Brahma Kumaris NOida

Brahma Kumaris NOida Shiv Baba at Noida

02/05/2017

Om shanti & thanks everyone

26/03/2017

Thanks everyone om shanti

28/09/2013

मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - अभी तुम्हारी ज्योति जगी है, ज्योति जगना अर्थात् बृहस्पति की दशा बैठना, बृहस्पति की दशा बैठने से तुम विश्व के मालिक बन जाते हो''
प्रश्न:- सतयुग में हर घर की विशेषता क्या होगी, कलियुग में हर घर क्या बन गये हैं?
उत्तर:- सतयुग में हर घर में खुशियां होंगी। सबकी ज्योति जगी हुई होगी। कलियुग में तो घर-घर में ग़मी, चिंता है। हर घर में अंधियारा है। आत्मा की ज्योति उझाई हुई है। बाप आये हैं अपनी ज्योति से सबकी ज्योति जगाने, जिससे फिर घर-घर में दीवाली होगी।
गीत:- माता ओ माता........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं में ज्ञान का घृत डालते सदा जागती ज्योत रहना है। बाप की याद में रह राहू का ग्रहण उतार देना है।
2) रूहानी और जिस्मानी दो बाप हैं, यह पहचान हर एक को देकर बेहद के वर्से का अधिकारी बनाना है।
वरदान:- ट्रस्टी बन लौकिक जिम्मेवारियों को निभाते हुए अथक रहने वाले डबल लाइट भव
लौकिक जिम्मेवारियों को निभाते हुए सेवा की भी जिम्मेवारी निभाना इसका डबल लाभ मिलता है। डबल जिम्मेवारी है तो डबल प्राप्ति है। लेकिन डबल जिम्मेवारी होते भी डबल लाइट रहने के लिए स्वयं को ट्रस्टी समझकर जिम्मेवारी सम्भालो तो थकावट का अनुभव नहीं होगा। जो अपनी गृहस्थी, अपनी प्रवृत्ति समझते हैं उन्हें बोझ का अनुभव होता है। अपना है ही नहीं तो बोझ किस बात का।
स्लोगन:- सदा ज्ञान सूर्य के सम्मुख रहो तो भाग्य रूपी परछाई आपके साथ रहेगी। om shanti

[28-09-2013]

21/09/2013

मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - तुम्हें 100 परसेन्ट सर्वगुणों में सम्पन्न बनना है, दिल दर्पण
में देखना है कि हम कहाँ तक पावन बने हैं''

प्रश्न:- तुम बच्चे कौनसा उत्सव रोज़ मनाते हो और मनुष्य कौनसा उत्सव मनाते हैं?
उत्तर:- तुम दैवी धर्म की स्थापना का अर्थात् भारत को स्वर्ग बनाने का उत्सव रोज़ मनाते
हो। रोज़ तुम्हें मनुष्य को देवता बनाने की सैपलिंग लगानी है। वे मनुष्य तो जंगल के कांटों
की सैपलिंग लगाते और नाम देते हैं वनोत्सव। तुम कांटों से फूल बनाने का उत्सव रोज़
मनाते हो। तुम्हारे जैसा उत्सव और कोई मना नहीं सकता।

गीत:- मुखड़ा देख ले प्राणी........

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) योगबल से विषय वैतरणी की बड़ी खाड़ी को पार करना है। उल्टे संकल्पों में मुरझाना नहीं
है। मजबूत रहना है।

2) पूज्यनीय बनने के लिए बाप के साथ भारत को सिरताज बनाने की सेवा करनी है।

वरदान:- क्लीयर बुद्धि द्वारा हर बात को परख कर यथार्थ निर्णय करने वाले सफलता मूर्त भव

जितनी बुद्धि क्लीयर है उतनी परखने की शक्ति प्राप्त होती है। ज्यादा बातें सोचने के बजाए एक
बाप की याद में रहो, बाप से क्लीयर रहो तो हर बात को सहज ही परखकर यथार्थ निर्णय कर
सकेंगे। जिस समय जैसी परिस्थिति, जैसा सम्पर्क-सम्बन्ध वाले का मूड, उसी समय पर उस
प्रमाण चलना, उसको परखकर निर्णय लेना यह भी बहुत बड़ी शक्ति है जो सफलतामूर्त बना
देती है।

स्लोगन:- ज्ञान सूर्य बाप के साथ लकी सितारे वह हैं जो जग से अंधकार को मिटाने वाले हैं,
अंधकार में आने वाले नहीं।

