09/10/2025
दिल्ली में हुआ मैत्री कल्चरल इकॉनमी समिट, संस्कृति आधारित अर्थव्यवस्था पर जारी हुई नीति रिपोर्ट*
-केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बोले – “संस्कृति सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की नई ताकत है”
दिल्ली- मैत्रीबोध परिवार द्वारा आयोजित मैत्री कल्चरल इकॉनमी समिट का आयोजन राजधानी दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में हुआ। इस क्लोज़-डोर इवेंट में 100 से अधिक विशेष अतिथियों, मंत्रालयों के प्रतिनिधियों, अर्थशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति के बीच के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मैत्रीबोध परिवार के संस्थापक,परिवर्तन अग्रदूत, मैत्रेय दादाश्रीजी ने कहा* “भारत की प्राचीन परंपराएं जैसे योग और आयुर्वेद आज पूरी दुनिया में आर्थिक शक्ति बन चुकी हैं। यह साबित करता है कि संस्कृति आधारित विकास ही भारत को सतत समृद्धि की ओर ले जा सकता है।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा* “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि भारत की अर्थव्यवस्था संस्कृति आधारित हो। हमें विकास के साथ अपनी विरासत का भी सम्मान करना चाहिए। संस्कृति सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति का स्तंभ है, जो रोजगार, नवाचार और रचनात्मक उद्योगों को आगे बढ़ाती है।” उन्होंने आगे कहा- “भारत की सांस्कृतिक आर्थिक संरचना को ‘ऑरेंज इकॉनमी’ के रूप में विकसित करने का समय आ गया है। हमें अपनी परंपरागत कलाओं और सांस्कृतिक संपदाओं को केवल दान नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखना होगा। सेवा क्षेत्र के सहयोग से संस्कृति आधारित अर्थव्यवस्था को नया आयाम दिया जा सकता है।”
संस्कृति और अर्थव्यवस्था के मेल पर फोकस*
पिछले एक वर्ष में समिट ने दिल्ली और मुंबई में कई सत्र आयोजित किए, जिनमें त्योहार और अर्थव्यवस्था, सतत समृद्धि, कला और संस्कृति, और कृषि अर्थशास्त्र जैसे विषयों पर संवाद हुआ। इन्हीं विचार-विमर्शों के आधार पर ‘5Ps फ्रेमवर्क – प्रदर्शन, क्षमता, पथ, योजना और नीति’ पेश किया गया, जिसे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता (आर्थिक मामलों) और MCES के संरक्षक गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने तैयार किया है।
कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता (आर्थिक मामलों) गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा* “संस्कृति और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के पूरक हैं। हमारा 5Ps फ्रेमवर्क बताता है कि भारत अपनी सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक प्रगति में कैसे बदल सकता है। यह मॉडल ग्रामीण और शहरी दोनों भारत के लिए उपयोगी साबित होगा।” उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट को भारत सरकार को सौंपा जाएगा ताकि संस्कृति-आधारित आर्थिक पहलों को नीतिगत रूप से लागू किया जा सके।
कार्यक्रम का समापन पॉलिसी रेकमेंडेशन्स रिपोर्ट के विमोचन के साथ हुआ, जिसे गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने तैयार किया है। यह रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपी जाएगी ताकि संस्कृति प्रेरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली नीतियों को लागू किया जा सके। उपस्थित विशेषज्ञों ने इसे भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक दिशा में एक “नई शुरुआत” बताया, जिससे देश आने वाले वर्षों में संस्कृति और विकास दोनों में आत्मनिर्भर भारत बनने की ओर कदम बढ़ा सकेगा।