26/02/2025
बाबा गुग्गा छतरी जी का इतिहास
कई जगहो पर गुग्गा जी को गोगा जी गुग्गा जी चौहान, गुग्गा जाहर पीर या कई और नामो से भी जाना जाता है। बाबा गुग्गा छत्री का जन्म राजस्थान में जिला चूरू के ददरेबा चौहान वंश उमर सिंह के घर हुआ उनके दो पुत्र हुए बडे पुत्र का नाम जेवरसिंह व छोटे पुत्र का नाम घेबरसिंह था। इन दोनो का विवाह बाछल और काछल से हुआ पर बहुत दिनो तक दोनो के कोई संतान नही हुई तब दोनो राजकुमारीयो ने गोरखनाथ जी की पूजा करनी प्रारंम्भ की, जब आशिर्वाद प्राप्ति का समय आया तो काछल पहले चली जाती है जिनको गोरखनाथ जी आशीर्वाद देते है जिनसे दो पुत्र अर्जुन और सुर्जन हुए फिर बाद मे बाछल गोरखनाथ जी के पास आशीर्वाद लेने जाती है फिर उनको ज्ञात हुआ के आशीर्वाद तो काछल को प्राप्त हुआ पर फिर भी वो काछल को क्षमा करके बाछल को एक दिव्यपुत्र का आशीर्वाद देते है जिससे उनको नवमी को जाहर वीर गोगा जी के रूप मे पुत्र प्राप्त हुआ ! जिस समय गोगाजी का जन्म हुआ उसी समय एक ब्राह्मण के घर नरसिंह पांडे का जन्म हुआ। ठीक उसी समय एक हरिजन के घर भज्जू कोतवाल का जन्म हुआ और एक भंगी के घर रत्ना जी भंगी का जन्म हुआ। यह सभी गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य हुए।
उसी समय उनकी बंध्या घोडी ने भी एक नीले घोड़े को जन्म दिया। ये सब गोगा जी के आजीवन के साथी हुए। गोगा जी के साथ साथ इन सबकी भी बहुत मान्यता है। उत्तर प्रदेश में इन्हें जहरपीर या जाहरवीर तथा मुसलमान इन्हें गोगा पीर भी कहते हैं।
राजस्थान हिमाचल हरियाणा ,उत्तर प्रदेश और पंजाब, में भी गुग्गा जी बहुत प्रसिद्ध मन्दिर हैं। गुग्गा जी को सांपों का देवता के रूप में पूजा करते हैं। गुग्गा जी का प्रसिध्द मन्दिर सलोह गांव में भी है। मान्यता है कि गुग्गा बाबा ने सलोह गांव में समाध्दि ली थी और बाद में यहा पर मन्दिर का निर्माण करवाया गया। अब सलोह गांव को भी लोग गुग्गा सलोह गांव से जानते है। हमारा पेज भी बाबा गुग्गा सलोह मन्दिर पर आधारित है।