Gaudiya Math Patna

Gaudiya Math Patna All glory to Sri Sri guru and gaurang

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं16 अगस्त 2025 Help by little donation
24/07/2025

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
16 अगस्त 2025



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सभी भक्तों को श्रीगुरु पूर्णिमा व्यास पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं🌺 महर्षि वेदव्यास जी की कथा — एक भावपूर्ण कथा रूप मे...
10/07/2025

सभी भक्तों को श्रीगुरु पूर्णिमा व्यास पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

🌺 महर्षि वेदव्यास जी की कथा — एक भावपूर्ण कथा रूप में 🌺

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बहुत समय पहले की बात है...
जब धरती पर धर्म धीरे-धीरे लुप्त होने लगा था और युग परिवर्तन की घड़ी आ रही थी, तब पराशर ऋषि, एक महान तपस्वी, अपने ज्ञान और तेज से प्रकृति को आलोकित कर रहे थे।

एक दिन, वे यमुना नदी के किनारे तपस्या करने निकले। वहीं उन्हें मिलीं मत्स्यगंधा – नाव चलाने वाली एक साधारण लेकिन तेजस्विनी कन्या। उस समय उनका नाम था सत्यवती। पराशर जी ने उसमें दिव्य तेज देखा और अपनी दिव्य दृष्टि से जाना कि यह कन्या कोई साधारण नहीं, बल्कि काल की कोख में इतिहास लिखने वाली है।

उन्होंने सत्यवती से आग्रह किया कि वे एक तेजस्वी संतान को जन्म दें — एक ऐसा पुत्र जो युगों को जोड़ने वाला, धर्म की रक्षा करने वाला, और ज्ञान का भंडार रचने वाला हो।
सत्यवती ने सहमति दी, लेकिन एक शर्त पर – “हे ऋषिवर! यह संतान जन्म लेकर तुरंत चला जाए और मुझे कुमारीत्व का वरदान मिले।”

पराशर जी मुस्कराए, और अपनी योगशक्ति से समय को रोक दिया। यमुना तट के एक द्वीप पर उन्होंने सत्यवती को वरदान दिया और वहीं हुआ कृष्णवर्णीय बालक का जन्म — वह बालक जन्म लेते ही युवा हो गया, तपस्वरूप हो गया, और माँ को प्रणाम कर बोला – “माँ, मुझे तप के लिए जाना होगा। एक दिन मैं लौटूंगा जब समय मुझे पुकारेगा।”

और वह चला गया… यही थे — महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास।
(कृष्ण = श्याम वर्ण, द्वैपायन = द्वीप पर जन्मा)

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📜 ज्ञान का अवतरण:

समय बीता…
युग बदला…
लोगों की बुद्धि मंद पड़ने लगी…
वेदों को कंठस्थ करना कठिन हो गया…
धर्म ग्रंथ धीरे-धीरे केवल ऋषि-मुनियों तक सीमित रह गए।

तब भगवान ने वेदव्यास जी को प्रेरणा दी —
“हे व्यास! अब समय आ गया है कि तुम वेदों को संकलित करो, उन्हें जनसामान्य की भाषा में लाओ, और धर्म की पुनः स्थापना करो।”

व्यास जी ने अपनी तपशक्ति से सम्पूर्ण वेदों को गहराई से समझा और उन्हें चार भागों में बाँटा:

1. ऋग्वेद – स्तुतियाँ और मंत्र

2. यजुर्वेद – यज्ञ विधियाँ

3. सामवेद – गान और संगीत

4. अथर्ववेद – रहस्य, चिकित्सा और नीति

हर वेद को उन्होंने एक-एक शिष्य को सौंपा, जो उन्हें आगे बढ़ाते गए। इस प्रकार वेद केवल ब्राह्मणों की संपत्ति न रहकर सम्पूर्ण भारत की आत्मा बन गए।

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🕉️ महाभारत की रचना और कर्तव्यबोध:

