माँ भगवती ज्योतिष अनुसंधान

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माँ भगवती ज्योतिष अनुसंधान सभी प्रकार के अनुष्ठान (पाठ) किए जाते है
ज्योतिष,कर्मकाड़,यन्त्र,मन्त्र,तन्त्र सम्बन्धित सभी पूजन

20/08/2026

महाकाली रति सिद्ध यंत्र में काली का कौन सा रूप समाहित है?

यह काम कला काली का एक रूप है। महाकाल की साधनाओं से सम्बन्धित है। काली मुख्य रूप से मूलाधार की देवी है और इन्हें गुह्य काली भी कहा जाता है। जो कामकला काली का ही पंथ विशेष से एक रूप है , काम कला काली के अनेक रूप है , जिनमें से एक यह भी है।

महाकाल मार्ग की ये साधनायें दो तरह से होती है , एक में भैरवी का प्रयोग होता है और दूसरे में अघोरपंथ की विधियाँ काम में लाइ जाती है।

काली वास्तव में महाकाल मार्ग की देवी है और महाकाल की ही शक्ति समझी जाती है । महाकाल शरीर या प्रकृति का ऊर्जा चक्र है ; जो एक शिवलिंग के रूप में प्रकृति की हर संरचना इसी ऊर्जा चक्र में हैं ।

इसी महाकाल के १३ बिन्दुओं के १३ क्षेत्र में काली के मुख्य १३ स्वरूप का विभाजन किया गया है । इसमें सबसे शक्तिशाली और मुख्य रूप मूलाधार की देवी कामकला काली है। इनको सिद्ध किये बिना काली क्या , किसी भी शक्ति को सिद्ध नहीं किया जा सकता।

इसलिए तन्त्र के सभी मार्गों में और योग आदि में भी सर्वप्रथम मूलाधार को ही सिद्ध करने की बात कही गयी है।

विधियाँ और प्रक्रिया मार्ग भेद-सम्प्रदाय भेद के अनुरूप से सैकड़ों प्रकार की है। हम जिनती देवियों की पूजा और साधना करते है, चाहे वह सरस्वती हो या लक्ष्मी , पार्वती हो या दुर्गा , ये सभी तन्त्र मार्ग की देवियाँ है। और सभी की साधनायें आधार रूप में तामसी ही है।

बाद में विभिन्न मार्ग के गुरुओं ने इनके रूप ध्यान और पूजा विधि को सात्विक रूप में संशोधित करके सामान्य लोगों की पहुँच में लाने का प्रयत्न किया। पर इन सात्विक रूपों में भी काली और दुर्गा का रूप तामसी ही है ।

मन्त्र – “क्लीं क्रीं हूं क्रों स्फ्रें (स्फ्रों) कामकलाकालि स्फ्रें (स्फ्रों) क्रों हूं क्रीं क्लीं स्वाहा ॥”

तन्त्र के प्राचीनतम रूप इतने भयानक है कि उन्हें घर में लगाना तो दूर , सामान्य साधक उन रूपों का ध्यान भी नहीं लगा सकता।

चेताववि विशेष -किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें आचार्य 7018223426

15/08/2026
काल सर्प दोष के लक्षण काल सर्प दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में कई तरह की दिक्कतें और परेशानियां आ सकती हैं। कुछ सामान्य ...
05/08/2026

काल सर्प दोष के लक्षण


काल सर्प दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में कई तरह की दिक्कतें और परेशानियां आ सकती हैं। कुछ सामान्य लक्षण जो काल सर्प दोष के संकेत देते हैं:



1. स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: बार-बार बीमारी होना, विशेषकर नसों, सिरदर्द, तनाव और मानसिक रोग।



2. आर्थिक तंगी: धन लाभ में बाधा, आर्थिक नुकसान, निवेश में घाटा।



3. व्यक्तिगत संबंधों में तनाव: परिवार और दोस्तों से दूरी, वैवाहिक जीवन में समस्याएं।



4. कामकाज में विफलता: व्यवसाय या नौकरी में निरंतर असफलता, बाधाएँ आना।



5. अचानक दुर्घटनाएं: छोटे-बड़े दुर्घटनाओं का बार-बार सामना।



6. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: भय, तनाव, बेचैनी, अनिद्रा।



7. अप्रत्याशित भय और चिंताएं: बिना किसी वजह के अचानक डर लगना और चिंताएं या अंधविश्वास।



हालांकि, काल सर्प दोष का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली के अन्य ग्रहों की स्थिति और मजबूत ग्रह योगों पर भी निर्भर करता है।



काल सर्प दोष के कारण


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, काल सर्प दोष जन्म समय की ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है। इसके कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं:



1. जन्म के समय राहु और केतु की स्थिति इस प्रकार होना कि सभी ग्रह इनके बीच फंसे हों।



