30/05/2026
अधिकमास पूर्णिमा आज: 3 साल बाद दुर्लभ संयोग, व्रत-दान का मिलेगा कई गुना फल
शनिवार से पुण्यकाल शुरू, पूर्णिमा तिथि रविवार दोपहर तक, सत्यनारायण व श्रीहरि विष्णु की पूजा का महत्व
तीन साल में एक बार आने वाला अधिकमास इस बार ज्येष्ठ माह में पड़ने से धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा पर शनिवार से पुण्यकाल शुरू होगा, जबकि पूर्णिमा तिथि रविवार दोपहर तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए व्रत, स्नान, दान और भगवान सत्यनारायण व श्रीहरि विष्णु की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
खेड़ा शिव मंदिर सेक्टर-28 के पुजारी सुभाष चंद शर्मा के मुताबिक अधिकमास को पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु और शालीग्राम की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस बार पूर्णिमा पर शिव योग और सिद्ध योग जैसे दो शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इसकी आध्यात्मिक महत्ता और बढ़ गई है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार अधिकमास हर तीन वर्ष में एक बार आता है। इस बार ज्येष्ठ माह में अधिकमास पड़ने के कारण पूर्णिमा का महत्व सामान्य पूर्णिमा से कई गुना अधिक माना जा रहा है।
दान-पुण्य का भी रहेगा विशेष महत्व
अधिकमास पूर्णिमा पर जल से जुड़े दान को विशेष पुण्यदायी माना गया है। धर्माचार्यों के अनुसार इस दिन शरबत, पानी से भरा पात्र, बर्तन, छाता और जूते दान करने से पुण्य फल मिलता है। मान्यता के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या नीच राशि में हो, वे इस दिन खीर का दान करें तो स्वास्थ्य और मानसिक शांति में लाभ मिलता है। इसलिए खास होती है पूर्णिमा : धार्मिक दृष्टि से पूर्णिमा वह तिथि मानी जाती है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच 180 डिग्री की दूरी होती है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देता है और मन, भावनाओं व आध्यात्मिक ऊर्जा पर उसका विशेष प्रभाव माना जाता है। धर्माचार्यों का कहना है कि अधिकमास पूर्णिमा पर किए गए जप, तप, व्रत और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, इसलिए इसे सर्वसिद्धिदायिनी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
यह रहेगा मुहूर्त: सत्यनारायण व्रत रखने और चंद्रमा की पूजा का विधान
शनिवार सुबह 11:58 बजे पूर्णिमा तिथि शुरू होगी, जो रविवार दोपहर 2:15 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में सत्यनारायण व्रत रखने और चंद्रमा की पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण और शालीग्राम जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा में आटे का चूरमा, फल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर अर्पित करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा भाव से पूर्णिमा व्रत रखने और शालीग्राम पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि आती है।