Rajputana-Blood

Rajputana-Blood Rajput ekta

नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)जन्म - 9 मई, 1540 ई.जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थानपुण्य तिथि - 29 जन...
08/05/2022

नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शासन अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह

अन्य जानकारी -
महाराणा प्रताप सिंह जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम 'चेतक' था।

राजपूत शिरोमणि महाराणा प्रतापसिंह उदयपुर,
मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।

वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर मेवाड़-मुकुटमणि
राणा प्रताप का जन्म हुआ।

महाराणा का नाम
इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रण के लिये अमर है।

महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है।

सूर्यवंश की शान, गहरवार कुल की बुंदेला शाखा में जन्मे,मुगल बादशाह औरंगजेब को बार बार पराजित करने वाले महान योद्धा और 52 ...
04/05/2022

सूर्यवंश की शान, गहरवार कुल की बुंदेला शाखा में जन्मे,मुगल बादशाह औरंगजेब को बार बार पराजित करने वाले महान योद्धा और 52 युद्धों के विजेता, अपराजित योद्धा क्षत्रिय शिरोमणि बुंदेलखंड नरेश महाराजा छत्रसाल जी की 373वीं जयंती पर उनको सादर नमन 🙏🙏🙏🙏
4 मई 1649 ई
क्षत्रिय धर्म युगे युगे
#अपराजित_योद्धा_महाराजा_छत्रसाल
#बुलंद_बुंदेला
✍️✍️✍️✍️

80 साल के एक बुजुर्ग की दहाड़ से अंग्रेजी हुकूमत कांप जाती थी। अंग्रेजी हुकूमत को इनसे जंग में कई बार मुंह की खानी पाड़ी...
23/04/2022

80 साल के एक बुजुर्ग की दहाड़ से अंग्रेजी हुकूमत कांप जाती थी। अंग्रेजी हुकूमत को इनसे जंग में कई बार मुंह की खानी पाड़ी है।
______________ हम बात कर रहे हैं वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की है। 23 अप्रैल को अग्रेजों पर फतह हासिल करने के लिए विजय दिवस मनाया जाता है।

👉1857 विद्रोह के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाई लड़ी थी। 80 साल के बुजुर्ग के जोश के आगे अंग्रेजों को कई बार मुंह की खानी पड़ी है।

👉कहा जाता है कि भारत में शायद अंग्रेजों को इतनी बार हार का सामना करना पड़ा हो। प्रसिद्ध इतिहासकार पंडित सुंदर लाल ने उनके बारे में लिखा है कि जगदीशपुर का राजा कुंवर सिंह आसपास के इलाके में अत्यंत सर्वप्रिय थे, उस वक्त बाबू कुंवर सिंह की आयु उस समय 80 साल से ऊपर थी। फिर भी कुंवर सिंह बिहार के क्रांतिकारियों के प्रमुख नेता और 57 के सबसे ज्वलंत व्यक्तियों में से एक थे____

जुलाई, 1857 में पटना में क्रांतिकारियों के नेता पीर अली को अंग्रेजों ने फांसी दे दी। पीर अली की मृत्यु के बाद 25 जुलाई को दानापुर के देशी पलटनों ने स्वाधीनता का ऐलान कर दिया। ये पलटनें जगदीशपुर भोजपुर की ओर बढ़ीं। कुंवर सिंह ने तुरंत अपने महल से निकल कर शस्त्र उठा कर इस सेना का नेतृत्व किया। कुंवर सिंह इस सेना के साथ आरा पहुंचे। आरा स्थित अंग्रेजी खजाने पर कब्जा कर लिया गया। जेल से कैदियों को रिहा कर दिया गया। अंग्रेजी दफ्तरों को गिरा दिया गया। इस विद्रोही जमात ने आरा के किले को घेर लिया। किले के अंदर थोड़े से अंग्रेज और सिख सिपाही थे। आरा के निकट एक आम का बाग था। कुंवर सिंह ने अपने कुछ आदमी आम के वृक्षों की टहनियों में छिपा रखे थे__________

