गिरने की आशंका रहती थी; अतः उसने उसके नीचे एक स्टेनलेस स्टील का पात्र उसको जमा करने के लिए लगाया था और उसे एक पाईप से जोड़ा था जिसका निकास उस स्थान से है जहाँ से मन्दिर का पानी बाहर जाता है।
कल शाम यानी 01-07-2020 की शाम में जब किशोर कुणाल मन्दिर में आये थे; उन्होंने इस व्यवस्था को देखा था और उन्होंने इसमें दो परिवर्तन कराये। पहला परिवर्तन था कि अंजलि सेन्सर के नीचे करने पर 10 मिल.ली. के बजाय 5 मि.ली. चरणामृत आये, ताकि अंजलि से बाहर न जाये।
और दूसरा परिवर्तन यह कराया कि पाइप से इसको जल-निकास के लिए जो जोड़ा गया था, उस पाइप को हटाकर नीचे एक पात्र रख दिया गया है। यह व्यवस्था बुधवार की शाम से लागू हो गयी है। महावीर मन्दिर के फेस-बुक पर जो फोटो आया है, वह कल दोपहर का था।
सेन्सर पद्धति द्वारा चरणामृत-वितरण की प्रक्रिया कोरोना-वायरस से संक्रमण से बचाव का एक अत्यन्त उपयोगी उपाय है और इसका स्वागत होना चाहिए। इसके परिष्कार में कोई सुझाव हो, तो उसका स्वागत है।
महावीर मन्दिर यह स्पष्ट कर देना चाहता है कि महावीर मन्दिर में प्रतिदिन रुद्राभिषेक में शिवजी पर दर्जनों लीटर दूध और जल चढ़ते हैं, उनमें किसी को भी जल-निकास से नहीं जोड़ा गया है, बल्कि हरेक शिवलिंग के सामने नीचे पात्र रहता है, जिसमें वह जमा होता है और उसका श्रद्धापर्वूक विसर्जन किया जाता है।
यह गलती प्रारम्भ में कम्पनी द्वारा हुई थी, जिसको 24 घण्टे के अन्दर कल सुधार लिया गया था। फिर भी, जिन लोगों ने इसे बतलाया है, उनको धन्यवाद। जिनकी भावनाएँ आहत हुई हैं उनके प्रति खेद और जिन्होंने केवल निन्दा के लिए प्रचारित किया है, उनके प्रति भी आभार, क्योंकि हमारे सन्तों ने कह रखा है- निन्दक नियरे राखिये, आंगन कुटी छवाय।
अभी जो व्यवस्था है, उसके कुछ चित्र नीचे दिये जा रहे हैं। इन पर भी कोई सुझाव हो, तो उनका स्वागत।