Jai Mata Di

Jai Mata Di Ya Devi Sarva Bhutesu Maa rupena samsthita I

Namestasyai II Namestasyai II Namestasyai II Namo Namah

माँ के भवन से सर्दियों में सुबह के नज़ारे एकबार सारे भक्त बोलेंगे "जय माता दी"
16/12/2019

माँ के भवन से सर्दियों में सुबह के नज़ारे एकबार सारे भक्त बोलेंगे "जय माता दी"

26/11/2019

ॐ नम: शिवाय पार्वती शिव नमो नम:।
जय माँ क्रीं काली-महाकाल नमो नम:।।

नवरात्रि के पावन पर्व पर आज हम आपको इक्यावन शक्तिपीठों में प्रमुख पाकिस्तान स्थिति चमत्कारिक  हिंगलाज मातामाता मंदिर के ...
09/10/2019

नवरात्रि के पावन पर्व पर आज हम आपको इक्यावन शक्तिपीठों में प्रमुख पाकिस्तान स्थिति चमत्कारिक हिंगलाज मातामाता मंदिर के बारे में बतायेगें, मुसलमान इसे कहते हैं 'नानी पीर'!!!!!!!!

माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान में स्थित है। इस शक्तिपीठ की देखरेख मुस्लिम करते हैं और वे इसे चमत्कारिक स्थान मानते हैं। इस मंदिर का नाम है माता हिंगलाज का मंदिर। हिंगोल नदी और चंद्रकूप पहाड़ पर स्थित है माता का ये मंदिर। सुरम्य पहाड़ियों की तलहटी में स्थित यह गुफा मंदिर इतना विशालकाय क्षेत्र है कि आप इसे देखते ही रह जाएंगे। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि यह मंदिर 2000 वर्ष पूर्व भी यहीं विद्यमान था।

मां हिंगलाज मंदिर में हिंगलाज शक्तिपीठ की प्रतिरूप देवी की प्राचीन दर्शनीय प्रतिमा विराजमान हैं। माता हिंगलाज की ख्याति सिर्फ कराची और पाकिस्तान ही नहीं अपितु पूरे भारत में है। नवरात्रि के दौरान तो यहां पूरे नौ दिनों तक शक्ति की उपासना का विशेष आयोजन होता है। सिंध-कराची के लाखों सिंधी हिन्दू श्रद्धालु यहां माता के दर्शन को आते हैं। भारत से भी प्रतिवर्ष एक दल यहां दर्शन के लिए जाता है।

इस मंदिर पर गहरी आस्था रखने वाले लोगों का कहना है कि हिन्दू चाहे चारों धाम की यात्रा क्यों ना कर ले, काशी के पानी में स्नान क्यों ना कर ले, अयोध्या के मंदिर में पूजा-पाठ क्यों ना कर लें, लेकिन अगर वह हिंगलाज देवी के दर्शन नहीं करता तो यह सब व्यर्थ हो जाता है। वे स्त्रियां जो इस स्थान का दर्शन कर लेती हैं उन्हें हाजियानी कहते हैं। उन्हें हर धार्मिक स्थान पर सम्मान के साथ देखा जाता है।

एक बार यहां माता ने प्रकट होकर वरदान दिया कि जो भक्त मेरा चुल चलेगा उसकी हर मनोकामना पुरी होगी। चुल एक प्रकार का अंगारों का बाड़ा होता है जिसे मंदिर के बहार 10 फिट लंबा बनाया जाता है और उसे धधकते हुए अंगारों से भरा जाता है जिस पर मन्नतधारी चल कर मंदिर में पहुचते हैं और ये माता का चमत्कार ही है की मन्नतधारी को जरा सी पीड़ा नहीं होती है और ना ही शरीर को किसी प्रकार का नुकसान होता है, लेकीन आपकी मन्नत जरूर पुरी होती है। हालांकि आजकल यह परंपरा नहीं रही।

पौराणिक तथ्य : पौराणिक कथानुसार जब भगवान शंकर माता सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर लेकर तांडव नृत्य करने लगे, तो ब्रह्माण्ड को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता के मृत शरीर को 51 भागों में काट दिया। मान्यतानुसार हिंगलाज ही वह जगह है जहां माता का सिर गिरा था। इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता व्याप्त है। कहा जाता है कि हर रात इस स्थान पर सभी शक्तियां एकत्रित होकर रास रचाती हैं और दिन निकलते हिंगलाज माता के भीतर समा जाती हैं।

