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06/05/2026
 #कबीरखुदा_का_नाम_कबीर Fazaile Amal is a reliable holy book of Muslims which is made by taking evidence of selected Hadi...
10/01/2025

#कबीरखुदा_का_नाम_कबीर

Fazaile Amal is a reliable holy book of Muslims which is made by taking evidence of selected Hadiths from Hadiths. Hadith is second in importance for Muslims after Holy Quran. There is a chapter Fazaile Zikr in Fazaile Amal. Its verses no. 1, 2, 3, 6 and 7 glorify Kabir Allah.

 #कबीरखुदा_का_नाम_कबीर In Fazaile Zikr, there is clear evidence in verse no. 1, 2, 3, 6 and 7 that the one who revealed ...
10/01/2025

#कबीरखुदा_का_नाम_कबीर

In Fazaile Zikr, there is clear evidence in verse no. 1, 2, 3, 6 and 7 that the one who revealed the knowledge of Holy Quran, (Allah) Brahm (Kaal i.e. Kshar Purush) is saying that you should praise Kabir Allah. That Kabir Allah knows all the hidden and visible things and he is Kabir and has a great status. When the angels get any order from Kabir Allah, they get scared out of fear. So much so that when the fear goes away from their hearts, they ask each other what is the order of Kabir Parvardigar. That Kabir is of great status. All these orders are from Kabir Allah who has a great status.
Watch daily on Shraddha TV from 2:00 pm to 3:00 pm.

 #कबीरखुदा_का_नाम_कबीर Hazrat Aqsad Sallallahu Alaihi Wa Sallam (Hazrat Muhammad) has said that there is no such person ...
10/01/2025

#कबीरखुदा_का_नाम_कबीर

Hazrat Aqsad Sallallahu Alaihi Wa Sallam (Hazrat Muhammad) has said that there is no such person who says 'Laila-h-illalah' and the doors of the heavens will not open for him, so much so that this Kalima directly reaches the throne, provided Kabira keeps away from sins. Two Kalimas are mentioned, one is 'Laila-h-illalah' and the other is 'Allahu Akbar' (Kabir). {Here the meaning of Allah Akbar is Lord Kabir (Kabir Saheb i.e. Kavirdev).}

 #गीता_वाला_काल_कौन_हैगीता वाला काल कौन?पवित्र गीता जी को बोलने वाला काल (ब्रह्म-ज्योति निरंजन) है, न कि श्री कृष्ण जी। ...
27/12/2024

#गीता_वाला_काल_कौन_है
गीता वाला काल कौन?
पवित्र गीता जी को बोलने वाला काल (ब्रह्म-ज्योति निरंजन) है, न कि श्री कृष्ण जी। क्योंकि श्री कृष्ण जी ने पहले कभी नहीं कहा कि मैं काल हूँ तथा बाद में कभी नहीं कहा कि मैं काल हूँ। श्री कृष्ण जी काल नहीं हो सकते। उनके दर्शन मात्र को तो दूर-दूर क्षेत्र के स्त्री तथा पुरुष तड़फा करते थे। पशु-पक्षी भी उनको प्यार करते थे।
देखें साधना टीवी पर प्रतिदिन शाम 7:30 से 8:30 तक।




 #गीता_वाला_काल_कौन_हैगीता वाला काल कौन?अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि ‘हे अ...
27/12/2024

#गीता_वाला_काल_कौन_है
गीता वाला काल कौन?
अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि ‘हे अर्जुन! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।‘
सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है। क्योंकि श्री कृष्ण जी अपना विराट रूप कौरवों की सभा में पहले ही दिखा चुके थे जो अनेकों ने देखा था।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज




 #गीता_वाला_काल_कौन_हैगीता वाला काल कौन?गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है क...
27/12/2024

#गीता_वाला_काल_कौन_है
गीता वाला काल कौन?
गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’
अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवन्! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान पवित्र वेदों के मंत्रों द्वारा उच्चारण कर रहे हैं तथा अपने जीवन की रक्षा के लिए मंगल कामना कर रहे हैं। कुछ आपके दाढ़ों में लटक रहे हैं, कुछ आपके मुख में समा रहे हैं। हे सहस्रबाहु अर्थात् हजार भुजा वाले भगवान! आप अपने उसी चतुर्भुज रूप में आईये। मैं आपके विकराल रूप को देखकर धीरज नहीं रख पा रहा हूँ।
श्री कृष्ण जी तो अर्जुन के साले थे। श्री कृष्ण की बहन सुभद्रा का विवाह अर्जुन से हुआ था। क्या व्यक्ति अपने साले को भी नहीं जानता? इससे सिद्ध है कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा, काल ब्रह्म ने बोला था।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज




   ’’साखी कंधार देश की चली‘‘ जन्म साखी के पृष्ठ 470-471 पर:-एक मुगल पठान ने पूछा कि आपका गुरू कौन है? श्री नानक जी ने उत...
22/12/2024


’’साखी कंधार देश की चली‘‘ जन्म साखी के पृष्ठ 470-471 पर:-
एक मुगल पठान ने पूछा कि आपका गुरू कौन है? श्री नानक जी ने उत्तर दिया कि जिन्दा पीर है। वह परमेश्वर ही गुरू रूप में आया था। उसका शिष्य सारा जहाँ है। फिर ‘‘साखी रूकनदीन काजी के साथ होई’’ जन्म साखी के पृष्ठ 183 पर कुछ वाणी इस प्रकार हैं:-
नानके आखे रूकनदीन सच्चा सुणहू जवाब। खालक आदम सिरजिया आलम बड़ा कबीर।
कायम दायम कुदरती सिर पिरां दे पीर। सजदे करे खुदाई नू आलम बड़ा कबीर।।
भावार्थ:- श्री नानक जी ने कहा है कि रूकनदीन काजी! जिस खुदा ने आदम जी की उत्पत्ति की है। वह बड़ा परमात्मा कबीर है। वह ही पृथ्वी पर सतगुरू की भूमिका करता है। वह सिर पीरां दे पीर यानि सब गुरूओं का सिरताज है। सब से उत्तम ज्ञान रखता है। वह कायम यानि श्रेष्ठ दायम यानि समर्थ परमात्मा (कुदरती) है।

#भगवान_कौन_है
#सजदेकरे_खुदाईनू_आलम_बड़ा_कबीर

    #भगवान_कौन_है    अगम निगम बोध के पृष्ठ 44 पर नानक जी का शब्द है:-वाह-वाह कबीर गुरू पूरा हैशब्दवाह-वाह कबीर गुरू पूरा...
22/12/2024


#भगवान_कौन_है
अगम निगम बोध के पृष्ठ 44 पर नानक जी का शब्द है:-
वाह-वाह कबीर गुरू पूरा है
शब्द
वाह-वाह कबीर गुरू पूरा है।(टेक)
पूरे गुरू की मैं बली जाऊँ जाका सकल जहूरा है।
अधर दुलीचे परे गुरूवन के, शिव ब्रह्मा जहाँ शूरा है।
श्वेत ध्वजा फरकत गुरूवन की, बाजत अनहद तूरा है।
पूर्ण कबीर सकल घट दरशै, हरदम हाल हजूरा है।
नाम कबीर जपै बड़भागी, नानक चरण को धूरा है।
देखें साधना टीवी पर प्रतिदिन शाम 7:30 से 8:30 तक।

#सजदेकरे_खुदाईनू_आलम_बड़ा_कबीर

   गुरु ग्रन्थ साहिब, राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1, पृष्ठ 24, शब्द 29फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस।।खरा सिआणां बहुता भार...
22/12/2024


गुरु ग्रन्थ साहिब, राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1, पृष्ठ 24, शब्द 29
फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस।।
खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।।3।।
मैं कीता न जाता हरामखोर, उह किआ मुह देसा दुष्ट चोर।
नानक नीच कह बिचार, धाणक रूप रहा करतार।।4।।
श्री नानक जी ने कहा कि परमात्मा मनमोहिनी सूरत में तथा जिस देश में जाता है वैसा ही वेश बना लेता है, जैसे जिंदा महात्मा रूप में बेई नदी पर मिले, सतलोक में पूर्ण परमात्मा वाले वेश में तथा उतर प्रदेश में धाणक(जुलाहे) रूप में स्वयं करतार (पूर्ण प्रभु) विराजमान है। यही धाणक(जुलाहे) रूप में सतपुरुष अर्थात् अकाल मूर्त ही है। वह परमात्मा कबीर है।
#भगवान_कौन_है
#सजदेकरे_खुदाईनू_आलम_बड़ा_कबीर

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