●दानापुर छावनी के कप्तान डनवर के नेतृत्व में करीब 300 अंग्रेज और करीब सौ सिख सिपाही जब आम के बाग में पहुंचे तो ऊपर से गोलियां बरसनी शुरू हो गईं। इसमें डनवर मारा गया। साथ ही इस युद्ध में उसके 415 में से मात्र 50 अंग्रेज-सिख सिपाही जीवित बचे। इसके बाद मेजर आयर एक बड़ी सेना लेकर आरा किले में घिरे अंग्रेज सिपाहियों की सहायता के लिए बढ़ा।

___________●2 अगस्त, 1857 को आरा शहर से सटे बीबीगंज के निकट कुंवर सिंह की सेना और मेजर आयर की सेना में संग्राम हुआ। इस युद्ध में अंग्रेज जीत गये। अंग्रेजों ने जगदीशपुर पर भी कब्जा कर लिया। कुंवर सिंह अपने महल की महिलाओं के साथ वहां से निकल गये। उसके बाद आजमगढ़ के पास अतरोलिया में कुंवर सिंह ने डेरा डाला। 22 मार्च 1858 को अंग्रेजों ने मिलमैन के नेतृत्व में कुंवर सिंह पर हमला कर दिया।

■अंग्रेजों को खदेड़ दिया________________
इस संग्राम में पहले तो कुंवर सिंह ने मैदान छोड़ दिया। पर थोड़ी ही देर के बाद हमला कर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों को हरा कर भगा दिया। उनके माल असबाब भी कुंवर सिंह के हाथ लगे। इस शर्मनाक घटना के बाद कर्नल डेम्स के अधीन बड़ी संख्या में अंग्रेज सैनिक कुंवर सिंह से लड़ने पहुंचे। एक बार फिर मुकाबला हुआ और पराजित होकर डेम्स ने आजमगढ़ में शरण ली। कुंवर सिंह भी आजमगढ़ पहुंचे और उन्होंने आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया

■बनारस की ओर बढ़े_____________________
इतिहास लेखक मालेसन ने लिखा कि यह खबर सुन कर लार्ड केनिंग घबरा गया। इस बीच लखनऊ से भागे अनेक क्रांतिकारी कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गये। छह अप्रैल को लार्ड मार्कर और कुंवर सिंह की सेनाओं के बीच संग्राम हुआ। किसी ने लिखा है कि 81 साल का बूढ़ा कुंवर सिंह अपने सफेद घोड़े पर सवार युद्धस्थल के बीच बिजली की तरह इधर -उधर लपकता हुआ दिखाई दे रहा था। लार्ड मार्कर हार गया। वह आजमगढ़ की ओर भाग गया। कुंवर सिंह ने उनका पीछा किया।

■गंगा नदी की ओर बढ़े कुंवर सिंह___________
वीर कुंवर सिंह का लगर्ड के नेतृत्व वाली अंग्रेज सेना से फिर युद्ध हुआ। कुंवर सिंह फिर जीते। उसके बाद वह गंगा नदी की ओर बढ़ गए। इस बीच डगलस के नेतृत्व वाली सेना से युद्ध हुआ। पराजित डगलस को पीछे हटना पड़ा और शिवपुर में गंगा पार करते समय कुंवर सिंह की बांह में गोली लग गई। कुंवर सिंह ने अपने बायें हाथ से तलवार खींच कर अपने घायल दाहिने हाथ को कुहनी पर से एक ही वार में काट कर उसे गंगा में फेंक दिया। यानी गंगा मां को समर्पित कर दिया। घाव पर कपड़ा लपेट कर उन्होंने गंगा पार किया

■जगदीशपुर कर लिया कब्जा_______________
जगदीशपुर पर एक बार फिर से कुंवर सिंह ने 22 अप्रैल को कब्जा कर लिया। अंग्रेजों ने लीग्रेड के नेतत्व में सेना जगदीशपुर भेजीं और कठिन लड़ाई हुई। मैदान कुंवर सिंह के हाथों रही। यह 23 अप्रैल की बात है। पर घायल कुंवर सिंह 26 अप्रैल 1958 को चल बसे। पर जब वे मरे तो जगदीश पुर के किले पर स्वाधानीता का उनका हरा झंडा फहरा रहा था। इसी जीत के बाद जगदीशपुर में हर साल 23 अप्रैल को विजयोत्सव मनाया जाताया है