वेदों के विभाग के बाद भी, वेदव्यास जी के मन में एक बेचैनी थी।
उन्होंने देखा कि धर्म केवल कर्मकांड में सिमट कर रह गया है।
लोग जीवन की जटिलताओं में उलझ गए हैं, और उन्हें सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

तब उन्होंने रचा – महाभारत।
इतिहास नहीं, इतिहास का आईना।
हर पात्र – धर्म, अधर्म, मोह, मोहभंग, भक्ति, और निर्लिप्तता का प्रतीक।

उन्होंने स्वयं हस्तिनापुर में आकर नियोग द्वारा धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर जैसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया, ताकि धर्म की रेखा आगे बढ़े।
श्रीकृष्ण, अर्जुन, भीष्म, द्रोण जैसे महान पात्र उन्हीं की गाथा में उत्पन्न हुए।

श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया – परंतु गीता को शब्द देने वाला कौन था?
वेदव्यास जी ही थे।

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📖 अंतिम पीड़ा और श्रीमद्भागवत की रचना:

इतना सब करने के बाद भी वेदव्यास जी को लगा –
“मैंने ज्ञान दिया, पर प्रेम नहीं दिया…
मैंने यज्ञ की विधियाँ बताईं, पर हृदय की भक्ति नहीं जगाई…”

उन्हें आत्मग्लानि हुई।

तभी पहुँचे नारद मुनि।

नारद ने कहा –
“हे व्यास! तुम्हारे ग्रंथों में ज्ञान है, कर्म है, नीति है – पर ‘भगवत भक्ति’ की सरिता नहीं है। जब तक तुम श्रीहरि की लीलाओं का गान नहीं करोगे, तुम्हारा हृदय शांत नहीं होगा।”

तब वेदव्यास जी ने बैठकर रचा –
"श्रीमद्भागवत महापुराण" – एक ऐसा ग्रंथ जो केवल ज्ञान नहीं, प्रेम, भक्ति, और रस का अमृत है।

श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ, गोपियों की प्रेमगाथाएँ, उद्धव का वैराग्य, प्रह्लाद की भक्ति, ध्रुव का तप, विदुर का ज्ञान — ये सब भावों की गंगा बनकर शुकदेव जी के मुख से बहती रहीं, और राजा परीक्षित ने जीवन के अंतिम सात दिनों में मोक्ष को प्राप्त किया।

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🏞️ आज भी वे हैं हमारे बीच:

कहते हैं — वेदव्यास जी चिरंजीवी हैं।
वे आज भी बद्रीकाश्रम में तपस्यारत हैं।
जब कभी धर्म संकट में होता है, तो उनकी रचनाएँ दीपक की तरह अंधकार में राह दिखाती हैं।

हर वर्ष 'गुरु पूर्णिमा' उन्हीं की स्मृति में मनाई जाती है।
हम सब उनके शिष्य हैं, चाहे हम किसी भी धर्म-मत के हों।

【𝐂𝐀𝐔𝐓𝐈𝐎𝐍 !】𝗧𝗵𝗲 𝗱𝗲𝘃𝗼𝘁𝗲𝗲𝘀 𝗮𝗻𝗱 𝗽𝗲𝗼𝗽𝗹𝗲, 𝗶𝗻 𝗴𝗲𝗻𝗲𝗿𝗮𝗹, 𝗮𝗿𝗲 𝗰𝗮𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻𝗲𝗱 𝗻𝗼𝘁 𝘁𝗼 𝗯𝗲 𝗺𝗶𝘀𝗹𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝘁𝗵𝗲 𝗽𝗵𝗼𝘁𝗼𝗴𝗿𝗮𝗽𝗵 𝗼𝗳 𝗮 𝗳𝗮𝗸𝗲 𝗰𝗼𝗶𝗻 𝗯𝗲𝗶𝗻𝗴 𝗰𝗶...
19/02/2024

