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पद्मिनी एकादशी 🙏🏼अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पावन व्रत है. इस दिन विधि-विधान...
26/05/2026

पद्मिनी एकादशी 🙏🏼

अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पावन व्रत है. इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. हालांकि, इस व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए स्नान, संकल्प, तुलसी अर्पण, दान और क्रोध व तामसिक भोजन से बचने जैसे कठोर नियमों का पालन आवश्यक है.


#ऊंनमःशिवाय #नटराज #शिवभक्ति

प्रथम पंक्ति (बार बार प्रभु विनती करूँ, धरूँ चरण पर सीश):भक्त हनुमान जी के सम्मुख अत्यंत विनम्र होकर बार-बार प्रार्थना क...
26/05/2026

प्रथम पंक्ति (बार बार प्रभु विनती करूँ, धरूँ चरण पर सीश):
भक्त हनुमान जी के सम्मुख अत्यंत विनम्र होकर बार-बार प्रार्थना कर रहा है। वह अपने अहंकार को त्यागकर अपना शीश (सिर) प्रभु के पावन चरणों में रख रहा है। सनातन परंपरा में चरणों में सिर रखना पूर्ण आत्मसमर्पण का प्रतीक है, जहाँ भक्त स्वयं को पूरी तरह ईश्वर की इच्छा पर छोड़ देता है।

द्वितीय पंक्ति (भक्ति दान मोहे दीजिये, हे कपीश जगदीश):
यहाँ भक्त प्रभु से संसार की कोई भौतिक सुख-सुविधा, धन या वैभव नहीं मांग रहा है। वह केवल 'भक्ति रूपी दान' की याचना कर रहा है। भक्त कहता है कि हे 'कपीश' (वानरों के स्वामी/हनुमान जी) और हे 'जगदीश' (जगत के स्वामी, जो हनुमान जी के हृदय में बसने वाले श्री राम भी हैं और स्वयं रुद्र अवतार हनुमान जी भी हैं), मुझे अपनी निश्छल भक्ति का वरदान दीजिए ताकि मेरा मन सदा आपके चरणों में लगा रहे।

विशेष:
इस दोहे में 'दास्य भाव' की प्रधानता है, ठीक वैसी ही भक्ति जैसी स्वयं हनुमान जी महाराज श्री रामचंद्र जी के प्रति रखते हैं। भक्त यहाँ हनुमान जी को ही अपना सर्वस्व मानकर उनसे मोक्ष या संसार न मांगकर केवल उनकी सेवा और प्रेम मांग रहा है।

#ऊंनमःशिवाय #नटराज #शिवभक्ति

हे नीलकंठ, आपकी महिमा और सामर्थ्य से सारा जग व्याप्त है।भगवान शिव, जो त्रिशूलधर हैं, उन्होंने कालकूट विष को अपने कंठ में...
25/05/2026

हे नीलकंठ, आपकी महिमा और सामर्थ्य से सारा जग व्याप्त है।
भगवान शिव, जो त्रिशूलधर हैं, उन्होंने कालकूट विष को अपने कंठ में संजोया ताकि सारी सृष्टि का कल्याण हो सके। जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तब इस विष ने सारी सृष्टि को संकट में डाल दिया। शिव ने अपने अपार साहस और करुणा से इस विष को ग्रहण किया। भगवान शिव की यह लीला हमें सिखाती है कि त्याग और समर्पण से हम किसी भी विषम परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। शिवजी की महिमा और शक्ति ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त है।

#महादेव #शिवभक्ति #शिवशंकर #नटराज #ऊंनमःशिवाय

१. प्रथम पंक्ति का भावार्थ:"सप्त अश्व के रथ चढ़े, चलते नित अविराम।"अर्थ: भगवान सूर्य नारायण सात घोड़ों के दिव्य रथ पर सव...
24/05/2026

१. प्रथम पंक्ति का भावार्थ:
"सप्त अश्व के रथ चढ़े, चलते नित अविराम।"

अर्थ: भगवान सूर्य नारायण सात घोड़ों के दिव्य रथ पर सवार हैं और वे बिना एक पल भी रुके (अविराम) निरंतर अपनी यात्रा पर चलते रहते हैं।

गहन संदेश: यहाँ सात घोड़े सूर्य की किरणों के सात रंगों (इंद्रधनुष के रंग) और सप्ताह के सात दिनों के भी प्रतीक हैं। सूर्य देव का 'नित अविराम' चलना हमें यह सिखाता है कि समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता। सृष्टि के आरंभ से लेकर आज तक, वे बिना थके, बिना रुके रोज़ नियत समय पर उदय होते हैं और संपूर्ण जगत को ऊर्जा देते हैं।