#भारत_विजयोत्सव

🎯🎯✍

24/03/2022

अभी एक पोस्ट मुझे किसी ने भेजी उसमे लिखा था की " ठाकुर तो शराब ,शबाब और कबाब के चक्कर में बर्बाद हो गए". राजपूत ऐसी बातो को पढ़ डिफेंसिव हो जाते हैं और लिखने ,बोलने लगते हैं की हां भाई हां बिल्कुल सही बोल रहे आप ।

कितने राजपूतों को शराब पीकर बर्बाद होते देखा है आज तक ? आपके चाचा , ताऊ बर्बाद हो भी गए हों तो इसका मतलब यह नहीं होता की सारे राजपूत शराब की वजह से बर्बाद हो गए। आप डाटा से क्रॉस वेरिफाई करिए और उसके लिए आप बताइए की आपके आस पास हजार राजपूत परिवार में कितने परिवार शराब से बर्बाद हो गए ? नशा को जायज नहीं ठहराया जा रहा है लेकिन मिथ्या बातो पर हामी भर देते हैं हम लोग बिना सोचे समझे । मेरे तीन पुस्त में कोई नही पीता।मेरे पूरे गांव में जिसकी आबादी हजार से ज्यादा है वहां आज भी गिनती के पांच , सात लोग पीते हैं । आप अपने आस पास नजर घुमा कर देखिए कि क्या हालत है ?होता यह है की एक ,दो की बर्बादी शराब की वजह से हुई तो पूरे समाज पर ही थोप दिया जाने लगा की ठाकुर तो दारू पीकर बर्बाद हो गए। हम अपने गांव,समाज को पूरी तरह समझने की कोशिश नही करते और चंद लोगो के कृत्य को देख धारना बना लेते हैं या कोई और कुछ लिख ,बोल देता है तो उसे बिना सोचे ,समझे स्वीकार कर लेते हैं।

दूसरी बात कही जाती है की ठाकुर तो कबाब के चक्कर में बर्बाद हो गए ।मतलब हद है ,भोजन या कहिए मांसाहारी भोजन के चक्कर में ठाकुर निपट गए ? कितनो को देखा है भाई जमीन बेच कर भोजन करते हुए? अपने आस पास ही देखिए ।शायद एक ,दो होंगे पर क्या वो पूरे समाज का ही चरित्र है ?

तीसरी बात तो और भी बुरी है ।लिखा है की ठाकुर तो शबाब यानी लड़की के चक्कर में बर्बाद हो गए।लड़की के चक्कर में कैसे बर्बाद हुए? क्या जमीन बेच किसी को उपहार देते रहे हैं ? यदि ऐसे लोग हैं भी तो कितने हैं ?हमे बिना अपने समाज को पूर्ण रूप से समझे किसी बात को स्वीकार नही करना चाहिए।

कुछ लोग यदि इन बातो पर खड़े उतरते हैं तो वो अपवाद ही हैं ।

अब बात करते हैं की क्या राजपूतों की जमीन बिकी या उनकी आर्थिक हालत खराब हुई तो यह सच है ।उसकी वजह यह है की समय के साथ सभी चीजे महगी होती चली गई और खेती से उतनी आय नही रह गई और ठाकुर क्यूंकि शिक्षा और नौकरी से दूर रहते थे तो उनके हांथ में कैश भी नही होता था। अब राजपूतों के साथ दिक्कत थी की उन्हे गांव में पुरखों वाली स्टेटस भी बना के रखनी थी तो उसमे खर्च तो होगा ही।दादा ने बेटी की शादी में हजार लोगो को खिलाया तो पोते को भी उसी परंपरा को निभाते हुए हजार लोगो को खाना खिलाना पड़ा ।दादा ने आधा किलो चांदी दिया ,दो सौ ग्राम सोना दिया था तो पोते को भी वो निभाना पड़ा।दादा के समय सुबह ,शाम पचास लोग दरवाजे पर बैठे रहते और उनके चाय ,नाश्ते का प्रबंध होता था ।यही परंपरा पोते ने भी निभाई ।