【𝐂𝐀𝐔𝐓𝐈𝐎𝐍 !】
𝗧𝗵𝗲 𝗱𝗲𝘃𝗼𝘁𝗲𝗲𝘀 𝗮𝗻𝗱 𝗽𝗲𝗼𝗽𝗹𝗲, 𝗶𝗻 𝗴𝗲𝗻𝗲𝗿𝗮𝗹, 𝗮𝗿𝗲 𝗰𝗮𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻𝗲𝗱 𝗻𝗼𝘁 𝘁𝗼 𝗯𝗲 𝗺𝗶𝘀𝗹𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝘁𝗵𝗲 𝗽𝗵𝗼𝘁𝗼𝗴𝗿𝗮𝗽𝗵 𝗼𝗳 𝗮 𝗳𝗮𝗸𝗲 𝗰𝗼𝗶𝗻 𝗯𝗲𝗶𝗻𝗴 𝗰𝗶𝗿𝗰𝘂𝗹𝗮𝘁𝗲𝗱 𝗮𝘀 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗺𝗺𝗲𝗺𝗼𝗿𝗮𝘁𝗶𝘃𝗲 𝗖𝗼𝗶𝗻 𝗿𝗲𝗹𝗲𝗮𝘀𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝘁𝗵𝗲 𝗛𝗼𝗻'𝗯𝗹𝗲 𝗣𝗿𝗶𝗺𝗲 𝗠𝗶𝗻𝗶𝘀𝘁𝗲𝗿, 𝗦𝗵𝗿𝗶 𝗡𝗮𝗿𝗲𝗻𝗱𝗿𝗮 𝗠𝗼𝗱𝗶, 𝗼𝗻 𝘁𝗵𝗲 𝗼𝗰𝗰𝗮𝘀𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝟭𝟱𝟬𝘁𝗵 𝗕𝗶𝗿𝘁𝗵 𝗔𝗻𝗻𝗶𝘃𝗲𝗿𝘀𝗮𝗿𝘆 𝗼𝗳 𝗦𝗿𝗶𝗹𝗮 𝗕𝗵𝗮𝗸𝘁𝗶 𝗦𝗶𝗱𝗵𝗱𝗵𝗮𝗻𝘁𝗮 𝗦𝗮𝗿𝗮𝘀𝘄𝗮𝘁𝗶 𝗚𝗼𝘀𝘄𝗮𝗺𝗶 𝗣𝗿𝗮𝗯𝗵𝘂𝗽𝗮𝗱 𝗼𝗻 𝟴𝘁𝗵 𝗙𝗲𝗯𝗿𝘂𝗮𝗿𝘆 𝟮𝟬𝟮𝟰. 𝗔 𝗦𝗶𝗹𝘃𝗲𝗿 𝗖𝗼𝗺𝗺𝗲𝗺𝗼𝗿𝗮𝘁𝗶𝘃𝗲 𝗖𝗼𝗶𝗻 𝗼𝗳 𝗦𝗿𝗶𝗹𝗮 𝗕𝗵𝗮𝗸𝘁𝗶 𝗦𝗶𝗱𝗵𝗱𝗵𝗮𝗻𝘁𝗮 𝗦𝗮𝗿𝗮𝘀𝘄𝗮𝘁𝗶 𝗚𝗼𝘀𝘄𝗮𝗺𝗶 𝗣𝗿𝗮𝗯𝗵𝘂𝗽𝗮𝗱 𝘄𝗮𝘀 𝗿𝗲𝗹𝗲𝗮𝘀𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝘁𝗵𝗲 𝗛𝗼𝗻'𝗯𝗹𝗲 𝗣𝗿𝗶𝗺𝗲 𝗠𝗶𝗻𝗶𝘀𝘁𝗲𝗿 𝗶𝗻 𝘁𝗵𝗲 𝗲𝘃𝗲𝗻𝘁 𝗼𝗿𝗴𝗮𝗻𝗶𝘇𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝗠𝗶𝗻𝗶𝘀𝘁𝗿𝘆 𝗼𝗳 𝗖𝘂𝗹𝘁𝘂𝗿𝗲, 𝗚𝗼𝘃𝘁 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 𝗮𝗻𝗱 𝗚𝗮𝘂𝗱𝗶𝘆𝗮 𝗠𝗶𝘀𝘀𝗶𝗼𝗻, 𝗕𝗮𝗴𝗵𝗯𝗮𝘇𝗮𝗿, 𝗞𝗼𝗹𝗸𝗮𝘁𝗮, 𝗮𝘁 𝘁𝗵𝗲 𝗕𝗵𝗮𝗿𝗮𝘁 𝗠𝗮𝗻𝗱𝗮𝗽𝗮𝗺, 𝗼𝗻 𝟴 𝗙𝗲𝗯𝗿𝘂𝗮𝗿𝘆 𝟮𝟬𝟮𝟰; 𝗮𝗻𝗱 𝗶𝘀 𝘃𝗶𝘀𝗶𝗯𝗹𝘆 𝗱𝗶𝗳𝗳𝗲𝗿𝗲𝗻𝘁.



