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नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)जन्म - 9 मई, 1540 ई.जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थानपुण्य तिथि - 29 जन...
08/05/2022

नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शासन अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह

अन्य जानकारी -
महाराणा प्रताप सिंह जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम 'चेतक' था।

राजपूत शिरोमणि महाराणा प्रतापसिंह उदयपुर,
मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।

वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर मेवाड़-मुकुटमणि
राणा प्रताप का जन्म हुआ।

महाराणा का नाम
इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रण के लिये अमर है।

महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है।

सूर्यवंश की शान, गहरवार कुल की बुंदेला शाखा में जन्मे,मुगल बादशाह औरंगजेब को बार बार पराजित करने वाले महान योद्धा और 52 ...
04/05/2022

सूर्यवंश की शान, गहरवार कुल की बुंदेला शाखा में जन्मे,मुगल बादशाह औरंगजेब को बार बार पराजित करने वाले महान योद्धा और 52 युद्धों के विजेता, अपराजित योद्धा क्षत्रिय शिरोमणि बुंदेलखंड नरेश महाराजा छत्रसाल जी की 373वीं जयंती पर उनको सादर नमन 🙏🙏🙏🙏
4 मई 1649 ई
क्षत्रिय धर्म युगे युगे
#अपराजित_योद्धा_महाराजा_छत्रसाल
#बुलंद_बुंदेला
✍️✍️✍️✍️

80 साल के एक बुजुर्ग की दहाड़ से अंग्रेजी हुकूमत कांप जाती थी। अंग्रेजी हुकूमत को इनसे जंग में कई बार मुंह की खानी पाड़ी...
23/04/2022

80 साल के एक बुजुर्ग की दहाड़ से अंग्रेजी हुकूमत कांप जाती थी। अंग्रेजी हुकूमत को इनसे जंग में कई बार मुंह की खानी पाड़ी है।
______________ हम बात कर रहे हैं वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की है। 23 अप्रैल को अग्रेजों पर फतह हासिल करने के लिए विजय दिवस मनाया जाता है।

👉1857 विद्रोह के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाई लड़ी थी। 80 साल के बुजुर्ग के जोश के आगे अंग्रेजों को कई बार मुंह की खानी पड़ी है।

👉कहा जाता है कि भारत में शायद अंग्रेजों को इतनी बार हार का सामना करना पड़ा हो। प्रसिद्ध इतिहासकार पंडित सुंदर लाल ने उनके बारे में लिखा है कि जगदीशपुर का राजा कुंवर सिंह आसपास के इलाके में अत्यंत सर्वप्रिय थे, उस वक्त बाबू कुंवर सिंह की आयु उस समय 80 साल से ऊपर थी। फिर भी कुंवर सिंह बिहार के क्रांतिकारियों के प्रमुख नेता और 57 के सबसे ज्वलंत व्यक्तियों में से एक थे____

जुलाई, 1857 में पटना में क्रांतिकारियों के नेता पीर अली को अंग्रेजों ने फांसी दे दी। पीर अली की मृत्यु के बाद 25 जुलाई को दानापुर के देशी पलटनों ने स्वाधीनता का ऐलान कर दिया। ये पलटनें जगदीशपुर भोजपुर की ओर बढ़ीं। कुंवर सिंह ने तुरंत अपने महल से निकल कर शस्त्र उठा कर इस सेना का नेतृत्व किया। कुंवर सिंह इस सेना के साथ आरा पहुंचे। आरा स्थित अंग्रेजी खजाने पर कब्जा कर लिया गया। जेल से कैदियों को रिहा कर दिया गया। अंग्रेजी दफ्तरों को गिरा दिया गया। इस विद्रोही जमात ने आरा के किले को घेर लिया। किले के अंदर थोड़े से अंग्रेज और सिख सिपाही थे। आरा के निकट एक आम का बाग था। कुंवर सिंह ने अपने कुछ आदमी आम के वृक्षों की टहनियों में छिपा रखे थे__________

●दानापुर छावनी के कप्तान डनवर के नेतृत्व में करीब 300 अंग्रेज और करीब सौ सिख सिपाही जब आम के बाग में पहुंचे तो ऊपर से गोलियां बरसनी शुरू हो गईं। इसमें डनवर मारा गया। साथ ही इस युद्ध में उसके 415 में से मात्र 50 अंग्रेज-सिख सिपाही जीवित बचे। इसके बाद मेजर आयर एक बड़ी सेना लेकर आरा किले में घिरे अंग्रेज सिपाहियों की सहायता के लिए बढ़ा।