परंपरा निभाने में खर्च होता है ।दादा के समय से पोते का समय बदल चुका है ।अब उसी परंपरा को निभाने में जितना पैसा चाहिए वो जमीन पर निर्भर पोते के पास नही है ।इसी में ज्यादातर जमीन बिकी ।बेटी की शादी ,गांव में अपने स्टेटस को बचाए रखने में ही आर्थिक रूप से कमर टूटी ।ऊपर से शुरू में ना शिक्षित थे ना ही नौकरी थी और ना ही व्यापार में थे तो कैश आमदनी के श्रोत तो बंद ही थे ।अनाज बेच जितना आया उतना पैसा ही पास में होता था।

ठाकुर " शराब ,शबाब ,कबाब में बर्बाद नही हुआ बल्कि परंपरा जो घर की थी उसे निभाने में कमर टूटी ,अशिक्षा और नौकरी एवम व्यापार से दूर रहने की वजह से कमर टूटी ". अब धीरे धीरे वक्त बदल रहा है ।राजपूत अब पढ़ने लगे हैं ,जहां नौकरी मिलती है वहां जाने लगे हैं ,व्यापार भी करते हैं।अब कई को देखा है की जितना खो दिया था उतना मेहनत से पुनः पा चुके हैं।

आखिरी बात यह याद रखिएगा की ज्यादातर राजपूत सैनिक या छोटे किसान थे ।उनके पास खोने को कुछ बीघे की जमीन और इज्जत के अलावे रही ही कब क्या?

तो यह शराब ,शबाब ,कबाब वाली बातो पर आंख मूंद कर सर ना हिलाइए ।ये बाते ज्यादातर गिल्ट फीलिंग डालने के लिए लिखी जाती है ।आपको सत्य से विमुख कर ,आपके समाज को भ्रष्ट दिखाने के लिए लिखी जाती है।
जिनकी हालत खराब हुई उनमें कुछ को छोड़ वजह सिर्फ यह रही की जमीन से उतनी आय नही रह गई , जितने खर्च थे और वो खर्च के साथ समझौता नहीं कर पाएं।शिक्षित कम लोग थे ,सिविल की नौकरी में जाना पसंद नही था ,व्यापार नही करना चाहते थे ।बस यही वजह रही जो झटका लगा।

यदि मेरी बाते गलत हैं तो बताइए ।जो मैने देखा है वो लिखा है यहां पर ।

28/11/2021

Jai Veer shiromani mahrana Pratab

हम आपके कदमों की धूल भी नहीं..लेक़िन जो आपका अपमान करे उसे धूल में मिला देंगे 🚩🙏वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी के जन्...
09/05/2021

हम आपके कदमों की धूल भी नहीं..
लेक़िन जो आपका अपमान करे उसे धूल में मिला देंगे 🚩🙏

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी के जन्मोत्सव पर सभी सनातनी भाइयो को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!

नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शासन अवधि - 29 वर्ष
वंश - सूर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह

🚩🚩⚔⚔जय महाराणा प्रताप सिंह 🚩🚩⚔⚔
🚩🚩⚔⚔जय राजपूताना🚩🚩⚔⚔

✨महाराणा सांगसिंह जी के जन्मदिवस पर कोटि कोटि नमन 🙏✨जय माँ भवानी 🚩
12/04/2021

✨महाराणा सांगसिंह जी के जन्मदिवस पर कोटि कोटि नमन 🙏✨जय माँ भवानी 🚩

जरूर पढ़े पूरा  "आनन्द मोहन सिंह"------------------------- बिहार का एक क्षत्रिय शेर जो सिर्फ इसलिए जेल में उम्रकैद की सज...
04/04/2021

जरूर पढ़े पूरा "आनन्द मोहन सिंह"-------------------------
बिहार का एक क्षत्रिय शेर जो सिर्फ इसलिए जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है क्योंकि उसने सारा जीवन क्षत्रिय समाज और गरीब स्वर्णो,मजलुमो के हक की लड़ाई लड़ने में न्यौछावर कर दिया।

जब इंद्र कुमार गुजराल के बाद देश में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीना चलने वाली सरकार बनी थी तब एनडीए से 45 राजपूत सांसद जीतकर पहुंचे थे।पर क्षत्रिय विरोधी आडवाणी के दबाव में एक भी राजपूत को केंद्र सरकार में मंत्री नही बनाया गया था।पर किसी की हिम्मत नही हुई इस अन्याय का विरोध करने की।