Bhagvat KathaSri Gaudiya math temple Mithapur patnaDay 2 part 2
24/09/2023

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हरे कृष्णजय जगन्नाथ जय बलदेव जय सुभद्रा सम्पूर्ण विश्व में स्थित श्री गौड़ीय मठ मंदिर के विभिन्न शाखाओं से भक्त गण रथ या...
14/06/2023

हरे कृष्ण
जय जगन्नाथ जय बलदेव जय सुभद्रा
सम्पूर्ण विश्व में स्थित श्री गौड़ीय मठ मंदिर के विभिन्न शाखाओं से भक्त गण रथ यात्रा मे शामिल होने और श्री क्षेत्र धाम परिक्रमा करने के लिए श्री जगन्नाथ पूरी धाम पहुंच गए हैं

হরে কৃষ্ণ
জয় জগন্নাথ জয় বলদেব জয় জয় সুভদ্রা
সারা বিশ্বে অবস্থিত শ্রী গৌড়ীয় মঠ মন্দিরের বিভিন্ন শাখা থেকে ভক্তরা গণ রথযাত্রায় অংশ নিতে এবং শ্রী ক্ষেত্রধাম প্রদক্ষিণ করতে শ্রী জগন্নাথ পুরীধামে পৌঁছেছেন।

Hare Krishna
All Glory to Jagannath Baldev and Subhadra
Devotees from different branches of Shri Gaudiya Math Temple located all over the world have reached Shri Jagannath Puri Dham to participate in Jaggarnath Rath Yatra and circumambulate Shri Kshetra Dham, and to clean Gundicha temple
Hari bol

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Former Governer of Sikkim and meghalaya His excellency Sri Ganga Prasad Chaurasiya visited Sri Gaudiya Math temple Patna...
12/06/2023

Former Governer of Sikkim and meghalaya His excellency Sri Ganga Prasad Chaurasiya visited Sri Gaudiya Math temple Patna on the occasion of 150 th birth anniversary of Shrila prabhupad sri Bhakti siddhanta saraswati Goswami Prabhupada date 12/6/23

जय श्रील प्रभुपादJay Sri Gaudiya Math
06/06/2023

जय श्रील प्रभुपाद
Jay Sri Gaudiya Math

03/06/2023

The Gaudiya Math says that imitating the devotee of Hari or putting on the dress of Narad as in a theatrical performance is far from walking after the devotee of Hari or following Narad. The delightful tune, time, cadence alone do not constitute the Hari-kirtan of the Gaudiya Math those are found, even in the performances of the gramophone or of harlots. 'Chetanata' 'consci- ousness' is necessary, the fiery life is necessary, simultaneous practice and preaching is necessary.

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Gaudiya Math Mithapur
Patna
800001

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Monday 5am - 9pm
Tuesday 5am - 9pm
Wednesday 5am - 9pm
Thursday 5am - 9pm
Friday 5am - 9pm
Saturday 5am - 9pm
Sunday 5am - 9pm

Telephone

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