कई महान लोगों ने टेका है यहां माथा : जनश्रुति है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम भी यात्रा के लिए इस सिद्ध पीठ पर आए थे। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्रि ने यहां घोर तप किया था। उनके नाम पर आसाराम नामक स्थान अब भी यहां मौजूद है। कहा जाता है कि इस प्रसिद्ध मंदिर में माता की पूजा करने को गुरु गोरखनाथ, गुरु नानक देव, दादा मखान जैसे महान आध्यात्मिक संत आ चुके हैं।

ऐसा है मंदिर का स्वरूप : यहां का मंदिर गुफा मंदिर है। ऊंची पहाड़ी पर बनी एक गुफा में माता का विग्रह रूप विराजमान है। पहाड़ की गुफा में माता हिंगलाज देवी का मंदिर है जिसका कोई दरवाजा नहीं। मंदिर की परिक्रमा यात्री गुफा के एक रास्ते से दाखिल होकर दूसरी ओर निकल जाते हैं। मंदिर के साथ ही गुरु गोरखनाथ का चश्मा है। मान्यता है कि माता हिंगलाज देवी यहां सुबह स्नान करने आती हैं।

यहां माता सती कोटटरी रूप में जबकि भगवान भोलेनाथ भीमलोचन भैरव रूप में प्रतिष्ठित हैं। माता हिंगलाज मंदिर परिसर में श्रीगणेश, कालिका माता की प्रतिमा के अलावा ब्रह्मकुंड और तीरकुंड आदि प्रसिद्ध तीर्थ हैं। इस आदि शक्ति की पूजा हिंदुओं द्वारा तो की ही जाती है इन्हें मुसलमान भी काफी सम्मान देते हैं।

हिंगलाज मंदिर में दाखिल होने के लिए पत्थर की सीढिय़ां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर में सबसे पहले श्री गणेश के दर्शन होते हैं जो सिद्धि देते हैं। सामने की ओर माता हिंगलाज देवी की प्रतिमा है जो साक्षात माता वैष्णो देवी का रूप हैं।

मुसलमानों के लिए 'नानी पीर' है माता : जब पाकिस्तान का जन्म नहीं हुआ था और भारत की पश्चिमी सीमा अफगानिस्तान और ईरान थी, उस समय हिंगलाज तीर्थ हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ तो था ही, बलूचिस्तान के मुसलमान भी हिंगला देवी की पूजा करते थे, उन्हें 'नानी' कहकर मुसलमान भी लाल कपड़ा, अगरबत्ती, मोमबत्ती, इत्र-फलुल और सिरनी चढ़ाते थे।

हिंगलाज शक्तिपीठ हिन्दुओं और मुसलमानों का संयुक्त महातीर्थ था। हिन्दुओं के लिए यह स्थान एक शक्तिपीठ है और मुसलमानों के लिए यह 'नानी पीर' का स्थान है।

प्रमुख रूप से यह मंदिर चारण वंश के लोगों की कुल देवी मानी जाती है। यह क्षे‍त्र भारत का हिस्सा ही था तब यहां लाखों हिन्दू एकजुट होकर आराधना करते थे।

कई बार मंदिर को तोड़ना का हुआ प्रयास : मुस्लिम काल में इस मंदिर पर मुस्लिम आक्रांतानों ने कई हमले किए लेकिन स्थानीय हिन्दू अरौ मुसलमानों ने इस मंदिर को बचाया। कहते हैं कि जब यह हिस्सा भारत के हाथों से जाता रहा तब कुछ आतंकवादियों ने इस मंदिर को क्षती पहुंचाने का प्रयास किया था लेकिन वे सभी के सभी हवा में लटके गए थे।

कैसे जाएं माता हिंगलाज के मंदिर दर्शन को????