तब निर्दलीय सांसद आनन्द मोहन सिंह ने संसद में ललकार लगाई कि---
""ए अटल आडवाणी जी,आपकी सरकार बनवाने में सबसे बड़ा योगदान राजपूतो का है फिर भी आपने 45 राजपूतो में किसी को भी मंत्री क्यों नही बनाया???"
यह सुनकर अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी को सांप सूंघ गया और सत्ता पक्ष द्वारा मार्शलो को इशारा किया गया।मार्शल आनन्द मोहन जी को उठाकर जबरन सदन से बाहर ले गए।इस हाथापाई में आनन्द जी का हाथ शीशे से टकरा गया।और वो लहूलुहान हो गए।।।।।।।।।
वो लहुलुहान हो गए मगर जिन मुर्दो के हक की वो मांग उठा रहे थे उनमे एक भी उनके पक्ष में सामने नही आया!!!!!! तो खैर कोई बात नही।हर किसी में शेर का जिगर नही होता।

एक बार जब खालिस्तानी नेता सिमरनजीत सिंह मान चुनाव जीतकर आया और वो अपना धार्मिक अधिकार कहते हुए संसद में तलवार ले जाने की जिद पर अड़ गया और सरकार दबाव में आकर उसे इजाजत देने लगी तो आनंद मोहन जी ने अपने को क्षत्रिय होने के नाते संसद में पिस्तौल ले जाने की बात कही, तब सरकार को झुकना पड़ा.

अपने इसी शेरदिल अंदाज की वजह से वो राजपूत विरोधियो की आँखों में खटक गए और नितीश कुमार,लालू यादव, सुशील मोदी सबने मिलकर उन्हें एक झूठे हत्या के मुकदमे में फसाकर उम्रकैद की सजा करवा दी।

और आज आनन्द मोहन सिंह उस अपराध के लिए उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं जो उन्होंने किया ही नही है।

दस साल से उनके घर में कोई त्यौहार कोई ख़ुशी नही मनाई गयी।पिता के प्यार से वंचित उनके पुत्र चेतन को अपने सहपाठियों का उपहास और ताने झेलने पड़े।पत्नी लवली आनंद और परिवार ने कैसे वियोग में समय काटा होगा??
आज उनकी अनुपस्थिति में उनके युवा पुत्र चेतन उनकी मशाल को आगे बढ़ा रहे हैं।

क्या इस महान क्षत्रिय यौद्धा की रिहाई के लिये देश का राजपूत समाज कुछ प्रयास करेगा????????
कृपया सभी बन्धु इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर जरूर करें। 🙏

गौर से देखिएगा इस तस्वीर को..सफेद उतरन में खड़े ये चारों लड़को को जिनके अभिभावको को होली वाले दिन अपराधियों के द्वारा गोली...
03/04/2021

गौर से देखिएगा इस तस्वीर को..

सफेद उतरन में खड़े ये चारों लड़को को जिनके अभिभावको को होली वाले दिन अपराधियों के द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गई है और यही नही कुल पांच लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 1 अभी पारस(दरभंगा) में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे है ।

और लानत स्वीकार करिये आपसभी लोग चाहे वो नेता हो, सामाजिक संगठन वाले या मीडिया .. जो सभी लोग इस नृशंस हत्याकांड पर ऐसे चुप्पी साधे हुए है जैसे कुछ हुआ ही नही है ।

कभी आपके किसी व्यक्ति पर खरोंच तक आ जाता है आप तांडव मचाने सड़को पर आ जाते है और आज 6 लोगो जान चली गई है और सब खामोश है, थू है आप पर ।

वैसे वजह कही इनका #राजपूत होना तो न है न ..?

