मान्यता है की मंदिर में भगवान का घर होता है। मंदिर में भगवन की पूजा से इंसान को विस्वास, निष्ठा, मन की शांति, एवं असीम कृपा प्राप्त होती है। इससे इंसान अपने जीवन में सकारात्मक सोच एवं भावनाओ की ओर प्रवृत होता है एवं इंसान का आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। मंदिर एक सेवा का स्थान होता है जिससे समाज और देश का सही दिशा में विकाश होता है । इसी सोच का फल है कि राजीव नगर, रोड नंबर ६, पटना २४ में एक भ
व्य मंदिर का निर्माण किया गया।
मंदिर निर्माण के प्रारम्भ में कुछ बाधाये आयी। फिर जब निर्वाण कार्य यहाँ के निवासियों के सहयोग से प्रारम्भ हुआ तो विस्वास और अनुमान से पहले ही मंदिर का निर्माण एवं मंदिर में देवी देवताओ का प्राण प्रतिष्ठा सम्पन हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के समय विभिन छेत्रो से आये हुए साधु-संत, ब्राम्हण, एवं कुछ प्रतिष्ठित मंदिर के संचालक आश्चर्यचकित थे की ५ जून २०१३ को मंदिर निर्माण कार्य प्रारम्भ हुआ और २३ फेब्रुअरी २०१५ में भव्य दो तल्ला आदिदेव मंदिर अस्तित्व्य में आ गया।
१०२४ वर्ग फ़ीट रकबा में दो तल्ला बना आदिदेव मंदिर में सभी प्रचलित देवी-देवता प्रतिष्ठित है।
निचला तल्ला:
* शिव दरबार :: शिव लिंग, माँ पर्वती, गणेश जी, कार्तिकेन जी एवं नंदी बाबा
* हनुमान जी / बजरंग बलि का मंदिर
* चतुर्भुजी दुर्गा जी का मंदिर
* सातो बहन काली जी और भैरो बाबा का मंदिर
उपरी तल्ला:
* गौरी संकर भगवन का मंदिर
* राम दरबार :: भगवन राम, माता सीता, लक्षमण जी एवं हनुमंथ लल्ला का मंदिर
* राधे - कृष्णा का मंदिर