2. पूर्व जन्म के कर्म, विशेष रूप से बुरी नीयत और अधर्म का प्रभाव।



3. ग्रहों की अशुभ स्थिति और दोषपूर्ण ग्रह योग।



4. जन्म के समय ग्रहों की राशि और भावों की गलत स्थिति।



काल सर्प दोष का प्रभाव


काल सर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति के जीवन में निम्न प्रभाव दिखाई दे सकते हैं:



1. मन में निरंतर चिंता और तनाव का रहना।



2. आध्यात्मिक समस्याएं और मानसिक अस्थिरता।



3. वैवाहिक जीवन में कलह, तलाक या अलगाव की संभावना।



4. नौकरी या व्यवसाय में असफलता और आर्थिक तंगी।



5. परिवार में अनबन और विघ्न।



6. स्वास्थ्य समस्याएं और दुर्घटनाओं का बढ़ना।



लेकिन ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि हर दोष का कोई न कोई उपाय होता है। सही समय और सही उपाय से काल सर्प दोष का प्रभाव कम किया जा सकता है।

जय नाग देवता
जय माँ भगवती

🔱 गुरु महामंत्र – बिना गुरु के भी कैसे शुरू करें साधना? (सम्पूर्ण मार्गदर्शन)साधक अक्सर पूछते हैं – "मेरे कोई गुरु नहीं ...
29/07/2026

🔱 गुरु महामंत्र – बिना गुरु के भी कैसे शुरू करें साधना? (सम्पूर्ण मार्गदर्शन)
साधक अक्सर पूछते हैं – "मेरे कोई गुरु नहीं है, तो क्या मैं साधना कर सकता हूँ?" "बिना गुरु के साधना का फल मिलता है?" "गुरु को कैसे प्रसन्न करूँ?" "गुरु मंडल की कृपा कैसे मिले?" "मैं गुरु के समीप जाना चाहता हूँ, पर रास्ता नहीं समझ आता।"

ये प्रश्न लगभग हर साधक के मन में आते हैं। बिना साक्षात गुरु के साधना की दिशा समझना कठिन लगता है। पर भगवान शिव ने गुरु गीता में इसका सरल समाधान दिया है – 'गुरु' शब्द स्वयं एक महामंत्र है। यह नाम ही ध्यान, जाप और साधना का केंद्र बन सकता है।

गुरु गुरु गुरु यही महामंत्र का आपको जप करना है 📌

भगवान शिव कहते हैं – 'गु' का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' का अर्थ है प्रकाश (ज्ञान)। जो अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करके ज्ञान रूपी प्रकाश देता है, वही सद्गुरु है। और इस 'गुरु' शब्द का जाप ही सबसे सरल गुरु साधना है। आइए, जानें कैसे और क्या करना है –

संस्कृत श्लोक एवं सरल अर्थ –

गुकारः चान्धकारो हि रुकारस्तेज उच्यते।
अज्ञान-ग्रासकं ब्रह्म गुरुरेव न संशयः ॥३३॥
सरल अर्थ – 'गु' अंधकार (अज्ञान) है और 'रु' तेज (प्रकाश) है। अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करने वाला जो ब्रह्म रूपी प्रकाश है, वही गुरु है – इसमें कोई संशय नहीं।

गुकारश्चान्धकारस्तु रुकारस्तन्निरोधकृत्।
अन्धकार-विनाशित्वात् गुरुरित्यभिधीयते ॥३४॥
सरल अर्थ – 'गु' अंधकार है और 'रु' उस अंधकार को रोकने (नष्ट करने) वाला है। इसलिए अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करने वाले को गुरु कहा गया है।

गुकारश्च गुणातीतो रूपातीतो रुकारकः।
गुण-रूप-विहीनत्वात् गुरुरित्यभिधीयते ॥३५॥
सरल अर्थ – 'गु' गुणों से परे है और 'रु' रूप से परे है। गुण और रूप से रहित होने के कारण 'गुरु' कहलाते हैं।

गुकारः प्रथमो वर्णो मायादिगुणभासकः।
रुकारोऽस्ति परं ब्रह्म मायाभ्रान्तिविमोचकम् ॥३६॥
सरल अर्थ – 'गु' माया के गुणों को प्रकाशित करता है और 'रु' माया के भ्रम को दूर करके परम ब्रह्म का मार्ग दिखाता है। यही सद्गुरु का स्वरूप है।

💫 गुरु महामंत्र जाप के संभावित लाभ

'गुरु' शब्द का नियमित जाप मन को स्थिरता और गहनता प्रदान कर सकता है। यह साधना में आ रही रुकावटों को कम करने में सहायक है। भीतर की जिज्ञासा को प्रकाश की ओर ले जाता है। अन्य साधनाओं में प्रगति अधिक सहज

जय माँ
15/06/2026

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