___________●2 अगस्त, 1857 को आरा शहर से सटे बीबीगंज के निकट कुंवर सिंह की सेना और मेजर आयर की सेना में संग्राम हुआ। इस युद्ध में अंग्रेज जीत गये। अंग्रेजों ने जगदीशपुर पर भी कब्जा कर लिया। कुंवर सिंह अपने महल की महिलाओं के साथ वहां से निकल गये। उसके बाद आजमगढ़ के पास अतरोलिया में कुंवर सिंह ने डेरा डाला। 22 मार्च 1858 को अंग्रेजों ने मिलमैन के नेतृत्व में कुंवर सिंह पर हमला कर दिया।

■अंग्रेजों को खदेड़ दिया________________
इस संग्राम में पहले तो कुंवर सिंह ने मैदान छोड़ दिया। पर थोड़ी ही देर के बाद हमला कर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों को हरा कर भगा दिया। उनके माल असबाब भी कुंवर सिंह के हाथ लगे। इस शर्मनाक घटना के बाद कर्नल डेम्स के अधीन बड़ी संख्या में अंग्रेज सैनिक कुंवर सिंह से लड़ने पहुंचे। एक बार फिर मुकाबला हुआ और पराजित होकर डेम्स ने आजमगढ़ में शरण ली। कुंवर सिंह भी आजमगढ़ पहुंचे और उन्होंने आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया

■बनारस की ओर बढ़े_____________________
इतिहास लेखक मालेसन ने लिखा कि यह खबर सुन कर लार्ड केनिंग घबरा गया। इस बीच लखनऊ से भागे अनेक क्रांतिकारी कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गये। छह अप्रैल को लार्ड मार्कर और कुंवर सिंह की सेनाओं के बीच संग्राम हुआ। किसी ने लिखा है कि 81 साल का बूढ़ा कुंवर सिंह अपने सफेद घोड़े पर सवार युद्धस्थल के बीच बिजली की तरह इधर -उधर लपकता हुआ दिखाई दे रहा था। लार्ड मार्कर हार गया। वह आजमगढ़ की ओर भाग गया। कुंवर सिंह ने उनका पीछा किया।

■गंगा नदी की ओर बढ़े कुंवर सिंह___________
वीर कुंवर सिंह का लगर्ड के नेतृत्व वाली अंग्रेज सेना से फिर युद्ध हुआ। कुंवर सिंह फिर जीते। उसके बाद वह गंगा नदी की ओर बढ़ गए। इस बीच डगलस के नेतृत्व वाली सेना से युद्ध हुआ। पराजित डगलस को पीछे हटना पड़ा और शिवपुर में गंगा पार करते समय कुंवर सिंह की बांह में गोली लग गई। कुंवर सिंह ने अपने बायें हाथ से तलवार खींच कर अपने घायल दाहिने हाथ को कुहनी पर से एक ही वार में काट कर उसे गंगा में फेंक दिया। यानी गंगा मां को समर्पित कर दिया। घाव पर कपड़ा लपेट कर उन्होंने गंगा पार किया

■जगदीशपुर कर लिया कब्जा_______________
जगदीशपुर पर एक बार फिर से कुंवर सिंह ने 22 अप्रैल को कब्जा कर लिया। अंग्रेजों ने लीग्रेड के नेतत्व में सेना जगदीशपुर भेजीं और कठिन लड़ाई हुई। मैदान कुंवर सिंह के हाथों रही। यह 23 अप्रैल की बात है। पर घायल कुंवर सिंह 26 अप्रैल 1958 को चल बसे। पर जब वे मरे तो जगदीश पुर के किले पर स्वाधानीता का उनका हरा झंडा फहरा रहा था। इसी जीत के बाद जगदीशपुर में हर साल 23 अप्रैल को विजयोत्सव मनाया जाताया है


#भारत_विजयोत्सव

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28/11/2021

Jai Veer shiromani mahrana Pratab

हम आपके कदमों की धूल भी नहीं..लेक़िन जो आपका अपमान करे उसे धूल में मिला देंगे 🚩🙏वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी के जन्...
09/05/2021

हम आपके कदमों की धूल भी नहीं..
लेक़िन जो आपका अपमान करे उसे धूल में मिला देंगे 🚩🙏

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी के जन्मोत्सव पर सभी सनातनी भाइयो को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!

नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शासन अवधि - 29 वर्ष
वंश - सूर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह

🚩🚩⚔⚔जय महाराणा प्रताप सिंह 🚩🚩⚔⚔
🚩🚩⚔⚔जय राजपूताना🚩🚩⚔⚔

✨महाराणा सांगसिंह जी के जन्मदिवस पर कोटि कोटि नमन 🙏✨जय माँ भवानी 🚩
12/04/2021

✨महाराणा सांगसिंह जी के जन्मदिवस पर कोटि कोटि नमन 🙏✨जय माँ भवानी 🚩

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