पिछली चार शताब्दी से गाँव दुजाना में
दादी सती का मेला लगता आ रहा है।
ऐसी मान्यता है कि सच्चे भाँव से यहाँ
मांगी गयी मन्नत अवश्य पूर्ण
होती है। जिसके चलते हज़ारों श्रद्धालू गाँव दुजाना
के मेला स्थल पर आते है।
ग्रामीणों के अनुसार आज से 400 साल पहले
हरियाणा के फरीदाबाद स्थित पाली गाँव
की रामकौर का विवाह दुजाना निवासी
भागीरथ से हुआ। भागीरथ उस
समय सेना में कार्यरत थे। रामकौर को रात में पति के मरने का
स्
वप्न आता है, सुबह उपले पाथते समय उन्हें फिर वो
ही सपना याद आया और उनकी
आँखों से आँसू बहने लगे। रामकौर ने सती होने का
निश्चय कर लिया। उनके सती होने
की खबर इलाके में जंगल की आग
की तरह फ़ैल गयी। पतिवर्ता
रामकौर लकड़ी इकटठा करके उस पर बैठ
गयी। समीप के गाँव कचैडा एक
व्यक्ति को शक़ हुआ कि जलने के डर से कहीं
रामकौर भाग ना जाये और सती प्रथा बदनाम न हो
जाये। इसलिए वो गंडासा लेकर तैयार हो गया ताकि भागने पर रामकौर
को जलने पर मजबूर किया जा सके। लेकिन रामकौर में दिव्यशक्ति
आ गयी, जिससे उन्हें उन लोगो की
मंशा का पूर्व आभास हो गया था, इससे क्रुध होकर रामकौर ने उस
व्यक्ति को जमकर लताड़ा। ग्रामीण बताते है कि
इसके बाद आग स्वयं प्रज्ज्वलित हो गयी और
रामकौर सती हो गयी।
तभी से होली के एक दिन बाद दुजाना
गाँव के बाहर जहाँ रामकौर सती हुई
थी उस स्थान पर एक दिन का मेला लगता है।
जिसमे आस-पास के 27 गाँवों के लोग आते है और मंदिर में
दादी सती की पूजा
अर्चना करते है। कचैडा गाँव के निवासी आज
भी दादी सती
की मूर्ती के सामने से ना जाकर
पीछे से जल चढाते है। पिछले चार शताब्दियों से चला आ रहा
दादी सती का मेला लोगो
की आस्था का प्रतीक बना हुआ।
लोग दादी सती की
आस्था जताने के लिए लोग अपनी दूकान और
बिज़नेस का नाम दादी सती के नाम पर
रखते है, और इसके अलावा सभी भक्तों
की गाड़ियों पर J.D.S. लिखा होता है। प्रत्येक
रविवार को उनके भक्तगण उन्हें दूध से नहलाते है, जिसके लिए
सुबह से ही मंदिर में भीड़ लगने
लगती है। तो बोलो दादी
सती मैया की जय। JDS
maa sabhi bhktano p apni kripa bnaye rkhna :)