Punjabi Dharamshala - Palitana

Punjabi Dharamshala - Palitana Managed by Shri Atmanand Jain Punjabi Yatri Bhuvan (Trust)

पंजाब केसरी जैनाचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरि समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति, शासन दिवाकर, कल्याणक तीर्थोद्धारक, शान्तिदूत...
03/07/2026

पंजाब केसरी जैनाचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरि समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति, शासन दिवाकर, कल्याणक तीर्थोद्धारक, शान्तिदूत “पद्मश्री” विभूषित

जैनाचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी म. सा. के आज्ञानुवर्ती श्रमण श्रमणीवृन्द वर्ष 2026 चातुर्मास सूची।

*चैत्र वदी अमावस्या यानि सद्धर्म संरक्षक प.पू. श्री बुद्धिविजय जी म. (बूटेरायजी) का पुण्यतिथि स्मृति दिवस*🙏🏼🙏🏼 19 मार्च ...
19/03/2026

*चैत्र वदी अमावस्या यानि सद्धर्म संरक्षक प.पू. श्री बुद्धिविजय जी म. (बूटेरायजी) का पुण्यतिथि स्मृति दिवस*

🙏🏼🙏🏼 19 मार्च 2026 🙏🏼🙏🏼

🌹 आप भगवान श्री महावीर स्वामीजी के 72वें पट्टधर हुए। आपका जन्म पंजाब के दुलुआ गांव में सिक्ख धर्मानुयायी जाट परिवार में हुआ था। आप जन्म से जैन नहीं थे। गुरु की खोज करते करते लगभग 25 वर्ष की आयु में आप दिल्ली में स्थानकवासी मुनि नागरमल जी से दीक्षित हुए एवं आप ऋषि बूटेराय के नाम से जाने गए। शास्त्रों-आगमों का अध्ययन करते हुए आपने पाया कि मूर्तिपूजा शास्त्रोक्त सत्य है। इस काल में आपने बहुत संघर्ष किया, आपका बहुत विरोध हुआ लेकिन आगमों की सच्ची मान्यता के साथ आप डटकर खड़े रहे।

🌹 आप पंजाब से विहार करके आप मूलचंदजी व वृद्धिचंदजी सहित अहमदाबाद आये जहाँ श्वे.मू. के समर्थ संवेगी साधु पंन्यास मणिविजय जी म. के शिष्य बने। आपने मुनि बुद्धिविजय नाम प्राप्त किया। लगभग 26 चातुर्मास श्वे. मूर्तिपूजक रूप में संवेगी साधु के रूप में किये।

🌹 आपश्रीजी ने अपने जीवन के अनुभवों को आत्मकथा का रूप देते हुए पुस्तक लिखी थी जो "मुँहपत्ती चर्चा" के नाम से विख्यात हुई। संवत 1919 में आप श्रीजी ने 24 तीर्थंकरों को वंदन करते हुए काव्य की रचना की थी।

🌹 पंजाब पर आपकी विशेष करुणा रखी। इस कारण संवेगी दीक्षा के बाद मूलचंदजी को गुजरात एवं वृद्धिचंदजी को काठियावाड़ की ज़िम्मेदारी देकर आप स्वयं पंजाब पधारे, लोगों को मूर्तिपूजा का बोध दिया एवं सच्चे श्रावक बनाये। पाकिस्तान क्षेत्र के गुजरांवाला, रामनगर, पपनाखा, पिंडदादनखां, किला दीदारसिंह, किला सोभासिंह आदि में आप श्रीजी ने जिनमंदिरों की स्थापना की थी। दुर्भाग्यवश वे सभी पाकिस्तान में विलीन हो गए। आप श्रीजी द्वारा जम्मू में प्रतिष्ठित महावीर स्वामी जिनालय का जीर्णोद्धार काफी समय बाद आ. श्री विजय समुद्र सूरीश्वर जी म. के सदुपदेश से हुआ था।

🌹आपका संयम और पापभीरुता अजोड़ थी। एक बार आपके शिष्य आपको गोचरी में सब्जी देना भूल गए तो आप मात्र रोटी ही खा बैठे। आपके बोलने में कहीं हल्की सी भी शास्त्र विपरीत बात आ जाती तो उसके याद आने पर या किसी के कह देने पर स्वयं ही प्रायश्चित्त कर लेते थे। बहनों द्वारा द्रव्य पूजा करने के प्रसंग पर वे वहां से उठ खड़े हुए एवं इसे अपना आचार न समझा।

💐 आपके कई शिष्य हुए जिनमें प्रमुखतया 3 थे -
1) *श्री मूलचंदजी म. (मुक्तिविजय जी)* जिनसे केसर सूरिजी समुदाय एवं धर्म सूरिजी समुदाय की शाखा हुई
2) *श्री वृद्धिचंद जी म. (वृद्धिविजय जी)* जिनसे भक्ति सूरिजी समुदाय और नेमि सूरिजी समुदाय की शाखा हुई।
3) *श्री आत्मारामजी म. (विजयानंद सूरिजी)* जिनसे वल्लभ सूरिजी समुदाय, लब्धि सूरिजी समुदाय, रामचन्द्र सूरिजी समुदाय, भुवनभानु सूरिजी समुदाय की शाखा हुई।

यानि तपागच्छ के 8 समुदायों की परंपरा श्री बुद्धिविजय जी पर आकर मिलती है।

🌹 संवत 1932 में आपने आत्मारामजी आदि 16 साधुओं को संवेगी दीक्षा प्रदान की थी। आप श्रीजी ने स्वास्थ्य अनुसार अपने अंतिम 6 चातुर्मास अहमदाबाद में ही किये। चैत्र वदी अमावस्या संवत 1938 यानि ईस्वी सन् 1881 में आपश्रीजी का 75 वर्ष की आयु में अहमदाबाद में कालधर्म हुआ।

*पंजाब क्षेत्र में सैंकड़ो भव्य जीवों को जिनधर्म की सनातन परंपरा से जोड़ने वाले प.पू. बुद्धिविजय जी म. (बूटेराय जी) के चरणों में कोटिशः कोटिशः नमन। भले ही आपका कालधर्म आज से लगभग 145 वर्ष पूर्व हुआ किन्तु आपके द्वारा लगाया गया जिनधर्म का पौधा ही आपके शिष्य भगवन्तों ने महकाया एवं आपकी भावनानुसार संवेगी साधु परंपरा का विकास हो पाया।*

♈वल्लभ वाटिका♈
9782499999

Address

Atma Vallabh Niwas, Punjabi Jain Dharamshala, Talheti Road
Palitana
364270

Opening Hours

Monday 10am - 8pm
Tuesday 10am - 8pm
Wednesday 10am - 8pm
Thursday 10am - 8pm
Friday 10am - 8pm
Saturday 10am - 8pm
Sunday 10am - 8pm

Telephone

+912848358156

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Punjabi Dharamshala - Palitana posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Punjabi Dharamshala - Palitana:

Shortcuts

Share