04/03/2021
#एकादशी माता के दर्शन
नगरकोट धाम मे विराजमान माता बजरेश्वरी देवी ब्रज की अधिष्ठात्री देवी है, श्री बांके बिहारी जी मन्दिर के गोस्वामियों की कुलदेवी भी है , ब्रज के भगत बाबा ध्यानू भगत माता के भगत थे उनके बुलाने पर नगरकोट वाली माता छाता गांव के नरी सेमरी मे आई थी इसलिए एक पीठ नरी सेमरी वाली माता भी नगरकोट का पीठ है तथा जो नगरकोट नहीं जा पाते वे नरी सेमरी वाली माता को धोक देते हैं कुछ गोस्वामियों की कुलदेवी नरी सेमरी वाली भी है , ब्रज में एकादशी व्रत का बहुत महत्त्व है नगरकोट की माता जी की पिंडी के साथ ही एकादशी माता का पिंड और माता भद्रकाली का पिंड है यही भद्रकाली की पिंडी भगवान कृष्ण के कुल बसुदेव देवकी की कुलदेवी हैं यही पर भगवान कृष्ण का मुण्डन हुआ था। बाद में यही भद्रकाली कुरूक्षेत्र मे भगवान कृष्ण के आवाहन पर आई थी , एकादशी माता का पिड्ड उत्पन्ना एकादशी को प्रकट माना जाता है एकादशी पारायण , उध्यापन ब्रत उठाने एवं किसी कारण बीच में छोड़ने के लिए माता एकादशी को चंदन अर्पित कर भगत संकल्प लेते हैं। एकादशी माता का एक मन्दिर श्री जगन्नाथपुरी मन्दिर उड़ीसा में भी है यहां उनकी उल्टी मूर्ती की पूजा होती है भाव यह है कि ठाकुर की सेवा प्रीत में एकादशी पर लगने वाले अन्न दोश को नहीं माना जाता वहीं दूसरी ओर श्री नगरकोट धाम में माता बजरेश्वरी की पूजा वैदिक रिति से होती है यहां श्री शंकराचार्य भगवान द्वारा प्रतिपादित आग्या ही सर्वोपरी है ये माता तीन रूप में माता बजरेश्वरी माता एकादशी और माता भद्रकाली के पिंड साक्षात विराजमान हैं जो ब्रज की अधिष्ठात्री होने के कारण नित्य चंदन धारण कर पीताम्बरी शक्ती है , यहां माता सती का बक्छ स्थल गिरा था इसलिए यह वात्सलय पीठ भी हे माता की पिंडियो को दूध से स्नान करने के बाद नीचे कुण्ड में आने वाला दूध जल माता के स्त्नो का मान भगत ग्रहण करते हैं , जात करने वालों को यह दूध पीना जरूरी होता है और एक चमत्कार भी यह है कि इस दूध जल से शरीर चमणी के रोग दूर हो जाते हैं माता के पास ही बाबा छेतरपाल भैरो विराजमान हैं माना जाता है माता के भक्तों के अन्तिम समय ये ही यम दूतों से छूडाने जाते हैं , बाबा भैरो तारने जाते हैं । गौलोक ही ब्रज है उस। परमधाम गौ लोक का गर्भ वृन्दावन है तो उसी गौलोक कै गर्भग्रह में विराजमान भगवान कृष्ण योगीराज का योगकछ साधना का भवन नगरकोट है जहां प्रभू की प्रिय एकादशी महारानी विराजमान हैं ये एकादशी माता आंवला एकादशी पर आंवले के पेड़ को साध्य कर बृन्दावन जाती है तथा भगवान कृष्ण मकर संक्रान्ति पर कुरूक्षेत्र पधारे थे ऐसा कहा जाता है भीष्म एकादशी पर भगवान कृष्ण नगरकोट धाम में एकादशी पिंड का पूजन किया था अतैव श्री कृष्ण प्रेमियों के लिए ब्रज जैसे ही नगरकोट धाम प्रिय है , जय जय श्री राधे , जयकारा नगरकोट वाली का सच्चे दरबार की जय
Post by Bhagat .
साछ्य प्रमाण , श्री मद्देवीभागवत एवं ब्रज / हिमाचल की लोक कथाओं के आधार पर ।