07/03/2016
शिव भक्त इस दिन यदि शिव की पूरी
आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं तो वह
जरूर प्रसन्न होते हैं। महाशिवरात्रि के दिन
भगवान भोलेनाथ की पूजा का जो
नियमानुसार विधान है। यदि आप इस
विधि-विधान से पूजा करेंगे तो शिव कृपा
आप पर जरूर बरसेगी। शिवपुराण के अनुसार,
इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान
पूर्वक पूजा करने तथा व्रत रखने से विशेष फल
मिलता है।
-महाशिवरात्रि के दिन किसी शिवालय
में जाएं। वहां मिट्टी के बर्तन में पानी
भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि
डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।
-शिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ
जरूर सुनें और रात्रि को जागरण करें।
-अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र
का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।
-महाशिवरात्रि पर दिन-रात पूजा का
विधान है। चार पहर दिन में शिवालयों में
जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र
चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती
है। साथ ही चार पहर रात्रि में वेदमंत्र
संहिता, रुद्राष्टा ध्यायी पाठ
ब्राह्मणों के मुख से सुनना चाहिए।
-सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजन-
आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए।
सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति
कीर्तन के साथ महाशिवरात्रि का पूजन
संपन्न होता है।
-यदि घर के आस-पास शिवमंदिर न हो तो
शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर
भी उसकी पूजा की जा सकती है। माना
जाता है कि इस दिन शिवपुराण का पाठ
सुनना चाहिए. रात को जागरण कर
शिवपुराण का पाठ सुनना हर व्रती का
धर्म माना गया है।
महाशिवरात्रि का दिन भगवान शंकर का
सबसे पवित्र दिन होता है। कहते हैं कि इस
व्रत को करने से सब पापों का नाश हो
जाता है।
विशेष मंत्र:
भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र के लिए बीज
मंत्र
ॐ नमः शिवाय
शिव वंदना:-
ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम् ।
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम् ।।
वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे
मुकुन्दप्रियम् ।
वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवंशंकरम् ।।
महामृत्युंजय मंत्र:-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा ∫
मृतात् ।।
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र:-
सौराष्ट्रे सोमनाथं च, श्रीशैले
मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालं ॐ कारममलेश्वरम् ॥
परल्यां वैधनाथ च, डाकिन्यां भीमशंकरम् ।
सेतुबन्धे तु रामेशं, नागेशं दारुकावने ॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं, त्र्यंबकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारं, धुश्मेशं च शिवालये ॥
ऐतानि ज्योतिर्लिंगानि, सायंप्रात:
पठेन्नर ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