20/09/2013

मुरली सार:- ``मीठे बच्चे - तुम्हारा किसी से भी वैर नहीं होना चाहिए क्योंकि तुम हो सबके
कल्याणकारी, वैर रखने वाले को हाफ कास्ट ब्राह्मण कहेंगे''

प्रश्न:- कौन सी स्मृति बुद्धि में सदा रहे तो निर्भय बन जायेंगे?
उत्तर:- सदा स्मृति में रहे कि हम सचखण्ड के मालिक देवी-देवता बन रहे हैं, शरीर को कोई
मारता भी है लेकिन आत्मा को मार नहीं सकता। गोली शरीर को लगती है। मैं आत्मा तो
जा रही हूँ बाबा के पास, हमको क्या डर है। हम बैठे हैं, छत गिर जाती है, हम बाबा के पास
चले जायेंगे। इसमें डरने की कोई बात नहीं। ऐसा निर्भय बनना है।

गीत:- माता ओ माता........

धारणा के लिये मुख्य सार:-

1) कलियुगी तमोप्रधान संस्कारों को निकाल सच्चा ब्राह्मण बनना है। किसी से भी वैर नहीं रखना है।

2) निर्भय बनने के लिये आत्म-अभिमानी रहने का अभ्यास करना है। हम शिव शक्ति सेना हैं,
हमें तो सचखण्ड का मालिक बनना है - इसी नशे में रहना है।

वरदान:- अपनी चलन और चेहरे द्वारा सेवा करने वाले निरन्तर योगी निरन्तर सेवाधारी भव

सदा इस स्मृति में रहो कि बाप को जानने और पाने वाली कोटों में कोई हम आत्मायें हैं, इसी
खुशी में रहो तो आपके यह चेहरे चलते फिरते सेवाकेन्द्र हो जायेंगे। आपके हार्षित चेहरे से बाप
का परिचय मिलता रहेगा। बापदादा हर बच्चे को ऐसा ही योग्य समझते हैं। तो चलते फिरते, खाते
पीते अपनी चलन और चेहरे द्वारा बाप का परिचय देने की सेवा करने से सहज ही निरन्तर योगी,
निरन्तर सेवाधारी बन जायेंगे।

स्लोगन:- जो अंगद समान सदा अचल अडोल एकरस रहते हैं, उन्हें माया दुश्मन हिला भी नहीं सकती।

_/\_ Om Shanati _/\_

07/07/2013

Slogan: Respect

We, the loving and co-operative souls, are the most elevated servers respectful to all, who do service through our words, through our connections, through different facilities and instruments, and who donate every virtue and make others virtuous, and colour others with our company…

We finish the defects in others with the power of our own virtues, make the weak ones powerful, give respect to hopeless cases, and look at the young or the old, the maharathis or infantry, with respect…we are those who give regard and respect to all… we give respect to those who do not give us respect, we give destination to those who constantly reject others, and make those who defame others into ones who praise others…we are virtuous souls who garland those who defame us with garlands of virtues…

by attaining the high destination of a yogi life, we transform defamation into admiration, insult into praise, rejection into regard, humiliation into self-respect, harm into upliftment, and are constantly victorious like the father… we are one of the eight, most elevated special deities…

We have the switch of our awareness turned on…we are the constant embodiments of experience, remaining constantly in the sweetness of One, having all experiences through the One, and remaining lost in experience every second, thereby being last so fast, and fast so first… we are the instruments, the lamps of the world showing the path to many, who are constantly respected by the world, and who are constantly benevolent towards the world….

Our every thought is filled with service for world benefit, our every word is constructive, filled with humility and greatnessIn our awareness, we have intoxication of being the unlimited masters of the world on one hand, and on the other hand we are world servers…on one hand we have intoxication of all rights, and on the other hand, we are respectful to all, and like the Father, bestowers and bestowers of blessings…

07/07/2013

me ek atma hun

07/07/2013

om shanti

om shanti
07/07/2013

om shanti

06/07/2013

[07-07-2013]

मीठे बच्चे - तुम ड्रामा के खेल को जानते हो इसलिए शुक्रिया मानने की भी बात नहीं है''
प्रश्न:- सर्विसेबल बच्चों में कौन-सी आदत बिल्कुल नहीं होनी चाहिए?
उत्तर:- मांगने की। तुम्हें बाप से आशीर्वाद या कृपा आदि मांगने की जरूरत नहीं है। तुम किसी से पैसा भी नहीं मांग सकते। मांगने से मरना भला। तुम जानते हो ड्रामा अनुसार कल्प पहले जिन्होंने बीज बोया होगा वह बोयेंगे, जिनको अपना भविष्य पद ऊंच बनाना होगा वह जरूर सहयोगी बनेंगे। तुम्हारा काम है सर्विस करना। तुम किसी से कुछ मांग नहीं सकते। भक्ति में मांगना होता, ज्ञान में नहीं।
गीत:- मुझको सहारा देने वाले......