अगर है तो थू है उनपर भी जो समाज के ठेकेदार बन कर अपनी राजनीति चमका लेते है, थू है उनपर भी जो समाज के नाम पर न जाने कितने संगठन बनाए बैठे है और आज आवाज उठाने की बारी है, साथ देने की बारी है तो बिल में छुपे बैठे है

#मधुबनी_नरसंहार
#सज़ा_ए_मौत_से_कम_मंजूर_नहीं

किसी भाई ने  #हाईकोर्ट में एक पिटीशन डाली है कि भारत के राष्ट्रपति जी के अंगरक्षक के लिए सिर्फ 3 जातीयोँ के युवाओं को ही...
03/04/2021

किसी भाई ने #हाईकोर्ट में एक पिटीशन डाली है कि भारत के राष्ट्रपति जी के अंगरक्षक के लिए सिर्फ 3 जातीयोँ के युवाओं को ही किंयु लिया जाता है . उनका मतलब ये है कि ये भेदभाव किंयु ?
जिसमे (राजपूत - जाट - सिख ) हैं. सबसे पहली बात जिन भाई साहब ने ये सवाल कोर्ट से किया है वो खुद OBC कैटेगरी से आते हैं . इनके मन मे आज तक ये सवाल नही आया होगा कि वो सम्पन्न होते भी OBC में किंयु आते हैं और एक गरीब राजपूत किंयु OBC में नही आता उसको किंयु सामान्य वर्ग में डाला हुआ है ..दूसरा खैर चलो ये भेदभाव बुरा लगा आपको तो इसकी भी सच्चाई बतादें . की आरक्षण और काबिलियत में बहुत फर्क है आरक्षण जातिगत होता है चाहें कंडीडेट अनफिट भी है फिर भी इस आरक्षण के तहत लिया जाता है. पर राष्ट्रपति के अंगरक्षक में कोई अनफिट नही हो सकता . एक भी गार्ड किसी भी पैमाने पर अनफिट नही हो सकता .ये है काबिलियत.. और राष्ट्रपति के अंगरक्षक के रुप मे राजपूत या जाट किंयु लिए जाते इसका तो राष्ट्रपति जी ही जाने..पर मेरे हिसाब राजपूतो को प्रथम स्थान देने की बजह नीचे है ...पढ़िये

शायद ये किसी को ना पता हो किंयु ये आंकड़े सरकार नही देगी और न ही देने चाहिए फिर भी हम आपको बतादें देश पर शहीद होने वाले सैनिकों में सबसे ज्यादा सैनिक राजपूत हैं. आज तक मिले वीरता पदकों में राजपूत सबसे आगे हैं 👍

#परंमवीर_चक्र : देश में वीरता को सम्मानित करने वाला सबसे सम्मानित # पदक है , और यह आजादी के बाद से पुरे 6 बार जो सबसे ज्यादा किसी भी एक कौम को मिलने वाला पदक है .उंन क्षत्रिय शूरवीरो के नाम निम्न है .
1) पिरू सिंह शेखावत
2) राम राघोवा राणा
3) ज़दूनाथ सिंह राठोर
4) मेज़र शैतान सिंह
5) गुरुबचन सिंह सलारिया
6) संज़य कुमार ड़ोगरा ..

