Shishir Thakur Rbt

Shishir Thakur Rbt Shiv Kali Kamakhiya Divya Dham
जय सोखा शम्भु नाथ बाबा।। I'm down to earth guy ☺️ i bilive in Humanity

शिव काली कामाख्या दिव्य धाम।।
26/04/2026

शिव काली कामाख्या दिव्य धाम।।

23/04/2026

शिव काली कामाख्या दिव्य धाम
श्मशान घाट।।

23/04/2026

जय छिन्नमस्तिका मां
तंत्र काट।।।

16/04/2026

“जब विष्णु और शिव एक हो जाएं… तब जन्म लेता है वो रूप, जिससे खुद समय भी डरता है—हरिहर!”🔥🔥🔥🙏🙏जब सृष्टि संतुलन खोने लगी… जब...
16/04/2026

“जब विष्णु और शिव एक हो जाएं… तब जन्म लेता है वो रूप, जिससे खुद समय भी डरता है—हरिहर!”🔥🔥🔥🙏🙏

जब सृष्टि संतुलन खोने लगी… जब धर्म और अधर्म की रेखा धुंधली हो गई… तब देवताओं ने महसूस किया कि केवल अलग-अलग शक्तियाँ अब पर्याप्त नहीं हैं। तभी जन्म हुआ एक ऐसे रूप का… जो दो नहीं, बल्कि एक ही सत्य का द्वार था—हरिहर।
एक समय, तीनों लोकों में असुरों का आतंक बढ़ गया था। Lord Vishnu अपने सुदर्शन चक्र से व्यवस्था बनाए रखते, और Lord Shiva अपने तांडव से अधर्म का विनाश करते… लेकिन इस बार शत्रु अलग था।
वह न केवल शक्तिशाली था, बल्कि चालाक भी—वह सृष्टि के नियमों को ही मोड़ देता था।
देवताओं ने एक साथ प्रार्थना की—“हे विष्णु, हे महादेव… अब अलग-अलग नहीं, एक होकर आओ।”
तभी आकाश फटा… ब्रह्मांड कांप उठा…
एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ—आधा शांत, आधा प्रचंड…
एक ओर मुकुटधारी, करुणामय विष्णु… दूसरी ओर जटाधारी, अग्निमय शिव…
और उस क्षण जन्म हुआ—हरिहर का।
हरिहर ने जब आँखें खोलीं, तो समय थम गया।
उनकी एक नजर में सृष्टि की करुणा थी… और दूसरी में विनाश की ज्वाला।
उन्होंने एक साथ चक्र और त्रिशूल उठाया—
और एक ही प्रहार में उस असुर के अस्तित्व को मिटा दिया, जिसने संतुलन को तोड़ा था।
युद्ध समाप्त हुआ… लेकिन संदेश अमर हो गया—
“जब सृष्टि में संतुलन बिगड़ता है, तब अलग-अलग शक्तियाँ नहीं… एकता ही समाधान बनती है।”
हरिहर का रूप हमें सिखाता है कि
संरक्षण और विनाश विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सत्य के दो पहलू हैं।

“श्मशान की आग में जब दुनिया डरती है…वहीं खड़े होते हैं कपाली शिव—तुम्हारे सबसे बड़े डर को तोड़ने के लिए।”🔥🔥🔥श्मशान की नि...
16/04/2026

“श्मशान की आग में जब दुनिया डरती है…
वहीं खड़े होते हैं कपाली शिव—तुम्हारे सबसे बड़े डर को तोड़ने के लिए।”🔥🔥🔥

श्मशान की निस्तब्धता में, जहाँ हर सांस राख की गंध से भरी होती है और समय भी जैसे थम-सा जाता है, वहीं प्रकट होते हैं Lord Shiva अपने एक रहस्यमय और भयावह रूप—कपाली में। चारों ओर धधकती चिताएँ, उठता हुआ धुआँ, और बीच में खड़े शिव… शरीर भस्म से लिप्त, जटाएँ बिखरी हुई, आँखों में गहरी, असीम शून्यता।
उनके हाथ में एक कपाल—मानव खोपड़ी—जिसमें संसार का सारा अहंकार, मोह और माया जैसे समा गई हो। यह कपाल केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि उस सत्य का प्रतीक है कि अंत में हर जीव इसी राख में बदल जाता है। जो जन्मा है, वह नश्वर है… और जो नश्वर है, वह केवल शिव की शरण में ही शांति पाता है।
कपाली रूप में शिव न तो केवल संहारक हैं, न ही केवल तपस्वी। वे उस गहरे रहस्य के स्वामी हैं जहाँ जीवन और मृत्यु एक ही धारा के दो किनारे बन जाते हैं। उनकी आँखें बंद हैं, पर वे सब कुछ देख रहे हैं—हर जन्म, हर मृत्यु, हर पीड़ा, हर मुक्ति।
शमशान में बैठा एक साधक भय से कांप रहा था। उसने शिव को देखा—उस भयावह, राख से ढके स्वरूप को… और उसकी आत्मा सिहर उठी। लेकिन तभी, शिव ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उन आँखों में न क्रोध था, न विनाश… बल्कि एक अजीब सी करुणा, एक गहरी शांति।
“डर क्यों रहा है?” शिव की आवाज़ गूंजी, जैसे स्वयं आकाश बोल रहा हो।
“यह अंत नहीं… यह आरंभ है।”
साधक ने कपाल की ओर देखा—और अचानक उसे समझ आया कि जो वह डर रहा था, वह केवल उसका अपना अहंकार था। शिव उस अहंकार को तोड़ने आए थे, उसे मुक्त करने आए थे।
धीरे-धीरे, शमशान का भय एक गहरी शांति में बदलने लगा। धुएँ के बीच, आग की लपटों में, साधक ने सत्य को देखा—कि मृत्यु कोई शत्रु नहीं, बल्कि एक द्वार है… और उस द्वार के पार खड़े हैं स्वयं कपाली शिव, जो हर आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाते हैं।
और उस रात, शमशान में केवल चिताएँ ही नहीं जल रही थीं…
बल्कि एक मनुष्य का अहंकार भी भस्म हो रहा था।