२. द्वितीय पंक्ति का भावार्थ:
"कर्म सिखाते विश्व को, सूर्य देव को प्रणाम॥"

अर्थ: निरंतर चलते रहकर सूर्य देव पूरे संसार को 'कर्मयोग' का पाठ पढ़ाते हैं। ऐसे प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य नारायण को हम सब आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं।

गहन संदेश: सूर्य देव इस जगत के सबसे बड़े कर्मयोगी हैं। वे बिना किसी भेदभाव के, बिना किसी फल की इच्छा के (निःस्वार्थ भाव से) संपूर्ण पृथ्वी पर अपना प्रकाश और जीवन बरसाते हैं। उनकी यही निरंतरता और कर्तव्यपरायणता पूरे विश्व को यह सीख देती है कि मनुष्य को भी अपने जीवन में आलस्य को त्यागकर निरंतर कर्मपथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

कुबेर महाराज की धनवर्षा सब पर होती रहे 🥰जय कुबेर जी🙏🏼🙏🏼
23/05/2026

कुबेर महाराज की धनवर्षा सब पर होती रहे 🥰
जय कुबेर जी🙏🏼🙏🏼

जय शनि देव महाराज 🙏🙏🙏🙏🙏
23/05/2026

जय शनि देव महाराज 🙏🙏🙏🙏🙏

माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले अनेक स्तोत्रों में “इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्र” अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायी माना ...
22/05/2026

माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले अनेक स्तोत्रों में “इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्र” अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि जब देवराज इंद्र अपने ऐश्वर्य, वैभव और स्वर्ग की समृद्धि खो बैठे, तब उन्होंने श्रद्धा और भक्ति से माता लक्ष्मी की आराधना की। उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर महालक्ष्मी ने पुनः इंद्र को धन, वैभव, यश और सुख प्रदान किया। इसी कारण यह स्तोत्र दरिद्रता, आर्थिक बाधा, अशांति और दुर्भाग्य को दूर करने वाला माना जाता है।

यह स्तोत्र विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली, शरद पूर्णिमा, अक्षय तृतीया तथा प्रतिदिन प्रातः या संध्या समय पढ़ना शुभ माना जाता है। कमलगट्टे की माला, घी का दीपक और माता लक्ष्मी के समक्ष शुद्ध भाव से इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

॥ इंद्र कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र ॥

नमस्ते सर्वलोकानां जननीमब्जसंभवाम्।
श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥

पद्मालयां पद्मकरां पद्मपत्रनिभेक्षणाम्।
वन्दे पद्ममुखीं देवीं पद्मनाभप्रियामहम्॥

त्वं सिद्धिस्त्वं स्वधा स्वाहा सुधा त्वं लोकपावनी।
संध्या रात्रिः प्रभा भूतिर्मेधा श्रद्धा सरस्वती॥

यज्ञविद्या महाविद्या गुह्यविद्या च शोभने।
आत्मविद्या च देवि त्वं विमुक्तिफलदायिनी॥

आन्वीक्षिकी त्रयी वार्ता दण्डनीतिस्त्वमेव च।
सौम्या सौम्यैर्जगत्पूज्या त्वयैतद्देवि पूरितम्॥

का त्वन्या त्वामृते देवि सर्वयज्ञमयं वपुः।
अध्यास्ते देवदेवस्य योगिचिन्त्यं गदाभृतः॥

त्वया देवि परित्यक्तं सकलं भुवनत्रयम्।
विनष्टप्रायमभवत् त्वयेदानीं समेधितम्॥

दाराः पुत्रास्तथा गेहं सुहृद्दान्यधनादिकम्।
भवत्येतन्महाभागे नित्यं त्वद्वीक्षणान्नृणाम्॥

शरीरारोग्यमैश्वर्यमरिपक्षक्षयो सुखम्।
देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्॥

त्वं माता सर्वलोकानां देवदेवो हरिः पिता।
त्वयैतद्विष्णुना चाम्ब जगद्व्याप्तं चराचरम्॥

मा नः कोशं तथा गोष्ठं मा गृहं मा परिच्छदम्।
मा शरीरं कलत्रं च त्यजेथा: सर्वपावनि॥

मा पुत्रान्मा सुहृद्वर्गान्मा पशून्मा विभूषणम्।
त्यजेथा मम देवस्य विष्णोर्वक्षःस्थले स्थिता॥