इस सिद्ध पीठ की यात्रा के लिए दो मार्ग हैं- एक पहाड़ी तथा दूसरा मरुस्थली। यात्री जत्था कराची से चल कर लसबेल पहुंचता है और फिर लयारी। कराची से छह-सात मील चलकर "हाव" नदी पड़ती है। यहीं से हिंगलाज की यात्रा शुरू होती है।

यहीं शपथ ग्रहण की क्रिया सम्पन्न होती है, यहीं पर लौटने तक की अवधि तक के लिए संन्यास ग्रहण किया जाता है। यहीं पर छड़ी का पूजन होता है और यहीं पर रात में विश्राम करके प्रात:काल हिंगलाज माता की जय बोलकर मरुतीर्थ की यात्रा प्रारंभ की जाती है।

रास्ते में कई बरसाती नाले तथा कुएं भी मिलते हैं। इसके आगे रेत की एक शुष्क बरसाती नदी है। इस इलाके की सबसे बड़ी नदी हिंगोल है जिसके निकट चंद्रकूप पहाड़ हैं। चंद्रकूप तथा हिंगोल नदी के मध्य लगभग 15 मील का फासला है। हिंगोल में यात्री अपने सिर के बाल कटवा कर पूजा करते हैं तथा यज्ञोपवीत पहनते हैं। उसके बाद गीत गाकर अपनी श्रद्धा की अभिव्यक्ति करते हैं।

मंदिर की यात्रा के लिए यहां से पैदल चलना पड़ता है क्योंकि इससे आगे कोई सड़क नहीं है इसलिए ट्रक या जीप पर ही यात्रा की जा सकती है। हिंगोल नदी के किनारे से यात्री माता हिंगलाज देवी का गुणगान करते हुए चलते हैं। इससे आगे आसापुरा नामक स्थान आता है। यहां यात्री विश्राम करते हैं।

यात्रा के वस्त्र उतार कर स्नान करके साफ कपड़े पहन कर पुराने कपड़े गरीबों तथा जरूरतमंदों के हवाले कर देते हैं। इससे थोड़ा आगे काली माता का मंदिर है।

इस मंदिर में आराधना करने के बाद यात्री हिंगलाज देवी के लिए रवाना होते हैं। यात्री चढ़ाई करके पहाड़ पर जाते हैं जहां मीठे पानी के तीन कुएं हैं। इन कुंओं का पवित्र जल मन को शुद्ध करके पापों से मुक्ति दिलाता है। बस इसके आगे पास ही माता का मंदिर है।

नीलकंठ का दर्शन जरूर करें दुर्गा पूजा में।
07/10/2019

नीलकंठ का दर्शन जरूर करें दुर्गा पूजा में।

माँ वैष्णो देवी प्रसाद जय माँ वैष्णो देवी        🙏🌹🙏🌹🙏
03/10/2019

माँ वैष्णो देवी प्रसाद
जय माँ वैष्णो देवी
🙏🌹🙏🌹🙏

नवरात्र का दूसरा दिन नवदुर्गा में दूसरा स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की होगी पूजा ।माता सभी का कल्याण करें ।जय माता दी।
30/09/2019

नवरात्र का दूसरा दिन
नवदुर्गा में दूसरा स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की होगी पूजा ।
माता सभी का कल्याण करें ।जय माता दी।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणीतृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति...
29/09/2019

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च
सप्तमं कालरात्रिति महागौरीति चाष्टमम्
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्वलाभां
सद्रलवन्मकरकुण्डलहारभूषाम्।।
दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां
रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम्।।

आप सभी दोस्तों और आपके पूरे परिवार को शारदीय #नवरात्रि की शुभकामनाएं🙏🙏

🚩🚩माँ जगदम्बा का सुस्वागतम 🚩🚩🙏🙏🙏🙏

जैसे दूध मे चावल डालने से खीर बनती है वैसे ""Jai Mata Dii"" लिखने से तकदीर बनती है 🙏
09/09/2019

जैसे दूध मे चावल डालने से खीर बनती है वैसे ""Jai Mata Dii"" लिखने से तकदीर बनती है 🙏

मंगलवार~मां के विंध्य धाम से🌺श्री विंध्यवासिनी माता का भव्य अलौकिक श्रृंगार दर्शन🙏🏻🌺श्री विंध्यवासिनी माता की जय🌺🙏🏻मां ह...
21/05/2019

मंगलवार~मां के विंध्य धाम से🌺श्री विंध्यवासिनी माता का भव्य अलौकिक श्रृंगार दर्शन🙏🏻🌺श्री विंध्यवासिनी माता की जय🌺🙏🏻मां हम बच्चों पर अपना आशीर्वाद बनाए रहे🌺🌺🌺🌺🌺🙏🏻🌺जय माता दी🙏🏻

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ।
06/04/2019

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ।

अक्षरधाम मन्दिर ।
06/04/2019

अक्षरधाम मन्दिर ।

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