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) विकर्मों से बचने के लिए इस शरीर से रहते अशरीरी बनने का पुरुषार्थ करना है। याद की यात्रा ऐसी हो जो शरीर की विस्मृति होती जाय।
2) ज्ञान का मंथन कर आस्तिक बनना है। मुरली कभी भी मिस नहीं करनी है। अपनी उन्नति के लिए डायरी में याद का चार्ट नोट करना है।

वरदानः- दिव्य बुद्धि की लिफ्ट द्वारा तीनों लोकों की सैर करने वाले सहजयोगी भव
संगमयुग पर सभी बच्चों को दिव्य बुद्धि की लिफ्ट मिलती है। इस वन्डरफुल लिफ्ट द्वारा तीनों लोकों में जहाँ चाहो वहाँ पहुंच सकते हो। सिर्फ स्मृति का स्विच आन करो तो सेकण्ड में पहुँच जायेंगे और जितना समय जिस लोक का अनुभव करना चाहो उतना समय वहाँ स्थित रह सकते हो। इस लिफ्ट को यूज़ करने के लिए अमृतवेले केयरफुल बन स्मृति के स्विच को यथार्थ रीति से सेट करो। अथॉरिटी होकर इस लिफ्ट को कार्य में लगाओ तो सहजयोगी बन जायेंगे। मेहनत समाप्त हो जायेगी।
स्लोगनः- मन को सदा मौज़ में रखना-यही जीवन जीने का कला है। om shanti

06/07/2013

[06-07-2013]

मीठे बच्चे - अपने कैरेक्टर्स सुधारने के लिए याद की यात्रा में रहना है, बाप की याद ही तुम्हें सदा सौभाग्यशाली बनायेगी''
प्रश्न- अवस्था की परख किस समय होती है? अच्छी अवस्था किसकी कहेंगे?
उत्तरः- अवस्था की परख बीमारी के समय होती है। बीमारी में भी खुशी बनी रहे और खुशमिजाज़ चेहरे से सबको बाप की याद दिलाते रहो, यही है अच्छी अवस्था। अगर खुद रोयेंगे, उदास होंगे तो दूसरों को खुशमिजाज़ कैसे बनायेंगे? कुछ भी हो जाए - रोना नहीं है।

धारणा के लिए मुख्य सारः-
1) अपना टाइम रूहानी धन्धे में सफल करना है। हीरे जैसा जीवन बनाना है। अपने को सावधान करते रहना है। शरीर समझने की कड़ी बीमारी से बचने का पुरुषार्थ करना है।
2) कभी भी माया का दास नहीं बनना है, अन्दर में बैठ जाप जपना है कि हम आत्मा हैं। खुशी रहे हम बेगर से प्रिन्स बन रहे है।

वरदानः- अव्यभिचारी और निर्विघ्न स्थिति द्वारा फर्स्ट जन्म की प्रालब्ध प्राप्त करने वाले समीप और समान भव
जो बच्चे यहाँ बाप के गुण और संस्कारों के समीप हैं, सर्व सम्बन्धों से बाप के साथ का वा समानता का अनुभव करते हैं वही वहाँ रायल कुल में फर्स्ट जन्म के सम्बन्ध में समीप आते हैं। फर्स्ट में वही आयेंगे जो आदि से अब तक अव्यभिचारी और निर्विघ्न रहे हैं। निर्विघ्न का अर्थ यह नहीं है कि विघ्न आये ही नहीं लेकिन विघ्न विनाशक वा विघ्नों के ऊपर सदा विजयी रहें। यह दोनों बातें यदि आदि से अन्त तक ठीक हैं तो फर्स्ट जन्म में साथी बनेंगे।
स्लोगनः- साइलेन्स की पॉवर से निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन करो। om

Address

Sectore/41
Noida
201301

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Brahma Kumaris NOida posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share