सत्त्वेन सत्यशौचाभ्यां तथा शीलादिभिर्गुणैः।
त्यजन्ते ते नराः सद्यः सन्त्यक्ता ये त्वयामले॥

त्वयावलोकिताः सद्यः शीलाद्यैरखिलैर्गुणैः।
कुलैश्वर्यैश्च युज्यन्ते पुरुषा निर्गुणा अपि॥

स ब्रह्मा स शिवः सेन्द्रः सोऽग्निः स वरुणोऽनिलः।
स सूर्यः स च सोमश्च स धन्यः स च पण्डितः॥

स्तोत्र के लाभ

इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित पाठ जीवन में धन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य को आकर्षित करने वाला माना गया है। जिन लोगों के कार्य बार-बार रुकते हों, व्यापार में हानि हो रही हो, घर में आर्थिक तंगी बनी रहती हो या मानसिक अशांति रहती हो, उनके लिए यह स्तोत्र अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस स्तोत्र के प्रभाव से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है तथा माता लक्ष्मी की कृपा से धन के नए मार्ग खुलने लगते हैं। यह केवल भौतिक सुख ही नहीं देता, अपितु मन में शांति, संतोष और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और पवित्रता से इसका पाठ करता है, उसके जीवन में मान-सम्मान, यश, वैभव और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। माता लक्ष्मी की कृपा से व्यापार, नौकरी और धन संबंधी बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

विशेष रूप से दीपावली, शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन इसका पाठ करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि कमल पुष्प, शंख, धूप और घी के दीपक के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करके यह स्तोत्र पढ़ा जाए, तो इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

"🌼🌼ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"🌼🌼
21/05/2026

"🌼🌼ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"🌼🌼

भगवान गणेश और माता लक्ष्मी हिंदू धर्म में सुख, समृद्धि और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जा...
20/05/2026

भगवान गणेश और माता लक्ष्मी हिंदू धर्म में सुख, समृद्धि और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं और परेशानियों को दूर करते हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। माता लक्ष्मी धन, वैभव और सौभाग्य की देवी हैं। उनकी कृपा से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। दीपावली के पावन अवसर पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की एक साथ पूजा की जाती है, जिससे बुद्धि, सफलता और धन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दोनों देवताओं की कृपा से जीवन में सकारात्मकता, उन्नति और खुशहाली आती है।

जब इंसान जिंदगी की परेशानियों से हारने लगता है, तब भगवान अपने भक्त का हाथ थाम लेते हैं। बजरंगबली सिर्फ शक्ति के देवता नह...
19/05/2026

जब इंसान जिंदगी की परेशानियों से हारने लगता है, तब भगवान अपने भक्त का हाथ थाम लेते हैं। बजरंगबली सिर्फ शक्ति के देवता नहीं हैं, वो अपने भक्तों के सबसे बड़े रक्षक हैं। जो सच्चे दिल से हनुमान जी का नाम लेता है, उसके जीवन से डर, दुख और नकारात्मकता धीरे-धीरे दूर होने लगती है। 🙏
इस दुनिया में हर कोई साथ छोड़ सकता है, लेकिन बजरंगबली अपने भक्त का साथ कभी नहीं छोड़ते। जब रास्ते कठिन हो जाते हैं, जब मन टूटने लगता है, तब हनुमान जी अपने भक्त के कंधे पर हाथ रखकर उसे हिम्मत देते हैं। यही विश्वास इस तस्वीर में दिखाई देता है — जैसे बजरंगबली खुद अपने भक्त के साथ चल रहे हों और कह रहे हों, “डर मत, मैं तेरे साथ हूं।” ❤️
हनुमान जी की भक्ति में इतनी शक्ति है कि बड़े से बड़ा संकट भी छोटा लगने लगता है। जिनके दिल में राम और हनुमान बसते हैं, उनके जीवन में कभी अंधेरा ज्यादा देर तक नहीं टिकता। बजरंगबली अपने भक्तों को केवल शक्ति ही नहीं देते, बल्कि सही रास्ता भी दिखाते हैं। 🚩
अगर आपके जीवन में भी परेशानियां चल रही हैं, तो एक बार सच्चे मन से “जय श्री राम” और “जय बजरंगबली” बोलिए। विश्वास मानिए, आपके अंदर एक नई ऊर्जा जाग जाएगी। क्योंकि जहां हनुमान जी का आशीर्वाद होता है, वहां डर, दुख और हार कभी टिक नहीं सकती। 🔥
यह तस्वीर केवल एक पोस्ट नहीं, बल्कि विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। बजरंगबली हमेशा अपने भक्तों के साथ चलते हैं, उन्हें गिरने नहीं देते और हर मुश्किल से बाहर निकालते हैं। इसलिए हमेशा अपने दिल में भक्ति और चेहरे पर विश्वास रखिए। 🌺
जो भी इस पोस्ट को देखे, बजरंगबली उसकी हर मनोकामना पूरी करें और उसके जीवन में सुख, शांति और सफलता लाएं।
🚩 जय बजरंगबली 🚩
🙏 जय श्री राम 🙏

