07/09/2026
कृष्ण की मुरली की मिठास में राधा-कृष्ण के प्रेम की गूंज, शिल्पा चौहान ने शब्दों में सजाई भक्ति
जन्माष्टमी पर पालमपुर की लेखिका शिल्पा चौहान की भावपूर्ण कविता ने कृष्ण प्रेम और ब्रज की भक्ति को दिया सुंदर स्वर
पालमपुर। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पालमपुर की लेखिका शिल्पा चौहान ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा और राधा-कृष्ण के प्रेम को भावपूर्ण शब्दों में अभिव्यक्त किया है। उनकी कविता “श्याम तेरी मुरली में कितनी है मिठास!” श्रीकृष्ण की मधुर मुरली, राधा के प्रेम, गोपियों की कृष्ण के प्रति आस और ब्रज की भक्तिमय संस्कृति को केंद्र में रखती है।
कविता में श्रीकृष्ण की मुरली को प्रेम की ऐसी मधुर धुन के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसकी ओर हर हृदय स्वतः आकर्षित होता है। लेखिका ने राधा-कृष्ण के प्रेम को आधार बनाते हुए राधा के मन में श्रीकृष्ण से मिलन की निरंतर बनी रहने वाली आस को सुंदर भावों के साथ सामने रखा है।
शिल्पा चौहान की रचना में राधा का प्रेम केवल एक सामान्य प्रेम भावना नहीं, बल्कि समर्पण और आत्मीयता से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। कृष्ण से दूरी होने के बावजूद उनके हृदय के करीब होने का भाव कविता को और अधिक संवेदनशील बनाता है। राधा और कृष्ण के बीच के इस भावनात्मक संबंध को लेखिका ने सहज शब्दों में व्यक्त किया है।
कविता में गोपियों का उल्लेख भी विशेष रूप से किया गया है। श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों के मन में बसे प्रेम और मिलन की आस को लेखिका ने अपनी पंक्तियों में स्थान दिया है। साथ ही राधा को गोपियों में विशेष बताते हुए राधा-कृष्ण के प्रेम की विशिष्टता को भी उजागर किया गया है।
रचना में ब्रज की संस्कृति की भी झलक देखने को मिलती है। गऊ-ग्वालों से लेकर राधा तक, सभी श्रीकृष्ण की मुरली की मधुर धुन से प्रभावित दिखाई देते हैं। मुरली की मिठास ही कविता का केंद्रीय भाव बनकर सामने आती है और पूरी रचना को एक सुंदर लय प्रदान करती है।
लेखिका की यह कविता जन्माष्टमी के धार्मिक वातावरण को प्रेम, भक्ति और साहित्य से जोड़ती है। सरल और भावपूर्ण भाषा में लिखी गई रचना पाठकों को श्रीकृष्ण की मुरली और राधा-कृष्ण के प्रेम की अनुभूति कराने का प्रयास करती है।
जन्माष्टमी के अवसर पर शिल्पा चौहान की यह रचना कृष्ण भक्ति को समर्पित एक भावपूर्ण साहित्यिक अभिव्यक्ति है, जिसमें प्रेम, आस्था, समर्पण और मिलन की आस एक साथ दिखाई देती है।
कविता
"जन्माष्टमी "
श्याम तेरी मुरली में कितनी है,मिठास!
दूर हो हमसे फिर भी हो दिल के पास,
छुप छुप के मिलते हो राधा संग दिन रात,
फिर भी राधा के मन में है,इक और मिलन की आस!
श्याम तेरी मुरली में कितनी है मिठास!!
हर गोपियों के मन में करते हो बास!
क्योंकि आप में है, हर कुछ बात ख़ास,
हर गोपियों के मन में है, आपके मिलन की आस,
पर राधा तों है,हर गोपियों में ख़ास!
श्याम तेरी मुरली में कितनी है, मिठास!!
हर गऊ-गवालो की मिटती है आस,
क्योंकि है इतनी आपकी मुरली में मिठास,
तभी दौड़ीं आती है, राधा आपके पास,
और पूरी होती है, उसके मन की आस!
श्याम तेरी मुरली में कितनी है मिठास!!
जय श्री कृष्णा!!!!!
Happy janmashtmi 😊😊
लेखिका — शिल्पा चौहान, पालमपुर