ओर वीरता का देश में दुसरा सबसे बड़ा पदक है # महा वीर चक्र जो सबसे ज्यादा 27 बार राजपूतो को मिला .
उन शूरवीरो के नाम निंम्न है-:
Rajputs also received most no. of Mahavir chakra(2nd Highest war time Military decoration) among all community...!!!
Rajputs who Received Mahavir chakra
#राजपूत जिन्हे महावीर चक्र से नवाजा जा चुका है -
1. Brigadier Rajendrasingh Dogra
2. Sipahi Diwan Singh
3. Major Khusal chand
4. Lieutenant kishan singh rathore
5. Brigadier yadunath singh bhati
6. Major Thakur Prithvi chand
7. Rifleman Dhokal singh
8. Naik Nar Singh
9. Lieutenant colonel Kamal Singh Pathaniya
10. Lieutenant colonel Anant Singh Pathaniya
11. Lieutenant Bhagwan Dutt Dogra
12. Brigadier Sher Pratap Singh Shreekanth
13. Rifleman Jasawant Singh Rawat
14. Captain Chandra Narayan Singh
15. Lieutenant colonel Raghubir Singh Rajawat
16. Major Anup Singh Guhilot
17. Lieutenant Colonel Rajkumar Singh
18. Major Basdev Singh Mankotia
19. Lietenant Colonel Maharaja Sawai Bhavani Singh Rajawat( Jaipur His Highness)
20. Major Jayveer Singh
21. Group Captain Chandan Singh Champawat
22. Naik Sugan Singh Rathore
23. Lance Naik Drigpal Singh Rathore
24. Lietenant Colonel Hanut Singh Rathore
25. Colonel Uday Singh Inda
26. Captain Pratap Singh
27. Major Rajesh Singh
28 .Dharamveer Singh ( Mahavir Chakra)
http://gallantryawards.gov.in/Awardee/dharam-vir-singh
ओर हा आजादी से पहले पूरी दुनियाभर में घुम-घुमकर दोनो विश्वयुद्ध में लड़ी गयी बड़ी बड़ी ज़गो में भारत का प्रतिनिधित्व करके परंमवीर चक्र के समान सबसे ज्यादा #विक्टोरिया_क्रास जीतने वाले शूरवीर भी राजपूत रहे हैं!
1-- Darban Singh Negi
2-- Gabbar singh Negi
3--- Thakur Lala Ram
4--- Prakash Singh Chib
5--- chatta Singh
6 --- Gobind Singh Rathore .
7-- Gurumukh Singh ( Sikh Rajput)
8- Subedaar Ram Swaroop Singh Tanwar....
#नोट : आजादी से पहले # परमवीर चक्र कि जगह
दिया जाता था जो विश्व युध 1 ,2 मिलाकर है .. जो उस समय विश्व का सार्वोच वीरता का मेडल था!
अब आओ बात करते है वर्तमान कि , तो वर्तमान में भी क्षात्र धर्म ज़िसका कर्म ही है सुरक्षा करना जो संसार का सबसे पूण्य का कर्म है .उसमे भी #राजपूत तुम फर्जी फेसबुकिये क्षत्रियो से कोसो आगें है .उसका जीता- जागता उदाहरण निम्न है-:
वर्तमान मे देश कि Defence Sector मे # क्षत्रिय विभिन्न पदो( post) पर -
#सेना अध्यक्ष - जनरल बिपिन सिंह रावत!
- Lt.Gen.Sk Patyal/ patial
#मध्य कमान सेना अध्यक्ष - लेफ्ट.जनरल बलवंत सिंह नेगी!
( Colonel of Asam Regiment)
( Director General Of Military Operations ) -Lt.Gen Anil chauhan
ीफ (Director General) - सुधीर प्रताप सिंह!(अभी हाल में रिटायर्ड हुए हैं )
ीफ ( Director General)- ओ.पी .सिंह!-- अभी ज़ल्दी रिटार्ड हुए हैं ओर # वर्त मान यूपी ड़ीजीपी है .
- राजेन्द्र सिंह!
- हरिश चन्द्र सिंह बिष्ट!
#डिप्टी_ऐयर_मार्शाल ( Southern Commandant in Chief) - ठाकुर राकेश सिंह भदौरिया, भदावर एस्टेट।
Of para Commandos- LT.Gen. PC.katoch...
( Nuclear Command authority ) - Lt.Gen jaiveer singh Negi
- Lt.Gen, G.Singh chandel..
# NDRf_Chief - Sanjay kumar Singh .
# DG_Of_Supplies_And_Support - Lt.Gen .MH Thakur
ओर हा वर्तमान में देश का सबसे सम्मानित
#आर्मी_आफिसर Col.Saurabh Singh shekhawat भी राजपुत है .
ज़िंनके बारे में कुछ जानकारी निम्न है .