"पवन-तनय प्रभु संकट हारी। भक्ति-शक्ति के तुम अवतारी।।"१. पवन-तनय प्रभु संकट हारीपवन-तनय: इसका अर्थ है 'पवनपुत्र' (वायुदे...
19/05/2026

"पवन-तनय प्रभु संकट हारी। भक्ति-शक्ति के तुम अवतारी।।"

१. पवन-तनय प्रभु संकट हारी
पवन-तनय: इसका अर्थ है 'पवनपुत्र' (वायुदेव के पुत्र)। शास्त्रों में वायु को प्राण माना गया है, और हनुमान जी साक्षात् प्राणशक्ति के प्रतीक हैं।

प्रभु संकट हारी: हे प्रभु! आप अपने भक्तों के जीवन में आने वाले सभी प्रकार के संकटों, दुखों, और बाधाओं को हरने (दूर करने) वाले हैं। इसी कारण आपको 'संकटमोचन' भी कहा जाता है। चाहे वह शारीरिक कष्ट हो, मानसिक तनाव हो या सांसारिक बाधाएं, आपकी शरण में आते ही सब दूर हो जाती हैं।

२. भक्ति-शक्ति के तुम अवतारी
भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम: हनुमान जी केवल परम बलशाली ही नहीं हैं, बल्कि वे परम ज्ञानी और भगवान श्री राम के सबसे बड़े भक्त भी हैं। आमतौर पर जहाँ अत्यधिक बल (शक्ति) होती है, वहाँ अहंकार आ जाता है, और जहाँ अत्यधिक विनम्रता (भक्ति) होती है, वहाँ कभी-कभी निर्बलता आ सकती है।

लेकिन हनुमान जी इन दोनों का संपूर्ण अवतार हैं। उनके पास असीमित शक्ति है, फिर भी वे श्री राम के चरणों में पूर्णतः समर्पित हैं। यह पंक्ति दर्शाती है कि जीवन को सही दिशा में जीने के लिए बल के साथ-साथ हृदय में भक्ति और विनम्रता का होना भी अत्यंत आवश्यक है।

"राम काज सब सहज सँवारे। शरणागत के काज सुधारे।।"

३. राम काज सब सहज सँवारे
राम काज: भगवान श्री राम के जितने भी कठिन कार्य थे—जैसे समुद्र पार करना, माता सीता की खोज करना, लंका दहन करना, लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाना—ये सभी कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण थे।

सहज सँवारे: हनुमान जी ने अपनी बुद्धि और पराक्रम से इन सभी असंभव लगने वाले कार्यों को अत्यंत 'सहज' (आसानी से) और कुशलतापूर्वक पूरा कर दिया। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि जब हम ईश्वर के कार्यों में या धर्म के मार्ग पर चलते हैं, तो हनुमान जी की कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी सरल हो जाते हैं।

४. शरणागत के काज सुधारे
शरणागत वत्सल: जो भी व्यक्ति अपनी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी की शरण में आता है (स्वयं को उन्हें सौंप देता है), हनुमान जी उसके बिगड़े हुए सभी काम सुधार देते हैं।

वे अपने भक्तों की रक्षा एक कवच की तरह करते हैं। जो कोई भी सच्चे मन से उनसे सहायता मांगता है, हनुमान जी उसके जीवन के भटकाव को दूर कर उसे सुख, समृद्धि और सही मार्ग (सन्मार्ग) प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष
यह पूरा दोहा हनुमान जी के करुणामयी, रक्षक और कल्याणकारी स्वरूप को प्रकट करता है। यह याद दिलाता है कि यदि मनुष्य के भीतर भक्ति (ईश्वर पर अटूट विश्वास) और शक्ति (कर्म करने की क्षमता) हो, तो वह जीवन के हर संकट को पार कर सकता है।

#शनिवार #शनिदेव

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