The Divine Thirst for Blood of Maa Kali is a deeply symbolic expression of her fierce role in destroying negativity and ...
16/04/2026

The Divine Thirst for Blood of Maa Kali is a deeply symbolic expression of her fierce role in destroying negativity and restoring cosmic balance. In sacred stories, her drinking of blood—especially in battles like that against Raktabeej—represents her power to prevent the endless multiplication of evil and ego. This imagery is not literal but spiritual, signifying the complete absorption and elimination of destructive forces at their root. Her “thirst” reflects an intense commitment to protecting dharma, where no trace of negativity is allowed to survive. To devotees, this form is not frightening but reassuring, as it shows the Divine Mother’s unwavering resolve to safeguard truth. In this sacred symbolism, Maa Kali’s fierce aspect reveals the power that consumes all darkness, ensuring that purity, balance, and righteousness prevail in the universe.

**ra

Shiva being with Vasuki and Nandi represents the perfect harmony of power, devotion, and cosmic balance. Vasuki, the sac...
16/04/2026

Shiva being with Vasuki and Nandi represents the perfect harmony of power, devotion, and cosmic balance. Vasuki, the sacred serpent coiled around Shiva, symbolizes awakened Kundalini energy, mastery over fear, and control over primal forces, while Nandi, the devoted bull, embodies loyalty, strength, and unwavering faith. In Shiva’s presence, these two companions reflect different dimensions of the spiritual path—Vasuki representing inner transformation and energy, and Nandi representing devotion and surrender. Together, they show that true realization requires both awakened शक्ति and steady devotion. Shiva, as the supreme consciousness, remains calm and centered amidst these powerful forces, guiding them in perfect balance. In this sacred vision, Shiva with Vasuki and Nandi reveals the union of energy, devotion, and awareness, leading the seeker toward higher consciousness and spiritual harmony.

**ra

भगवान  #गणेश का नाम लेने मात्र से ही समस्त बाधाएं और मुसिबतें दूर हो जाती हैं, और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगम...
16/04/2026

भगवान #गणेश का नाम लेने मात्र से ही समस्त बाधाएं और मुसिबतें दूर हो जाती हैं, और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है।
उनकी कृपा से बुद्धि का विकास होता है और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।
जो भक्त सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी विघ्न स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
गणपति बप्पा अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं।
इसलिए प्रत्येक शुभ कार्य की शुरुआत में उनका नाम लेना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

क्या किसी मंत्र को सिद्ध करने के लिए सच में सवालाख जाप करना अनिवार्य होता है, या यह केवल एक परंपरा है? यह प्रश्न हर उस स...
16/04/2026

क्या किसी मंत्र को सिद्ध करने के लिए सच में सवालाख जाप करना अनिवार्य होता है, या यह केवल एक परंपरा है? यह प्रश्न हर उस साधक के मन में उठता है जो साधना के मार्ग पर पहला कदम रखता है।
शास्त्रों और तांत्रिक परंपराओं में 1,25,000 जाप अर्थात सवालाख जाप को एक पूर्ण अनुष्ठान की सीमा माना गया है। यह संख्या साधक को अनुशासन, धैर्य और ऊर्जा के संचय की एक गहराई तक ले जाती है। लगातार इतने जाप करने से मंत्र की ध्वनि, कंपन और साधक की चेतना एक विशेष स्तर पर जुड़ने लगती है। इसी कारण इसे सिद्धि का एक सशक्त मार्ग बताया गया है।
परंतु यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि साधना का वास्तविक आधार केवल संख्या नहीं होता। यदि मन अशांत है, नियमों का पालन नहीं है, और श्रद्धा अधूरी है, तो लाखों जाप भी केवल शब्दों की पुनरावृत्ति बनकर रह जाते हैं। वहीं दूसरी ओर यदि साधक का मन पूर्णतः समर्पित है, आचरण शुद्ध है और साधना विधि सही है, तो कम जाप में भी मंत्र जागृत होने लगता है।

तांत्रिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो गुरु की दीक्षा, स्थान की पवित्रता, समय की अनुकूलता और साधक की आंतरिक अवस्था यह सब मिलकर मंत्र को शक्ति प्रदान करते हैं। कई बीज मंत्र और देवी साधनाएं ऐसी होती हैं जिनमें अल्प जाप में ही अनुभव होने लगता है, क्योंकि वहां संख्या से अधिक भाव और विधि का महत्व होता है।
सवालाख जाप एक शक्तिशाली साधना पथ है, यह साधक को गहराई में ले जाता है, अपितु यह कोई कठोर नियम नहीं है कि इसके बिना सिद्धि असंभव है। सच्ची साधना वहां प्रारंभ होती है जहां जप केवल शब्द नहीं रहता, अपितु साधक और मंत्र एक हो जाते हैं।
अंततः साधना का रहस्य यही है कि संख्या से अधिक महत्व भावना, नियम और आंतरिक शुद्धता का है। जब यह तीनों एक साथ जुड़ते हैं, तब मंत्र स्वयं साधक के भीतर प्रकट होने लगता है।

नमामीशमीशान
#मंत्रसाधना #तंत्रविद्या #आध्यात्मिकज्ञान #भैरवसाधना

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