#कर्नल_सौरभ_सिंह_शेखावत One Of The Most Decorated Serving Army Officer in the Indian Army .He Is a Member Of the 21 Battalion Of Parachute Regiment .
तीन बार माउंट एवरेस्ट फतेह कर चुके है
अगर आप गुगल पर ड़ालते है कि " Who is the Most Decorated army Officers In The Indian Army ?
तो आपको जवाब #कर्नल_सौरब_सिंह मिलेगा .
दो - चार मेंड़ल जीतकर कुछ लोग बहुत उछलते है जो अपनी जान पर खेलकर मेड़ल्स लाते है वो #राजपूत
देश का सबसे पहले सेना अध्यक्ष स्वतंत्र भारत का राजपूत ही थे :- #राजेन्द्र_सिंह_ज़ड़ेजा .और
वर्तमान में भी राजपूत है #विपिन_सिंह_रावत है .
#शहीदों के आंकड़े सार्वजनिक नही किये जा सकते... अगर कभी किये गए तो राजपुत कौम के शहीदों की संख्या चौकाने वाली होगी,।।। हमे शहीद होने का कोई गम नही ये तो हमारी परम्परा है..पर ऐसी कौम को अपने स्वार्थ के लिए निशाना बनाना दिल जरूर दुखाता है..
#वर्तमान में दुनिया के बहुत ही ताकतवर देश को आजाद कराने में राजपूतो का योगदान पढ़े
#इजरायल_भी_मानता_है_राजपूतों_क
ी_वीरता_का_लोहा ....इजरायल को राजपूतों ने ही कराया था आजाद...
ई. में #प्रथम_विश्वयुद्ध चल रहा था। युद्ध लगभग समाप्ति पर था परंतु जर्मनी की सेनाओं ने #इजरायल के शहर #हायफा_या_हैफा से अपनी मजबूत पकड़ नहीं छोड़ी थी ।इंग्लैंड समर्थित सारे #राष्ट्र हाइफा पर कब्जे के लिए परेशान थे व कई बार असफल कोशिश भी कर चुके थे, उन्हें हर बार जान- माल का भारी नुकसान उठा कर पीछे हटना पङा। हाईफा शहर तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ था। जहां जर्मन फोजों ने मशीन गने लगा रखी थी तथा वे लगातार गोलाबारी कर रहे थे किसी को भी शहर में प्रवेश नहीं करने दे रहे थे। अंग्रेजों के लिए युद्ध जीतने के लिए यह जंग व शहर जीतना बहुत जरूरी था ।तब इसका जिम्मा #जोधपुर_लांसर के मेजर जनरल ठाकुर दलपत सिंह शेखावत व राठौड़अमान सिंह जोधा को सौंपा गया इनके साथ हैदराबाद, मैसूर व जोधपुर की आर्मी थी। सबसे पहले #ठाकुर_दलपत_सिंह के नेतृत्व में घुङसवार सेना ने शहर में प्रवेश करने का प्रयास किया जिसमें युद्ध करते हुए दलपत सिंह शहीद हो गये इसके बाद जोधपुर की वीर #राठौड़_घुड़सवार सैना का #राठौड़_मेजर_अमान_सिंह_जोधा ने नेतृत्व संभाला व बरसते गोलो के बीच बहादुरी से युद्ध करते हुए शहर पर कब्जा किया व शहर को जर्मनी से मुक्त कराया।राठौड़ वीरों के आगे हारने के बाद जर्मन सेना नेें #आत्मसर्मपण कर दिया व लगभग 1305 जर्मन सैनिकों के बन्दी बना कर राजपूत योद्धाओं ने अपनी वीरता का लोहा इजरायल सहित पूरे विश्व को मानने के लिए मजबूर कर दिया। युद्ध में हुये #शहीदों व युद्ध की घटना की स्मृति में इजराइल में #स्मारक बना हुआ है सन् 2018ई. में इस घटना को 100 साल पूरे होने पर इजराइल में इन योद्धाओं की स्मृति में उत्सव मनाया जाएगा व इजरायल को जर्मन फौजों से मुक्ति दिलाने वाले भारतीय व #राजपूत_क्षत्रिय योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी जायेगी। इन बहादूर क्षत्रिय योद्धाओं की कहानियां इजराइल के #पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है तथा राठौड़ योद्धाओं को हाईफा को स्वतंत्र कराने वाले सैनानी माना जाता है। दिल्ली के #तीन_मूर्ति भवन का स्मारक भी इन्हीं योद्धाओं की स्मृति में बनाया गया है।इस प्रकार इजराइल जैसा शक्तिशाली राष्ट्र भी राजपूतों की वीरता को कृतज्ञता से नमन व हृद्वय से सम्मान करता है ।
आज #इजरायल में हैफा शहर जाकर #प्रधानमंत्री_म
ोदी करेगें राजपूत यौद्धाओं को नमन!!

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